बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री के लिए कहा जाता है कि पेट्रियाकी का सबसे बड़ा अगर कोई हुई है तो वह भाग्यश्री है। अपने करियर के पीक पर उन्होंने अपने पति के साथ रहने के लिए फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और अब एक बार फिर से भाग्यश्री पर की हावी होती नजर आई है। यह तब हुआ जब भाग्यश्री सांगली गई अपनी जन्मभूमि पर जहां की रॉयल फैमिली से वह बिलोंग करती है।
वहां पर भाग्यश्री गणपति के मौके पर गई। उन्होंने अपने फैमिली के गणपति की आरती की। लेकिन इस आरती से एक बड़ा विवाद शुरू हो गया और यह विवाद शुरू किया है खुद भाग्यश्री के पिता ने ही। भाग्यश्री के पिता है विजय सिंह राजे पटवर्धन जो कि सांगली की रॉयल फैमिली से हैं। विजय सिंह पटवर्धन की तीन बेटियां है जिसमें से भाग्यश्री सबसे बड़ी है।
जब भाग्यश्री गणपति की आरती करने पहुंची तो उन्होंने बताया कि मेरे पिता की तबीयत खराब है और ऐसे में हमारी रॉयल फैमिली को आगे बढ़ाने के लिए कोई तो उत्तराधिकारी चाहिए। तो इसीलिए मैं यहां पर आई हूं। घर की बड़ी बहन होने के नाते मैंने यहां पर आकर अपने घर की परंपरा को पूरा किया है। अब इसी पर भाग्यश्री के पिता विजय सिंह राजे ने एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि हमारे घर का उत्तराधिकारी ना भाग्यश्री है ना ही उनकी दो बहने हैं। हमारे घर का उत्तराधिकारी वो बेटा है जिसे हमने गोद लिया है। आदित्य राजे पटवर्धन और यही हमारी फैमिली का वंश आगे बढ़ाएगा।
ऐसे में अगर गणपति के मौके पर किसी को आरती करने का हक है तो वह सिर्फ और सिर्फ आदित्य सिंह राजे का ही है। भाग्यश्री का नहीं। भाग्यश्री ने यह आरती करके आदित्य सिंह राजे के ओदे को छोटा दिखाने की कोशिश की है जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम ऑफिशियली यह कहते हैं कि अगर कोई ऑथोराइज्ड पर्सन है हमारी सांगली फैमिली को, हमारी पटवर्धन फैमिली को आगे बढ़ाने के लिए तो वो सिर्फ और सिर्फ आदित्य सिंह राजे ही है।
आपको बता दें कि आदित्य सिंह राजे भी भाग्यश्री के ममेरे भाई का बेटा ही है और उसे भाग्यश्री के पिता ने गोद लिया क्योंकि उनका खुद का अपना कोई बेटा नहीं था और कहते हैं कि रॉयल फैमिलीज में वंश आगे बढ़ाने के लिए बेटा होना बहुत जरूरी है। तो जब भाग्यश्री के पिता को बेटा नहीं हुआ तो उन्होंने भाग्यश्री के इस कजिन को गोद ले लिया और उसी के नाम पूरी प्रॉपर्टी जाएगी। भाग्यश्री के पिता ने कहा कि अगर भाग्यश्री को ऐसा लगता है कि वह बेटी है वह कुछ भी कर सकती है तो ऐसा नहीं है एक परंपरा है जिसे ऑथोराइज्ड पर्सन ही आगे बढ़ा सकता है और मेरी तरफ से यह अथॉरिटी मैं आदित्य सिंह राजे को दे चुका हूं। उसे ही मेरा उत्तराधिकारी माना जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर अब भाग्यश्री के बारे में लोगों ने उनके पिता से यह बात सुनी तो एक बार फिर से पेट्रियाकी पर बहस होती नजर आई कि जो डॉटर्स हैं उनमें से किसी को भी उत्तराधिकारी ना बनाकर एक अडॉप्टेड सन को उत्तराधिकारी बनाना इस बात को लेकर लोग यही कह रहे हैं कि हम 2026 में जी रहे हैं। हम कितने आगे बढ़ गए हैं लेकिन सोच से अभी तक हम बंधे हुए