क्या कागज के नोट बंद होने वाले हैं? अगर सोशल मीडिया पर आप इस तरह की खबरें देख या सुन रहे हैं तो अब वक्त है सच जानने का। साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का पूरा प्लान क्या है। नमस्कार, आप देख रहे हैं NDTV इंडिया और मैं हूं मुनीष देवगन। अगर आप WhatsApp या सोशल मीडिया पर यह खबर देखें कि कागज के नोट बंद होने वाले हैं, तो इसे पूरी तरह अनदेखा कर लीजिए क्योंकि यह खबर फेक है। कागज के नोट पहले की तरह चलते रहेंगे, लेकिन उसके साथ ही आपके वॉलेट में प्लास्टिक के नोट भी अपनी जगह बना लेंगे। आरबीआई ने पॉलीमर करेंसी नोट्स के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। हमारे सहयोगी चैनल एनडीTV प्रॉफिट ने 17 जुलाई को प्लास्टिक नोट जारी होने की संभावना के बारे में बताया था और अब सरकार ने खुद इस खबर की पुष्टि कर दी है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी है। सरकार ने बताया कि ₹10 और ₹20 के पॉलीमर करेंसी नोटों के फील्ड ट्रायल के लिए आरबीआई के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। अब सवाल उठता है कि अभी जो 10 और ₹20 के नोट चल रहे हैं उनका क्या होगा? और 10 और 20 के तो सिक्के भी आते हैं। क्या वह भी बेकार हो जाएंगे? आपको पैनिकिक करने या डरने की जरूरत नहीं है। फिलहाल ना तो सिक्के कहीं जा रहे हैं और ना कागज के नोट अपनी कीमत खो रहे हैं। कागज और सिक्के दोनों बदस्तूर जारी रहेंगे। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है। पायलट प्रोजेक्ट यानी किसी आईडिया की छोटे स्तर पर आजमाइश कि वो आईडिया काम करेगा या नहीं, कामयाब होगा या नहीं। उसमें कहां क्या दिक्कतें आ रही हैं ताकि फुल स्केल पर उस आईडिया को लॉन्च करने से पहले सारे रिस्क फैक्टर चेक कर लिए जाए। प्लास्टिक नोटों के मामले में आरबीआई इसी तरह छोटे-छोटे कदमों से ही आगे बढ़ना चाहता है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 और ₹20 के 200 करोड़ नोट छापे जाएंगे। सरकार ने संसद में बताया कि आरबीआई फील्ड ट्रायल के तहत 10 और ₹20 के 100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी करेगा। इन नोटों को टेस्टिंग बेसिस पर बाजार में उतारा जाएगा ताकि यह एनालाइज किया जा सके कि भारतीय माहौल में प्रैक्टिकली लोग इसे कितना अपनाते हैं। अगर ट्रायल कामयाब रहता है तो बड़े पैमाने पर पॉलीमर नोट जारी करने पर सोचा जा सकता है। अब आपके दिमाग में यह भी सवाल आ सकता है कि 10 और 20 के नोट ही क्यों? बड़े नोट क्यों नहीं? दरअसल छोटे मूल्य के नोट बार-बार इस्तेमाल में आते हैं। इसी वजह से जल्दी खराब हो जाते हैं। इन्हें बार-बार नष्ट करना पड़ता है। साथ ही नए नोट भी छापने पड़ते हैं। इस पूरे प्रोसेस में ठीक-ठाक पैसा खर्च होता है। पॉलीमर के नोट इस दिक्कत को दूर करने का दम रखते हैं। इससे ना सिर्फ लोगों के हाथ में यह कहीं लंबे समय तक टिके रहेंगे बल्कि नोटों की छपाई और रिप्लेसमेंट पर आने वाला खर्च भी घट जाएगा। असल में कागज के नोट जहां आसानी से फट जाते हैं या गल जाते हैं, वहीं पॉलीमर नोट को फाड़ना या तोड़ मरोड़ के खराब होना मुश्किल होता है। यह कहीं ज्यादा टिकाऊ होते हैं। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो कागज के नोट की तुलना में पॉलीमर नोट की लाइफ ढाई गुना से चार गुना तक ज्यादा होती है। यानी अगर ₹10 का एक नोट एक हाथ से दूसरे हाथ तक गुजरते गुजरते 5 साल में खराब होता है तो पॉलीमर नोट उसकी तुलना में 15 से 20 साल तक चल सकता है। हमारे जैसे देश में जहां कैश करेंसी का अच्छा खासा इस्तेमाल होता है, वहां पॉलीमर नोट एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है। जैसे अभी हमारे हाथ में पॉलीमर का एक नोट है। यह ऑस्ट्रेलियन डॉलर है। असल में यह एक बार गलती से वाशिंग मशीन में धुल चुका है। लेकिन यह पूरी तरह सलामत है। इसे फाड़ने की कोशिश करें तो देखिए यह कागज की तरह फटता नहीं है। इसके अलावा एक और बात पॉलीमर नोटों को बेहद खास बनाती है। वो है सिक्योरिटी फीचर्स। इन नोटों की काउंटर फीट या नकली करेंसी तैयार करना इतना आसान नहीं है। कागज के नोट पर तो हमने आपको बता दिया कि इन नोटों पर पॉलीमर आने के बाद भी फिलहाल कोई असर नहीं होगा। यह पहले की तरह ही मान्य करेंसी के तौर पर चलते रहेंगे। लेकिन यूपीआई का क्या होगा? क्या डिजिटल पेमेंट, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड जैसे पेमेंट मोड पर भी इसका कोई असर होगा। आरबीआई की माने तो इस बारे में अभी किसी नतीजे पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी।
पहली बात तो यह कि यह मोड्स भी कागज के नोट की तरह ही वैलिड रहेंगे। अब रही बात असर की तो वह तभी देखा जा सकता है जब पॉलीमर में सभी डिनॉमिनेशन के नोट मौजूद हो और अभी तो हम यहां सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट की बात कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर पॉलीमर नोट उतारने पर अभी कोई बात नहीं हो रही। वैसे भी रिजर्व बैंक पहले भी कहता रहा है कि कैश करेंसी और डिजिटल पेमेंट एक दूसरे को कॉम्प्लीमेंट करते हैं और भविष्य में भी दोनों साथ-साथ चलते रहेंगे।
ऐसा नहीं है कि देश में पहली बार पॉलीमर नोट लाने का आईडिया आया हो। इससे पहले 2012 में आरबीआई ने इस बारे में विचार किया था। लेकिन तब तकनीकी कारणों से इसे टाल दिया गया। अब समझते हैं कि दुनिया के किन और देशों में ऐसे प्लास्टिक या पॉलीमर नोट चलन में हैं। 50 से ज्यादा देश ऐसे हैं जहां कभी ना कभी पॉलीमर नोट चलन में रहे हैं। कुछ और बड़े देशों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूके और कनाडा जैसे कई देशों में प्लास्टिक के नोट इस्तेमाल होते हैं।
आरबीआई की नोट प्रिंटिंग यूनिट ने ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी कर दिया है। इसमें पॉलीमर सबस्ट्रीट शीट की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए बोलियां मंगाई गई हैं। पॉलीमर का नोट इन्हीं खास शीट्स पर प्रिंट किया जाता है। इसके लिए टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त रखी गई है। एक बार टेंडर प्रोसेस पूरा होने के बाद प्रिंटिंग और इसके सर्कुलेशन के लिए उतारने का काम शुरू होगा।
यानी अभी इसमें कुछ वक्त लग सकता है। आपको क्या लगता है?