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अमिताभ ने सनी को दिया बड़ा धोखा? फिर कभी साथ काम नहीं किया!

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साल 1994 एक फिल्म आती है इंसानियत। अगर यह गोलियां उन पर जल गई तो यहां भी जलन वाला बाप बन जाएगा। टूटते हुए देश की किस्मत तेरे एक कदम आगे बढ़ने से सवर जाएगी हरी। इसमें पहली बार अमिताभ बच्चन और सनी देओल साथ दिखाई देते हैं। और अजीब बात यह है कि पहली बार ही आखिरी बार है। सिर्फ एक फिल्म उसके बाद साल गुजरते गए। अमिताभ ने न जाने कितने एक्टर्स के साथ काम किया। सनी ने भी दर्जनों स्टार्स के साथ फिल्म्स की। लेकिन दोनों फिर कभी एक फिल्म में साथ नहीं आए। अब अगर बात सिर्फ दो एक्टर्स की होती तो शायद इतना अजीब नहीं लगता। लेकिन सनी के पिता धर्मेंद्र और अमिताभ का रिश्ता बिल्कुल उल्टा था। शोले चुपके-चुपके रामबलराम जैसी फिल्में साथ में की और साथ में दोस्ती भी निभाई। और एक समय धर्मेंद्र ने खुद अमिताभ का नाम शोले के लिए आगे बढ़ाने में मदद की थी। तो फिर पिता और अमिताभ इतने करीब लेकिन बेटा और अमिताभ सिर्फ एक फिल्म बात यहां से इंटरेस्टिंग होती है।

और फिर 2026 में एक विजुअल सामने आता है जो इस पूरी कहानी को और उलझा देता है। सनी देओल कौन बनेगा करोड़पति पर बैठे हैं। सामने अमिताभ बच्चन हैं। दोनों हंस रहे हैं। पुराने किस्से निकल रहे हैं। और अमिताभ को सनी की जिंदगी का वो फेमस इंसिडेंट तक याद है। जब डर की शूटिंग के दौरान गुस्से में सनी ने जींस की पॉकेट के अंदर मुट्ठी इतनी जोर से भी कि कपड़ा फट गया। अब यहां सवाल सीधा है। अगर दोनों के बीच सच में 30 साल की दुश्मनी थी तो यहां दुश्मनी दिख क्यों नहीं रही? और अगर दुश्मनी थी ही नहीं तो इंसानियत के बाद यह दोनों फिर कभी साथ क्यों नहीं आए? और यार अमिताभ और सनी की यह कहानी जितनी सीधी सुनाई जाती है उतनी है नहीं। बॉलीवुड में सालों से एक वर्जन घूमता रहा है कि सब कुछ इंसानियत के दौरान बिगड़ा। सनी अपने रोल से खुश नहीं थे। अमिताभ का हिस्सा बढ़ रहा था। सनी का कम हो रहा था। प्रोफेशनल इनसिक्योरिटी आई और उसके बाद दोनों अलग हो गए। सुनने में परफेक्ट बॉलीवुड फ्यूड लगता है। बस प्रॉब्लम यह है कि जब आप इस कहानी को थोड़ा खोलते हो तो कई चीजें फिट नहीं बैठती। दुश्मनी की कहानी की पहली प्रॉब्लम है इंसानियत की टाइमलाइन। हम इसे 1994 की फिल्म कहते हैं

क्योंकि रिलीज 1994 में हुई। लेकिन फिल्म का प्रोडक्शन उससे कई साल पहले शुरू हो चुका था और प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा। यानी जब आज कोई यह कहता है कि 1994 में सनी बहुत ऊपर जा रहे थे। अमिताभ करियर के मुश्किल दौर में थे और इसलिए इनसिक्योरिटी हुई। तो एक बेसिक सवाल उठता है जिस शूटिंग इंसिडेंट की बात की जा [संगीत] रही है वो हुआ कब था? रिलीज ईयर और शूटिंग ईयर एक चीज नहीं होते और यही गॉसिप की यह परफेक्ट कहानी थोड़ी टूटने लगती है। हो सकता है कि इंसानियत के सेट पर कुछ हुआ ही नहीं। प्रोफेशनल डिफरेंसेस हो सकते हैं। रोल को लेकर डिसए्रीमेंट हो सकता है। दोनों स्टार्स कंफर्टेबल ना रहे हो यह सब पॉसिबल है। लेकिन सनी की तरफ से ऐसा कोई फेमस ऑन रिकॉर्ड स्टेटमेंट नहीं मिलता जिसमें वो साफ कहें कि अमिताभ ने उनका रोल कटवाया और इसलिए उन्होंने उनके साथ काम बंद कर दिया। और जब किसी बड़े झगड़े की पूरी कहानी एक ऐसे स्टेटमेंट पर टिक रही हो जो कभी मिला ही नहीं। तो थोड़ा रुक कर पूछना बनता है कि हम फैक्ट सुन रहे हैं या बॉलीवुड की सालों पुरानी कहानी। कहानी को और उलझाने वाला हिस्सा है धर्मेंद्र की एंट्री। सबको पता है कि 1970 के दशक में धर्मेंद्र पहले से बड़े स्टार थे और अमिताभ ऊपर आ रहे थे।

शोले की कास्टिंग के दौरान [संगीत] अमिताभ ने धर्मेंद्र से अपने लिए बात करने को कहा था और धर्मेंद्र ने रमेश सिप्पी के [संगीत] सामने उनका नाम पुश किया। अब मैं इसे लेकर यह कंक्लूजन नहीं निकालूंगी कि धर्मेंद्र सिक्योर थे और अमिताभ इनसिक्योर। क्योंकि फिर हम दो लोगों के दिमाग के अंदर घुसकर कहानी लिख रहे होंगे। लेकिन विडंबना देखो। पिता ने एक यंग अमिताभ को आगे बढ़ाने में मदद की। वही अमिताभ बाद में सनी के साथ सिर्फ एक फिल्म करते हैं। और फिर दोनों की राहें अलग हो जाती हैं। थोड़ा स्ट्रेंज [संगीत] तो है। फिर दुश्मनी की कहानी में आती है डर। क्योंकि सनी देओल जब किसी चीज से सच में नाराज हुए तो उसका हमारे पास मच क्लियर रिकॉर्ड है। डर में सनी को अपने कैरेक्टर के ट्रीटमेंट से प्रॉब्लम थी। खासकर क्लाइमेक्स को लेकर। उनका पॉइंट था कि एक ट्रेंड कमांडो को विलेन इस तरह कैसे डोमिनेट कर सकता है। सनी ने बाद में इस बारे में खुलकर बात की। यश चोपड़ा के साथ अपनी नाराजगी बताई। और यही वो फेस था जहां जींस पटने वाला इंसिडेंट फेमस हुआ। यानी यहां हमें पता है कि सनी नाराज थे। उन्होंने बाद में उस नाराजगी को शब्द दिए और कहानी सिर्फ गॉसिप पर नहीं टिकी। अब इसी वजह से इंसानियत वाला सवाल और बड़ा हो जाता है। अगर अमिताभ के साथ मामला भी इतना सीरियस था कि 30 साल तक साथ काम नहीं किया गया। तो सनी ने उसके बारे में कभी वैसा साफ स्टेटमेंट क्यों नहीं दिया? डर के बारे में वह बोलते हैं, यश चोपड़ा के बारे में बोलते हैं।

रोल ट्रीटमेंट के बारे में बोलते हैं। लेकिन अमिताभ और इंसानियत वाली कथित दुश्मनी पर वही क्लेरिटी नहीं दिखती। यहीं से शक शुरू होता है कि क्या 30 साल की दूरी को हमने 30 साल की दुश्मनी मान लिया और फिर आता है सबसे मजेदार रिवर्सल। 2026 में सनी केबीसी पर बैठे हैं और अमिताभ खुद सनी को वही डर वाला किस्सा याद दिला रहे हैं। कैसे सनी सेट पर कुछ नहीं बोले। हाथ पॉकेट में था। गुस्सा बढ़ता गया और जींस फट गई। सनी सामने बैठे हंस रहे हैं। अमिताभ भी मजाक के साथ कहानी सुना रहे हैं। अब इसका मतलब यह नहीं कि दोनों सीक्रेटली बेस्ट फ्रेंड्स थे। और यह भी नहीं कि कभी कोई टेंशन नहीं हुआ। लेकिन इतना जरूर है कि जिस आदमी को बॉलीवुड गॉसिप ने सनी की 30 साल की दुश्मनी का दूसरा हिस्सा बना दिया, वही आदमी सनी की पर्सनालिटी का इतना पुराना किस्सा वार्म तरीके से सुना रहा है। तो फिर असली सवाल शायद यह नहीं है कि किसने किसका रोल कटवाया? असली सवाल यह है कि बॉलीवुड में दो एक्टर्स का 30 साल साथ काम ना करना। क्या हमेशा अपने आप दुश्मनी साबित करता है? स्क्रिप्ट चाहिए, डेट्स चाहिए, डायरेक्टर्स चाहिए, रोल्स दोनों को सूट करने चाहिए, कमर्शियल इक्वेशन बैठनी चाहिए। बड़े एक्टर्स कई बार दशकों तक साथ नहीं आते और उसके पीछे कोई ड्रामेटिक पर्सनल रीजन नहीं होता। लेकिन अमिताभ और सनी के केस में एक चीज जरूर दिक्कत वाली बात है। सिर्फ एक फिल्म। उसके बाद कुछ नहीं। फिर परिवारों की क्लोजनेस, फिर इंसानियत की गॉसिप। फिर सनी का डॉक्यूमेंटेड डर वाला गुस्सा। और आखिर में केबीसी पर अच्छी हल्की-फुल्की बातें। सारे पीसेस हैं लेकिन पजल पूरा नहीं बनता। और यार बॉलीवुड गॉसिप की यही सबसे मजेदार चीज है। जहां आंसर नहीं मिलता वहां कहानी बन जाती है। दो लोग साथ नहीं दिखे तो कहा गया नाराज हैं। दूसरी फिल्म नहीं आई तो कहा गया ईगो क्लैश हुआ। कोई ऑन रिकॉर्ड एक्सप्लेनेशन नहीं मिला। तो बीच की खाली जगह रिपोर्ट्स, रूमर्स और पुराने सेट स्टोरीज ने भर दी। धीरे-धीरे दोबारा साथ काम नहीं किया। बदलकर 30 साल की दुश्मनी बन गया। लेकिन मैं दूसरी एक्सट्रीम पर भी नहीं जाऊंगी।

यह कहना भी आसान होगा कि कुछ हुआ ही नहीं। हम यह भी नहीं जानते। हो सकता है इंसानियत के दौरान प्रोफेशनल इशू रहा हो। हो सकता है दोनों ने डिसाइड किया हो कि साथ काम करना जरूरी नहीं। हो सकता है कोई ऐसी बात हुई हो जो पब्लिक कभी नहीं हुई लेकिन आज हमारे सामने जो दिखाई देता है उसमें एक इंटरेस्टिंग कंट्राडिक्शन जरूर है सनी की दूसरी नाराजगियों के बारे में हमें उनके वर्ड्स मिलते हैं अमिताभ वाली कथित नाराजगी पर नहीं धर्मेंद्र और अमिताभ का रिश्ता वार्म रहा और तीन दशक बाद अमिताभ और सनी कैमरा के सामने भी अनकंफर्टेबल नहीं दिखे। इसलिए मेरे लिए इस स्टोरी का आंसर अमिताभ इनसिक्योर थे और सनी ने रिश्ता खत्म कर दिया। नहीं है। वो बहुत आसान आंसर है। ज्यादा इंटरेस्टिंग [संगीत] आंसर यह है कि शायद बॉलीवुड ने एक रियल डिस्टेंस को लेकर एक बहुत बड़ी फ्यूड स्टोरी बना दी। और शायद उस रियल डिस्टेंस के पीछे कोई छोटा प्रोफेशनल इशू था। शायद टाइमिंग थी, शायद कास्टिंग चॉइसेस थी। या शायद कुछ ऐसा था जो हम आज भी नहीं जानते। और शायद इसीलिए इंसानियत की कहानी आज भी इंटरेस्टिंग [संगीत] है क्योंकि हमारे पास शुरुआत है। अमिताभ और सनी पहली बार साथ हमारे पास एंडिंग भी है। फिर 32 साल तक दूसरी फिल्म नहीं। लेकिन बीच का चैप्टर मिसिंग है। और बॉलीवुड को मिसिंग चैप्टर से ज्यादा प्यारी चीज शायद कोई नहीं। अब मैं सवाल आप पर छोड़ती हूं। आपको क्या लगता है? इंसानियत के दौरान [संगीत] सच में कुछ ऐसा हुआ था जो कभी पब्लिक नहीं आया या सिर्फ 32 साल साथ काम ना करने को हमने 32 साल की दुश्मनी बना दिया। कमेंट में जरूर बताना। फिल्मी जाद गर्ल को लाइक करो, [संगीत] सब्सक्राइब करो और घंटी दबाना मत भूलना। मिलते हैं अगली वीडियो में।

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