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अनीता आडवाणी को नहीं मिलेगी राजेश खन्ना की संपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई अर्जी

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राजेश खन्ना के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का दावा करने वाली पूर्व एक्ट्रेस अनीता आडवाणी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. गुरुवार को अनीता आडवाणी के केस को फालतू मुकदमा करार देते हुए कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. अनीता ने अपने लिव इन रिलेशनशिप को शादी की मान्यता देने की मांग की थी जिसे अब कोर्ट ने ठुकरा दिया है.

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का दावा करने वाली पूर्व एक्ट्रेस अनीता आडवाणी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. गुरुवार को अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राजेश खन्ना के साथ अपने कथित लिव इन रिलेशनशिप को शादी के रूप में मान्यता देने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुकदमे को ‘लग्जरी लिटिगेशन’ यानी गैर-जरूरी मुकदमेबाजी करार दिया.

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि इस याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं है. अनीता ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 1 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली.सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई याचिकापीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान अनीता आडवाणी की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल इस मुकदमे के जरिए सम्मान हासिल करना चाहती हैं. वकील ने कहा कि सिविल मुकदमे में उनकी मांग का आधार गरिमा और सम्मान की भावना है. हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को याचिका पर विचार करने के लिए पर्याप्त नहीं माना.

डिंडोशी सेशन कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अनीता आडवाणी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका को हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था. राजेश खन्ना का जुलाई 2012 में निधन हो गया था. अनीता आडवाणी का दावा था कि वह कई साल तक अभिनेता के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रही थीं. उन्होंने आरोप लगाया था कि 2012 में उन्हें मुंबई स्थित राजेश खन्ना के बंगले ‘आशीर्वाद’ से बाहर कर दिया गया था.

अनीता आडवाणी ने ट्विंकल खन्ना-डिंपल कपाड़िया पर लगाये थे आरोपउनके मुताबिक, इस घटना में अभिनेता की अलग रह रही पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार की भूमिका थी. अनीता आडवाणी ने 2013 में डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी.

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