1970 के दशक में जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड पर राज कर रहे थे तब एक और स्टार अपनी दमदार आवाज और दमदार डायलॉग डिलीवरी से उनके राज को चुनौती दे रहा था। लोग अक्सर विनोद खन्ना को अमिताभ बच्चन का कॉम्पिटिट मानते हैं। लेकिन असल में जिस एक्टर की पॉपुलरिटी और मास अपील ने अमिताभ बच्चन को डरा दिया था, वह शत्रुघ्न सिन्हा थे।
शत्रुघ्न सिन्हा की बढ़ती शोहरत और सेट पर उनके दबदबे ने अमिताभ बच्चन को इतना अनकंफर्टेबल कर दिया कि एक समय के बाद दोनों ने साथ काम करना तक बंद कर दिया था। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत में बॉम्बे टू गोवा जैसी फिल्मों में साथ काम किया था। उस समय अमिताभ बच्चन स्ट्रगल कर रहे थे और शत्रुघ्न सिन्हा एक उभरते हुए विलेन थे। लेकिन 1970 के दशक के बीच तक पूरा इक्वेशन बदल गया था। अमिताभ बच्चन शहंशाह बन गए थे। जबकि शत्रुघ्न सिन्हा लोगों के चहेते बन गए थे।
जिन्हें बिहारी बाबू के नाम से जाना जाता था। शत्रुघ्न सिन्हा की खासियत यह थी कि विलेन के रोल में भी वह हीरो से ज्यादा वाहवाही बटोर लेते थे। अक्सर कहा जाता है कि विनोद खन्ना का मुकाबला अमिताभ बच्चन से था। लेकिन विनोद स्वभाव से जितना शांत थे। इसके उलट शत्रुघ्न सिन्हा बेबाक और बेहद कॉन्फिडेंट थे। जब भी दोनों एक साथ स्क्रीन पर आते थे तो शत्रुघ्न सिन्हा की डायलॉग डिलीवरी अमिताभ बच्चन की सीरियस एक्टिंग पर भारी पड़ती थी। यह इनसिक्योरिटी काला पत्थर के दौरान चरम पर पहुंच गई थी। शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी बायोग्राफी एनीथिंग बट खामोश में बताया कि अमिताभ बच्चन काला पत्थर के सेट पर उनके बगल में बैठना भी पसंद नहीं करते थे।
अमिताभ बच्चन उनकी बढ़ती पॉपुलैरिटी के कारण अक्सर इनसिक्योर महसूस करते थे। शत्रुघ्न सिन्हा के अनुसार कई बार तो मेन लीड यानी अमिताभ बच्चन का कद कम ना हो इसीलिए फिल्म से उनके सबसे अच्छे सींस हटा दिए जाते थे। यह दुश्मनी इस हद तक बढ़ गई थी कि अमिताभ बच्चन शत्रुघ्न सिन्हा वाली फिल्में करने से बचने लगे। इन दोनों को ध्यान में रखकर लिखी गई कई बड़ी मल्टीस्टारर फिल्में या तो कभी स्क्रीन पर नहीं आई या उनमें से किसी एक को हटना पड़ा। शत्रुघन सिन्हा ने तो यहां तक कहा कि सिर्फ इसीलिए कि पब्लिक ने मेरे डायलॉग पर बहुत ज्यादा शोर मचाया।
मुझे कई प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया। फिल्म दोस्ताना और नसीब में उनकी जोड़ी को बहुत तारीफ मिली। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही थी। यहां तक कि नसीब के सुपरहिट गाने जॉन जॉनी जनार्दन की शूटिंग के दौरान भी दोनों के बीच बातचीत नहीं होती थी। शत्रुघ्न सिन्हा का मानना था कि अमिताभ बच्चन को लगता था कि शत्रुघ्न उनकी स्टार पावर छीन रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बिग बी को शत्रुघ्न का देर से आना पसंद नहीं था। हालांकि यह अनुशासन की लड़ाई नहीं थी
बल्कि नंबर एक की पोजीशन बनाए रखने की लड़ाई थी। 1980 के दशक की शुरुआत के बाद इन दोनों लेजेंड्स को एक साथ देखना बहुत कम हो गया। अमिताभ बच्चन ने सोलो एक्शन फिल्मों पर फोकस करना शुरू कर दिया। जबकि शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना रास्ता अलग बनाया। शत्रुघ्न ने पॉलिटिक्स और फिल्मों में अपनी पहचान बनाई लेकिन अमिताभ से उनकी दूरी बनी रही। हालांकि सालों बाद दोनों के बीच रिश्ता कुछ हद तक सामान्य हो गया और पुरानी दोस्ती वापस आ गई। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।