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आपका और हमारा DNA एकदम…PM मोदी ने इंडोनेशिया में ये क्या कह दिया?सब हंस पड़े!

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कि आप में इंडिया का डीएनए भारत इंडोनेशिया संबंधों का डीएनए वैसे मैंने देखा कि यहां भारत का गाना कुछ-कुछ होता है। बहुत ही लोकप्रिय है। आज मैंने प्रेसिडेंट प्रभोवो इसे इस पर कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर चलते हैं तो कुछ कुछ से भी आगे बढ़कर बहुत कुछ होता है।

साथियों आज सुबह ही मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने का भी सौभाग्य मिला। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] यह 140 करोड़ भारतीयों का यश है। यह भारतीय समुदाय के आप सभी साथियों का सम्मान है।

और सबसे बड़ी बात यह पुरस्कार इंडोनेशिया और भारत की घनिष्ठ मित्रता का एक और प्रतीक है। मैं इस मंच से भी राष्ट्रपति प्रभु इंडोनेशिया की सरकार और यहां की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। फ्रेंड्स, पिछले साल 26 जनवरी को भारत ने अपना गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया। 26, टू और सिक्स 2 + 6 इज इक्वलऔर मेरे मित्र का जन्मदिन भी 17 है।

वन प्लस उस समारोह में प्रेसिडेंट प्रभु चीफ गेस्ट के रूप में आए थे। उस यात्रा के दौरान हमें कई विषयों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर मिला। लेकिन उस यात्रा की एक बात मैं आज खास तौर पर याद करना चाहूंगा और उस बात को बड़े गौरव पूर्वक आज राष्ट्रपति जी ने यहां भी बड़े डंके के चोट पर बड़े शान से उल्लेख किया। मिस्टर प्रेसिडेंट आपने उस समय कहा था और आज फिर से कहा और आपने उस समय भी कहा था कि आप में इंडिया का डीएनए है। आपकी उस बात एक बात ने आज भी मैंने देखा सबसे ज्यादा तालियां उसी समय पड़ी और भारत में भी करोड़ों करोड़ों भारतवासियों का दिल आपने जीत लिया था। उस एक वाक्य ने भारतीयों के दिलों को छू लिया था। मैं आपकी ही उस बात को आगे बढ़ाता हूं।

जिस डीएनए की बात आपने की थी और जिस डीएनए की चर्चा आज आप सबके लिए कर रहे थे वो डीएनए आखिर है क्या? वह डीएनए म्यूचुअल ट्रस्ट से बना है। वो डीएनए साझी विरासत से बना है। वो डीएनए साजा स्मृतियों से बना है। वह डीएनए उन समुद्री हवाओं से बना है जिन्होंने हजारों वर्ष तक हमारे जहाजों को एक दूसरे के तटों तक पहुंचाया।

भारत इंडोनेशिया संबंधों का डीएनए उन संतों और बौद्ध भिक्षुओं से बना है जिन्होंने ज्ञान को सीमाओं में नहीं बांधा। यह उन उद्यमियों से बना है जिन्होंने केवल मसालों का व्यापार ही नहीं किया बल्कि संस्कृतियों के सेतु भी बनाए।

यह डीएनए को उन कलाकारों ने घड़ा है जिन्होंने रामायण और महाभारत को अपनी-अपनी भाषा में जिया। लेकिन उनकी आत्मा को को एक ही रखा। भारत इंडोनेशिया के संबंधों को इंडोनेशिया के जिंदा दिल नागरिकों ने यहां बैठे अनेक परिवारों ने सींचा है, सवारा है।

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