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प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौ;त को लेकर खंगाले गए केलिकुंज से लेकर अपार्टमेंट, मोबाइल में छुपा बड़ा राज ?

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क्या वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत सिर्फ एक खुदकुशी थी या फिर इसके पीछे कोई बहुत गहरा राज छिपा है? आखिर जान देने से ठीक पहले उन्होंने खुद पर इतना खौफनाक सितम क्यों ढहाया और 60 से ज्यादा संतों से पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ 11 दिन बाद भी खाली क्यों हैं?

यह सब सवाल इसीलिए हैं क्योंकि संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की दर्दनाक मौत को 11 दिन बीत चुके हैं। पुलिस की चार टीमें दिनरा खाक छान रही है। कैलीिकुंज आश्रम से लेकर उस अपार्टमेंट तक का कोना-कोना खंगाला जा चुका है। 60 से ज्यादा साधकों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। लेकिन इस मौत का रहस्य सुलझने की जगह और ज्यादा उलझता नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही खड़ा है।

उस सुबह बंद कमरे के अंदर आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसने एक साधक को इस रूह कपा देने वाले कदम तक धकेल दिया। घटना के तुरंत बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया था। जबलपुर से आए दीपक के परिजनों जिनमें उनकी मां, भाई, बहन और जीजा शामिल हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर खुदकुशी मानने से इंकार कर दिया था। परिवार का कहना था कि दीपक ऐसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता। दाल में कुछ काला है और इस मौत की तह तक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

परिवार के इन गंभीर आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया था। मथुरा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन चार अलग-अलग टीमों का गठन कर दिया। इन 11 दिनों की सघन जांच में पुलिस ने आश्रम से जुड़े 60 से ज्यादा साधकों और सेवाधारों से आमने-सामने लंबी पूछताछ की है। अपार्टमेंट के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरे की एक-एक सेकंड की फुटेज खंगाली गई है ताकि यह पता चल सके कि घटना वाले दिन या फिर उससे पहले कौन-कौन लोग दीपक से यानी कि रसिक दुलारी से मिलने आए थे और उनकी गतिविधियां कैसी थी। इसके अलावा पुलिस ने मृतक के खून के नमूने और उनका फोन मोबाइल फोन ज्त कर फॉरेंसिक लैब भेज दिया है।

वृंदावन के सीओ संदीप सिंह का साफ कहना है कि अब सारा दारोमदार मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पर टिका हुआ है। उम्मीद है कि कॉल डिटेल डिलीट किए गए चैट्स या इंटरनेट सर्च हिस्ट्री से उस आखिरी सुबह की उलझी हुई पहेली सुलझ सकेगी। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के जबलपुर की नर्मदा बस्ती फरहद धुली के रहने वाले दीपक करीब 2 साल पहले दुनियादारी छोड़कर वृंदावन पहुंचे थे।

यहां आकर उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से बकायदा दीक्षा ली और अपना नाम बदलकर रख लिया रसिक दुलारी शरण। पहले दो सालों से वह आश्रम की दिनचर्या और भक्ति मार्ग में पूरी तरह लीन [संगीत] दिखाई दे रहे थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन 25 सितंबर की सुबह करीब 10:30 बजे एक ऐसी खबर सामने आई जिसने सबको सन्न कर दिया।

वृंदावन के एक अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से नीचे गिरकर रसिक दुलारी शरण की मौत हो गई। शुरुआती नजर में यह छत से कूदकर की गई आत्महत्या का मामला लग रहा था। लेकिन जब पुलिस उनके कमरे के अंदर दाखिल हुई तो वहां का मंजर देखकर अनुभवी अफसरों के भी होश उड़ गए। छत से छलांग लगाने से पहले उन्होंने ग्राइंडर मशीन से अपना खुद का प्राइवेट पार्ट काटा था। कमरे में बिखरा खून और यह भयानक कदम अपने आप में कई ज्यादा सवाल खड़े कर रहे थे। कोई इंसान खुद के साथ इतना क्रूर कैसे हो सकता है? यह सवाल था। क्या यह किसी गहरे मानसिक दबाव का रिजल्ट था? यह भी सवाल है।

किसी अंधविश्वास से जुड़ा कदम था या फिर इसके पीछे कोई और ही कहानी थी। यह मामला सिर्फ एक युवक की रहस्यमई मौत का मामला नहीं। वृंदावन जैसे पावन धाम में संत प्रेमानंद महाराज के करोड़ों अनुयाई हैं जो उनके विचारों आश्रम की सादगी का सम्मान करते हैं। ऐसे में उनके एक दीक्षित शिष्य का इस खौफनाक तरीके से जान देना कई सारे गंभीर सवाल खड़े करता है। चिंताओं [संगीत] को जन्म देता है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक लोग हैरान है कि जो शख्स आध्यात्म की शरण में शांति की तलाश में आया था, वह भीतर ही भीतर किस मानसिक गंध या फिर तनाव से जूझ रहा था। क्या आश्रमों में रहने वाले नए साधकों की मानसिक स्थिति को समझने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए या फिर यह कोई ऐसा षड्यंत्र है जिसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है। यह सवाल उठ रहे हैं।

जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस का आधिकारिक बयान सामने नहीं आता है तब तक अफवाहों और सवालों का बाजार इसी तरीके से गर्म रहने वाला है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और हर किसी की निगाहें अब मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है कि क्या वो उस बंद कमरे का सच सामने ला पाएंगी जो मोबाइल की रिपोर्ट है। इस मामले के सामने आने के बाद उन परिवारों में भी चिंता की लहर दौड़ी जिन्होंने दुनियादारी छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुना था। प्रदर्शन भी देखने को मिले। परिवार आश्रम के बाहर डेरा डालते हुए नजर आए। कई बच्चों के गुमशुदा होने की खबरें भी सामने आई। फिर पुलिस ने उन्हें बरामद किया। फिर प्रदर्शन खत्म हुआ। इसी के बाद कई और माता-पिता भी आश्रम में पहुंचे और इसके बाद तनाव भी देखने को मिला। इसी के साथ-साथ कई सारे नियमों में भी बदलाव किया गया है।

कई सारे अपडेट इस खबर को लेकर सामने आए हैं। कई सारे सवाल भी उठ रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि क्या कुछ इस पूरे मामले में आखिर में निकल कर आता है।

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