यह तस्वीरें वृंदावन के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम के बाहर की हैं। जहां अपनी बेटी की तलाश में नोएडा से एक परिवार पहुंचा। परिवार के मुताबिक 35 साल की युवती 15 अगस्त को घर से वृंदावन जाने की बात कहकर निकली थी। इसके बाद कई हफ्ते बीत गए। लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी।
परिवार का कहना है कि युवती पहले भी बिना बताए घर से गई थी। लेकिन बाद में वापस लौट आई थी। इस बार काफी समय बीतने के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला। क्या नाम है आपका? मेरा नाम उमेश सिंह। कहां से आए हैं? नोएडा।
क्या बात हुई आप? क्या मामला है? वो मेरी एक लड़की है विभा कुमार। वो प्रेमानंद प्रेमानंद ऐसे उनका फोटो रखना बैग में छिपा करके और 15 अगस्त को बिना बताए वो घर से निकल गए। मैंने सोचा कि प्रेमानंद के आश्रम में इंक्वायरी किया जाए। इसीलिए मैं आया और मेरे मित्र मथुरा में रहते हैं तो इनको बुला लिया है और यहां पर कहता है लोग कि यहां तो भाई बिना परमिशन के किसी को दीक्षा दी ही नहीं जाती है। बिना पेरेंट्स के परमिशन का किसी भी लड़की लड़का को अगर दीक्षा लेना है तो पेरेंट्स का परमिशन चाहिए। तो ऐसा लगता है कि यहां नहीं है।
बाकी तो आप लोग से गुजारिश यही है कि आप मीडिया वाले हैं। आप प्रेमानंद जी के यहां आए हैं। प्रेम क्या आपको लगता है प्रेमानंद जी के यहां आए हैं आपकी बिटिया? देखिए मैं मेरे को लगता है तब ना मैं आया। यहां वो बराबर नाम ले रहे थे कि प्रेमानंद के आश्रम में मैं रहता हूं। ऐसा ऐसा आपने देखा आपको कहीं दिखी आपकी? नहीं नहीं नहीं। आपने पुलिस से शिकायत की? पुलिस का तो शिकायत एक बार नोएडा में मैंने किया था। जी तो उस समय गुमशुदगी का रिपोर्ट होने के बाद वह चली आई थी। तो मैंने कह दिया पुलिस को कि आ गई है। ये ये हो गया छ महीना पहले की बात। तो अब क्या चाहते हैं आप? अब चाहता हूं कि आप लोग के माध्यम से कहीं ऐसा कुछ हो कुछ प्रोसेस हो।
ऐसा आप लोग के माध्यम से तो रिकवरी हो जाए। मैं यही चाहता हूं और क्या पिता का कहना है कि वह अपनी बेटी को ढूंढने आश्रम आई लेकिन वह वहां नहीं मिली। पिता कहते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को आश्रम के अंदर नहीं देखा। हालांकि वह प्रेमानंद महाराज की भक्त थी। इसलिए परिवार को आशंका है कि वह वृंदावन या आश्रम के आसपास हो सकती है। फिलहाल इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि युवती आश्रम में है या आश्रम से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध है। इस रिपोर्ट को लिखते वक्त तक पुलिस में कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं करवाई गई है। वहीं ऐसे ही आरोप सबसे पहले हाथरस के अनुज के परिजनों ने लगाई थी। आरोपों के मुताबिक 16 साल का अनुज करीब 3 महीने से लापता था। परिवार ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई बाद में बरसाना पुलिस ने सर्च ऑपरेशन के दौरान उसे एक आश्रम से बरामद किया और हाथरस पुलिस के सुपुर्द किया।
बरामदगी के वक्त अनुज ने चोला पहन रखा था। गले में माला और माथे पर चंदन लगा हुआ था। इन घटनाओं के बीच कुछ और परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में वृंदावन पहुंच रहे हैं। कुछ वैसा करता था। प्रेमानंद बाबा बाबा के वीडियो देखता था। उनके जैसा खानपान सब रहन-सहन उनके जैसा था। ऐसा ऐसा यहां आने के बाद वो दिखाते नहीं है। पहले बोले है बाद में बोले नहीं है तो प्रेमा तीन तास वो गंगा किनारे बैठाया क्यों बैठाया हुआ तब क्यों बैठा है वो उन्होंने तो आपको बेटा मिला था.
प्रेमानंद जी के यहां कभी नहीं मिला जब से नहीं मिला खाली एक दिन उन्होंने बोला हाय करके दिखाया सीसीटीवी में हाय बोल के क्या क्या नाम है आपका मेरा नाम उज्ज्वला है उज्ज्वला परमेश्वर बेटे का क्या नाम था ओम परमेश्वर तक कब आया था बेटा यहां पे? वो 217 को वहां से निकला तो 22 को यहां आ गया और मैं 22 को वहां निकली। सातव महीने में 23 को यहां आ गई। 23 को मैं यहां अंदर जाने नहीं दे रहे थे। गुरु पूर्णिमा का उत्सव चल रहा था। तो पुलिस को लेके अंदर गई। उन्होंने हां करे बोले है मेरे पाव पड़े सब सब महाराज लोग मेरे मेरे पांव छुए कि हां माता जी आप अच्छी है आपका बेटा कितना अच्छा है वो भगवान को भगवान से प्रार्थना करो आपका बेटा अच्छा रहेगा ऐसे बातें करे उन्होंने ऐसे बातें करे फिर बोला है आपका बेटा है बोले और गंगा किनारे लेके गए मुझे तीन ताज बिठाया मुझे तीन ताज गंगा किनारे पे पर मिलवाया नहीं.
बेटे से कभी मिलवाया नहीं मिलवाया आपको वो बिल्कुल पक्का वो है कि बेटा अंदर ही है मेरा बेटा अंदर ही है पक्का तो ये क्यों नहीं मिलने दे रहे आपसे क्या मालूम क्यों नहीं मिलने दे रहे वो तो किसी को भी मिलने नहीं देते अंदर भी अरे ऐसा कौन सा ऐसा कैसा आश्रम है कि मां को भी अंदर नहीं जाने देते बेटे को मिलने देते ऐसा कौन सा भगवान है.
मां के मां से बढ़कर कोई भगवान होता है क्या मां से बढ़कर कोई भगवान नहीं होता मेरा बेटा मुझे चाहिए अभी के अभी नहीं तो मैं यहां उपोषण को बैठूंगी। अभी अभी दो चार दिन में यह हादसा हो गया। कैसे होगा यह हादसा? जो तस्वीरें देखने को मिल रही है कि परिजन जहां एक तरफ आक्रोशित नजर आते हैं तो वहीं उनका सामना होता है प्रेमानंद महाराज के अनुयायियों से। महाराज के समर्थक उनसे भिड़ जाते हैं और इन आरोपों को साजिश बताते हैं। कुल मिलाकर वृंदावन में यह मामला गरमाया हुआ है। इस पूरे बवाल की शुरुआत हुई प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की संदिग्ध मौत के बाद जो अभी भी एक बहुत बड़ी मिस्ट्री बनी ] हुई है। जिस पर अब आश्रम का भी पक्ष आ गया है। आश्रम ने कहा कि इस पूरे मामले से सभी लोग काफी स्तब्ध हैं। दुखी हैं। यह अफसोसनाक है। आश्रम की तरफ से कहा जाता है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। उसके लिए आश्रम का एक-एक शख्स पुलिसके साथ है और जब जांच पूरी होगी तो सब कुछ सामने आ जाएगा। आश्रम इसे अपने खिलाफ होने वाली एक बड़ी साजिश करार देता है।