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आयुषी शर्मा ने मां को नहीं दी मौ!त ?मामा के खुलासे से पलटा पूरा केस।

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जा रहा है। केवल आईसी को हिट किया जा रहा है। आईसी को अपराधी बनाया जा रहा है। अरे आईसी तो केवल टूल्स है। उसको किस तरीके से उसका शोषण किया गया है या किसी अन्य साधन के माध्यम से उसको किस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये मेरी बहन मुझे बताया करती थी कि अमुक अमुक आदमी उसे परेशान किया करते हैं। मेरी बहन की जो दुर्घटना हुई है उसमें मुझे की आशंका है। इसी एफआईआर पर सात अपराधी पकड़ में आए जो कि उसके परिवार की सदस्यता हुआ था और पिछले दो-ती साल से भी उस आयुष के संपर्क में था। नीरज शर्मा हत्याकांड में लगातार समा तमाम सवालों पर रिपब्लिक भारत सवाल पूछता पूछता उस व्यक्ति तक भी पहुंचा है जिस पूरे मामले में जिन्होंने आवाज उठाई सर आपका नाम मेरा नाम राकेश शर्मा है जी सर नीरज शर्मा साहब का क्या रिश्ता था नीरज मेरी सगी बहन थी सबसे बड़ी बहन थी एक ही बहन थी जी सर ये जब पूरा मामला हुआ ।

आखिरकार कब की ये पूरी घटना है और क्या कुछ पूरा घटनाक्रम हुआ था दिनांक 3 जुलाई 2026 को 5 4:45 के करीब उसका दुर्घटना हुई जिसकी जानकारी मुझे मेरी भांजी आयुष के द्वारा जरिए फोन दी गई थी। मेरी भांजी आयुष का 626 पर फोन आया था कि मामाम का एक्सीडेंट हो गया और मम्मी एक्सीडेंट में खत्म हो गई।

ऐसा कहते ही उसने तुरंत फोन काट दिया और उसके ना कोई रोने का ना कोई ऐसा कोई नेचुरल जो चीजें थी तो फोन काटना ही मेरा एकदम शंका कि बढ़ता गया। लेकिन मैं अपने घर पहुंचा। इस दौरान मेरा एक रिश्तेदार था जो मोर्चरी पहुंच चुका था। उसने कहा कि बेटा घबराना मत। सिस्टर मर गई है। सही बात है। लेकिन तू घबराना मत हिम्मत रखना। और अब आने की जरूरत नहीं है यहां क्योंकि मैं हूं और मोर्चरी में लाश रखवा दी तो अब मोर्चरी का नियम ये है कि किसी भी व्यक्ति को चाहे खास सगाई भाई क्यों ना हो परिवार का सदस्य क्यों ना हो मिलने नहीं दिया जाएगा तो बेटा तू अपनी लीगल तेरी कारवाई जो भी है तू उसको कर तो मैं अपने 810 अपने परिवार के सदस्यों और भाइयों को लेकर के मैं सांग प्रताप नगर थाना गया प्रताप नगर थाने जा के मैंने जो है हत्या की एफआईआर दर्ज कराई उसमें मैंने सिर्फ एप्लीकेशन में सिर्फ चार लाइन लिखी कि मेरी बहन मुझे बताया करती थी कि अमुक अमुक आदमियों से परेशान किया करते हैं। मेरी बहन की जो दुर्घटना हुई है ।

उसमें मुझे हत्या की आशंका है। इसी एफआईआर पर सात अपराधी पकड़ में आए जो कि उसके परिवार के सदस्य थे। कौन-कौन जिनमें बलराम का जिन उसका भाई बलराम जो लगातार सात साल से साल भर से कब्जा करके मकान पे बैठा हुआ था और पिछले दो-ती साल से भी उस आयुष के संपर्क में था।

हम इसके अलावा उसका बाप मोहन उसका चाचा जो है कृष्णा उसका भाई कृष्णा चाचा अक्षो उसकी मां उसकी सास जो है मेरी बहन की सास भगवान देई ये सभी और जो पकड़ में आने वाले व्यक्ति हेमंत है और भी कई कई नाम है जो सामने आए हैं। ये सारे लोग मुख्य अभियुक्त के रूप में शामिल हैं। महत्वपूर्ण सोचनीय बिंदु यह है कि अभी तक उसके पिता मोहन को पकड़ने के बावजूद भी मोहन को पुलिस ने हिरासत में 5 तारीख के लमसम ले लिया है।

के बावजूद भी आज 11 तारीख होने को आ गई। आज तक वह मुख्य अभियुक्त बलराम को नहीं पकड़ पाई। अगर पुलिस थर्ड डिग्री का यूज़ करें और ढंग से मोहन की कुटाई करे तो क्या संभव नहीं है कि वो अब तक अभियुक्त जो मुख्य अभियुक्त बलराम है वो पकड़ में आता। इसलिए कहीं ना कहीं पुलिस की जो जांच है उसमें ढिराई सामने आ रही है और कहीं ना कहीं संलिप्तता नजर आ रही है। बात निकल कर आई। आपने एक बड़ी बात कही। ₹ लाख कहां से आए क्योंकि आयुषी बेरोजगार थी। पढ़ाई कर रही थी और इस दौरान यह पूरा ₹ लाख निकलने के बाद आई है। सर ₹ लाख बहुत मोटी राशि होती है और बेरोजगार एक कर्मचारी भी होता है। अगर इसको ₹80,000 की मंथली प्रतिमाह तनख्वाह प्राप्त होती है तो वो अपने बच्चों पे खर्च करता है। अन्य दवाइयों पे खर्च करता है।

एजुकेशन खर्च करता है। तब जाके उसको ₹10,000 प्रति मंथ की सैलरी की सेविंग हो पाती है। तो कितने लंबे समय के बाद में वो अमाउंट जमा होती है। आप समझ सकते हो इन चीजों को। आप भी मीडियम फैमिली से बिलोंग करते हो। तो महत्वपूर्ण चीज़ ये है कि आयुष के पास ₹7 लाख की मोटी अमाउंट आई कहां से? कौन है फाइनेंसर? कौन है इन्वेस्टर? क्या आयुष को फसा होने वाला था डायरेक्ट? अरे आयुष तो लीगल राइट से उसकी सत ही उसको संपत्ति मिलने वाली थी क्योंकि उसका भाई तो एनॉर्मल था।

तो वो तो अकेली बारिशान थी। तो वो क्यों मारेगी? उसने मारा ये सत्य बात है। लेकिन किसके लिए मारा? कौन है अंतिम? किसको संपत्ति चाहिए थी? कौन था फाइनेंसर? जो व्यक्ति आयुष को पूर्ण रूप से हिट किया जा रहा है। सोशल मीडिया के द्वारा किया जा रहा है। चैनलों के माध्यम से किया जा रहा है। पुलिस के द्वारा किया जा रहा है। केवल आयुष को हिट किया जा रहा है। आईसी को अपराधी बनाया जा रहा है। अरे आयुष तो केवल टूल्स है। अच्छा उसको किस तरीके से उसको शोषण किया गया है या किसी अन्य साधन के माध्यम से उसको किस तरह सेल किया जा रहा है।

ये पुलिस की इन्वेस्टिगेशन का पार्ट है। महत्वपूर्ण अपराधी मोहन, उसका बेटा बलराम, उसका बेटा कृष्णा, उसकी मां भगवान देवी ये सभी लोग मुख्य थे। इनको संपत्ति की आवश्यकता थी। तो इनकी गिरफ्तार किया जाए और जो उनको अभी जेसी जो हुई है उसको वापस निवेदन करना चाहूंगा उसको वापस पीसी में लिया जाकर उसको जो है वापस जो इन्वेस्टिगेशन अभी शेष रह गया है।

उस पे इन्वेस्टिगेशन किया जाए संपत्ति में बात की जाए तो आपकी बहन नीरज के पास क्या कुछ संपत्ति थी क्या कुछ था एक बार डाटा बता सकते हैं मेरी बहन के पास में दो मकान थेट लमसम दो करोड़ की संपत्ति थी सरकारी नौकरी थी मेरी जीजा जी की मृत्यु के बाद जो पैसा मिलने वाला था वो मेरी भांजी जी ने विभिन्न की याचिका लगा के उस पैसे को बैन करा दिया।

तो ये दूसरी बात जो दुर्घटना इन्होंने जो प्लान से जो कारज किया है वो निश्चल रूप से इंश्योरेंस प्राप्ति हेतु इन्होंने जो है इस रचा गया जिसमें भी कहीं ना कहीं इनको मोटा अमाउंट मिलता।

इस दुर्घटना कराने के पीछे भी कहीं ना कहीं कारण कि पैसे की प्राप्ति ही रहा होगा। भाई साहब देखा जाए तो कहीं ना कहीं ये सीधे तौर पर जो राशि है वो इनडायरेक्टली कहीं ना कहीं आयुष को ही मिलती। देखा जाए तो सर इसमें यह है कि जो प्रॉपर्टी संपत्ति जो ऑलरेडी ₹15 करोड़ आयुष के हैं तो वो अपनी मां को मानने का विचार क्यों सोचेगी क्योंकि आज तक मैंने कभी इतिहास में ना देखा ना मैंने सुना ना मेरे वरिष्ठ पिताजी ने ताऊ जी ने कभी ऐसा सुना कि एक बेटी ने अपनी मां को मार दिया पूत कपूत हो सकता है।

लेकिन मैंने बेटी को कभी भी अपनी मां को मारते आज तक का इतिहास रहा मैंने नहीं देखा और सबसे बड़ी बात है कि मेरी जो सिस्टर है वो भी अपनी बेटी आयुष को ही नौकरी लगाना चाहती थी लेकिन आयुष की इज्जत यह थी कि नहीं नहीं मुझे अगर दोनों मकानों की रजिस्ट्री कराई जाए जैसे कि मेरी सिस्टर ने मुझे बताया था तभी मैं नौकरी लूंगी तो अंतिम दिनों में 90 डेज होते हैं नौकरी प्रार्थना पत्र पेश करने के अंतिम दिनों में मेरी सिस्टर ने प्रार्थना पत्र पेश किया अगर सिस्टर की नौकरी करने की इच्छा होती तो प्रारंभ में प्रार्थना पत्र पेश कर देती ना हां भाई साहब जब ये नौकरी दी गई ।

आपकी बहन को यह अपॉइंट किया गया तो उसके बाद आयुष ने कभी मां से बात करने की कोशिश नहीं की कि मां मैं ये नौकरी करना चाहती उसको परेशान करती थी ये तो उस मेरी सिस्टर ने उनको बोला था कि आप नौकरी ले लो। मेरा बेटा एब्नॉर्मल है। मैं इस बेटे की केयर देखरेख करूंगी। मेरी सब जान बसी हुई है। तो मैं नौकरी करने में असमर्थ हूं। मैं पेंशन से अपना काम चला लूंगी।

नौकरी आप कर लो। लेकिन उसकी इज्जत ये थी कि मैं नौकरी उसी शर्त में करूंगी। ये दोनों मकान मेरे नाम से रजिस्ट्री कर दी जाएगी। नौकरी प्राप्ति करने से पूर्व। भाई साहब एक बात और निकल कर आई। आप लोगों ने बताया जा रहा है कि जीजा जी वाले मामले में भी एक केस हुआ था थोड़े दिनों पहले। उसमें भी संज्ञान नहीं लिया कि वो क्या कुछ मामला? उसमें ये था 3 महीने उनको अंडरग्राउंड रखा गया। अंडर ग्राउंड रखने के बाद में जिस तरह से हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया 90% पार्ट डैमेज हुए तो कैसे क्या हादसा था।

क्यों उन्हें भर्ती कराया गया के से बीमारी से वो थे और उनको हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया हॉस्पिटल में 90% वो स्वस्थ हो गए थे इसके बाद में उनको अपनी मर्जी से गुप्त स्थान में रखा गया और संदि परिस्थिति में उनको भर्ती कराया गया जिस तारीख को भर्ती कराया गया था 90% पार्ट उनके डैमेज थे तो इससे कहीं ना कहीं संदेह जाता है अगर इसकी भी जांच कराई जाए तो कहीं ना कहीं चीजें और भी ओपन हो के आ सकती है। परिवार का कौन सदस्य उस वक्त भाई साहब के साथ मौजूद था? मेरी भांजी आयशी और बलराम। बाकी अन्य लोगों को किसी को जानकारी नहीं थी। बलराम कौन है? बलराम मेरी भांजी का कजिन हूं। कजिन इनका घर और ये बलराम का घर कितना दूर है? क्या पास में ही रहता? मैं किराए पे रहा करता था। घर में ही घर पे नहीं बाहर आसपास ही है। भाई साहब एक और बात आपने बड़ा ही खुलासा कुछ दिनों पहले किया। तांत्रिक विद्या भी करवाई गई।

क्या कुछ तांत्रिक विद्या थी क्या तांत्रिक मीडिया का वीडियो मीडिया पे आप लोगों को मिला है सभी को मिला है आजकल तो डिजिटल साक्ष यही होता है तो ये सभी के जानकारी में है तो हो सकता है किसी व्यक्ति के द्वारा इन्होंने संबंध स्थापित करके ये श्योर किया हो कि क्या तांत्रिक क्रिया के द्वारा ऐसा काम किया सकता है और किसी ने असोर किया होगा तब ये तांत्रिक गुड्डा नींबू कलाई वगैरह इस तरीके के जो है काम में लिए गए ये जो गुड्डा है नींबू है ये एक ही दिन मिले या कोई पर्टिकुलर अलग-अलग ये 27 तारीख को शनिवार को शनिवार के हम मतलब पूरी प्लानिंग थी आयुषी की कि किसी तरह से पहले माता जी को पहले पिताजी को फिर माताजी को ये कहीं ना कहीं प्लान ए बी सी डी का हिस्सा है इसमें प्लान ए बी सक्सेस हो चुके है प्लान सी डी बाकी थी प्लान सी बच्चा है एबनॉर्मल है तो वो नेचुरली प्लान सी के लिए बहुत ही लमसम समीप था हो सकता है मेरी भांजी आयुष को ये ज्ञान नहीं था कि हो सकता है प्लान डी कैसा है वो स्वयं उन लोगों के द्वारा बनाई जाती है।

प्लान ए क्या था जिस तरीके से नजर प्लान बी आ रहा है तो प्लान ए कहीं ना कहीं संपत्ति का जो इच्छुक व्यक्ति है तो प्लान ए के काम किया तो बी का किया है। कौन मारता है? कौन मारता है? कोई बात हो जाती है लड़ाई झगड़ा होता है बोलना बंद कर देते हैं। मारता कोई नहीं है। तो जब मारा है और जिस तरीके स्वीकार किया है। आपने भी मीडिया पे देखा है पुलिस के द्वारा ओपन किया गया कि यहां संपत्ति के लाश से मारा है तो 14 करोड़ संपत्ति क्या मतलब जीजा के जिंदा होने पे मिल जाती क्या? जीजा मरेगा तो ही तो मरेगी तभी तो मिलेगी। अच्छा आपका कहने का मतलब है पहले जीजा जी उसके बाद उनकी पत्नी जो आपकी बहन है नीरज उसके बाद बेटी को भी कहीं ना कहीं टारगेट की बात है सर जिसको संपत्ति चाहिए थी बिलाल बी को जो इन्होंने सक्सेस किया है स्वीकार किया है कि हमने इसलिए मारा कि 15 करोड़ संपत्ति के लिए तो नेचुरल बात है ये कॉमन सेंस की बात है कहीं ना कहीं हम तो इस चीजों को देख सकते हैं और चीज अगर इस इन्वेस्टिगेशन किया जाए तो जाहिर सी बात है कि बहुत सारे तथ्य और बहुत सारे राज उजागर होंगे। अब आप एक बड़ी मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले में किससे जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री जी की बात निकल कर आई।

सर मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को इस चैनल के माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि इसकी जांच सीबीआई से होनी चाहिए। सीआरडीसी से होनी चाहिए ताकि निष्पक्ष रूप से जो है अपराध का खुलासा हो और दूध का दूध पानी का पानी हो। पुलिस की अभी तक की कारवाई से आप संतुष्ट हैं? मैं वर्तमान में पुलिस की कारवाई संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि जो मुख्य बलराम इतने लंबे समय के बावजूद भी पकड़ में नहीं आना कहीं ना कहीं मुझे निराशा हाथ पुलिस प्रशासन के द्वारा लग रही है। कहां उम्मीद बताई जा रही है कि कहां मिल सकता है बलराम? ये मेरे ये तो पुलिस की इन्वेस्टिगेशन का पार्ट है। ये पुलिस इन्वेस्टिगेशन करे इस चीज का।

लेकिन जितना विलंब किया गया है ये प्रश्न चिन्ह लगना स्वभाव है। बेसिकली बात की जाए तो ये जो बलराम का परिवार है रहने वाला कहां का है? का कोई गांव कोई या फिर पर्टिकुलरली जयपुर के ही थे ये लोग। ये गांव भोमपुरा के निवासी हैं। मैं भी बयाना का निवासी हूं। भोमपुरा कहां पड़ता है? ये सेवर बरमपुरा भरतपुर जिले के अंदर है। वहां के लोग हैं। वहां के लोग हैं। ये यहां क्या करते थे? क्या परिवार का व्यवसाय है? ये मेरे जिया जी हाई कोर्ट में कोर्ट मास्टर थे। तो वो अपनी नौकरी करते थे और ये किराया लेकर के पढ़ाई करता था। और ये जो लोग हैं जो मोहन जी है वगैरह दूसरे लोग हैं। ये गांव में रहते थे और ये जो है कोई खास स्थिति अच्छी नहीं थी। राकेश जी एक और लास्ट मेरा आखिरी सवाल रहने वाला है। बताया जा रहा है कि कई दिनों से प्लानिंग चल रही थी। मुजिमों ने हिरासत में लिया गया।

पुलिस के द्वारा जिस तरह से सोशल मीडिया पे आपने भी देखा है, सुना है, हम लोगों ने देखा सुना है। तो उन्होंने कबूल भी किया है कि हम पूर्व में भी दो महीने पूर्व थार गाड़ी से रिहर्सल करके गए हैं। इनको चोट पहुंचाने की कोशिश की है। हम सफलता नहीं मिली। फिर दोबारा इन लोगों ने मुझे फिर पंच करके बुलाया है। जैसा कि आपने सुना होगा। तो ये कई दिन से फिर जब ये घटना हुई है उसमें उजागर हुआ है तो सात आठ दिन की रेकी करना इसमें शामिल हुआ है कि शामिल आए तो ये सारी चीजें जो मतलब लंबे समय से ये प्लान किया जा रहा है 27 तारीख को तांत्रिक क्रिया के माध्यम से जो है मरवाने का प्रयास किया गया था सफलता उनको हाथ नहीं लगी तो वो जिस तरह से आमादा थे मानने पर तो उन्होंने अपने काम को अंजाम दे दिया जीजाजी की कब हुई जीजा जी की 21425 को नीरज 3726 मतलब पहले से प्लानिंग थी जब जीजाजी की जिस तरीके से अभी पार्ट प्लान भी इस तरीके से ओपन हुआ है तो संदेह तो जाना लाजमी है। यह थे नीरज शर्मा जो फिलहाल हमारे इस दुनिया में नहीं रही है।

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