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विराट कोहली को उन्होंने… प्रेमानंद महाराज आश्रम पर फलाहारी बाबा ने लगाया चौंकाने वाला आरोप, मचा चकचार।

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देखिए प्रेमानंद महाराज जी आश्रम में स्थिति इस समय बहुत ही विकराल हो चुकी है। वहां पर साधु संतों में दो गुट बन चुके हैं। एक तो असली संत है और एक तरफ नकली संत थे। असली संत थे। वो तो प्रेमानंद जी महाराज जी के साथ में बेलवन आश्रम चले गए। और जो नकली संत है वो इस केलीकुंज में रह गए।

क्योंकि प्रेमानंद महाराज जी बड़े दुखी हो गए थे। आहत हो गए थे। जब उनको पता चला कि हमारे संत साधु भेष में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहे हैं। जमीनों को बेच रहे हैं। यमुना खादर को उन्होंने बेच खाया तो वो इन सब चीजों से बहुत ही आहत हुए दुखी हुए।

हमारी भी उनसे कई बार इस बार में इस विषय पर वार्ता हुई तो महाराज जी ने यही कहा था कि मैं खुद दुखी हूं ऐसे लोगों से जो साधु परंपरा को नहीं निभा रहे। जो साधु परंपरा में रहकर व्यापार कर रहे हैं। गोरख धंधे कर रहे हैं। तो हम तो यहां इस आश्रम को छोड़कर जाएंगे। तो लगभग चार पांच महीना पहले वो इस आश्रम को छोड़कर चले गए। देखिए पहले जब प्रेमानंद महाराज जी एक साधारण संत थे तो उस समय ये राजस्थान के कुछ प्रॉपर्टी डीलर थे। एक एक बड़ा ग्रुप था तो महाराज जी से मिला था।

उन्होंने कहा था महाराज जी हम आपको बहुत ज्यादा हाईलाइट करना चाहते हैं क्योंकि आप विद्वान संत हैं। आप अच्छे संत हैं और साधना में लगे रहते हैं। तो महाराज जी तो सीधे सरल है। उन्होंने कह दिया कि आप जैसा उचित समझ वैसा कर लो। तो यह ₹ करोड़ में विराट कोहली को लाए थे और इन्होंने जब विराट कोहली आया था तो महाराज जी का जो फॉलोअर्स थे उनकी संख्या कई गुना बढ़ गई थी और महाराज जी पूरे विश्व में और अधिक जाने लगे तो महाराज जी तो पहले से ही अच्छे थे आज भी अच्छे हैं लेकिन उन्होंने विराट कोहली का जो खर्चा झेला था तो वही लोग प्रॉब्ल डीलिंग का काम करते हैं उन लोगों ने ही जमुना खांदर को बेचा उन लोगों ने महाराज जी के जो 14 15 आसम थे उन सभी पर कब्जा किया क्योंकि वो नाम भी उन्हीं लोगों के थे इसलिए महाराज जी को अब लगा कि अब बहुत ज्यादा यह पाप कर चुके हैं।

तो महाराज जी ने सबको बुलाकर एक बार सख्त निर्देश दिया था। कहा था कि मेरे रहते हुए मेरे संत भेष में आप इस प्रकार का कार्य नहीं करेंगे। लेकिन यह लोग मानते नहीं चोरी छुपे कार्य करते रहते हैं तो महाराज जी इनसे दुखी होकर चले गए थे और महाराज जी ने वहां पर अपने जो भी साधक थे जो भी अच्छे-अच्छे संत थे सबको वही बुला लिया और वहीं बैठकर साधना करते हैं। देखिए हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते क्योंकि वहां 10% संत तो भू माफिया हैं और 90% संत अच्छे हैं तो जो 90% पर ये 10% भारी हैं। ये पाप करते हैं वो पुण्य करते हैं।

तो महाराज जी के नाम का ये बुनाते हुए उनको बदनामी दिला रहे हैं। महाराज जी कभी नहीं चाहते कि वो मेरा शिष्य प्रॉपर डीलिंग करें या बच्चों को गायब करे या बच्चे चोरी करें या इस संत भेष में मोह माया में फंसा क्योंकि महाराज जी सभी को यही शिक्षा देते हैं कि यदि बीमार है तो डॉक्टर के पास जाओ और यदि आशीर्वाद लेना है तो राधा नाम संकीर्तन करो भगवान का नाम लो हमारे आशीर्वाद से कुछ नहीं होगा ऐसे दिव्य संत सरल मिलना कठिन है वह तो हमेशा सभी का कल्याण ही सोचते है

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