सनी देओल स्टारर बंटवारा 1947 को राजकुमार संतोषी ने डायरेक्ट किया है। इससे पहले दोनों घायल, घातक और दामिनी जैसी तगड़ी फिल्मों पर साथ काम कर चुके हैं। यही कारण है कि उनकी नई मूवी से लोगों को काफी उम्मीदें थी। फिर भी यह बॉक्स ऑफिस पर बिल्कुल फीकी नजर आई। इस बीच राजकुमार संतोषी का एक बयान सामने आया। इसमें उन्होंने बताया कि कोई भी इन्वेस्टर बंटवारा 1947 पर पैसे लगाने को तैयार नहीं था।
वजह यह थी कि फिल्म में सनी ने एक मुस्लिम शख्स का रोल किया है। बंटवारा 1947 चर्चित हिंदी लेखक और प्ले राइटर अजगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देखिया वो जमियाई नहीं पर आधारित है। इसमें लखनऊ के एक ऐसे मुस्लिम परिवार को दिखाया गया है जिसे पार्टीशन के बाद मजबूरी में लाहौर माइग्रेट करना पड़ जाता है। परिवार का मुखिया सिकंदर मिर्जा नाम का एक शख्स है जिसका किरदार फिल्म में सनी देओल ने निभाया है। उनके 40 साल के करियर में यह केवल दूसरा मौका है जब उन्होंने किसी मुस्लिम का रोल किया है। इससे पहले वो 2010 में आई केसी बोकारडिया की मूवी खुदा कसम में हुसैन नाम के एक मुस्लिम ट्रक ड्राइवर का रोल किया था।
पिछले दिनों राजकुमार संतोषी ने गलाटा प्लस को एक इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने बंटवारा 1947 के आड़े आने वाले मुश्किलों के बारे में बात की। खासकर वो बात जहां सनी का मुस्लिम बनना पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट को रोके हुए था। राजकुमार संतोषी कहते हैं मुंबई के ज्यादातर इन्वेस्टर्स को जब यह पता चला कि मैं और सनी साथ में कोई मूवी बना रहे हैं तो उन्होंने मुझे एक रेगुलर एक्शन या रिवेंज फिल्म बनाने को कहा। वो इस फिल्म यानी बंटवारा 1947 पर पैसे लगाने को तैयार नहीं थे। जहां सनी एक मुस्लिम कैरेक्टर सिकंदर मिर्जा का रोल कर रहे हैं। राजकुमार आगे बताते हैं हाल ही में मैंने कुछ रिव्यूज देखे जहां लोग यह कह रहे थे कि सनी ने फिल्म में एक पाकिस्तानी का किरदार प्ले किया है। लेकिन इस कहानी में वो पाकिस्तानी नहीं है। वो भारत के एक मुस्लिम बने हैं जिसे अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए पाकिस्तान जाना पड़ता है। वरना वो यहां पैदा और बड़े हुए हैं। फिल्म में एक डायलॉग है। कई पुश्तों से यहीं रहे हैं और इसी मिट्टी में दफन हो जाएंगे। लेकिन हिंदुस्तान छोड़कर नहीं जाएंगे। किसी भी कैरेक्टर को पाकिस्तानी कह देना बहुत आसान है। मगर फिल्म में सनी का कैरेक्टर ऐसा नहीं है।
राजकुमार की मानें तो मुस्लिम और पाकिस्तान वाले एंगल की वजह से कोई भी इस मूवी पर पैसे लगाने को तैयार नहीं था। वो कहते हैं आजकल तो ट्रेंड ऐसा हो गया है कि पाकिस्तान का जिक्र भर करते ही आपको एंटीनेशनल कह दिया जाता है। वो बताते हैं कि जब आमिर को इस फिल्म के सब्जेक्ट के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे प्रोड्यूस करने में इंटरेस्ट दिखाया। उनके आने के बाद ही फिल्म बन सकी। वरना राजकुमार और सनी कई लोगों के पास यह कहानी लेकर गए थे।
मगर कोई भी इसे बनाने के लिए तैयार नहीं हुआ। रही बात बॉक्स ऑफिस की तो 14 अगस्त को रिलीज हुई बटवारा 1947 ने भारत में ग्रॉस 33 करोड़ 95 लाख कमाए हैं। वहीं ओवरसीज मार्केट से इसके हिस्से 6 करोड़ 25 लाख आए। इस मूवी को 120 से ₹150 करोड़ के बजट पर बनाया गया है। मगर अब तक इसने केवल ₹40 करोड़ 20 लाख ही कलेक्ट किए हैं। फिल्म का 100 करोड़ तक पहुंचना भी मुश्किल नजर आ रहा है। इसलिए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह फिल्म डिजास्टर बनने की राह पर है। यह तमाम जानकारी मेरे साथी शुभांजल ने जुटाई है। आपकी इस पूरी खबर पर क्या राय है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। मैं हूं कनिष्का। देखते रहिए ललन टॉप सिनेमा। शुक्रिया।