आपको याद होगा कि एरिया इंडिया का एक विमान जिसमें हुई थी, कई लोग घायल हुए थे, उसको लेकर के कई सवाल उठाए गए थे। उसके पायलट को लेकर के कई सवाल उठाए गए थे। और खबर यह भी आई थी कि दूसरे टेस्ट में पायलट फेल हुआ था। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में और क्या-क्या कहा गया और यह हादसा कितना और भयावह हो सकता था, यह मैं दिखाता हूं आपको। 4 अगस्त 2026 पुकेट से दिल्ली की उड़ान विमान में 137 यात्री आठ क्रू मेंबर्स 4 अगस्त को 400 फीट की ऊंचाई पर 137 यात्रियों और आठ क्रू मेंबर्स की जिंदगी दांव पर लगी थी क्योंकि प्लेन का पायलट के में चूर था। हवा में सिर्फ प्लेन ही नहीं था बल्कि एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 का पायलट भी में हाई था।
तभी फोकट से दिल्ली आ रही यह फ्लाइट हिचकोले खाते हुए 300 फीट नीचे आ गई और विमान में हड़कंप मच गया। प्लेन में सवार पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स को जोर का झटका लगा। चार क्रू मेंबर्स और 20 यात्री बुरी तरह घायल हो गए। 5 मिनट तक लोगों की सांसे अटकी रही। विमान के अंदर जगह-जगह ओवरहेड बॉक्स डैमेज हो गए। जानकारी के मुताबिक प्लेन ही नहीं मेन पायलट को भी को पायलट ने संभाला और फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग कराई। मगर यात्रियों ने आपबीती बताई तो सभी हैरान रह गए।
इसका एक्चुअली हम लोग को बहुत शक था क्योंकि जो पायलट का डिमिनर था जो उन्होंने पहनावा उनका जैसे दिख रहा था। शर्ट वगैरह बहुत क्रीज था। उसके अंदर टकटिन भी नहीं था और उनका जो चाल था वो भी अच्छा नहीं दिख रहा था। और जिस तरीके से वो बात कर रहे थे के बाद या के बाद तो वो पूरा लग रहा था कि वो में है। तो हम चाहेंगे कि यह इसको आगे ले जाके बहुत सीरियस एक्शन हो इसके ऊपर। पर सवाल उठे तो जांच शुरू हुई। तब जाकर पता चला कि प्लेन में सवार 145 लोगों की जिंदगी जिस पायलट के हाथ में थी वो तो के में था। पायलट इन कमांड यानी कैप्टन का शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट संदेहास्पद पाया गया। जिसके बाद उनका दूसरा निर्णायक कंफर्मेट्री टेस्ट कराया गया।
11 अगस्त को इस दूसरे टेस्ट की रिपोर्ट आई जिसमें कैप्टन के शरीर में मारीजुआना यानी की मौजूदगी की पूरी तरह पुष्टि हुई। सुरक्षा के लिहाज से इस तरह की बड़ी घटना के बाद फ्लाइट क्रू का यानी की जांच जरूरी होती है। यही वजह है कि सच सामने आ गया। लेकिन इस सच ने सिर्फ के में विमान उड़ा रहे पायलट को ही नहीं पकड़ा बल्कि एिएशन सिस्टम को भी बेनकाब कर दिया। क्योंकि पायलट के लिए 12 घंटे का टू रूल है। यानी उड़ान से 12 घंटे पहले 12 घंटे पहले है। वाले भी प्रतिबंधित है। उड़ान से पहले टेस्ट होता है।
भारत में लैंडिंग वाले विदेशी विमानों में भी टेस्ट होता है। टेस्ट नहीं करवाने पर पॉजिटिव माना जाता है। यहां तक कि विमान के क्रू मेंबर की भी जांच का नियम है। फिर भला ऐसा कैसे संभव है कि पायलट के में हो और विमान उड़ाने लगे। हालांकि सच सामने आते ही डीजीसीए ने दोनों पायलटों को जांच पूरी होने तक तुरंत प्रभाव से फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया है।
साथ ही इस गंभीर लापरवाही पर एक्शन की बात की है। वुड से दैट लेट अस वेट फॉर दी अह अह फुल फ्लेज रिपोर्ट टू कम फ्रॉम सो दैट वी कैन सी व्हाट एक्शन डेफिनिटिव एक्शन नीड्स टू बी टेकन ऑन दिस। बट इन द मीन टाइम इफ इट इज़ एनीथिंग रिलेटेड टू अह
आई वुड से दैट फ्रॉम द मिनिस्ट्री वी आर टेकिंग इट वेरी-वेरी सीरियसली एंड इफ वी फाइंड दैट देयर नीड्स टू बी सम ट्वीटकिंग इन दी अह एकिस्टिंग रेगुलेशंस वी आर रेडी टू डू दैट। मगर क्या यह इन्वेस्टिगेशन और एक्शन उन पैसेंजर्स का भरोसा जीत पाएगी जो हजारों फीट ऊंचाई पर आसमान में एक पायलट के भरोसे प्लेन में उड़ाने भरते हैं। क्या फ्लाइट में सफर करते वक्त उनके दिमाग में यह सवाल नहीं घूमेगा कि कहीं उनकी जिंदगी किसी गंजेड़ी पायलट के हाथ में तो नहीं है?