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महेश भट्ट के साथ परवीन बॉबी का क्या था रिश्ता? कौन था बर्बादी का जिम्मेदार?

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उस औरत की बर्बादी ने मुझे आबाद किया। जब महेश भट्ट ने वो लम्हे फिल्म की मेकिंग में यह बात कही तो इन शब्दों में एक साथ दो आवाजें थी। उसकी बर्बादी ने ही मुझे स्टार बनाया। हम आबाद में जब वो बर्बाद हुई। एक प्रेमी की जो अपने गुनाह को कबूल कर रहा था। और एक कलाकार की जो इतनी सच्ची थी कि सीधे दिल में उतर जाती। यही एक लाइन उस पूरी कहानी का दरवाजा खोल देती है। मुंबई की किसी शाम में एक रिश्ता शुरू हुआ था। एक तरफ थी परवीन बॉबी जो 70 के दशक में पर्दे की सबसे चमकती हुई लड़की थी। जिसकी खूबसूरती जिसकी हंसी पूरी स्क्रीन को रोशन कर देती। हर दिल अजीज हर किसी की ख्वाहिश तमन्ना। दूसरी तरफ एक शादीशुदा फिल्मकार महेश भट्ट जिसके पास उस वक्त सिर्फ सपने थे और एक नाम बनाने की भूख। ये दोनों मिले, दोनों इश्क में डूबे और फिर एक दिन एक दूसरे से बिछड़ गए। लेकिन फर्क बड़ा था बिछड़ते वक्त। उस रिश्ते की राख से एक इंसान उठकर शहरत की बुलंदी तक पहुंच गया और दूसरा उसे राख में अकेली बीमार और भुलाकर अकेले तड़प तड़प कर सड़ कर मर गई और वहीं से वो सवाल खड़ा हुआ चुभता हुआ अनसुलझा क्या महेश भट्ट ने परवीन बॉबी का इस्तेमाल किया था जानेमन हसी मिले तो दिल के जाने दो नमस्कार मैं हूं शुभांकर मिश्रा। इस वीडियो में आज इस सवाल का सच हम आपको बताएंगे। हम जानेंगे कि महेश भट्ट और प्रवीण बॉबी पहली बार कैसे मिले। इनका प्यार कैसे शुरू हुआ। फिर देखेंगे कि महेश ने इस प्यार के लिए अपना भरा पूरा घर क्यों छोड़ा था। इसके बाद बात करेंगे उस मूड़ की जब परवीन की जिंदगी में अंधेरा छाने लगा। हम आपको किस्सा सुनाएंगे कैसे अमिताभ बच्चन पर एक बहुत गंभीर आरोप परवीन बॉबी ने लगाया था। आपको वो किस्सा भी सुनाएंगे जहां एक प्रेमी से नर्स बनकर महेश भट्ट ने उनकी देखभाल की। और फिर वो पल जब दोनों अलग हो गए। उस रहस्यमय टेप की बात भी करेंगे जिसने सब कुछ बदला और आखिर में उस बड़े सवाल का जवाब ढूंढेंगे जिसने आज तक कई लोगों को बांध रखा है कि क्या महेश भट्ट ने परवीन बॉबे का इस्तेमाल किया। परवीन एक बहुत ही लिबरेटेड किस्म की महिला थी। जब हम जाते थे प्राइवेट पार्टीज पर तो अक्सर वो शौक वैल्यू के लिए अपनी जो ब्रा है वो निकाल कर ऐसे कहती थी जस्ट पुट इट इन माय बैग। तो प्रवीन ने कभी मुझे नाइफ नहीं किया मगर हां वायलेंट हो गई थी जब स्किफ्रेनिया के माउथ से ज्यादा गुजर रही थी। शुरू से कहानी शुरू करते हैं। इस कहानी की शुरुआत करें उससे पहले बॉलीवुड की ऐसी तमाम कहानियों के लिए आप हमारे चैनल से जुड़िएगा। हमारा WhatsApp चैनल का लिंक भी हमने दे रखा है। सब्सक्राइब कीजिएगा। आप जुड़ेंगे ताकत बढ़ेगी हमारी। अब बात करते हैं दोनों मिले कैसे? महेश भट्ट परवीन बॉबी कैसे मिले? तो देखिए परवीन बॉबी का सितारा 70 के दशक में आसमान छू रहा था। दीवार, अमर अकबर, एंथनी, शान, नमक हलाल जैसी फिल्मों ने हर घर का चेहरा बनाया था। प्रवीण बॉबी की शोहरत सिर्फ हिंदुस्तान तक थोड़ी थी। वो उन गिनी चुनी भारतीय अभिनेत्रियों में से थी, जिसे दुनिया की मशहूर टाइम मैगजीन ने अपने कवर पर जगह दी।

आप सोचिए, एक भारतीय लड़की और सीधे टाइम के कवर पर। यह उसकी ऊंचाई का अंदाजा देता है। वो खूबसूरत थी, मॉडर्न थी। उसमें एक ऐसी आजादी थी जो उस जमाने की बाकी हीरोइन में कम दिखती थी। पर इसी चमक के पीछे गहरा अंधेरा भी था। परवीन एक रईस खानदान से थी लेकिन फिर भी बचपन से खुद को अकेला महसूस करती थी। उसने एक बार खुद लिखा था कि उसका बचपन एक डरावने सफर जैसा था। जहां उसे वो प्यार कभी नहीं मिला जिसकी उसे जरूरत थी। यानी अकेलापन उसकी जिंदगी में बहुत पहले से था। यही वजह थी कि जब उसका कबीर बेदी से रिश्ता खत्म हुआ तो अंदर से टूट गई। बाहर से वो एक हस्ती खेलती सुपरस्टार अंदर से एक तन्हा लड़की और ऐसे कमजोर पलों में महेश भट्ट उसकी जिंदगी में दोस्त बनकर आए। मेरी पहली मुलाकात प्रवीण से एक फिल्म के सेट पर हुई थी। मगर उस वक्त उसने मुझे नहीं देखा मगर मैंने उसे देखा था। उस वक्त महेश अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे। बड़ा नाम उनसे कोसों दूर था। वो परवीन की बातें सुनते, उनके दर्द को समझते और शायद यही समझ धीरे-धीरे प्यार बन गई। परवीन को लगने लगा कि आखिरकार कोई ऐसा मिला जो उसकी शकल अंदर से देख सकता है। सिर्फ चमक के पीछे प्यार नहीं कर रहा। अब यहां एक बहुत दिलचस्प बात है। महेश भट्ट ने खुद एक बार बताया कि परवीन उन्हें अपनी मां की याद दिलाती थी। उनकी मां भी एक अकेली स्त्री थी। जिनका सहारा बनने वाला कोई नहीं था। परवीन का वही अकेलापन, वही नाजुकपन महेश को अपनी ओर खींच ले आया। और यही गहराई महेश को एक ऐसे कदम तक ले गई जिसकी उस वक्त किसी ने उम्मीद नहीं की थी। महेश भट्ट ने परवीण बॉबी के लिए अपना घर छोड़ दिया। दरअसल जब महेश भट्ट को परवीण बॉबी से प्यार हुआ तो पहले से शादीशुदा थे। पत्नी थी। दो बच्चे थे। एक भरा पूरा घर। पर परवीन के प्यार में वो इस कदर खो गए कि सब कुछ पीछे छूट गया। उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों से दूरियां बना ली। परवीन के साथ रहने लगे। उस जमाने में आसान नहीं था। शादीशुदा आदमी का किसी और के साथ खुलेआम रहना बहुत बड़ी बात थी। लोगों ने खूब बातें बनाई। दोनों ने परवाह नहीं की। यही वो दौर था जब उनका प्यार सबसे ऊंचे मुकाम पर था। घर के अंदर परवीन कोई सुपरस्टार नहीं रहती। बस एक साधारण लड़की जो प्यार में डूबी थी। ना शोहरत की भूख नाकामी का डर। महेश के साथ बिताए वह पल उसकी जिंदगी के हसीन पलों में से एक थे। बंद दरवाजों के पीछे वो एक आम सी लड़की जिसके बालों में तेल लगाना घर का खाना खाना अच्छा लगता था। पर्दे पर वो भले ही ग्लैमर की मूरत थी। असल में दिल साधारण था, कोमल था। दोनों को लगता कि यह कहानी हमेशा ऐसी खूबसूरत रहेगी पर पता नहीं था कि किस्मत इस हंसती खेलती कहानी में एक ऐसा मोड़ लाने वाला है जो सब बदल देगा। परवीन बॉबी की जिंदगी में उस अंधेरे से। होने यह लगा कि परवीन बॉबी के मन में एक अचानक डर पनप गया। उसे लगता था कि हर कोई उसे मारना चाहता है। कोई उसकी जासूसी करवा रहा है।

इस बीमारी का नाम बाद में पता लगा जिसे सिजोफ्रेनिया कहते हैं। पर उस वक्त किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। पर प्रवीण ने कभी मुझे नाइफ नहीं किया। मगर हां वायलेंट हो गई थी जब वो एक स्किफ्रेनिया के पाउ से गुजर रही थी। महेश भट्ट ने इसकी सबसे डरावनी शक्ल एक शाम को देखी। जब वो घर लौटे देखा परवीन एक कोने में दुखी है। फिल्म वाला कपड़ा पहने चाकू हाथ में लिए डर से कांपती हुई धीरे से कहा दरवाजा बंद कर दो। वो लोग मारने आ रहे हैं। उसे एक पल महेश समझ गए कि जिस परवीण को वो जानते थे वो खो चुकी है। यह बीमारी मामूली नहीं थी। परवीन को खाना खाने से डर लगता था। उसे लगता था ज़हर है। इसमें जहर है ना? कई दिन तक ना कपड़े बदलती, ना भरोसा करती। डर इतना बड़ा कि कई बड़े नामों पर शक करना शुरू कर दिया। यहां तक कि अमिताभ बच्चन पर जान से मारने के आरोप लगाए। वो कहती कि अमिताभ उन्हें मारना चाहते हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा है। यह बातें सुनकर लोग हैरान रह जाते। पर सच यह था कि इसमें कोई सच्चाई नहीं थी। यह सब उसकी बीमारी का असर था। उस डर का जो उसके मन पर पूरी तरह हावी हो गया। उसका वो खिलखिलाता चेहरा अब डर और शक के पीछे छिप गया। यह बीमारी उसके अंदर बहुत पहले से छिपी थी। महेश ने बताया कि बचपन में दंगों के दौरान परवीन को गद्दों के नीचे छिपा कर रखा गया था। इस डर से कहीं भीड़ खींच ना ले जाए। वो डर शायद कभी उनके मन से गया ही नहीं और सालों बाद वही भयानक रूप में लौट आया। महेश ने अपनी आंखों के सामने एक खूबसूरत इंसान को टुकड़ों में बिखरते देखा। और ऐसे मुश्किल दौर में जब ज्यादातर लोग पीछे हटते हैं। महेश ने अलग किया। वो परवीन बॉबी की देखभाल कर रहे थे। साथ नहीं छोड़ा। अच्छे से अच्छे डॉक्टर के पास ले गए। इलाज के लिए दूर-दूर तक गए। यहां तक कि देश से बाहर भी कई बार वो परवीन को लेकर पहाड़ों में छिप गए ताकि सुकून मिले। दुनिया की नजरों से दूर रहे। महेश कहते हैं कि उन दिनों उन्होंने एक नर्स की तरह सेवा की। खाना संभालते दवा का ध्यान रखते। परवीन का शक इतना गहरा था कि वो महेश से पहले खाना के लिए कहती कि तुम खाओ। यह देखने के लिए कुछ मिला तो नहीं है। महेश खाते फिर खिलाते। सिर्फ इसलिए कि परवीन भरोसा करके अपनी दवा ले ले। महेश ने सिर्फ दवा और डॉक्टर तक खुद को नहीं रखा। परवीन को सुकून देने के लिए रास्ता आजमाया। उन्होंने उसे यूजी कृष्णमूर्ति नाम के एक विचारक से मिलवाया जो महेश भट्ट के भी गुरु थे। जो किसी फकीर की तरह जीते थे और जिंदगी को एक अलग नजरिए से रखते थे। बीमारी के उस दौर में परवीन इन्हीं की बातों में थोड़ा ठहराव ढूंढने लगे। यानी महेश ने सारी कोशिश की। दवा से लेकर दुआ अध्यात्म तक। इन्हीं दिनों के बारे में महेश भट्ट ने एक अजीब सी बात कही। कहा कि वो बहुत मुश्किल दिन थे। पर किसी तरह सबसे सुंदर दिन भी वही थे। एक प्रेमी का इस तरह बीमार साथी की सेवा करना बहुत कुछ कहता है। इस रिश्ते में सिर्फ फायदा नहीं था। एक अपनापन भी था। पर इतनी सेवा देखभाल के बाद भी यह कहानी उस अंजाम तक नहीं पहुंची जहां दोनों को उम्मीद थी। क्योंकि महेश भट्ट और परवीन अलग हुए। अब सवाल कैसे अलग हुए? क्योंकि बीमारी इतनी गहरी हो गई थी कि साथ रहना मुश्किल हो गया था। परवीन का शक महेश भट्ट तक पहुंच गया था।

कभी भी वो उन पर भरोसा नहीं करते। आखिरकार वो रात आई जब महेश ने जाने का फैसला किया। कहते हैं वह आधी रात को परवीन के घर से निकल पड़े। परवीन ने रोकना चाहा। वो इतनी बेबस थी कि आधे कपड़ों में सड़क पर दौड़ पड़ी। इस उम्मीद में कि शायद महेश रुक जाए। लौट आए लेकिन महेश भट्ट रुके नहीं। यह इस कहानी का एक दर्दनाक पल था। एक तरफ वो स्त्री जो अपना सब कुछ इस रिश्ते में लगा चुकी थी। दूसरी तरफ वो आदमी जो अंधेरे से निकल कर अपनी जिंदगी की ओर लौट रहा था। यहीं से लोगों ने महेश भट्ट को इस्तेमाल करने वाला कहना शुरू किया। कहा गया कि परवीन के शोहरत का फायदा उठाया। जब वो बीमार बेसहारा हुई तो छोड़ दिया। महेश बाद में अपने पुराने परिवार के पास लौट गए और परवीन वहीं रह गई। अकेली बीमार टूटी हुई। परवीन इस रिश्ते जुड़ी रही। एक ऐसे तरीके से जिसने शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी। लेकिन इस्तेमाल करने की कहानी सिर्फ साथ रहकर अलग होने की नहीं है। महेश भट्ट ने परवीन बॉबी कहानी से अपना करियर बनाया और यहीं से आरोप गहरा हुआ कि महेश ने इस्तेमाल किया। दरअसल महेश भट्ट ने इस टूटे रिश्ते से सिर दर्द नहीं पाया। इससे अपना पूरा करियर खड़ा किया। महेश भट्ट की पहली कामयाब फिल्म अर्थ इसी रिश्ते कहानी पर थी। इसके बाद सारांश, जख्म और फिर वो लम्हे में भी इसी रिश्ते की छाया दिखी। वो लम्हे तो खुलकर परवीन की बीमारी और उसकी जिंदगी पर बनी थी। महेश भट्ट खुद मानते हैं कि उनकी शोहरत की पहली सीढ़ी परवीन बॉबी से उनका रिश्ता था और इसीलिए वो डायलॉग आया था कि परवीन बॉबी की बर्बादी ने महेश भट्ट को आबाद किया। उसकी बर्बादी ने ही मुझे शार बनाया। हम आबाद हुए जब वो बर्बाद हुए हैं। कहा कि अगर अर्थ ना बनाई होती तो शायद आज कोई उनका नाम भी ना लेता। यही वो सच है। एक इंसान जिसकी जिंदगी बिखर गई उसी की कहानी दूसरी कामयाबी की नींव बनी। आलोचक कहते हैं किसी अपने के सबसे कमजोर पलों को बार-बार पर्दे पर बेचना ठीक नहीं लेकिन महेश का नजरिया अलग है। उनके लिए फिल्में बनाना ही अपने सबसे अंधेरे दिन दिलों से निकलने का रास्ता था और वह लम्हे बनाने के पीछे भी एक गहरा किस्सा है।

दरअसल परवीण बॉबी की मौत के बाद महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट को घर में एक पुराना टेप मिला। उस टेप में परवीन की अपनी आवाज रिकॉर्ड थी। उसमें वह अकेलेपन की बात कर रही थी। आती हुई बीमारी इस दुनिया से इस फिल्मी चकाचौंध से दूर जाने की इच्छा महेश ने बाद में कहा उन शब्दों के बीच खामोशी उन्हें शब्दों से ज्यादा कुछ कह गई यही टेप वो लम्हे बनाने की इसलिए वजह बनी हालांकि मोहित सूरी ने इसको लेकर अलग कहानी कही थी। मोहित सूरी कहना था कि जब परवीन बॉबी की मौत हुई अकेले सड़कर घुटकर भूख की वजह से खाते में करोड़ों रुपए थे लेकिन तड़प-तड़प कर मरी तो उनकी अंतिम यात्रा में बॉलीवुड गायब रहा। महेश भट्ट थे और वहीं उन्हें लगा कि क्या वो महेश भट्ट को गलत समझते हैं? फिर महेश भट्ट प्रवीण बॉबी के रिश्ते को लेकर अपने वर्जन से उन्होंने वो लें बनाई। इस सवाल को समझते हुए कि महेश भट्ट ने क्या प्रवीण बॉबी का इस्तेमाल किया। अब इस सवाल का जवाब इस बात पर टिका है कि आप इसे किस तरह देखते हैं। अगर इस्तेमाल करने का मतलब आपकी नजरों में किसी रिश्ते के निजी दर्द को बेचकर नाम पैसा कमाना तो हां हुआ। महेश भट्ट छिपाते नहीं। कई फिल्में बनाई परवीन बॉबी के ऊपर। अधिकतर हिट रही। अगर इस्तेमाल का मतलब है किसी कमजोर इंसान को सिर्फ अपने फायदे के लिए जोड़े रखना और बेरहमी से छोड़ना तो यह सच इतना सीधा नहीं है। क्योंकि बीमारी कठिन दिनों में महेश भट्ट ने सेवा भी की इलाज भी करवाया। 2005 में परवीन कई दिनों तक अपने घर से बाहर नहीं निकली। ना दूध उठाया ना अखबार। पड़ोसियों ने पुलिस बुलाई तो अपने फ्लैट में अकेली मरी हुई मिली। उनकी मौत के बाद उनका शव लेने कोई आगे नहीं आ रहा था। कभी जिस औरत को पूरा देश चाहता था, उसके अंतिम सफर में वह तन्हा थी।

तब महेश भट्ट आगे आए थे। अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई थी। कभी सोचा नहीं था कि फिर जब जाऊंगा तो उसकी डेड बॉडी को क्लेम करने जाऊंगा। क्योंकि जब वो गुजरी तब कोई उसकी डेड बॉडी को क्लेम करने वाला नहीं था। आप सोचिए जो आदमी आधी रात को छोड़कर चला गया आखिर में उसे विदा करने वाला वो अकेला इंसान बना। यही कहानी एक पूरे घेरे में बन जाती है। शायद सच्चा जवाब भी यही है। दोनों बातें एक साथ सच है। महेश ने इस्तेमाल किया भी नहीं भी किया। यहां एक गहरा प्यार भी है और एक कलाकार की भूंग भी जिसने उस प्यार के दर्द को अपनी कला में बदल दिया। पर इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा दुखद पहलू वो है कि इसमें परवीन की अपनी आवाज सबसे कम सुनी गई। हर किसी ने उसी कहानी को कहा। पर वो खुद अपनी बात नहीं कह पाई। वो औरत बच गई। उसकी रोशनी आज भी किसी और के नाम पर जल रही है। हालांकि इस कहानी में एक किस्सा और भी है महेश भट्ट की पत्नी का। इस पूरी कहानी में इस पूरे रोमांस में हम और आप यह भूल गए कि इस पूरी यात्रा में महेश भट्ट अपनी पत्नी को धोखा दे रहे थे। कुछ वैसा है जैसा रॉकस्टार में जॉर्डन हीर के लिए पागल था और हीर अपने पति को धोखा दे रही लेकिन कहानी आई ऐसे कि हमें रणबीर कपूर के लिए बुरा लग रहा था। क्या महेश भट्ट ने अपनी पत्नी और अपनी गर्लफ्रेंड का इस्तेमाल किया? परवीन बॉबी का इस्तेमाल किया। क्या सोचते हैं आप? प्यार था इस्तेमाल। जवाब दिल से दीजिएगा। सोच कर दीजिएगा। और ऐसी कहानियों के लिए जुड़े रहिएगा। WhatsApp चैनल भी हमारा जुड़िएगा। कहानी आप तक पहुंचाते रहेंगे। रिश्ता मजबूत करेंगे। नमस्कार जवाब कमेंट सेक्शन में

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