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किसने कराई थी नाना पाटेकर की फिल्मों में जबरन एंट्री? कौन था नाना का गॉड फादर?

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नाना पाटेकर ने खुलासा किया था कि वह थिएटर में खुश थे और फिल्मों में नहीं आना चाहते थे। करीबी दोस्त स्मिता पाटिल ने उन्हें जबरदस्ती फिल्मी दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया।नाना पाटेकर को हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिना जाता है, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई। थिएटर से निकले नाना ने फिल्मों में ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर उनकी करीबी दोस्त और दिग्गज अभिनेत्री स्मिता पाटिल

ने उन्हें फिल्मों में आने के लिए मजबूर नहीं किया होता, तो शायद नाना का फिल्मी सफर कुछ और होता। नाना ने खुद एक पुराने इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया थाथिएटर छोड़ना ही नहीं चाहते थे नाना पाटेकरनाना पाटेकर का झुकाव शुरुआत से ही थिएटर की तरफ था। रंगमंच पर अभिनय करते हुए वह काफी संतुष्ट थे और फिल्मों में जाने की उनकी कोई खास इच्छा नहीं थी। उन्हें लगता था कि थिएटर ही वह जगह है,

जहां वह अपनी कला को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। यही वजह थी कि जब फिल्मों का प्रस्ताव उनके सामने आने लगा, तब भी वह इसे लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। नाना ने राजत शर्मा के शो ‘आप की अदालत’ में अपने फिल्मी सफर से जुड़ा यह दिलचस्प किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया था कि फिल्मों में आने का श्रेय काफी हद तक स्मिता पाटिल को जाता है। स्मिता उन्हें लगातार फिल्मों में काम करने के लिए कहती थीं, जबकि नाना थिएटर की दुनिया में ही खुश थे।स्मिता पाटिल ने जबरदस्ती फिल्मों में भेजानाना ने बताया था

कि स्मिता पाटिल ने उन्हें फिल्मों में आने के लिए लगभग मजबूर कर दिया था। उनके मुताबिक, वह थिएटर करते थे और उसी दुनिया में खुश थे, लेकिन स्मिता चाहती थीं कि नाना फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा दिखाएं। उन्होंने नाना का नाम निर्माता रवि चोपड़ा तक पहुंचाया और फिल्म ‘आज की आवाज’ में काम मिलने का रास्ता तैयार हुआ। नाना के मुताबिक स्मिता पाटिल ने उनकी प्रतिभा को उनसे पहले पहचान लिया था। वह समझती थीं कि नाना की अभिनय क्षमता सिर्फ थिएटर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने नाना को लगातार फिल्मों की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नाना ने खुद कहा था कि अगर स्मिता उन्हें फिल्मों में आने के लिए नहीं कहतीं तो शायद वह थिएटर में ही अपना करियर आगे बढ़ाते रहते

स्मिता की सलाह बनी नाना के करियर का टर्निंग प्वाइंट‘आज की आवाज’ नाना पाटेकर के शुरुआती फिल्मी सफर की अहम कड़ी बनी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा में अपनी अलग जगह बना ली। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। नाना की खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा। गंभीर भूमिकाओं से लेकर खलनायक और कॉमेडी तक, उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों को अपनी शैली में निभाया। लेकिन उनके इस शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत के पीछे स्मिता पाटिल की भूमिका को वह खुद बेहद अहम मानते थे।

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