बहुत बड़े पॉलिटिशियंस बहुत बहुत बड़े मीडिया वाले कहते थे क्या कर रहे हो कब तक बैठोगे नहीं देंगे इस्तीफा आप जानते नहीं होंगे इस सरकार को बहुत निर्दई सरकार है किसी की नहीं सुनती है ये सरकार अपनी मनमानी करती है बहुत जिद्दी सरकार है 36 दिन हर रोज मुझसे ये सवाल पूछा जाता था इस्तीफा नहीं होगा तो क्या होगा ये लोग इस्तीफा नहीं देंगे मुझे हर किसी ने कहा हर किसी ने कहा और जब मैं यूएसए से निकला था जब मैं यूएसए से निकला था।
तब कई सारे लोग कई सारे लोग ये कहते थे तुझे क्या लगता है तू इंडिया जाएगा इंडिया में क्रांति आएगी आ गई क्रांति देखा आपने सीजेपी की प्रतिक्रिया इसको बड़ी जीत के तौर पर बाबा यहां पर यह देख रहे हैं और इस दौरान करीब एक महीने तक यह आंदोलन चला है और इसका दायरा भी यहां पर बढ़ा लेकिन विपक्षी पार्टियां जब इसके अंदर शामिल हुई तो तेरा आंदोलन मेरा आंदोलन भी बहुत हुआ। अब बताइए जरा विपक्षी पार्टियां कैसे इसका क्रेडिट ले रही हैं? तो अब तो फिर वही होगा ना तेरी जीत मेरी जीत भी आपको देखने को मिलेगी। विपक्ष कहेगा हमने सरकार पे दबाव बनाया संसद के अंदर। हमने संसद नहीं चलने दिया। हम हार गए थे अपने मांग पे कि पहले इस्तीफा होना चाहिए।
तब जाके इस्तीफा हुआ। जो प्रदर्शनकारी है वो उन्होंने आपने देखा वो क्लेम कर रहे हैं कि हमने दबाव बनाया। इसके वजह से इस्तीफा हुआ।
लेकिन मूल बात ये है कि सरकार में जैसे अंग्रेजी में कहते हैं गुड सेंस प्रिवेल तो वो एक तरह से सदभाव वो सन्मार्ग आया है आया उनको और उन्होंने इस सेंसिटिविटी को समझते हुए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रधानमंत्री ने दिया है। यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। तो प्रधानमंत्री ने जब कब वीडियो जारी किया था उसके बाद से एक रीच आउट करने की कोशिश जो है वहां से हुई