इस एक तस्वीर ने पूरे यूरोप में बवाल मचा दिया है। इस तस्वीर की एक कड़ी भारत से भी जुड़ती है। कुछ घंटों पहले खबर आई थी कि स्वीडन यूरोप का वो पहला देश बन गया है जहां पर मुस्लिम प्रवासियों ने मौजूदा राइट विंग सरकार को गिराने के लिए वामपंथी पार्टियों को जमकर वोट दिया और उन्हें जिता भी दिया। इसी कड़ी में ब्रिटेन से आई इस तस्वीर ने हंगामा खड़ा कर दिया है। स्वीडन में तो सिर्फ सरकार ही पलटी थी मगर ब्रिटेन में तो इतिहास का सबसे बड़ा कांड हो गया।
इस होश उड़ा देने वाली कहानी को समझने के लिए आपको इस तस्वीर के तीन मुख्य किरदारों के बारे में पता होना चाहिए। पहली है चर्च ऑफ इंग्लैंड की सबसे बड़ी धर्मुगुरु डेम सारा मुल्लाली। दूसरे हैं पाकिस्तानी मुस्लिम धर्मगुरु हाफिज मोहम्मद ताहिर और बुर्के में खड़ी यह महिला पाकिस्तानी मुस्लिम धर्मगुरु की पत्नी है। पूरे ब्रिटेन में हंगामा खड़ा करने वाला काम चर्च ऑफ इंग्लैंड की धर्मगुरु डेमसारा मुल्लाली ने किया है। सोचिए चर्च के इतिहास में 105 पुरुषों के बाद इस पद पर बैठने वाली यह पहली महिला है और इन्होंने सत्ता में आते ही बड़ा कांड कर दिया।
अब देखिए हुआ क्या है। दरअसल सारा मुल्लाली ने अमेरिका में हुए 911 हमले की बरसी पर पाकिस्तानी मुस्लिम धर्मगुरु हाफिज मोहम्मद ताहिर को समाज में सद्भावना बढ़ाने का अवार्ड दे दिया। मगर होश तो तब उड़े जब यह पता चला कि हाफिज मोहम्मद ताहिर ने बयान दिया था कि 91 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन एक मुस्लिम योद्धा है। ओसामा बिन लादेन तो रूसियों, अमेरिकियों और अंग्रेजों के खिलाफ इस्लाम के लिए सबसे बड़ी जंग लड़ रहा था। लादेन को तो सबसे बड़ा सम्मान मिलना चाहिए। सोचिए ऐसा बयान देने वाले कट्टरपंथी शख्स को चर्च ऑफ इंग्लैंड की सबसे बड़ी धर्मुरु ने अवार्ड दे दिया। एक ब्रिटिश सांसद ने बताया कि अवार्ड लेने वाला हाफिज मोहम्मद ताहिर यह तक बोल चुका है
कि ईरान पर यहूदियों और ईसाइयों ने हमला इसलिए किया है ताकि पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों को खत्म किया जा सके। हाफिज मोहम्मद तो यहां तक बोल चुका है कि अगर किसी अफगानिस्तानी ने नाटो सैनिकों को मारने के लिए खुद को उड़ाया है तो उसने बिल्कुल जायज काम किया है। अब इसी व्यक्ति को ब्रिटेन का सबसे बड़ा चर्च सद्भावना का अवार्ड दे रहा है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद इस पाकिस्तानी मौलाना से अवार्ड छीन भी लिया गया है। बहरहाल बवाल यहीं खत्म नहीं हुआ। अगला बवाल इस पाकिस्तानी की पत्नी को लेकर शुरू हो गया। क्योंकि सारा मुल्लाली यह बोल चुकी है कि मैं तो महिलाओं के प्रति नफरत के खिलाफ आवाज उठाऊंगी।
उनकी आजादी की बातें करूंगी। पितृसत्ता यानी पेट्रिय्की को तोड़ने का काम करूंगी। लेकिन सारा मुल्लाली बुर्के में खड़ी इस महिला को देखकर खामोश रही। उन्हें यहां पर महिला अधिकार नहीं दिखे। वैसे यहां पर अगर कोई हिंदू महिला सिंदूर और मंगलसूत्र के साथ होती तो सारा मुल्लाली उसे टोक जरूर देती। आपने ऐसा ड्रामा भारत में भी देखा होगा। स्मैश द पेट्रियाकी के नारे लगाए जा रहे हैं। हिंदू महिलाओं को अपने ही परिवार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है। लेकिन जब बुर्के की बात आती है तो उसे पर्सनल चॉइस बोल दिया जाता है। बहरहाल इस वक्त पूरे ब्रिटेन में बवाल मच गया है। ब्रिटेन के ईसाई बोल रहे हैं कि हमारे देश का इस्लामीकरण हो चुका है। हमारे सबसे बड़े चर्च में पाकिस्तान के कट्टरपंथी मौलवी को अवार्ड दिया जा रहा है।