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चाइनीज ऐप ने भारत में मचाया तहलका! बीच सड़क पर हैक करली ए-रिक्शा

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क्या आपने कभी सोचा है कि आप सड़क पर जा रहे हो और आपकी गाड़ी का इंजन कोई दूर बैठा इंसान अपने मोबाइल से एक क्लिक पर बंद कर दे। किसी हॉलीवुड या सफाई फिल्म जैसा लगता है ना? लेकिन मध्य प्रदेश के उज्जैन और भोपाल से जो खबरें आई हैं, उसने पूरे देश के ई रिक्शा चालकों को दहशत में डाल दिया है। सवाल बड़ा है क्या एक चाइनीस मोबाइल ऐप के जरिए चलते हुए ई रिक्शा को बीच सड़क पर फ्रीज़ किया जा सकता है? क्या आपकी सेफ्टी एक बेसिक ब्लूटूथ ऐप के भरोसे चल रहा है और आखिर कैसे इस पूरे मामले ने एक बड़े एक्सटॉर्शन रैकेट और साइबर फ्रॉड का रूप ले लिया है? आज की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में हम इस पूरे सच को डिकोड करेंगे। उज्जैन और भोपाल में जो हुआ क्या उसके बाद पूरे देश में ईवी चालकों को अब डर लग रहा है और क्या इस ऐप को जल्द से जल्द बैन किया जाना चाहिए? खबर आती है बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से जहां 5000 से ज्यादा ई रिक्शास चलते हैं और पिछले कुछ दिनों में यहां एक बड़ा अजीब पैटर्न देखा गया। एक के बाद एक लगातार

ई रिक्शा चलते-चलते अचानक बंद होने लगे। जैसे ही गाड़ी रुकती अचानक एक अनजान लड़का वहां मैकेनिक बनकर पहुंचता और कहता कि भैया ₹300 दो अभी 2 मिनट में ठीक कर देता हूं। और हैरानी की बात तो देखिए वो बिना किसी बड़े टूल के कुछ ही सेकंड में गाड़ी स्टार्ट भी कर देता है। यह सिलसिला जब बढ़ा तो ई रिक्शा एसोसिएशन को शक हुआ। उन्होंने पुलिस को इनफॉर्म किया और वेडनेसडे की शाम को लोटी स्कूल त्यहार पर एक ड्राइवर ने एक ऐसी फेक मैकेनिक कोंगे हाथ पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। अरेस्ट हुए 18 साल के रितेश भानुपा ने जब पुलिस के सामने अपना मुंह खोला तो जो सच सामने आया वह होश उड़ा देने वाला था। कोई मैकेनिकल खराबी नहीं थी। यह पूरा खेल एक मोबाइल ऐप के जरिए चल रहा था और यह सिर्फ उज्जैन तक महदूद नहीं था बल्कि भोपाल के जिनसी चौराहा और ओल्ड भोपाल इलाके में भी कई ड्राइवर्स ने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी गाड़ियां एक ही दिन में चार-चार बार अचानक बंद हुई। जहां उन्हें अनलॉक करवाने के नाम पर ₹400 तक देने पड़े। दर्शकों ₹300400 कोई बहुत बड़ी कीमत नहीं है। लेकिन एक रिक्शा चालक के लिए सोचिए जो शायद उसके पूरे दिन भर की कमाई थी वो किसी ने सिर्फ एक बटन के जरिए छीन ली।

अब बात करते हैं उस ऐप की जिसने पूरे देश में बवाल मचा रखा है। बैट पीएमएस। सोशल मीडिया पर इस ऐप के वीडियोस आग की तरह वायरल हो रहे हैं। जिसे देखकर लोगों में डर फैल गया है कि क्या उनकी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सेफ है? तो चलिए समझते हैं इसकी टेक्निकिटी को। बैड बीएमएस या Zyzon जैसे एप्स कोई हैकिंग टूल्स नहीं है। यह असल में लेजिटमेट एप्लीकेशनेशंस हैं जिन्हें शज़न ग्रनर्जी टेक्नोलॉजीस जैसी चाइनीस कंपनीज़ ने बनाया है। इनका असली काम होता है लिथियम आयन बैटरी के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मॉनिटर करना। इस ऐप से आप बैटरी का वोल्टेज, चार्जिंग लेवल, टेंपरेचर और बैटरी हेल्थ देख सकते हैं। इसमें एक फीचर होता है चार्ज एंड डिस्चार्ज कंट्रोल। यानी आप बैटरी से करंट का आउटपुट ऑन या ऑफ कर सकते हैं। और इसी फीचर का फायदा उठाकर यह साइबर अपराध सामने आया है। अब सवाल ये उठता है कि कोई अनजान आदमी आपकी ई रिक्शा की बैटरी को कैसे कंट्रोल कर सकता है? क्या यह कोई हाईटेक सॉफ्टवेयर हैकिंग है? तो जवाब है बिल्कुल नहीं। यह हैकिंग नहीं है बल्कि सिक्योरिटी की एक बहुत बड़ी लापरवाही है। दरअसल मार्केट में बिकने वाले कई सस्ते या लो कॉस्ट ई रिक्शा में जो लिथियम बैटरी लगती है उनका बीएएमएस ब्लूटूथ लो एनर्जी पर काम करता है। जब यह गाड़ियां फैक्ट्री से आती है तो इनका ब्लूटूथ सिस्टम ओपन होता है या फिर इनमें कोई पासवर्ड नहीं होता। अब ऐसी सिचुएशन में अगर कोई शातिर दिमाग इंसान 10 से 15 मीटर की रेंज में खड़ा है

तो वो अपने मोबाइल का ब्लूटूथ ऑन करके बैड बीएमएस ऐप से उस अनसिक्यर्ड बैटरी को बिना किसी परमिशन के कनेक्ट कर सकता है और कनेक्ट होते ही जैसे ही वो ऐप पर डिस्चार्ज ऑफ का बटन दबाता है बैटरी से मोटर को मिलने वाली पावर कट हो जाती है और ई रिक्शा बीच सड़क पर झटके मारते हुए रुक जाती है। सवारियां परेशान हो जाती है। ड्राइवर हैरान हो जाता है और वहीं यह फ्रॉडस्टर मैकेनिक का छोला ओढ़कर उनसे पैसे लूटने आ जाता है। कुछ जगहों पर तो खुद कंपनीज़ और सर्विस सेंटर्स के स्टाफ पर ही एक्सटॉशन के आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने ही ऐसे लोगों को बेवकूफ बनाया और उनसे पैसे वसूल लिए। जब से उज्जैन और भोपाल का ये केस सामने आया है और सोशल मीडिया पर प्रैंक के नाम पर चलती रिक्शा को बंद करने के वीडियोस वायरल हुए हैं। तब से एक नया डर फैल गया है। लोग इसे साइबर वॉर और ईवी सेफ्टी पर बड़ा सवाल मान रहे हैं। भैया आज ई रिक्शा रोक रहे हैं। कल को ईवी गाड़ी रोक दी तो लेकिन यहां थोड़ा शांत होकर सोचना जरूरी है। यह डर हर ईवी यूजर के लिए नहीं है। अगर आपके पास कोई अच्छी ब्रांड की इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार है तो उनका कम्युनिकेशन सिस्टम हाईली इंक्रिप्टेड होता है। जिसे ऐसे किसी ऐप से एक्सेस नहीं किया जा सकता। यानी आपकी ई स्कूटी, आपकी ई कार बिल्कुल सेफ है। यह आप उसे नहीं हैक कर सकते हो और हैक कर भी नहीं रहा है। यह जैसे आप ब्लूटूथ स्पीकर से कनेक्ट करते हैं, वैसे ब्लूटूथ से कनेक्ट कर देता है। यह खतरा सिर्फ उन सस्ती ई रिक्शास पर है जिनकी बैटरीज में सिक्योरिटी फीचर्स को इग्नोर किया गया है। लेकिन इस प्रैंक और फ्रॉड से चलते हुए व्हीकल का अचानक रुकना किसी बड़े रोड एक्सीडेंट को दावत भी दे सकता है। सोचिए पीछे से कोई भारी वाहन आ रहा हो और अचानक ई रिक्शा फ्रीज हो जाए। यह किसी की जान पर बन सकती है। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। इस पूरे मामले पर ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर इंद्रपाल राजपूत और साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका इलाज बहुत सिंपल है। अगर आप ई रिक्शा ड्राइवर हैं तो तुरंत अपनी बैटरी कंपनी ऑथराइज सर्विस सेंटर जाएं और अपनी बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम पर एक पासवर्ड लगवा लें। जैसे ही आप पासवर्ड सेट कर देंगे, कोई भी आपकी बैटरी से कनेक्ट नहीं कर पाएगा। बिल्कुल आसान है। जाइए और बोलिए कि भाई इसमें पासवर्ड लगा दो और उसको स्ट्रांग लगाना। अब भैया अनजान लोगों से सावधान रहिए।

अगर आपकी गाड़ी अचानक बंद होती है तो किसी भी राह चलते अनजान मैकेनिक को पैसे ना दीजिए। तुरंत कंपनी के टोल फ्री नंबर या ऑथराइज्ड पर्सन को कॉल करें और पुलिस को चेतावनी दे दें। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति अचानक आकर पैसे मांगे तो डरना मत। उसका वीडियो बनाएं। फोटो लें और तुरंत 100 या 112 या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इनफॉर्म कर दीजिए। टेक्नोलॉजी जितनी हमारी जिंदगी आसान बनाती है, हमारी एक छोटी सी लापरवाही उसे उतना ही बड़ा हथियार बना देती है। ई रिक्शा हमारे देश की पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीड की हड्डी है जिससे लाखों गरीब परिवारों का चूल्हा जलता है। उनकी मेहनत की कमाई पर इस तरह के साइबर वार बेहद शर्मनाक है। क्योंकि ₹300 400 इनसे वसूल के कोई बहुत अमीर तो बन नहीं जाएगा लेकिन प्रैंक के नाम पर इन विचारों को परेशान करना बहुत गलत है। जरूरत है अब सरकार और ईवी मैन्युफैक्चरर्स इन मामले को गंभीरता से लें और हर एक बैटरी पैक को इंक्रिप्टेड और पासवर्ड प्रोटेक्टेड बनाना मैंडेटरी करें ताकि कल को कोई भी एरागरा एक मोबाइल ऐप लेकर किसी गरीब की रोजी रोटी और मासूम सवारियों के जान के साथ खिलवाड़ ना कर सके। आपको जो भी लगता है, जो भी आपकी राय है हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। आप देख रहे हैं वन इंडिया। मैं हूं आकर्ष कौशिक। [संगीत] नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ। [संगीत]

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