किशोर कुमार का जीवन जितना शानदार उनकी आवाज और गायकी के लिए जाना जाता है, उतना ही वह अपने अनोखे और कभी-कभी अजीब माने जाने वाले व्यवहार के कारण भी चर्चा में रहे। उनकी निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। उन्होंने चार शादियां की। आयकर विभाग के छापों का सामना किया और आपातकाल के समय सरकार से उनका टकराव भी सुर्खियों में रहा। दोस्तों, वीडियो में आगे बढ़ने से पहले, प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों, वीडियो को शुरू करते हैं। भारत के साथ-साथ संगीत इतिहास में आपातकाल का दौर आया था।
जब हिंदी सिनेमा के महान गायक किशोर कुमार को भी ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिसने उनके करियर पर गहरा असर डाला। यह वह समय था जब उनकी आवाज जो देश भर के लोगों की पहली पसंद थी, अचानक सरकारी रेडियो से गायब कर दी गई। साल 1975 का दौर भारत के इतिहास का सबसे विवादित समय माना जाता है जब देश में आपातकाल लागू हुआ। इस दौरान सरकार ने सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि मीडिया और मनोरंजन जगत पर भी कड़ा नियंत्रण लगा दिया था। अखबारों से लेकर फिल्मों और रेडियो तक हर जगह सरकार की पकड़ मजबूत हो गई थी।
उस समय सूचना और प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी विद्या चरण शुक्ल के पास थी और उनका साफ निर्देश था कि बड़े कलाकार सरकार के कार्यक्रमों और अभियानों का हिस्सा बने ताकि जनता तक सरकारी संदेश आसानी से पहुंच सके। इसके लिए किशोर कुमार से भी संपर्क किया गया और उनसे कहा गया कि वह एक सरकारी कार्यक्रम में गाएं और सरकार के समर्थन में हिस्सा लें। लेकिन किशोर कुमार अपने बेफिक्र और स्वतंत्र स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने बिना ज्यादा सोचे समझे इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनका मानना था कि वो किसी दबाव में आकर काम नहीं करेंगे। चाहे सामने सरकार ही क्यों ना हो। किशोर कुमार का यह फैसला सरकार को बिल्कुल रास नहीं आया।
इसके बाद जो हुआ उसने पूरी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया। सरकारी आदेश जारी हुआ और आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गानों के प्रसारण पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया। सोचिए जरा उस दौर में जब इंटरनेट, YouTube या म्यूजिक एप्स नहीं थे, तब रेडियो ही लोगों के मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन था। ऐसे में करीब 6 महीनों तक किसी भी चैनल पर किशोर कुमार की आवाज सुनाई ना देना उनके फैंस के लिए भी एक बड़ा झटका था। इस फैसले का असर सिर्फ किशोर कुमार तक सीमित नहीं रहा। जिन फिल्मों में उन्होंने गाने गाए थे उन फिल्मों के प्रमोशन पर भी असर पड़ा। फिल्म निर्माता परेशान हो गए क्योंकि उनके सबसे लोकप्रिय गायक की आवाज ही लोगों तक नहीं पहुंच पा रही थी। संगीत कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि उनके गाने रेडियो पर नहीं बज रहे थे। जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ा।
लेकिन इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि इस बैन के बावजूद किशोर कुमार की लोकप्रियता में जरा सी भी कमी नहीं आई। लोग उनके पुराने गाने रिकॉर्ड्स पर, कैसेट्स पर सुनते रहे और उन्हें उतना ही प्यार देते रहे बल्कि कुछ लोगों के लिए तो उनका यह कदम उन्हें और बड़ा बना गया। उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में देखा जाने लगा जिसने अपने आत्मसम्मान और आजादी को सबसे ऊपर रखा। कई लोग आज भी मानते हैं कि किशोर कुमार का यह फैसला सिर्फ एक ना नहीं था बल्कि यह उनके व्यक्तित्व की पहचान था। उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक कलाकार सिर्फ मनोरंजन करने वाला नहीं होता बल्कि उसके अपने सिद्धांत और सोच भी होती है। जब आपातकाल का दौर खत्म हुआ और देश में हालात सामान्य होने लगे तब धीरे-धीरे यह बैन भी हटा लिया गया। इसके बाद एक बार फिर रेडियो पर किशोर कुमार के गाने बजने लगे। जैसे ही उनकी आवाज वापस लौटी लोगों ने उन्हें उसी प्यार और उत्साह के साथ अपनाया जैसे पहले अपनाते थे। तो दोस्तों आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-बाय। टेक केयर।