गोविंदा ने 19 साल पहले 2007 में अपनी आखिरी फिल्म दी थी। पार्टनर दूसरी तरफ अक्षय कुमार हैं। जिन्होंने इन 19 सालों में छह ब्लॉकबस्टर फिल्म, सात सुपरहिट फिल्म, 20 क्लीन हिट फिल्में दी हैं। फिल्म इंडस्ट्री को लगभग 5000 करोड़ का बिजनेस दे चुके हैं। इस साल दो फिल्म रिलीज़ होकर हिट भी हो गई और अब दो नई रिलीज़ का इंतजार कर रहे हैं। गोविंदा कहां है? कहीं नहीं। टैलेंट की बात करें तो गोविंदा के आगे इंडस्ट्री के यह खान कुमार कहीं नहीं टिकते। फिर क्या हुआ? एक दिन में 40 फिल्में करने वाला 90ज का मेगा स्टार आज इतना खामोश है। कुछ और होता भी है तो सिर्फ कंट्रोवर्सीज का। बीवी के पास बेवफाई के किस्से हैं डायरेक्टर के पास लेट लतीफी के। कुछ क्रिंस टाइप की फिल्में हैं। सोशल मीडिया पे तो अंधविश्वास से लेकर जाने क्या-क्या पढ़ने को मिल जाएगा। वहीं अक्षय कुमार है जो अपने हर ऑड से बाहर निकल आए। फिर गोविंदा के साथ ऐसा क्यों हुआ? एक सुपर टैलेंटेड एक्टर का ऐसा डाउनफॉल क्यों? और हम यहां उन्हें अक्षय कुमार से कंपेयर ही क्यों कर रहे हैं? हाय, मैं हूं रुचि और आपकी ही तरह गोविंदा मेरे भी फेवरेट हैं। उनका कोई भी 90ज का सॉन्ग देखकर मैं भी स्क्रोल करना भूल जाती हूं। मैं खुद भी मानती हूं कि उनके जैसी कॉमिक टाइमिंग, डांस, नेचुरल एक्सप्रेशनंस, डायलॉग डिलीवरी आज भी किसी बॉलीवुड एक्टर में नहीं। राजा बाबू कुली नंबर वन, हीरो नंबर वन, साजन चले, ससुराल, दूल्हे राजा, बड़े मियां, छोटे मियां, हसीना मान जाएगी। जैसे फिल्मों के दौर में गोविंदा का स्टारडम किसी सुनामी की तरह था। मेकर्स कहते थे गोविंदा अगर कैमरे के सामने सिर्फ खड़ा होकर मुस्कुरा भी दे तो सीन सुपरहिट हो जाता था। फिर आज क्या हुआ? क्या बदल गया? उनके को एक्टर्स आज भी काम कर रहे हैं। जैसे अक्षय कुमार हर साल में चार से छह फिल्में करते नजर आते हैं। लाइफ में उन्होंने भी काफी फेलियर देखा। दो बार वो इस फेस से निकल कर बाहर आए हैं। फिर इतने सालों से गोविंदा की नैया क्यों मजधार में चल रही है? गोविंद के डाउनफॉल के कई कारण गिनाए जाते हैं। पर मेरी नजर में कुछ बातें अहम है। तो चलिए एक-एक करके सभी रीजंस पर बात करते हैं।
90ज के दौर में बॉलीवुड में कई सुपरस्टार्स आए। आमिर, सलमान, शाहरुख, अक्षय, अजय देवगन, सैफ अली खान इन सबके बीच भी जो एक स्टार सबसे ज्यादा चमकदार था वो थे गोविंदा। सिंगल स्क्रीन सिनेमा के किंग। 1986 में लव 86 से डेब्यू करने वाले गोविंदा ने एक दिन में 70 फिल्में साइन की थी। जी हां, 70 फिल्में और डेब्यू के अगले 4 साल में उनकी 40 फिल्में रिलीज भी हो गई। कोरियोग्राफर च्नी प्रकाश ने एक इंटरव्यू में बताया कि गोविंदा एक दिन में पांच फिल्मों की शूटिंग करते थे और उनकी एनर्जी लेवल देखकर लोग समझ नहीं पाते थे कि यह इंसान है कि रोबोट। गोविंदा की यही खूबी बाद में उनके करियर के लिए काल बन गई। इतनी सारी फिल्मों की एक साथ शूटिंग के चक्कर में गोविंदा अक्सर सेट्स पर लेट पहुंचते। लेट मतलब सुबह की शिफ्ट में शाम को और शाम की शिफ्ट में अगले दिन सुबह। जब तक फिल्में चल रही थी तब तक तो ऐसी बात को लोगों ने मजाक में उड़ाया। लेकिन जब एक बार फिल्मों का फ्लॉप होने का सिलसिला शुरू हुआ तो यही सब बातें उनके खिलाफ जाने लगी। फिल्म मैगजीनंस में हेडलाइन बनने लग गई। फिल्म मेकर टीनू आनंद ने एक इंटरव्यू में कहा कि गोविंदा इज सुपर टैलेंटेड। बड़े मियां छोटे मियां में वह अमिताभ बच्चन पर भारी पड़ गए थे। लेकिन वहीं सेट पर लेट आना पहले उसने टाइम की कदर नहीं की और अब टाइम उसकी कदर नहीं कर रहा। हालांकि इसका एक साइड और भी है। उनके फेवरेट डायरेक्टर डेविड धवन ने एक इंटरव्यू में गोविंदा का बचाव करते हुए कहा था कि हां वो लेट आता है
लेकिन बिना किसी ड्रामे के वो अपना काम पूरी क्षमता के साथ खत्म करके जाता है। दूसरे स्टार्स भी तो लेट आते हैं। खैर तो लेट आना गोविंदा के स्टारडम के लिए बुरा साबित हुआ। वहीं दूसरी तरफ एक और था जो सुबह 4:00 बजे सेट पर पहुंच जाता। ना पार्टी ना कभी लेट। अपनी फिटनेस के साथ-साथ फिल्मों को टाइम पर कंप्लीट करता। मशहूर डायरेक्टर अनीस बजमी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अगर अक्षय ने सुबह 7:00 बजे का टाइम दिया है तो वह ठीक 7:00 बजे वहां पर मौजूद रहते हैं। उनके साथ काम करते समय पूरी क्रू टीम को सुबह जल्दी उठने और कड़ी मेहनत की आदत पड़ जाती है। क्योंकि अक्षय कभी लेट नहीं होते। खुद अक्षय कुमार ने बताया था कि उनके करियर में एक वक्त वो भी था जब उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थी। तब भी मेकर्स उन्हें सिर्फ इसलिए साइन करते थे क्योंकि वह जानते थे कि अक्षय टाइम पर आएंगे और फिल्म टाइम पर खत्म करेंगे। वो उन्हें परेशान नहीं करेंगे और उनके तय बजट के अंदर काम पूरा कर देंगे। जब गोविंदा का एरा खत्म हो रहा था तब फिल्म मेकर्स ने उन्हें ना लेने का एक बड़ा रीजन दिया। उनका डिसिप्लिन में ना होना। साल 2000 के बाद सिंगल स्क्रीन का दर्शक मल्टीप्लेक्स में शिफ्ट हो रहा था। सिनेमा बनाने और देखने वालों का अंदाज तेजी से बदल रहा था। लेकिन जो नहीं बदला वो थे गोविंदा। उस दौर में लोगों का टेस्ट चेंज हो रहा था। लोग टिपिकल कॉमेडी से बोर हो चुके थे और उन्हें देखना था कई सारे कॉमेडी कैरेक्टर्स। हंगामा, गोलमाल, हेराफेरी, वेलकम इसी टाइप की फिल्में थी। अब फिल्म एक एक्टर नहीं बल्कि कई कैरेक्टर के कॉम्बिनेशन वाली हिट हो रही थी। अक्षय कुमार सहित जहां दूसरे एक्टर्स ने जल्द ही इस ट्रेंड को एक्सेप्ट कर लिया, वहीं गोविंदा अभी भी सोलो हीरो वाली फिल्में कर रहे थे। अखियों से गोली मारे, बेटी नंबर वन पूरी तरह से फ्लॉप। उन्होंने यहां पर अडप्ट नहीं किया। उनका सोचना था कि अभी भी अकेले दम पे वो फिल्में हिट करा सकते हैं। लेकिन यह सच नहीं था। यह थी उनके डाउनफॉल की दूसरी वजह। यह बात तो गोविंदा की पत्नी सुनीता लगभग हर पडकास्ट में कहती है कि उन्होंने कई बार गोविंदा को समझाया कि टाइम बदल चुका है। अब 90ज वाले दौर नहीं है। अब हीरो फिल्में दोनों चेंज हो गए हैं।
पर गोविंदा ने सुनीता की भी नहीं सुनी और ना दर्शकों की। दूसरी तरफ अक्षय ने खुद को इंप्रोवाइज किया। एक्शन से कॉमेडी जॉनर को अपना लिया। लोगों को उनकी कॉमिक टाइमिंग पसंद आई। हेराफेरी में तो उनका काम इतना जबरदस्त था कि आपको भी उनके कई मीम्स इंटरनेट पर रोज यूज होते मिल जाएंगे। गोविंदा और डेविड धवन ने साथ में कुल 17 फिल्में की जिसमें 12 हिट थी। एक समय आया जब डेविड धवन ने खुद गोविंदा का साथ छोड़ दिया। एक तरफ उनकी फिल्में पिट रही थी। दूसरी तरफ डेविड धवन ने गोविंदा से मुंह फेर लिया था। आपकी अदालत में गोविंदा ने बताया कि डेविड धवन ने उनके बारे में बोला था कि गोविंदा बहुत सवाल पूछने लग गया है। उसके साथ काम करना मुश्किल हो गया है। उससे कहो जो भी छोटा-मोटा रोल मिलता है कर ले। यह सुनकर गोविंदा टूट गए। उनके करियर के ग्राफ के नीचे जाने में डेविड धवन का भी बहुत योगदान था। इस इंसिडेंट को लेकर गोविंदा की पत्नी ने बताया कि डेविड ने कई बार गोविंदा से कहा था कि उन्हें सेकंड लीड पर कैरेक्टर रोल्स भी करने चाहिए। लेकिन गोविंदा कॉम्प्रोमाइज नहीं करना चाहते थे। डेविड धवन की बात कितनी सही है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि साल 2007 में गोविंदा की आखिरी हिट फिल्म पार्टनर भी डेविड धवन ने ही डायरेक्ट की थी और उसमें सलमान खान के साथ गोविंदा सेकंड लीड में थे। गोविंदा के करियर का नोज डाई मोमेंट तब आया जब उन्होंने अपने फेलियर के लिए सीधा खान को टारगेट करना शुरू कर दिया। पार्टनर की शूटिंग के दौरान सब कुछ ठीक था। बताया जाता है कि सलमान खान ने गोविंदा को प्रॉमिस किया था कि वह उनका करियर पटरी पर जरूर लेकर आएंगे और उनकी बेटी टीना को भी लॉन्च करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्टा गोविंदा को पता चला कि पार्टनर में सलमान खान को उनसे 5 करोड़ ज्यादा मिले थे।
गोविंदा खफा हो गए। पार्टनर के बाद गोविंदा ने जितनी भी मल्टीस्टारर फिल्में की सभी फ्लॉप रहीं। जिसमें लाइफ पार्टनर मनी है तो है और जो सोलो हीरो वाली फिल्में सब सुपर फ्लॉप हुई। जिसके बाद गोविंदा ने खुलकर बॉलीवुड के खान के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। 2018 में अपनी फिल्म रंगीला राजा की रिलीज के दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों का एक ग्रुप है जो मेरे खिलाफ लगातार साजिश रच रहा है। वे नहीं चाहते कि मेरी फिल्में सिनेमाघर घर में रिलीज़ हो और उन्हें अच्छी स्क्रीनंस मिले। हालांकि दबंग 2 में सलमान खान ने गोविंदा को रोल ऑफर किया था। लेकिन तब उन्होंने कहा कि मैंने सलमान की फिल्म में ऑफर इसलिए ठुकराया क्योंकि मुझे उनके रोल पसंद नहीं थे। मैं किसी की कृपा मतलब फेवर पर काम नहीं करना चाहता। सलमान के दिल में मेरे लिए सम्मान है। लेकिन मुझे ऐसी फिल्मों की जरूरत नहीं जहां मेरा किरदार मजबूत ना हो। बस इन्हीं बयानों के बाद फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें सपोर्ट करने वालों की संख्या भी कम हो गई। गोविंदा के जीवन में जो सबसे बड़ी गलती थी वह थी उनका पॉलिटिक्स में जाना। जब फिल्मी करियर चल नहीं रहा था तब गोविंदा को पॉलिटिक्स में जाने का ऑफर आया। उन्होंने मौके को भुनाने की कोशिश की। 2004 के लोकसभा चुनाव में गोविंदा ने कांग्रेस पार्टी के टिकट में मुंबई नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ा। बीजेपी के कद्दावर नेता और लगातार पांच बार के सांसद रहे राम नायक को भारी मतों से हराकर अप्रत्याशित जीत हासिल की। राजनीतिक हलकों में गोविंदा को जॉइंट किलर नाम दिया गया। राजनीति गोविंदा को रास नहीं आई और ना ही उनका वहां मन लगा। लोकसभा में गोविंदा की अटेंडेंस थी सिर्फ 12% और अपने 5 साल के टेन्योर में गोविंदा ने 303 बैठकों में से अटेंड की सिर्फ 37। अब आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि कितने सीरियस थे वह एक मेंबर ऑफ पार्लियामेंट के तौर पे। कुछ समय बाद ही उन्हें अपनी गलती समझ आ गई और उन्होंने फिल्मों की तरफ रुख किया। इधर उन्हें वोट देने वाले परेशान कि गोविंदा आते ही नहीं है। हमारी परेशानी से उन्हें कोई वास्ता नहीं। मुंबई में उन्हें लापता सांसद तक कहा जाने लगा। राजनीति में रहने के दौरान गोविंदा का वेट 114 किलो तक बढ़ गया था। अपने एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इतने वजन के साथ वो सोलो हीरो तो नहीं बन सकते थे। इसलिए पार्टनर भागम भाग जैसी फिल्मों में उन्होंने सेकंड लीड के तौर पर काम किया। एक रीजन और भी है। लेकिन मैं उसे गोविंदा के फेलियर का जिम्मेदार नहीं कहूंगी। लेकिन हां, उनकी इस आदत ने इंडस्ट्री और फैंस के बीच उनकी इमेज को खराब करने का एक बहुत बड़ा रीजन है। वो है अंधविश्वास। लगातार फिल्म में फ्लॉप होना, राजनीति में ना चल पाए। गोविंदा को लगने लग गया कि कोई ताकत है जो उन्हें कामयाब नहीं होने दे। पहला आज नेहलानी बताते हैं कि शूटिंग के दौरान गोविंदा अजीब-अजीब बातें करते थे। कभी वह कहते कि झूमर गिरने वाला है। सब हट जाओ। कभी वह कहते कि कादर खान डूबने वाले हैं। उनका अंधविश्वास इतना बढ़ गया था
कि मनी है तो हनी है। मूवी की शूटिंग के दौरान गोविंदा थोड़ा लो फील कर रहे थे। तो उन्होंने वहां एक एस्ट्रोलॉजर को बुला लिया। जिसने उन्हें बताया कि अभी राहु काल है। इसलिए आज वह पूरी शूटिंग में एक मुर्गे को अपने साथ रखे। उनका राहु काल दूर हो जाएगा। और फिर प्रोडक्शन हाउस को गोविंदा के लिए एक मुर्गी का इंतजाम करना पड़ गया। जिसके चक्कर में गोविंदा की शूटिंग में काफी देर हो गई। मुर्गी आई और गोविंदा ने जैसे ही मुर्गी के साथ शूट करना शुरू किया वो मर गई। फिर क्या था? एस्ट्रोलॉजर ने कहा था कि पूरे दिन शूट करना है तो गोविंदा ने मरी हुई मुर्गी के साथ पूरे दिन शूट किया। गोविंदा के इन्हीं अंधविश्वासों के चलते एक टीवी शो तक बंद हो गया था। कुछ और भी रीजन है जिसके चलते गोविंदा की इमेज थोड़ी ब्लर हुई है। उनकी वाइफ सुनीता का हर पॉडकास्ट में गोविंदा के अफेयर्स को लेकर बातें करना। हमें पता नहीं कि गोविंदा के अफेयर्स थे कि नहीं। लेकिन अगर पत्नी पब्लिक में आकर आरोप लगाती है तो लोग विश्वास कर लेते हैं। इतना सब कुछ डिस्कस करने के बाद अंत में यही लगता है कि गलतियां और गलत फैसले हर किसी से होते हैं। इंडस्ट्री में कभी ना कभी सभी आर्टिस्ट करते हैं लेकिन जरूरत होती है सही समय पर अपनी कमियों को जानकर उसे सही करना। हम तो दिल से गोविंदा के फैन हैं और उम्मीद करते हैं जल्द ही उनका कमबैक देखने को मिलेगा। आपको क्या लगता है गोविंदा के डाउनफॉल की जो वजह मैंने गिनाई क्या वही है या कोई और वजह भी है? आप जो भी सोचते हैं मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। स्टोरी पसंद आई हो तो चैनल को लाइक, सब्सक्राइब और शेयर जरूर करें।