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हमले की प्लानिंग कर रहे है ट्रंप?क्यों दंगाइयों को दे रहे अरबों डॉलर?

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अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर ऐसा विवाद खड़ा हो गया है जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप प्रशासन की एक महत्वाकांक्षी योजना जिसका नाम है फंड। अब अदालत, संसद और राजनीतिक दलों के बीच टकराव का बड़ा कारण बन गया है। एक तरफ ट्रंप समर्थकों का दावा है कि यह फंड उन लोगों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया है जिन्हें पिछली सरकारों के दौरान राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया।

वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि योजना अप्रत्यक्ष रूप से उन लोगों को फायदा पहुंचा सकती है जो 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद यानी कैपिटल हिल पर हुए हमले से जुड़े थे। यह मामला इतना बढ़ गया है कि अब अमेरिकी अदालत ने इस फंड पर अस्थाई रोक लगा दी है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी न्याय विभाग खुद इस फैसले से असहज महसूस कर रही है। लेकिन उसने अदालत के आदेश का पालन करने की बात कही है।

तो आखिर यह एंटी फंड क्या है? इस पर इतना विवाद क्यों हो रहा है और आखिर ट्रंप को अदालत से झटका कैसे लगा? अमेरिका में पिछले कई वर्षों से एक बड़ा राजनीतिक आरोप लगाया जा रहा है कि सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के निशाना बनाने के लिए किया गया।

विशेष रूप से ट्रंप और उनके समर्थकों का आरोप रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में कई संघीय एजेंसियों ने राजनीतिक पक्षपात किया और कुछ लोगों को अनुचित तरीके से जांच कारवाई और मुकदमे का सामना करना पड़ा। इसी दावे के आधार पर ट्रंप प्रशासन ने एक विशेष योजना तैयार की जिसका नाम रखा गया फंड। सरकार का कहना था कि इस फंड का उद्देश्य उन नागरिकों को राहत देना और मुआवजा देना है जो खुद को सरकारी संस्थाओं द्वारा गलत तरीके से निशाना बनाए जाने का शिकार मानते हैं। लेकिन योजना सामने आते ही राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस फंड का इस्तेमाल ट्रंप समर्थकों और विवाद मामलों से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। यहीं से यह मामला अदालत तक पहुंच गया।

अब आते हैं इस पूरी कहानी की सबसे अहम खबर पर। अमेरिकी जिला न्यायाधीश लन विक्रमा ने इससे 1.8 अरब डॉलर के फंड पर अस्थाई रोक लगा दी है। अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक सरकार इस फंड से संबंधित कोई नई कारवाई नहीं करेगी। इसका मतलब यह है कि सरकार ना तो फंड में पैसा ट्रांसफर कर सकती है ना किसी दावे की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है और ना ही किसी व्यक्ति को भुगतान कर सकती है। यानी ट्रंप प्रशासन की पूरी योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अदालत के इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं है। लेकिन फिर भी वह कानून का सम्मान करते हुए आदेश का पालन करें। उधर विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों ने भी मोर्चा खोल दिया है। सेनेटर एलिसा स्लॉट किंग और एडम शेफ और मार्क केली ने ड्रेन द स्लश फंड एक्ट नाम का एक नया विधेयक पेश किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य इस फंड को स्थाई रूप से समाप्त करना है।

ताकि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल किसी राजनीतिक सहयोगी, दोषी व्यक्तियों या 6 जनवरी कैपिटल ही हमले से जुड़े लोगों को भुगतान करने के लिए ना किया जा सके। विपक्ष का आरोप है कि यह योजना सरकारी धन के दुरुपयोग और उदाहरण बन सकती है। जबकि ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक के कथित पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश बता रहे हैं।

फिलहाल अमेरिका में यह विवाद सिर्फ एक सरकारी फंड तक सीमित नहीं रह गया है। यह बहस अब इस बड़े सवाल तक पहुंच गई है कि क्या सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक के रूप में किया जा रहा है या फिर यह सिर्फ राजनीतिक नरेटिव का हिस्सा है? ।

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