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CJP के बाद RHA का आंदोलन शुरू ? 46 लाख लोगों ने रख दीं 5 बड़ी मांगें, मचा हड़कंप!

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49 दिनों तक चले सीजेपी आंदोलन के बाद अब सोशल मीडिया पर एक और नई मुहिम ने जोर पकड़ लिया है। नाम है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन यानी आरएचए। दावा है कि कोई राजनीतिक संगठन नहीं बल्कि आम नागरिकों का अभियान है। Instagram पर कुछ ही वक्त में इस अभियान से लाखों लोग जुड़ चुके हैं।

लेकिन इसके साथ ही आरक्षण, जाति और पहचान को लेकर देश में नई बहस भी शुरू हो गई है। आखिर क्या है यह आंदोलन? इसकी मांगे क्या हैं? और क्यों इसकी इतनी चर्चा हो रही है। नीट परीक्षा विवाद को लेकर सीजेपी के आंदोलन के खत्म होने के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से वायरल हो रहा है। इस अभियान का नाम है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन जिसे लोग आरएचए के नाम से भी जान रहे हैं।

इस अभियान का दावा है कि इसका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। संगठन खुद को पूरी तरह एक गैर राजनीतिक नागरिक आंदोलन बताता है। उनका कहना है कि उनका मकसद किसी पार्टी का समर्थन या विरोध करना नहीं बल्कि देश में आरक्षण व्यवस्था पर खुलकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू करना है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि Instagram पर रिजर्वेशन हटाओ मूवमेंट नाम के इस अकाउंट ने बहुत कम वक्त में करीब 46 लाख फॉलोवर्स जोड़ लिए हैं। इस अकाउंट पर फिलहाल 109 पोस्ट मौजूद है। दिलचस्प बात यह भी है कि यह अकाउंट सिर्फ भारतीय सेना के आधिकारिक Instagram अकाउंट को ही फॉलो करता है। अगर इसके प्रोफाइल पर नजर डालें तो वहां डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के मशहूर नारे शिक्षित बनो आंदोलन करो संगठित हो का इस्तेमाल किया गया है।

इसके साथ हिंदी में लिखा गया है सारी जाति एक समान मेरा बस यह देश महान और आखिर में जय हिंद लिखा गया है। संगठन का कहना है कि यह उन नागरिकों की आवाज है जो मानते हैं कि देश में सुधार की जरूरत है। उनका दावा है कि आरक्षण का मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि नीति का विषय है। इसलिए [संगीत] इसे राजनीति के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। अपने पोस्ट में संगठन ने साफ कहा है कि [संगीत] उन्हें भी उम्मीद थी कि सरकार आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव करेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने इस अभियान की शुरुआत की।

अब बात करते हैं इस आंदोलन की मांगों की। संगठन का कहना है कि अगर देश से जातिवाद खत्म करना है तो सबसे पहले सरकारी व्यवस्था से जाति की पहचान हटानी होगी। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है कि सरकारी दस्तावेजों में जाति का जिक्र अनिवार्य ना हो। स्कूल, कॉलेज, नौकरी और दूसरी सरकारी प्रक्रियाओं में जाति पूछने की व्यवस्था खत्म की जाए। सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाएं समाप्त हो और पूरे देश में एक देश, एक पहचान भारतीय की अवधारणा लागू की जाए।

इस अभियान का अंतिम नारा है आरक्षण हटाओ, जातिवाद हटाओ। दिलचस्प बात यह भी है कि सीजेपी आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे कई नए अभियान सामने आने लगे हैं।

हाल ही में E20 जनता पार्टी राम से भी एक नया समूह चर्चा में आया जो एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति का विरोध कर रहा है। इस समूह की मांग है कि लोगों को 100% पेट्रोल खरीदने का ऑप्शन मिले। साथ ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है।

इतना ही नहीं दिल्ली के टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट संगठनों ने भी 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन की राजनीति और तेज हो सकती है। तो अब सोशल मीडिया सिर्फ फोटो और वीडियो शेयर करने का प्लेटफार्म नहीं रह गया। यहां से शुरू होने वाले अभियान अब लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं और बड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ रहे हैं। [संगीत]

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