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94 साल तक क्यों नहीं हुआ था टाटा मंदिर यानी की बॉम्बे हाउस का रेनोवेशन? वजह जानकर होश उड़ जाएंगे।

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बॉम्बे हाउस की टाटा उस परिवार का टाइटल है जिसने 150 साल पहले टाटा शुरू किया था टाटा परिवार ने ही बरसों दशकों ततक टाटा को चलाया क्रांतिकारी बदलाव तब हुआ जब रतन टाटा के हाथों में कमान आई जीते जी रतन टाटा ने यह रास्ता बना दिया कि जरूरी नहीं कि जो टाटा होगा वही टाटा को लीड करेगा इसी प्रयोग के तहत 2012 में उन्होंने एक नॉन टाटा सायरस मिस्त्री को टाटा की फ्लैगशिप कंपनी टाटा सस को चेयरमैन बनाया 20177 में रतन टाटा ने पहले से भी बड़ा दूसरा प्रयोग किया दूसरे नॉन टाटा पहले नॉन पारसी दक्षिण भारत के एन चंद्रशेखरन को टाटा की कमान सौंपी तब से चंद्रशेखरन ही टाटा चला रहे हैं.

रतन टाटा के जाने के बाद एन चंद्रशेखरन ने रतन टाटा को याद करते हुए लिंटन पर ओबेरी लिखी है चंद्रशेखरन के पोस्ट से वायरल हुई है बॉम्बे हाउस की गजब कहानी 1924 में बना बॉम्बे हाउस 100 साल बाद भी टाटा का हेड क्वार्टर है फर्क बस इतना आया कि बिल्डिंग को अब टाटा का हेड क्वार्टर कॉरपोरेट ऑफिस नहीं बल्कि मंदिर कहा जाता है 94 साल तक बिल्डिंग का रिनोवेशन नहीं कराया गया.

जब रिनोवेशन का आईडिया आया तो हंगामा मच गया क्योंकि इसके लिए मनाना था रतन टाटा को जो 21 साल तक एक ही बिल्डिंग एक ही ऑफिस एक ही केबिन में बिना किसी बदलाव के बैठे टाटा ग्रुप को कहां से कहां पहुंचा दिया उन्होंने लेकिन कभी यह सोचा ही नहीं कि चलो बॉम्बे हाउस का रिनोवेशन करा देते हैं 1924 के बाद तब से मुंबई और दुनिया कहां से कहां चली गई शहर का भूगोल बदल गया बिल्डिंग्स बदल गई ऑफिस और ऑफिस कल्चर बदल गया बॉम्बे हाउस दशकों तक जस का तस बना रहा कभी कोई रिनोवेशन नहीं हुआ कोई स्ट्रक्चरल चेंज नहीं हुआ जेआरडी फिर रतन टाटा सायरस मिस्त्री कितने चेयरमैन आए और चले गए लेकिन कभी किसी ने सोचा भी नहीं कि बॉम्बे हाउस को बदलते हैं .

सबके लिए बॉम्बे हाउस मतलब टा का मंदिर एन चंद्रशेखरन चेयरमैन बने तो उन्होंने पॉम्पे हाउस को बदलने का रिस्क लिया टा के पुराने लोगों ने समझाया कि रिनोवेशन के लिए रतन टाटा मानेंगे नहीं फिर भी चंद्रशेखरन आईडिया लेकर रतन टाटा के पास पहुंचे चंद्रशेखरन की सुनाई कहानी के मुताबिक रतन टाटा ने पूछा क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूं जब आप रिनोवेट करते हैं तो क्या इसका मतलब वेकेट है कुत्ते कहां जाएंगे रतन टाटा को कुत्तों से बहुत लगाव था उन्होंने बहुत सारे आवारा कुत्तों को गोद लिया था टाटा की सबसे बड़ी बिल्डिंग बॉम्बे हाउस के रिसेप्शन के पास रहने का इंतजाम था .

चंद्रशेखरन ने यकीन दिलाया कि कुत्तों के लिए केनल बनाकर बढ़िया इंतजाम किया जाएगा रतन टाटा बॉम्बे हाउस की रिनोवेशन के लिए मान गए आज भी टा की ऑफिशियल वेबसाइट tata.com पर अलग एक सेक्शन है जिसमें रतन टाटा के पेट डॉग गोवा एंड फ्रेंड्स पर गोवा स्वीटी जूनियर सिंबा राणा बुशी जैसे कुत्तों की फोटोस लगी हैं सिर्फ 7 महीने में 800 वर्कर्स ने दिन रात रिनोवेशन किया 2018 में बमबे हाउस बिल्डिंग का नया अवतार सामने आया.

आर्किटेक्ट सुमाया और कलप कंसल्टेंट ने बिल्डिंग को रीडिजाइन किया चंद्रशेखरन ने याद किया कि जब बॉम्बे हाउस का रिनोवेशन पूरा हुआ तो रतन टा सबसे पहले कुत्ते के लिए बने कैनल को देखने गए कैनल देखकर खुश हुए चंद्रशेखरन ने इसे कन्फर्मेशन माना कि रतन टाटा को रिनोवेशन में हुआ काम ठीक लगा यह किस्सा बताकर चंद्रशेखरन यह बता रहे हैं कि कैसे रतन टाटा का अटेंशन टू डिटेल और वैल्यू पर जोर रहता था मुंबई के फोर्ट इलाके में टाटा की आइकॉनिक बॉम्बे हाउस बिल्डिंग है जमशेद जी टाटा के बड़े बेटे सर दूरा जी टाटा ने 1921 में बॉम्बे नगरपालिका से 2273 स्क्वायर फीट के दो प्लॉट्स खरीदकर टाटा को हेड क्वार्टर बनाने का काम शुरू किया नई बिल्डिंग की जरूरत इसलिए पड़ने लगी क्योंकि टाटा का कारोबार फैल रहा था नवसारी बिल्डिंग और नवसारी चेंबर्स में सबके लिए व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा था गेटवे ऑफ इंडिया प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम डिजइन कर चुके स्कॉटिश आर्किटेक्ट जॉर्ज विटेट ने बॉम्बे हाउस डिजाइन किया .

जॉर्ज विटेट ने आगे चलकर टा की 40 और बिल्डिंग्स डिजाइन की बाद में वह टाटा इंजीनियरिंग के हेड भी बने 1924 में बनकर तैयार हुई बॉम्बे हाउस बिल्डिंग टाटा की ही कंपनी द एसोसिएटेड बिल्डिंग कंपनी के नाम पर है इसी कंपनी के नाम ग्रुप की तमाम बिल्डिंग्स है 1942 में जरूरतें पूरी करने के लिए फोर्थ फ्लोर बनवाया गया था तब से 2018 तक बिल्डिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ था.

1991 में रतन टाटा जब चेयरमैन बने तब बॉम्बे हाउस की उसी केबिन में बैठने लगे जिसमें जेआरटी टा बैठा करते थे पुणे में टा सेंट्रल आर्काइव बिल्डिंग बनी जिसमें जेआरडी का एक रिप्लिका ऑफिस बना उसी में उनके टेबल चेयर ऑफिस स्टेशनरी को शिफ्ट कर दिया गया.

फर्स्ट फ्लोर पर टा केमिकल्स टा पावर टा इंडस्ट्रीज के ऑफिस हैं सेकंड फ्लोर टा स्टील और टा मोटर्स को मिले हैं थर्ड फ्लोर टा सस के लिए हैं फोर्थ फ्लोर पर टा चेयरमैन बैठते हैं और बोर्ड रूम है ने शहर के नाम पर

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