यह हैं सोनम वांगचुक। इंडिया के अंदर यह आज किसी भी इंट्रोडक्शन के मोहताज नहीं है। क्योंकि एग्जाम लीग के मसले पर दिल्ली के अंदर होने वाले प्रोटेस्ट में शामिल होकर बल्कि यह कहिए कि वहां पर भूख हड़ताल करके उस प्रोटेस्ट का मेन चेहरा बन जाने की वजह से ही आज इनको भारत में रहने वाला मानो हर हर बच्चा जानता है। मगर साथियों इन्हीं सोनम वांगचटचुक से जुड़ा हुआ वो एक पहलू इनकी जिंदगी से जुड़ी हुई वो एक अजीब कहानी कि जो आज हम आपको सुनाएंगे वो शायद ही आप में से किसी ने पहले कभी सुनी होगी। यह कहानी आप में से ज्यादातर लोगों को ना सिर्फ हैरान कर देगी बल्कि इस कहानी के अंदर आपको सोनम वांगचुक के अलावा हिंदुस्तान की जो सबसे बड़ी पॉलिटिकल पार्टी है मतलब कि बीजेपी नजर आएगी। इस कहानी के अंदर आपको लद्दाख, कश्मीर, कश्मीर के मुसलमान और हां अगर सोनम वांगचुक के ही पर्सेक्टिव से कहा जाए तो धोखा भी नजर आएगा। तो साथियों सबसे पहले शॉर्ट में अगर एक नजर सोनम वांगचुक की जिंदगी पर ही डाल लें तो इनका जन्म 1966 में आज के लद्दाख के इलाके में हुआ था। इनको एजुकेशन और इनोवेशन के फील्ड में तो एक बड़ा ओहदा बहुत पहले ही मिल गया था। 90 के दशक में ही ये ऑलरेडी देश के पढ़े लिखे तबके में काफी मशहूर हो चुके थे। मशहूर होने की वजह वही सारे कारनामे थे जो इन्होंने एजुकेशन या फिर इनोवेशन के फील्ड में अंजाम दिए थे। मगर अगर बात की जाए इनकी असली पॉपुलैरिटी की आसान जबान में कहें तो उस मिलने वाली शोहरत की कि जिसके बाद यह हिंदुस्तान के हर-हर में मशहूर हो गए थे तो उसके पीछे कुछ और नहीं बल्कि आमिर खान की आने वाली एक बड़ी फिल्म थी। इस फिल्म को हम सब लोग थ्री इडियट के नाम से जानते हैं
और यह एक ऐसी फिल्म है कि जो खुद आमिर खान के पूरे करियर की भी सबसे कामयाब फिल्मों में गिनी जाती है। अब यह फिल्म सोनम वांगचुक के ऊपर डायरेक्टली बेस तो नहीं थी। शायद इंस्पायर्ड जरूर थी और अगर यह भी ना माना जाए जैसा कि बहुत सारे लोग एग्री नहीं करते हैं तब भी इतना तो जरूर है कि अगर आप लोग इस फिल्म को देखेंगे तो इस फिल्म के अंदर जो मेन किरदार दिखाया गया है उसकी जो पूरी कहानी है वो कहीं ना कहीं सोनम वांगचुक की असली जिंदगी से काफी मैच करती है। अब अगर इधर-उधर की बात ना करते हुए, डायरेक्ट उस कहानी पर आए कि जिसका जिक्र हमने बिल्कुल शुरू में किया था, तो इस कहानी की शुरुआत होती है 5 अगस्त 2019 के दिन से कि जब देश की संसद के अंदर इतिहास का एक अहम फैसला हुआ था। वो फैसला यह था कि जम्मू कश्मीर के इलाके से वो खास दर्जा हटा दिया गया कि जिसके जरिए से ही कभी जम्मू कश्मीर का भारत में विलय किया गया था। दूसरे शब्दों में कहें तो कश्मीर से आर्टिकल 370 का हटना यह वो फैसला था कि जिसको करने का वादा बीजेपी बहुत पहले से ही करती आ रही थी। मतलब हर इलेक्शन में ही उसकी जो वादों की लिस्ट हुआ करती थी। उनमें जम्मू कश्मीर से जो खास दर्जा है उसको हटाने का वादा हुआ ही करता था। 5 अगस्त 2019 के दिन फाइनली बीजेपी हुकूमत ने इस चीज पर तो अमल किया ही। साथ ही साथ इसी दिन एक और भी फैसला किया गया और वो यह था कि जम्मू कश्मीर से जो लद्दाख का इलाका था उसको बिल्कुल अलग कर दिया गया। मतलब जम्मू कश्मीर को एक अलग स्टेट बना दिया गया और लद्दाख को एक अलग स्टेट बना दिया गया और वो भी इन दोनों को केंद्र शासित प्रदेश मतलब कि यूटी बनाया गया था। मगर हां इन दोनों के बीच एक फर्क मौजूद जरूर था। वो फर्क यह था कि जहां एक तरफ जम्मू कश्मीर को एक ऐसे केंद्र शासित राज्य के तौर पर रखा गया कि जहां पर उसकी विधानसभा थी मतलब कि चुनाव होने थे और उसका अपना सीएम होना था। बिल्कुल वैसा ही कि जैसा कि दिल्ली के अंदर भी होता है क्योंकि दिल्ली भी जैसा कि हम जानते हैं कि केंद्र शासित राज्य है
मगर वहां पर भी उसकी विधानसभा है और वहां पर उसका सीएम भी चुना जाता है। मगर यही चीज नए-नए केंद्र शासित राज्य बने लद्दाख के केस में गायब नजर आई। मतलब यह कि जम्मू कश्मीर की तरह ही लद्दाख एक केंद्र शासित राज्य तो था मगर जम्मू कश्मीर की तरह उसके पास अपनी विधानसभा नहीं थी। जिसका मतलब यह हुआ कि वहां पर इलेक्शन नहीं होने थे। वहां पर उसका कोई सीएम नहीं होना था। बल्कि उसको एक ऐसे बंदे या फिर यह कहिए कि उसको एक ऐसे गवर्नर के द्वारा ही कंट्रोल किया जाना था कि जिस गवर्नर को केंद्र सरकार चुनती है। अब हुआ यह कि जम्मू कश्मीर से जब उसका खास दर्जा खत्म किया गया तो वहां के लोगों में नाराजगी तो दिखनी ही वो दिखी भी। वहां की जो बड़ी-बड़ी कुछ पॉलिटिकल पार्टीज हैं, उन्होंने खुले तौर पर इस चीज का विरोध भी किया। इसके अलावा इंडिया की नेशनल लेवल की जो बाकी अपोजिशन पार्टीज हैं, उन्होंने भी इसका विरोध किया जैसा कि कांग्रेस या इस तरह की कुछ और पार्टीज। मगर ऐसे माहौल में बीजेपी के इस फैसले को उस वक्त कुछ ऐसी पार्टी या कुछ ऐसे लोगों की तरफ से सपोर्ट जरूर मिला कि जिनको देखकर खुद बीजेपी को भी हैरानी हुई होगी। राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो एक पार्टी तो अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी थी। की दूसरी पार्टी मायावती जी की बीएसपी मतलब कि बहुजन समाजवादी पार्टी थी। जबकि अगर इन राजनीतिक पार्टियों से अलग हटकर उस एक मशहूर चेहरे की उस एक मशहूर नाम की बात करें कि जिस इंसान ने बिल्कुल उसी दिन ही अपना पूरा दिल खोलकर बीजेपी के इस फैसले का स्वागत किया था तो वह कोई और नहीं बल्कि लद्दाख के यही सोनम वांगचुक थे। वह इस फैसले के फौरन बाद बीजेपी के काफी कसीदे पढ़ते हुए नजर आए थे और उन्होंने ट्वीट करते हुए नरेंद्र मोदी और पीएमओ का शुक्रिया अदा किया था। उस ट्वीट का अगर आसान जबान में मतलब निकालें तो सोनम वांगचुक
ने यह कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने लद्दाख के लोगों का वह सपना पूरा कर दिया है कि जिस सपने के तहत वह लंबे वक्त से ही लद्दाख को एक यूटी मतलब के यूनियन टेरिटरी बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा सोनम वांगचुक ने इस ट्वीट के अंदर पिछले 30 साल के स्ट्रगल का भी जिक्र किया था कि किस तरह से लद्दाख के नेता 1989 से ही लगातार लद्दाख को एक यूनियन टेरिटरी बनाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे और आज उनका यह सपना पूरा हो चुका है। मगर उस वक्त जब सोनम वांगच क्योंकि ये इस तरह का ट्वीट कर रहे थे या फिर बाकी अलग-अलग तरीके से सरकार की इस फैसले को लेकर तारीफें कर रहे थे तो उनके वहमोगुमान में भी नहीं होगा कि बहुत जल्द ही आने वाले दिनों में मामला बिल्कुल इधर से उधर हो जाएगा। यह जो पूरे हालात हैं, यह जो तस्वीर है, जो उनको आज नजर आ रही है, यह पूरी तरीके से उलट हो जाएगी। और ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि फिर 2024 में ही यह देखा गया कि यही सोनम वांगचोक देश की सरकार के खिलाफ इसी मैटर पर ही बड़े लेवल पर प्रोटेस्ट कर रहे थे। मामला यह था कि सोनम वांगचोक या इनके बाकी जो लद्दाखी सपोर्टर्स थे या लद्दाख के आम लोग थे, उनका यह कहना था कि सरकार ने 2019 में लद्दाख को एक यूटी मतलब कि केंद्र शासित राज्य तो बना दिया था। मगर सिर्फ केंद्र शासित राज्य ही बनाया था। उसके अलावा जो और भी जरूरी मांगे थी उन पर तो कोई अमल किया ही नहीं गया। सिर्फ और सिर्फ वो कागज पर मौजूद हैं और उन पर आज तक कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। खासतौर से इन लोगों की जो मांग थी वो सिक्स्थ शेड्यूल को लेकर थी कि लद्दाख को भी सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल किया जाए। अब यहां पर अगर आपको नहीं पता है तो आसान जबान में बताते चलें कि जिस राज्य को भी सिक्स शेड्यूल में शामिल कर दिया जाता है उस राज्य के जो लोग होते हैं उनको एक खास तरीके की आजादी मिल जाती है। आजादी कुछ इस तरह की कि वो देश की मेन सरकार से अलग हटकर अपने यहां की जमीन, खेतीबाड़ी, अपने रीति रिवाज या इस तरह की बाकी चीजों से जुड़े हुए फैसले खुद ले सकते हैं। इनसे जुड़े हुए कायदे कानून भी खुद बना सकते हैं। इवन अगर सरकार इंटरफेयर करना भी चाहे तो यहां की इनकी जो अपनी बॉडी होगी, इनका जो अपना सिस्टम होगा वो उसको रोक भी सकता है। असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे देश के चार राज्य ऐसे हैं जो ऑलरेडी सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल हैं। मतलब यहां के लोगों को इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के थ्रू एक खास दर्जा मिला हुआ है और यहां पर सिस्टम ऐसे ही काम करता है। तो इसी चीज की मांग के लिए ही सोनम वांगचुक ने लद्दाख के अंदर 6 मार्च 2024 से अपना प्रदर्शन शुरू किया था।
पहले इन्होंने 21 दिन का क्लाइमेट फास्ट शुरू किया जो 6 मार्च से लेकर 27 मार्च तक चला और उसके बाद मामला धीरे-धीरे ठंडा होने लगा। मगर 2024 के ही सितंबर में एक बार फिर से मामला गर्माना शुरू हुआ और इस बार सोनम वांगचुक ने यह फैसला किया कि वह लेह से लेकर दिल्ली तक की पद यात्रा करेंगे। उन्होंने सितंबर की शुरुआत में यह पद यात्रा शुरू भी कर दी। उनके साथ लद्दाख के बाकी आम लोग भी थे कि जो लद्दाख के लेह से दिल्ली की तरफ पैदल आ रहे थे। 30 सितंबर 2024 के दिन तक यह तमाम लोग दिल्ली के बॉर्डर तक पहुंच भी गए। मगर इनको उसी खास बॉर्डर पर बाहर ही रोक लिया गया कि जहां पर कभी किसानों को रोका गया था। इसके बाद सोनम वांगचुक और उनके साथियों को हिरासत में ले लिया गया था और बाद में इन तमाम लोगों को छोड़ भी दिया गया था। मगर सोनम वांगचुक ने जब यह देखा कि आने वाले दिनों में भी अब सरकार की तरफ से किसी भी तरह की कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही है तो एक बार फिर से सोनम वांगचुक ने कुछ करने का फैसला किया और इस बार वह उसी जंतरमंतर पर आ गए कि जिस जंतरमंतर पर वह भूख हड़ताल करके एग्जाम लीक के मामले पर बैठे हुए हैं। यहां पर सोनम वांगचुक ने अपना अनशन शुरू किया। मगर यह अनशन बाद में खत्म भी कर दिया गया था। शायद इस वजह से कि अंदर ही अंदर किसी चिट्ठी वगैरह के जरिए से सरकार की तरफ से सोनम वांगचू को किसी तरीके का कोई भरोसा मिला था। मगर साथियों फिर धीरे-धीरे वक्त गुजरा एक के बाद एक दिन गुजरता गया और आखिरकार वो दिन आ गया कि जिस दिन सबसे बड़ी चिंगारी फूटी। यह दिन था 24 सितंबर 2025 का। इस दिन भी प्रोटेस्ट का कॉल था। लद्दाख के लेह के अंदर भीड़ जुटी हुई थी। दो हफ्ते से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचू के समर्थन में लोग इकट्ठा हो रहे थे। धीरे-धीरे भीड़ काफी बढ़ती गई और फिर इसी भीड़ से ही नौजवानों का एक जत्था निकला और लेह बंद का ऐलान करते हुए निकल पड़ा। रैली निकाली गई और फिर देखते ही देखते वायलेंस होने लगा। लेह के अंदर जगह-जगह पर आगजनी होने लगी। बीजेपी दफ्तर के ऊपर पत्थरबाजी हुई बल्कि उसको आग के हवाले कर दिया गया। यह हिंसा उस वक्त और भी ज्यादा बढ़ गई कि जब सिक्योरिटी फोर्सेस की तरफ से फायरिंग खोल दी गई। इवन चार लोगों की मौत तक हो गई। ठीक फिर एक दिन के गैप के बाद ही 26 सितंबर 2025 के दिन सोनम वंगचुक को पुलिस ने हथकड़ियां पहना दी। उनके ऊपर एनएसए लगाया गया। मतलब कि वो खास धारा कि जो किसी ऐसे इंसान पर लगाई जाती है कि जिसको देश की सिक्योरिटी के लिए खतरा समझा जाता है और उसके बाद उनको लेह से लगभग 1600 कि.मी. दूर राजस्थान की जोधपुर जेल में लाकर बंद कर दिया गया। अगले कुछ महीने तक सोनम वांगचुक जेल के अंदर ही रहे और फिर मार्च 2026 में आकर उनको आजाद कर दिया गया।
आजाद होने के बाद सोनम वांगचुक ले वापस जा चुके थे। खुद सोनम वांगचुक और उनका जो मुद्दा था मतलब कि शेड्यूल सिक्स यह सारी ही चीजें लगभग ठंडे बस्ते में जा चुकी थी। मतलब मीडिया वगैरह में कहीं पर दिखाई नहीं दे रही थी। मगर फिर जून के आखिर में मीडिया और सोशल मीडिया हर जगह पर सोनम वांगचुक की उस वक्त एंट्री हुई कि जब देश के अंदर एग्जाम लीक का मामला पीक पर चल रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी नाम की एक पार्टी वजूद में आ चुकी थी जो डिजिटल कैंपेंस के बाद अब जमीन पर भी उतरने का फैसला कर चुकी थी और जंतरमंतर पर प्रोटेस्ट भी शुरू हो चुका था। सोनम वांगचुक इसी प्रोटेस्ट का ही ना सिर्फ हिस्सा बने बल्कि बहुत जल्द ही इस प्रोटेस्ट का मेन चेहरा बन गए। खासतौर से तब कि जब जून के आखिर में उनकी तरफ से भूख हड़ताल का भी ऐलान कर दिया गया। अब बाकी यह प्रोटेस्ट किस तरह से आगे बढ़ा आने वाले दिनों में और क्या-क्या हुआ यह तो आप सभी लोग अच्छी तरह से जानते ही होंगे क्योंकि खबरें वगैरह देखते ही रहते होंगे। मगर अभी तक की इस वीडियो के जरिए से आपको यह तो क्लियर हो चुका होगा कि 2024 ही वो वक्त था कि जब से सोनम वांगचुक और मौजूदा सरकार का टकराव शुरू हुआ। वरना उससे पहले तक सोनम वांगचुक की पहचान एक ऐसे बड़े चेहरे के तौर पर ही थी कि जिनको लद्दाख के अंदर मौजूदा हुकूमत की पॉलिसीज के सपोर्टर के तौर पर देखा जाता था। सोनम वांगचुक कभी दिल खोलकर पॉलिसीज को सपोर्ट किया करते थे या कम से कम हर मुद्दे पर सरकार को लेकर एक सॉफ्ट कॉर्नर तो रखा ही करते थे और यही वजह थी कि जब सोनम वांगचुक ने एग्जाम लीग के मामले पर अपना यह अनशन वगैरह शुरू किया था तो शुरुआती दिनों से ही बहुत सारे लोगों की तरफ से इन तमाम चीजों को शक की निगाह से देखा गया था बल्कि आज भी बहुत सारे ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे कि जो इन तमाम मुद्दों पर सरकार के तो बहुत ज्यादा खिलाफ हैं खुलकर बोलते भी हैं मगर साथ ही सोनम वांगचुक जो कुछ भी कर रहे हैं या फिर सीजेपी पार्टी की तरफ से भी जो कुछ हो रहा है उस पर खामोशी बनाए रखते हैं बल्कि उसको शक की निगाह से देखते हैं।
इसके पीछे वजह सिर्फ सोनम वांगचुक का किसी दौर में मौजूदा हुकूमत की पॉलिसीज का सपोर्टर होना ही नहीं है बल्कि जो कॉकरोच जनता पार्टी है उससे जुड़े हुए लोग भी हैं। जी हां, कॉकरोच जनता पार्टी के जितने भी मशहूर चेहरे हैं, उनमें से ज्यादातर लोग ऐसे रहे हैं कि जो एक खास पार्टी मतलब कि आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए रहे हैं बल्कि आज भी उनको आम आदमी पार्टी से ही जोड़कर देखा जाता है। इवन इनके दोस्त सोशल मीडिया के ऊपर ऐसे बहुत सारे बयान या ऐसी बहुत सारी पोस्ट भी वायरल की जाती हैं कि जिनके अंदर अभी कुछ वक्त पहले तक इनको अपोजिशन लीडर ही मतलब कि राहुल गांधी के खिलाफ ही बोलते हुए या लिखते हुए देखा गया था। यही वजह है कि यह नोटिस किया गया है कि लगातार बहुत सारे दबाव के बावजूद भी देश की मेन अपोजिशन पार्टी मतलब कि कांग्रेस ने इस प्रोटेस्ट से दूरी बनाकर रखी है। बाकी दोस्तों हम जानते ही हैं कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। हर चीज को अलग-अलग नजरिए से देखा जाता है और हर चीज की बहुत सारी हकीकतें होती हैं। इस मामले पर आप लोगों की भी जो राय है वो आप कमेंट्स बॉक्स में दे सकते हैं। वीडियो अगर जानकारी से भरपूर लगी हो तो लाइक करें। दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसी ही नॉलेजेबल और हिस्टोरिकल वीडियोस हमेशा देखने के लिए हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब करने के साथ-साथ बेल आइकन को जरूर प्रेस