दरअसल यह कहानी अरुणा ईरानी की है जो उन्होंने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को लेकर सुनाई है और अपना तजुर्बा बताया है कि दोनों के साथ उनके रिश्ते कैसे रहे और दोनों के साथ काम करने का उनका अपना तजुर्बा कैसा रहा और दोनों की शख्सियत कैसी रही। राजेश खन्ना का जिक्र करते हुए अरुणा ईरानी एक इंटरव्यू में उत्साहित हो जाती हैं। राजेश खन्ना का स्टारडम जब अपने चरम पर था तब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कहावत मशहूर थी। ऊपर आका नीचे काका। राजेश खन्ना के पीछे लोग तो पागल थे ही। निर्माता निर्देशक भी उनके दफ्तर के चक्कर लगाते नहीं थकते थे।
अरुणा ईरानी कहती हैं कि मैंने खुद राजेश खन्ना के बंगले में उन पार्टीज को अटेंड किया है जिनमें फिल्म इंडस्ट्री के तमाम बड़े लोग आते थे और मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है कि काका के घर के बाहर हॉल में तमाम जो बड़े-बड़े डायरेक्टर प्रोड्यूसर्स हुआ करते थे वह सब हाथ बांधे लाइन लगाए खड़े रहते थे। सिर्फ इस इंतजार में कि काका से उनकी मुलाकात हो जाए। एक मीटिंग हो जाए और वह फिल्म उनकी साइन कर लें। 70 के शुरुआती दशक में राजेश खन्ना की लोकप्रियता आसमान छूने लगी थी और फिल्मों के हिट होने की वह केवल गारंटी ही नहीं थे।
वो उनका इस फिल्म में होना किसी भी फिल्म में यूं समझ लीजिए कि दर्शकों के लिए एक नया मसाला होता था जिसके लिए लोग पागल थे। एक फिनोमिना जिसे कहते हैं। उनकी हर फिल्म सुपरहिट हो रही थी और ऐसे में हर निर्माता निर्देशक उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। राजेश खन्ना के लिए यह तय कर पाना मुश्किल था कि वो किसकी फिल्म करें और किसकी फिल्म ना करें यानी कि किसे खुश करें और किसे निराश करें। और इसके लिए उन्होंने एक एक तरकीब निकाली जिसे बाद में अरुणा ईरानी इस इंटरव्यू में बताती हैं।
और अरुणा कहती हैं कि मैंने जो राजेश खन्ना के साथ काम करने के दौरान महसूस किया कि उन्हें ना कहना नहीं आता था। वो नो नहीं कह पाते थे। उनके पास जितने ऑफर आते थे, जितने लोग उनसे मिलने आते थे, वह सबसे समय निकालकर मिलने की कोशिश करते थे। यह और बात है कि वह घंटों इंतजार कराते थे। लेकिन वो किसी को ना नहीं कह पाते थे कि मैं फला डायरेक्टर के साथ काम नहीं करूंगा या मैं फला प्रोड्यूसर के साथ काम नहीं करूंगा। वो काम सबके साथ करते थे। लेकिनकि इतनी ज्यादा फिल्में उनको ऑफर होने लगी थी कि वो उनके लिए कर पाना मुश्किल था। राजेश खन्ना के पीछे सभी प्रोड्यूसर्स लगे रहते थे कि उनकी फिल्म में काम कर लें और किसकी फिल्म का चुनाव करें। यह फैसला राजेश खन्ना के लिए मुश्किल काम था। अरुणा ईरानी इस इंटरव्यू में बताती हैं कि इसके लिए
राजेश खन्ना ने प्रोड्यूसर्स के नाम का एक ड्रॉ निकाला। सभी जो प्रोड्यूसर्स आए रहते थे मान लीजिए आज संडे है। संडे को 10 प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनसे मिलने आए हैं तो वह 10 के नाम लिखकर एक पर्ची में और उसका एक लकी ड्रॉ निकालते थे। अरुणा ईरानी बताती हैं कि राजेश खन्ना सभी प्रोड्यूसर्स को बुलाकर उनके सामने सबके नाम का ड्रॉ कराते थे और जिसके नाम की चिट्ठी निकलती थी उसी की फिल्म में वह काम करते थे और इसी तरह का एक और किस्सा प्रचलित है जब राजेश खन्ना एक बार बीमार हो गए और निर्माता निर्देशक अस्पताल में भी उनके पीछे पहुंच गए और उन्होंने यहां तक कि यह समझ लीजिए कि जो राजेश खन्ना के आसपास के बेड थे या जो उनके रूम के आसपास के बैठते वो सारे बुक करा लिए।
सब ने इधर-उधर की फर्जी बीमारियों के चलते सारे वो पूरा हॉस्पिटल ही बुक हो गया। दरअसल हुआ क्या कि राजेश खन्ना को पाइल्स की परेशानी थी और पाइल्स के के लिए वह अस्पताल में भर्ती हुए थे। जब निर्माताओं को यह बात पता चली तो उन्होंने उनके आसपास के सभी बेड्स बुक करवा लिए ताकि वह राजेश खन्ना को अपनी कहानी सुनाकर उन्हें अपनी फिल्म में साइन कर सकें।
राजेश खन्ना ने आराधना, कटी पतंग, हाथी, मेरे साथी, महबूब की मेहंदी, आपकी कसम जैसी तमाम शानदार फिल्में की। लेकिन आनंद उनके करियर की एक ऐसी फिल्म मानी जाती है। राजेश खन्ना के जिसमें गाने और उन गीत संगीत ने जितनी लोकप्रियता बटोरी उसका एक अलग ही असर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में देखने को मिला। उनके स्टारम में संगीतकार आर डी बर्मन और गायक किशोर कुमार का भी एक अहम रोल अरुणा ईरानी मानती हैं। अरुणा ईरानी कहती हैं कि मैंने राजेश खन्ना के साथ बाद के दिनों में ढेर सारी फिल्में की जिनमें गुलाब है जो साल 1980 में आई या कुदरत अमृत या रेड रोज और उनके साथ काम करने का जो मेरा तजुर्बा है मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो जैसा उनके बारे में मशहूर था कि वह अपने अलावा किसी को कुछ नहीं समझते। ऐसा मैंने राजेश खन्ना के साथ काम करते हुए महसूस नहीं किया। अपने एक्टिंग करियर में उन्होंने कई ऐसे किरदार भी निभाए जिन्होंने हिंदी सिनेमा में उन्हें एक तरीके से सुपरस्टारडम के टॉप पर पहुंचाया।
तो अरुणा ईरानी भी डांस कॉमेडी खासकर विलेन के तौर पर जब वह वैंप बनकर आई तो जान फूंकने लगी। अमिताभ के साथ बतौर लीड एक्ट्रेस वो बॉम्बे टू गोवा में नजर आई और इसके अलावा राजेश खन्ना के साथ भी उन्होंने ढेर सारी फिल्मों में काम किया। और इन फिल्मों में अरुण ईरानी और राजेश खन्ना ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोहा। एक सिंगिंग रियलिटी शो में राजेश खन्ना की फिल्में साइन करने का किस्सा खोलते हुए जब यह तमाम बातें इस इंटरव्यू में अरुणा ईरानी ने बताई तो उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ काम करने का जो तजुर्बा था वो सम्मोहित कर लेने वाला था।
वो जहां शूटिंग पर जाते थे वहां हजारों की संख्या में भीड़ वहां पर आ जाती थी और यह समझ लीजिए कि शूटिंग करना मुश्किल हो जाता था और अरोड़ा कहती है कि मैंने तो उनके साथ उस दौर में काम किया जब सुपरस्टारडम के वो पीक पर थे और उसके बाद भी 80 तककि सबसे महंगे कलाकार के तौर पर राजेश खन्ना थे। लेकिन फिर भी यह वो दौर था जब राजेश खन्ना के अलावा कहीं कोई दिखाई सुनाई नहीं देता था।
यह बात ठीक है कि अमिताभ बच्चन आ चुके थे और अरुणा ईरानी क्योंकि खुद फिल्म इंडस्ट्री की पॉपुलर एक्ट्रेसेस में से एक रही और उन्होंने भी तमाम बड़े सितारों के साथ काम किया अमिताभ के साथ तो उन्होंने बतौर हीरोइन भी काम किया बॉम्बे टू गोवा में। अरुणा ईरानी ने राजेश खन्ना, शदुघन सिन्हा, अमिताभ बच्चन जैसे स्टार्स के साथ काम करने को लेकर भी खुलकर बात की। राजेश खन्ना के साथ उनकी अच्छी बनती इस बात को बार-बार दोहराती हैं। लेकिन अमिताभ और शदुघन सिन्हा के साथ उनकी बॉन्डिंग कुछ खास नहीं रही। राजेश खन्ना पर बात करते हुए अरुणा कहती हैं कि राजेश खन्ना बहुत अच्छे एक्टर थे। वो मेरे साथ बहुत अच्छे थे। लोग उनसे बहुत डरते थे लेकिन मैं डरती नहीं थी। मुझे वो बेन बुलाते थे।
वो ऐसा कहते थे कि ए बेन चलो खाना खाएं। टाइम हो गया। अमिताभ के बारे में अरुणा ईरानी बताती हैं कि वह थोड़ा हैरानी भरा था। वह कहती हैं कि अमित जी शुरू से ही बहुत अलग रहते थे। वह बस अपने कमरे में या फिर वैनिटी वैन में समय बिताया करते थे और मैंने उन्हें कभी किसी के साथ फ्रेंडली होते नहीं देखा। जबकि राजेश खन्ना सुपरस्टार होते हुए भी हम सबके साथ बहुत फ्रेंडली थे और कभी भी उन्होंने हमें एक तरीके से वो होता है ना जिसे दोयम दर्जे का कलाकार समझा समझा जाता है उस तरीके से उन्होंने कभी हमें नहीं समझा। अरोड़ा ईरानी ने शगन सिन्हा के बारे में कहा कि मेरी कभी उनसे अच्छी बहुत अच्छी दोस्ती नहीं हुई। लेकिन हम कभी-कभी बात कर लेते थे और बात करते हुए अरोड़ा कहती हैं कि हीरोइनों से भी मेरी अच्छी बनती थी। मुझे नहीं पता कि मुझे क्यों पसंद वो लोग करती थी। लेकिन अमिताभ और शत्रुघन सिन्हा इन दोनों से मेरी बहुत ज्यादा कभी नहीं बनी। इससे पहले एक और इंटरव्यू में अरुण ईरानी ने कहा था कि अमिताभ बड़े शिष्टाचार वाले आदमी थे जो कितने भी बिजी हो पलट कर कॉल जरूर करते थे। उन्होंने कहा था कि एक्टर के तौर पर वो लेजेंड थे और जब मैंने उनके साथ बॉम्बे टू गोवा में काम किया तो वो फेमस नहीं थे। वो न्यू कमर थे। जबकि मेरी कई फिल्में आ चुकी थी।
लेकिन अब जब उन्होंने इतना नाम कमा लिया वो अभी भी वैसे ही हैं। उनमें किसी तरह का कोई एटीट्यूड वाली समस्या नहीं है। हां थोड़े रिजर्व नेचर के हैं। शूटिंग के दिनों में भी वह अपनी वैनिटी वैन में या कमरे में बैठना पसंद करते थे। जबकि राजेश खन्ना खुलकर हम लोगों के साथ बात करते थे। अरुणा ईरानी ने यह भी कहा कि अगर वह अमिताभ बच्चन की जगह होती तो इतनी कामयाबी उनके सिर चढ़ जाती। उन्होंने आगे कहा कि मुझे शक है कि अमित जी की जगह कभी कोई नहीं ले सकता। लेकिन यह बात भी है कि कोई राजेश खन्ना भी नहीं बन सकता।