हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जमकर वायरल हो रहा है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि बॉलीवुड की मशहूर सिंगर अलका याग्निक अब गाना नहीं गा पाएंगी और इसके पीछे एक खतरनाक बीमारी कारण है। दरअसल आपको बता दें कि 90 के दशक से लेकर आज तक अलका ज
की आवाज के बिना बॉलीवुड अधूरा है। लेकिन पिछले कुछ समय से वो म्यूजिक इंडस्ट्री से बिल्कुल गायब है। फैंस पूछ रहे थे कि अलका जी कहां है और अब खुद अलका जी ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। अलका याग्निक ने खुलासा किया है कि वह एक बहुत ही दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले जब वह एक फ्लाइट से बाहर निकली तो अचानक उन्हें सुनाई देना बंद हो गया।
डॉक्टर ने इसे सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस बताया जो एक वायरल अटैक की वजह से होता है। हाल ही में एक इंटरव्यू में अलका जी ने भावुक होते हुए कहा कि वह आज भी इस तकलीफ से लड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि कई बड़े म्यूजिक कंपोजर्स उनके पास काम लेकर आते तो हैं लेकिन वह गा नहीं पा रही हैं क्योंकि उन्हें सुनने की दिक्कत है। हौसले की बात यह है कि इसी मुश्किल दौर के बीच उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित भी किया गया है। अपनी बीमारी के बावजूद उन्होंने सम्मान को स्वीकार किया और अपने फैंस का शुक्रिया अदा किया। वहीं उनकी आखिरी रिकॉर्डिंग फिल्म अमर सिंह चमकीला का गाना नरम कालजा था। उसके बाद से उन्होंने अब तक एक भी गाना नहीं गाया। अलका जी ने अपने फैंस और युवा गायकों को एक खास चेतावनी भी दी है।
उन्होंने कहा कि बहुत तेज म्यूजिक और हेडफोनस का ज्यादा इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक हो सकता है। वो नहीं चाहती कि उन्होंने जो सहा वो कोई और सहे। दरअसल आपको बता दें न्यूरल हियरिंग लॉस तब होता है जब आपके कान के अंदरूनी हिस्से या कान से दिमाग तक संकेत ले जाने वाली तंत्रिका में कोई क्षति होती है। यह बहरेपन का सबसे आम तरीका है। इसके कई कारण हैं। उम्र बढ़ने के साथ कान की नसें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। लंबे वक्त तक हेडफोन का इस्तेमाल फैक्ट्रियों का शोर या अचानक कोई तेज धमाका कानों की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। वहीं वायरल इंफेक्शन भी इसकी वजह बन सकता है। जैसा कि हाल ही में सिंगर अलका याग्निक के मामले में भी देखा गया। कुछ खास वायरस जैसे कि मम्स, मज़ल्स या हर्बीस सुनने वाली नस पर हमला कर देते हैं और हियरिंग लॉस का कारण बनते हैं। वहीं दवाइयों का दुष्प्रभाव जैसे कि कुछ हैवी एंटीबायोटिक्स या कीमोथेरेपी की दवाएं कानों को नुकसान पहुंचाती हैं। कई बार परिवार में पहले से ही किसी को यह परेशानी हो तो यह जेनेटिक कारण से भी हो सकता है।
ऑटोइ्यून बीमारी या मेनियर रोगों के कारण भी ऐसी दिक्कत देखने को मिलती है। तो अगर आपको भी सुनने में दिक्कत आ रही है, बैकग्राउंड शोर ना होने पर भी बातचीत समझने में बहुत कठिनाई होती है। कानों में लगातार घंटी बजने या सीटी जैसी आवाज आती है। टीवी या रेडियो की आवाज को दूसरों की तुलना में बहुत तेज बढ़ाकर सुनते हैं। कभी-कभी एक या दोनों कानों से अचानक सुनाई देना बंद हो जाता है। तो समझे कि आपको भी हियरिंग लॉस होने के साफ लक्षण नजर आ रहे हैं। इसे ठीक करने के लिए आमतौर पर डॉक्टर्स स्टेरॉइड्स देते हैं ताकि नसों की सूजन कम हो और रिकवरी की संभावना बढ़ सके। आधुनिक मशीनें आवाज को एंपलीफाई करके सुनने में मददगार साबित होती हैं। वहीं अगर कान की मशीन काम ना करे तो सर्जरी के जरिए एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाता है जो सीधे सुनने वाली नस को उत्तेजित करता है। फिलहाल इस वीडियो में इतना ही। वीडियो को लाइक और शेयर करें। साथ ही चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।