हेलो दोस्तों, मेरे चैनल वारिधि मंथन में आपका स्वागत है। आपको 90 के दशक के एक उभरते अभिनेता अविनाश वाधवन तो याद ही होंगे, लेकिन क्या आपको यह पता है कि इस स्टार की जिंदगी इसकी बीवी ने बर्बाद कर दी थी। नौबत यहां तक आ गई थी कि उनको अपने हिंदी सिनेमा के उभरते करियर को छोड़कर विदेश तक भागना पड़ा था। दोस्तों, आपको यह जानकर बड़ी हैरानी होगी कि अविनाश वादवन एक पढ़े लिखे इंजीनियर थे। किस तरह वह इंजीनियर से एक बेमिसाल अभिनेता बने और फिर किस तरह बर्बाद हो गए। यह पूरी कहानी आज की इस वीडियो में हम आपको बताने वाले हैं। 90 का दशक यूं तो बहुत सारे अभिनेताओं के लिए एक गोल्डन पीरियड था। कई अभिनेता 90 के दशक में उभर रहे थे। लेकिन अविनाश वाधवन के लिए यह समय मानिए कुछ ऐसा था कि बॉलीवुड में आते ही इनकी लॉटरी लग गई थी। यह बहुत तेजी से उभरते जा रहे थे। वैसे पेशे से इंजीनियर रहे अविनाश वाधवन बॉलीवुड में कैसे पहुंच गए? क्या आप यह जानते हैं 2 नवंबर 1968 के
दिन मुंबई में अविनाश माधवन का जन्म हुआ था। वैसे यह जानकारी भी बहुत कम लोगों को होगी कि अविनाश का असली नाम राकेश था और वह राकेश से किस तरह अविनाश हो गए। यह बात हम आपको आगे बताएंगे। लेकिन पहले जानते हैं कि अविनाश आखिर फिल्मों में किस तरह पहुंच गए। यूं तो अविनाश का फिल्मी दुनिया से दूर-दूर तक कोई भी नाता नहीं था। वह एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे और पढ़ने में काफी ज्यादा होशियार थे। उनके पिता भी यह बात जानते थे और इसीलिए वह अपने बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे। बेटे को पढ़ा लिखाकर इंजीनियरिंग करने के लिए उन्होंने दिल्ली भेज दिया। लेकिन उनकी किस्मत में शायद कुछ और ही लिखा था। यूं तो अविनाश मन लगाकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन उनका मन सिनेमा में भी काफी ज्यादा लगता था। वह फिल्में देखा करते थे। अविनाश माधवन, बलराज साहनी और संजीव कुमार की एक्टिंग के मुरीद हुआ करते थे और अमिताभ बच्चन की डॉन जैसी फिल्म तो उन्होंने कई बार देखी थी और तभी इन्होंने ठान लिया कि अब तो एक्टर ही बनना है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह घर लौटे तो अपने पिता को अपनी ख्वाहिश बता दी। पिता यह सुनकर हैरान हो गए कि आखिर पढ़ा लिखा इंजीनियर बेटा यह क्या बोल रहा है? उन्होंने बहुत समझाया। रिश्तेदार भी मनाने के लिए आए। लेकिन अविनाश तो अपनी जिद पर अड़े थे। वह इतने ज्यादा जिद्दी थे कि उन्होंने अपने पिता से कह दिया कि अब इंजीनियर नहीं बनूंगा। बनना तो अभिनेता ही है। बेटे की ज़िद के आगे पिता ने हार मान ली और मंजूरी दे दी। मगर अपने हिस्से का संघर्ष तो सबको करना ही होता है। अविनाश भी फिल्मों में जाने के लिए रास्ता तलाशने लगे। उन दिनों अक्षय कुमार भी हीरो बनने के लिए बंबई में संघर्ष कर रहे थे।
दोनों एक साथ लोखंडवाला में रहते थे और अच्छे दोस्त बन गए थे। वह दोनों एक साथ डांस प्रैक्टिस के लिए भी जाया करते थे। अविनाश दिखने में काफी ज्यादा हैंडसम थे। उन्होंने अपना एक पोर्टफोलियो बनवाया और डायरेक्टर प्रोड्यूसर्स के ऑफिसिसेस के चक्कर काटने लगे। अविनाश की किस्मत ने साथ दिया और एक प्रोड्यूसर ने उनको अपनी फिल्म में काम दे दिया। इस फिल्म का नाम था प्यार हो गया। इस फिल्म से अविनाश ने हिंदी सिनेमा में कदम तो रखा लेकिन फिल्म आई और गई हो गई। इस फिल्म से अविनाश की ज्यादा पहचान नहीं बन पाई। मगर इसी बीच अविनाश की किस्मत ने फिर से एक बार उनका साथ दिया। 1987 की बात है। डायरेक्टर टी रामराव धर्मेंद्र और जितेंद्र के साथ एक फिल्म बना रहे थे। जिसका नाम था इंसाफ की पुकार। इस फिल्म में मनोहर नाम के एक किरदार के लिए अविनाश उन्हें पसंद आ गए और अविनाश को यह फिल्म मिल गई। यह फिल्म एक बड़े बजट की फिल्म थी और यह फिल्म हिट हो गई। इस फिल्म से अविनाश को अच्छी खासी पहचान मिल गई। इस फिल्म के बाद इन्हें ठीक-ठाक काम मिलना शुरू हो गया। लेकिन रातों-रात स्टार बनाने वाली फिल्म तो अभी आने वाली थी। कुछ समय पहले ही गुलशन कुमार आशिकी जैसी सुपरहिट फिल्म बनाकर हिंदी सिनेमा में तहलका मचा चुके थे।
वह अब अपनी अगली फिल्म सायरा बानू की भतीजी शाहीन के साथ प्लान कर रहे थे और इस फिल्म के लिए उन्हें एक हैंडसम सा हीरो चाहिए था। अविनाश जब गुलशन कुमार से मिलने पहुंचे तो उन्हें उनका नाम राकेश पसंद नहीं आया। लेकिन इस फिल्म के लिए अविनाश उन्हें काफी ज्यादा पसंद आ गए थे। ऐसे में गुलशन कुमार ने कहा कि राकेश तो हर दूसरे घर में किसी ना किसी का नाम होता है। ऐसे में तुम्हारा नाम बदलना पड़ेगा। इसके बाद फिल्म की पूरी टीम बैठी और सारे लोग जिस नाम पर सहमत हुए वो नाम था अविनाश और इस तरह राकेश वाधवन अविनाश वाधवन बन गए। 1991 में फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था आई मिलन की रात। रिलीज होते ही इस फिल्म के गीतों ने पूरे देश में तहलका मचा दिया और रातोंरात इस फिल्म के गीतों की वजह से अविनाश वाधवन स्टार बन गए। अब तो ऐसा समय आ गया था कि अविनाश को बड़ी-बड़ी फिल्में मिलने लगी। बड़े-बड़े डायरेक्टर प्रोड्यूसर्स इन्हें अपनी फिल्मों में लेने लगे। इसके बाद राजेश खन्ना के साथ उनकी एक फिल्म आई जिसका नाम था रुपए 10 करोड़। यह फिल्म भी हिट हो गई और इसके बाद ही महेश भट्ट की नजर इन पर पड़ी। महेश भट्ट ने अपनी हॉरर फिल्म जुनून में 1992 में उन्हें हीरो बना दिया। राहुल रॉय के साथ इस फिल्म में अविनाश ने कमाल कर दिया। यह फिल्म भी सुपरहिट हुई थी और इसके बाद आई दो फिल्मों ने तो अविनाश के करियर को सफलता के सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। 1992 में ही दिव्या भारती के साथ सुपरहिट फिल्म गीत और 1993 में आयशा जुल्का के साथ बलमा फिल्म के गानों ने माधवन को काफी ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचा दिया और सिर्फ इन फिल्म के गीतों ने अविनाश को सुपरस्टार बना दिया था।
लोग अविनाश के दीवाने हो गए थे। अविनाश के पास इतनी सारी फिल्मों के ऑफर्स आने लगे कि उनके पास समय ही नहीं रहता था उन फिल्मों को कर पाने का। अविनाश की फिल्मों के गीत लोगों की जुबान पर छाए रहते थे और इसके बाद भी अविनाश की कई सारी फिल्में आई जैसे मीरा का मोहन, परवाने, दिल की बाजी, धनवान, पापी गुड़िया से लेकर पुलिस और मुजरिम तक सबको अविनाश में अगला सुपरस्टार नजर आ रहा था। लेकिन फिर अचानक ऐसा हुआ कि उनका करियर ही नहीं जिंदगी भी तबाह हो गई। उनकी तबाही की वजह कोई और नहीं बल्कि उनकी बीवी थी। हुआ यह कि करियर की ऊंचाई पर खड़े अविनाश को एक मॉडल से प्यार हो गया था। उसका नाम छाया पारख था। दोनों ने एक दूसरे से शादी करने का फैसला तक कर लिया था। अविनाश ने छाया से शादी तो कर ली लेकिन उस लड़की ने अभिनेता की जिंदगी नर्क जैसी बना दी। शादी के बाद से ही दोनों के बीच काफी ज्यादा झगड़े होने लगे। वह इतने ज्यादा परेशान रहने लगे कि अपने करियर पर ध्यान ही नहीं दे पाए। शादी के बाद भी उन्हें कई बड़ी-बड़ी फिल्में ऑफर हो रही थी। लेकिन वह इतने ज्यादा टेंशन में रहते थे कि उन सभी फिल्मों को एक-एक कर मना करते चले गए। और फिर एक समय तो ऐसा आया कि वह अपनी बीवी से इतना ज्यादा परेशान हो गए कि सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि भारत छोड़कर भी भाग गए। वह अमेरिका, कनाडा और लंदन में ही रहने लगे। कई सालों तक उनका किसी से कोई संपर्क ही नहीं रहा। वह पूरी तरह गायब हो गए। इधर बड़े-बड़े फिल्मी डायरेक्टर्स और फिल्मी प्रोड्यूसर्स उन्हें तलाशते रहे मगर किसी को अविनाश का ठिकाना ही नहीं मिलता। थक हार कर सब ने अविनाश को ढूंढना ही बंद कर दिया। इधर अविनाश को छाया से छुटकारा मिला साल 2000 में।
जब कोर्ट ने दोनों के तलाक की अर्जी को मंजूर कर दिया। मगर तब तक छाया की वजह से अविनाश का सुपरहिट फिल्मी करियर और जिंदगी दोनों तबाह हो चुकी थी। हालांकि इसके बाद अविनाश ने फिर से फिल्मों में वापसी करने की कोशिश जरूर की लेकिन तब तक वह फिल्मी दुनिया से बाहर हो चुके थे और फिल्म मेकर्स की नजरों से उतर चुके थे। फिल्म इंडस्ट्री उन्हें भूलकर अब आगे बढ़ चुकी थी। यहां तक कि दर्शकों ने भी उन्हें भुला दिया था। अब उन्हें कोई याद नहीं करता। शायद आपने भी उन्हें इन बीते सालों में कभी याद नहीं किया होगा। अगर आपको अविनाश वाधवन याद है या इन पर फिल्माया कोई गीत याद है तो हमें कमेंट्स में जरूर लिखिएगा। बीवी की वजह से पीक पर चल रहा फिल्मी करियर पूरी तरह से बर्बाद हो गया। एक समय का स्टार जिसके पास काम के लिए समय ही नहीं रहा करता था। वह अब काम के लिए ही तरसने लगा। जब बॉलीवुड फिल्मों ने भुला दिया तो टीवी पर आ गए। यहां इन्होंने छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए। इसी बीच साल 2003 में इनकी जिंदगी में नताशा नाम की एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर आई और दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। इन दोनों की शादी भी हो गई। साल 2011 में अविनाश और नताशा का एक बेटा हुआ जिसका नाम है सम्राट। एक जमाने का मशहूर अभिनेता अब कभी कभार टीवी या फिर किसी वेब सीरीज में नजर आ जाता है। मगर अब उनको पहचानने वाला कोई नहीं है। दोस्तों अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो इस वीडियो को लाइक कीजिएगा और अगर आप हमारे चैनल वारिधी मंथन पर नए हैं तो इसे सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना बिल्कुल मत भूलिएगा। अविनाश वाधवन के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं? हमें कमेंट्स में जरूर लिखिएगा। अब तक वीडियो में बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।