जीडी नायडू को भारत का एडिसन कहा जाता है। नायडू साहब के बारे में कहा जाता है कि वे हमेशा अपनी जेब में पिचकस, प्लायर और कुछ छोटे औजार रखा करते थे। वे किसी भी नई मशीन या गैजेट को देखते ही उसे खोलकर समझने की कोशिश करने लग जाते थे। चाहे वह किसी के पास हो या कहीं प्रदर्शनी में ही क्यों ना रखी हो। वो एक ऐसे जीनियस, बिजनेसमैन और विजनरी थे जिन्होंने अपनी मेहनत और इनोवेशन से भारत के इंडस्ट्रियल लैंडस्केप को बदल कर रख दिया। जीडी नायडू एक बार फिर से सुर्खियों में है। वजह है उन पर आधारित उनकी बायोपिक फिल्म जीडी एन।
मार्केट में इसका ऑफिशियल ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है। आर माधवन लीड रोल में है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि असल में जीडी नायडू कौन थे? आइए जानते हैं उनकी लाइफ की इंस्पायरिंग कहानी। नमस्कार, मैं हूं आदित्य। भारत फैक्ट्स के आज के एपिसोड में आपका स्वागत है। [संगीत] गोपालस्वामी दरेस्वामी नायडू यानी जीडी नायडू जिनका जन्म 1893 में तमिलनाडु के कोयंबटूर के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनकी लाइफ इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अगर आप में कुछ सीखने की आग हो तो हालात चाहे कितना भी टफ क्यों ना हो। आप इतिहास रच सकते हैं। नायडू साहब बचपन से ही थोड़े अलग थे। उन्हें किताबों में रटी रटाई थ्योरी पढ़ने में ज्यादा मशीनों को खोलकर देखने में मजा आता था। जब बाकी बच्चे खेल रहे होते थे तब वे अपने पिता के खेतों में काम करते हुए वहां इस्तेमाल होने वाली मशीनों की वर्किंग को ऑब्जर्व करते थे।
उनके दिमाग में हमेशा एक ही सवाल रहता था। यह मशीन काम कैसे करती है? और यही जिज्ञासा उन्हें आगे चलकर इंडिया का सबसे बड़ा इन्वेंटर बनाने वाली थी। उनकी लाइफ का शुरुआती सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने अपनी किस्मत आजमाने के लिए बहुत कुछ किया। कभी होटल में वेटर बने तो कभी तांगा चलाया। लेकिन उनके अंदर का बिजनेसमैन हमेशा शांत बैठने से मना कर देता था। उन्होंने अपनी सेविंग से एक पुरानी मोटर खरीदी और उसे खुद रिपेयर करके चलाना शुरू किया। यही वो मोमेंट था जब उनकी लाइफ का असली टर्निंग पॉइंट आया। उन्होंने ट्रांसपोर्टेशन फील्ड में कदम रखा और यूनाइटेड मोटर सर्विस की शुरुआत की। जल्द ही कोयंबटूर में उनकी बसें शान से चलने लगी। जीडी नायडू को एडिसन ऑफ इंडिया ऐसे ही नहीं कहा जाता। उनकी इन्वेंशन लिस्ट देखकर आप हैरान रह जाएंगे। उनके पास हमेशा पिचकस जैसे हथियार रहा करते थे ताकि चलते फिरते वो किसी भी मशीन को देख सकें और उसे ठीक कर सकें। उनके कुछ जबरदस्त आविष्कारों में कई चीजें शामिल है। उन्होंने खुद की स्वदेशी इलेक्ट्रिक मोटर बनाई जो उस वक्त देश के लिए एक बड़ी अचीवमेंट थी। उन्होंने फलों का जूस निकालने वाली एक मशीन भी बनाई जो
बहुत ही सिंपल लेकिन इफेक्टिव थी। क्या आप यकीन करेंगे नायडू जी ने सालों पहले ही चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक वोटिंग मशीन का प्रोटोटाइप तैयार किया था। उन्होंने अपने खुद के कस्टमाइज्ड कैमरा भी बनाए थे। उनकी खास बात यह थी कि वे मशीन सिर्फ मार्केट में बेचने के लिए नहीं बनाते थे बल्कि वे ऐसी चीजें बनाते थे जो आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों को खत्म कर सकें। नायडू जी का मानना था कि असली शिक्षा वो है जो प्रैक्टिकल हो। उन्होंने कोयंबटूर में पॉलिटेक्निक कॉलेज की नीव रखी ताकि स्टूडेंट्स को सिर्फ किताबी ज्ञान ना मिल सके बल्कि वह मशीनों को असल में ऑपरेट करना भी सीख सकें। वे एक ऐसे विजनरी थे जिन्होंने आज के स्किल इंडिया का सपना सालों पहले देख लिया था। उन्होंने एग्रीकल्चर फील्ड में भी बहुत एक्सपेरिमेंट किए और किसानों को आधुनिक तकनीक का रास्ता दिखाया। [संगीत] जीडी नायडू की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे कभी भी डिग्री के पीछे नहीं भागे। उन्होंने अपने अनुभव को ही अपना सबसे बड़ा गुरु माना।
उन्होंने हमेशा लोगों को सिखाया कि अगर आप किसी मशीन को समझ सकते हैं तो आप उससे बेहतर मशीन भी बना सकते हैं। साथियों आज कोयंबटूर को जो दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है उसकी नींव में भी जीडी नायडू का खून पसीना शामिल है। उन्होंने ना सिर्फ बड़े-बड़े उद्योग खड़े किए बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी दिया। जीडी नायडू की कहानी हमें यह सिखाती है कि महानता बड़े घरों में पैदा होने से नहीं आती बल्कि अपनी मेहनत और अपने आइडियाज पर भरोसा रखने से आती है। वे आज भी हर उस भारतीय के लिए रोल मॉडल है जो कुछ नया करने का सपना देख रहा है। अगर एडिसन ने बल्ब जलाकर दुनिया को रोशन किया तो जीडी नायडू ने अपनी बुद्धिमानी से भारतीय इंडस्ट्री की नीव को रोशन किया। उनकी कहानी आज भी हमें मोटिवेट करती है कि सीखना कभी बंद ना करें। तो साथियों जीडी नायडू के ऊपर यह थी हमारी खास पेशकश। इस पर आप अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए india.com के साथ। शुक्रिया।