इलाज के लिए विदेश गया एक्टर। सात समंदर पार तोड़ा दम। होटल के कमरे में पड़ा दिल का दौरा। सात दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार। भारत लौटी सिर्फ अस्थियां। सन रह गए फैंस परिवार को मिला सदमा। एक सितारा ऐसा जिसकी दीवानगी उसके चाहने वालों के सिर चढ़कर बोलती थी। जहां से वह गुजरता था वहां जवान लड़कियों के दिलों की धड़कनें बढ़ जाती थी।
लेकिन अफसोस जब वो सितारा इस दुनिया से रुखसत हुआ तब उसकी अंतिम यात्रा में ना चाहने वालों का कारवा था और ना ही फैंस को उसकी आखिरी झलक देखना नसीब हुआ। हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के सबसे चार्मिंग और एवरग्रीन स्टार देवानंद की। हाल ही में देवानंद के इकलौते बेटे सुनील आनंद के निधन की खबर आई तो बॉलीवुड में मातम पसर गया। सुनील 70 साल के थे और लंदन में उन्होंने आखिरी सांस ली।
सुनील ने शादी नहीं की थी। पिता की के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी अकेले गुजारी। सुनील की बहन और देवानंद की बेटी के परिवार की तरफ से सुनील आनंद की मौत की पुष्टि की गई। सुनील आनंद के निधन की खबरें जैसे ही लोगों तक पहुंची तो लोगों के जेहन में देवानंद की यादें ताजा हो गई क्योंकि इसे इत्तेफाक कहें या नियति का अजब संयोग लेकिन पिता बेटे की भी लगभग एक जैसे हालातों में ही हुई। बता दें कि लगभग 15 साल पहले वर्क कमिटमेंट्स और अपने मेडिकल चेकअप के लिए देवानंद लंदन गए थे। लेकिन अफसोस वो वहां से वापस नहीं आ पाए। लंदन से देवानंद की सिर्फ अस्थियां वापस आई।
3 दिसंबर 2011 को देवानंद का निधन की वजह से हुआ था। वो 88 साल के थे। लंदन के द वाशिंगटन माय फेयर होटल में उन्होंने आखिरी सांस ली। लंदन वो शहर था जिसे वह दुनिया में अपनी सबसे पसंदीदा जगह मानते थे। जहां उन्हें सुकून मिलता था और इसी सुकून की तलाश में उस साल भी वह लंदन गए थे। जहां उन्हें अपने कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट करवाने थे। इसके साथ ही वह वहां रहकर कुछ दिन आराम करना चाहते थे। लेकिन किसे पता था कि 3 दिसंबर की रात जब वह सो जाएंगे तो फिर कभी उठेंगे ही नहीं। दरअसल निधन से कुछ ही दिनों पहले देवानंद को लगातार सीने में दर्द की तकलीफ थी।
3 दिसंबर की रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उस वक्त उनके साथ उनके बेटे सुनील आनंद भी मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 3 दिसंबर की रात 10:00 बजे के करीब जब सुनील आनंद बाथरूम से बाहर आए तो उन्होंने देखा कि देव साहब कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। उन्होंने तुरंत डॉक्टर को बुलाया जिन्होंने चेकअप के बाद उनके निधन की पुष्टि की।
बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टर्स ने भी उन्हें डिक्लेअ कर दिया। देवांद की पत्नी कल्पना कार्तिक और उनकी बेटी देवनाथ अब मुंबई में थी। जैसे ही दुखद खबर उन्हें मिली वह फौरन लंदन के लिए रवाना हो गई। निधन के 7 दिन बाद 10 दिसंबर 2011 को देवानंद का अंतिम संस्कार किया गया। क्योंकि देव साहब को लंदन से बेहद लगाव था। इसलिए परिवार ने उनका अंतिम संस्कार लंदन में ही करने का फैसला किया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जाता है कि देवानंद की आखिरी इच्छा थी कि के बाद कोई भी उनका चेहरा नहीं देखे।
उनका अंतिम संस्कार लंदन के पुटनी वेले श्मशान घाट में किया गया। देवानंद जो अपनी फिल्म की प्लानिंग के लिए लंदन गए थे। वहां से भारत सिर्फ उनकी अस्थियां ही लौटी। बता दें कि देवानंद की अस्थियों को भारत लाकर गोदावरी नदी में विसर्जित किया गया था।