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पटौदी खानदान की बहु बनने के लिए शर्मिला टैगोर ने दी थी जीवन की सबसे बड़ी कुर्बानी, जानकर चौंक जाएंगे।

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पटौदी खानदान के परिवार में लगभग सभी ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने इंटरकास्ट वेडिंग की। फिर चाहे वह शर्मिला टैगोर हो या फिर उनकी बेटी सोहा अली खान। बंगाली हिंदू परिवार से होते हुए शर्मिला टैगोर ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब पटौदी मंसूर अली खान से शादी की थी जिसके लिए उन्होंने अपना धर्म भी बदला और नाम भी।

इस बारे में उनकी बेटी सोहा ने बताया बटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में सोहा ने कहा, मेरी पेरेंट्स की शादी [संगीत] में कोई दिक्कत नहीं आई। मां ने शादी से पहले अपना धर्म बदला और अपना नाम आयशा रखा। सभी के लिए यह बात काफी कंफ्यूजिंग थी क्योंकि मां [संगीत] कभी-कभी आयशा के नाम से साइन करती थी और कभी शर्मिला के नाम से साइन करती थी क्योंकि वह प्रोफेशनल फ्रंट पर शर्मिला टैगोर के नाम से जानी जाती थी तो उनका वही नाम रहा। पर आयशा भी है। दरअसल मंसूर अली खान ने जब] सुल्तान को बताया कि वह फिल्म एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं तो साजिदा सुल्तान ने तुरंत इस शादी के लिए हामी नहीं भरी थी।

उन्होंने पहले उनके सामने एक शर्त रखी थी। उनकी शर्त थी कि अगर शर्मिला अपना धर्म बदलकर मुस्लिम धर्म अपना लें और इस्लाम धर्म कबूल कर लें तभी दोनों की शादी हो सकती है। ऐसे में शर्मिला ने मंसूर अली खान के प्यार के लिए यह शर्त मान ली और इस्लाम धर्म कबूललिया और शर्मिला बेगम आयशा सुल्ताना बन गई। उन्होंने उस समय इंटरकास्ट मैरिज की थी जब लोग इस तरह के रिश्ते को एक्सेप्ट नहीं करते थे। लोगों ने शर्त लगाई थी कि यह शादी ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।

लेकिन शर्मिला ने इन सारी बातों को झूठा साबित कर दिया अपना रिश्ता ताउम्र निभाकर। कहा जाता है कि शर्मिला को मनाने के लिए मंसूर अली खान ने कभी गुलाब तो कभी खानदानी फ्रिज भेजे थे।शर्मिला के लिए मंसूर से एक-एक कर सात फ्रिज भेजे गए थे। तब जाकर शर्मिला ने शादी के लिए हां की थी। और यह फ्रिज बड़े खानदानों की निशानी मानी जाती थी।

शर्मिला की तरह ही उनके बेटे सैफ अली खान की शादी करीना कपूर से हुई है, जो पंजाबी फैमिली से ताल्लुक रखती है। जबकि उनकी बेटी सोहा अली खान की शादी कुणाल खेमू से हुई है, जो एक कश्मीरी पंडित है। शर्मिला खुद बंगाली परिवार से थी। उनके पिता बंगाली थे और मां असम से थी। शादी के बाद खुद मुस्लिम बनी। उनके परिवार ने इस बात की मिसाल दी कि एक साथ मिलकर कैसे रह सकते हैं

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