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आमिर और सलमान के बीच क्या हुआ था? शूटिंग कैमरा बंद होते ही बदल जाते थे दोनों!

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यार अगर मैं तुमसे पूछूं कि बॉलीवुड की सबसे नेचुरल कॉमेडी केमिस्ट्री कौन सी है? ज्यादातर लोग कहेंगे अमर और प्रेम अंदाज अपना-अपना के सलमान और आमिर खान। अगर तुमने पुलिस को खबर की तो कर देना। कोई फिक्र की बात नहीं। जिसे आज बॉलीवुड की कर्ल्ट क्लासिक कॉमेडी फिल्म माना जाता है। लेकिन एक प्रॉब्लम है। इस फिल्म की शूटिंग के समय जब कैमरा बंद होता था, तब ये दोनों एक दूसरे से बात तक नहीं करते थे। इतना टेंशन था कि कई सींस अलग-अलग शूट हुए। फिर भी स्क्रीन पर ऐसा लगा जैसे दोनों बचपन के दोस्त हो। कैसे? यहीं से शुरू होती है असली कहानी जिसे आज मैं यानी कि सुहानी तुम्हें बताने वाली है। मस्ताने चले [संगीत] जिंदगी बनाने बंदे सयाने और नाम के दीवाने। यार अगर दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते थे तो दोनों के बीच इतनी शानदार केमिस्ट्री आई कहां से? सोचो। दो आदमी जो एक दूसरे से आंख मिलाना पसंद नहीं करते थे। जिनकी वजह से डायरेक्टर परेशान थे। क्रू परेशान था। हमेशा एटमॉस्फेयर टेंस रहता था।

लेकिन जैसे ही डायरेक्टर बोलता एक्शन अचानक पूरा सेट हंसने लगता। इतना कि कैमरामैन कैमरा संभाल नहीं पाता। यार ये एक्टिंग नहीं थी। यह कुछ और ही था। 1994 में अंदाज अपना-अपना के समय बाहर से दिखने पर बिल्कुल एक अलग सा माहौल नॉर्मल लगता था। दो बड़े स्टार, एक कॉमेडी फिल्म लेकिन कैमरा के पीछे की कहानी बिल्कुल अलग थी। वैसे आमिर और सलमान एक दूसरे को पहले से जानते थे। कहा जाता है कि दोनों कुछ समय तक एक ही स्कूल में पढ़े, एक ही क्लास में पढ़े। यानी यह दोनों स्ट्रेंजर्स नहीं थे। लेकिन जब अंदाज अपना-अपना शुरू हुई तब दोनों बिल्कुल अलग-अलग इंसान बन चुके थे। आमिर खान उस समय फिल्म कर रहे थे। यही फिल्म अंदाज अपना-अपना। आमिर का काम करने का तरीका आज भी एक जैसा ही है। सीन शुरू होते हैं, रिहर्सल करते हैं, डायरेक्टर के साथ डिस्कशन करते हैं, डायलॉग पर बात करते हैं, एक्सप्रेशन तक की प्लानिंग होती है। सेट पर जल्दी पहुंचना हर चीज परफेक्ट चाहिए थी। दूसरी तरफ सलमान खान थे। उस दौर में वो एक साथ इतनी फिल्मों की शूटिंग कर रहे थे कि दिन का कोई ठिकाना ही नहीं था।

एक सेट से दूसरे सेट पर भागते थे। दूसरे से तीसरे पर कई बार रात-रात भर शूटिंग करते थे। फिर दूसरी सुबह दूसरी फिल्म पर जाते थे। जब वह अंदाज अपना-अपना के सेट पर पहुंचते तब तक उनके पास रिहसल करने का समय नहीं बचता था। सलमान ने कहा भी था मैं रात 5:00 बजे से काम करके आया [संगीत] हूं। तीन शिफ्ट में जब तक मैं रेडी होता तब तक यह साहब रिहल कर चुके होते थे। मैंने लोगों से कह दिया कि जब यह फाइनल रेडी हो जाए तो मुझे बता देना शूट रेडी हो जाए, सीन रेडी हो जाए और सीन शूट करके अगले सेट के लिए निकल जाते थे। अब सोचो इन दोनों में क्लैश होना तो तय था ना। आमिर को लगता था कि सलमान काम को सीरियसली नहीं लेते। बाद में खुद माना कि उस समय उन्हें सलमान बिल्कुल पसंद नहीं थे। उन्हें लगता था कि आदमी बहुत कैजुअल है और उधर सलमान की कहानी बिल्कुल अलग थी। उन्होंने कहा कि जब तक मैं सेट पर पहुंचता तब तक आमिर रिहर्सल करके पूरे तैयार हो चुके होते थे। इसीलिए मैंने लोगों से कह दिया कि मुझे तब बुलाना जब शूट रेडी हो जाए। यानी दोनों एक दूसरे को गलत समझ रहे थे।

आमिर सलमान को केयरलेस लगते थे। सलमान को आमिर बहुत ज्यादा प्रोसेस वाले लगते थे। लेकिन सच तो यह था कि दोनों अपनी-अपनी रियलिटी में सही थे। बस दोनों की सिचुएशन एक दूसरे को समझ में नहीं आ रही थी। यहीं से कहानी दिलचस्प होती है। जरा सोचो दो एक्टर जिनकी वर्किंग स्टाइल बिल्कुल अपोजिट है। डायरेक्टर राजकुमार संतोषी बीच में हैं। कभी डायलॉग को लेकर बहस तो कभी शूटिंग के तरीके को लेकर डिसए्रीमेंट। रिपोर्ट्स तो यहां तक कहती हैं कि कुछ सींस अलग-अलग तरीके से शूट करने पड़े। अगर उस समय कोई आउटसाइडर सेट पर आता तो शायद कभी सोच नहीं पाता कि यह फिल्म आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे प्यारी कॉमेडी बन जाएगी। लेकिन फिर डायरेक्टर बोलते एक्शन और जैसे ही कैमरा चालू होता सब कुछ बदल जाता। दो लोग कैमरा के पीछे अनकंफर्टेबल थे और कैमरा के सामने अमर और प्रेम बन जाते थे। राजकुमार संतोषी ने बताया था कि कई बार सेट पर इतनी हंसी आती थी कि शूटिंग रोकनी पड़ती थी। कैमरामैन तक हंसते-हंसते कैमरा गिरा देते थे।

और यही वो जगह है जहां मुझे लगता है कि असली मैजिक हुआ है। कॉमेडी सिर्फ जोक से नहीं बनती। कॉमेडी रिएक्शन से बनती है, टाइमिंग से बनती है और टाइमिंग तब सबसे अच्छी बनती है जब दो लोग अलग-अलग तरीके से सोचते हो। आमिर हर रिएक्शन सोच कर देते थे। सलमान इंस्टिंक्ट रिएक्शन देते थे। एक कंट्रोल था, दूसरा स्पॉनटेनियस था। एक तरफ प्लानिंग थी, एक तरफ फ्लो था। [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह दोनों की एनर्जी एक फ्रेम में मिली तब पैदा हुए अमर और प्रेम। मुझे लगता है कि दोनों बिल्कुल एक जैसे एक्टर होते तो शायद यह कॉमेडी इतनी भी यादगार नहीं बनती। लेकिन जब 1984 में फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। इतनी [संगीत] मेहनत, सारी केमिस्ट्री कुछ भी काम नहीं आया और थिएटर में ऑडियंस नहीं खींच पाई। फिल्म फ्लॉप होती है 2.9 करोड़ बजट के साथ सिर्फ 86 लाख का कलेक्शन करती है। उस समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि आगे चलकर यह फिल्म कल्ट क्लासिक कहलाएगी। [संगीत] आज 30 साल बाद भी लोग इसके डायलॉग बोलते हैं। मैं तेजा हूं क्राइम मास्टर गो गलती से मिस्टेक हो गया। नई जनरेशन भी इस फिल्म को उतना ही एंजॉय करती है जितना 90ज वाले करते हैं। यानी फिल्म उस समय बॉक्स ऑफिस पर हार गई। लेकिन समय के साथ ऑडियंस का दिल जीत गई।

सबसे अच्छी बात यह है कि 30 साल बाद जब दोनों खुद इस कहानी को देखते हैं तो बिल्कुल एक अलग नजरिए से देखते हैं। आमिर ने माना कि उस समय वह बहुत जजमेंटल थे। उन्हें लगता था कि सलमान को सीरियसली काम करना नहीं आता। लेकिन बाद में समझ में आया कि हर एक्टर का अपना एक तरीका होता है। सलमान [संगीत] ने भी माना कि उस फिल्म के दौरान टेंशन थी लेकिन फ्रेंडशिप कभी खत्म नहीं हुई। मुझे लगता [संगीत] है कि यही मैच्योरिटी है। समय बीतने के बाद इंसान को समझ में आता है कि सामने वाला गलत नहीं था बस अलग था। और शायद यही अंदाज अपना-अपना की सबसे बड़ी कहानी है। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसके डायलॉग नहीं। उसकी सबसे बड़ी ताकत अमर और प्रेम भी नहीं। उसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि दो अलग इंसानों ने मिलकर एक ऐसी केमिस्ट्री बना दी जिसे बॉलीवुड आज तक नहीं दोहरा पाया है। कभी-कभी परफेक्ट केमिस्ट्री परफेक्ट दोस्ती से नहीं बनती। कभी-कभी परफेक्ट केमिस्ट्री पैदा होती है जहां दो लोग एक दूसरे से अलग होते हैं। और शायद अगर आमिर और सलमान उस समय अच्छे दोस्त होते अमर [संगीत] प्रेम इतने यादगार नहीं बनते। तो अब सवाल आपके लिए है। आपको क्या लगता है कि उनकी अलग पर्सनालिटी ही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत थी या फिर दो बेहतरीन एक्टर्स की एक्टिंग का कमाल था? अपनी राय कमेंट में जरूर बताना। वीडियो पसंद आई हो तो फिल्मी जाट गर्ल को लाइक करना, सब्सक्राइब करना और बेल आइकॉन दबाना मत भूलना। मैं तुम्हें अगली वीडियो में मिलूंगी।

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