Cli

एक छोटा सा कीड़ा और खत्म हो गई 189 जिंदगीया? क्या है ये खौफ!नाक मामले का सच

Uncategorized

रात के 11:30 बज रहे हैं। डोमेनिकन रिपब्लिक के पोतोप्लाता शहर का ग्रेगोरियो लुपेरोन इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपनी रात की खामोशी में डूबा हुआ है। रनवे की लाइट्स चल रही हैं। समुंदर की हवा चल रही है और एक बड़ा चमकदार बोइंग 757 अपनी जगह से धीरे-धीरे घूम रहा है रनवे की तरफ।

इसके अंदर बैठे हैं 176 पैसेंजर्स। ज्यादातर जर्मन टूरिस्ट्स जो डोमेनिकन रिपब्लिक में अपनी छुट्टियां बिता के घर लौट रहे थे। फ्रैंकफर्ट उनका इंतजार कर रहा था। कॉकपिट में एक एक्सपीरियंस्ड कैप्टन अपनी सीट पर बैठे हैं। 24,750 फ्लाइट आवर्स का तजुर्बा लिए हुए। इंजंस स्टार्ट हो चुके हैं।

एटीसी से क्लीयरेंस आ चुकी है। सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल लग रहा है। टेक ऑफ रोल शुरू होता है। और तब कैप्टन की नजर अपनी एयर स्पीड इंडिकेटर पर जाती है। वो नीडल जो उन्हें बतानी चाहिए थी कि प्लेन कितनी स्पीड से भाग रहा है रनवे पर वो हिल नहीं रही। वह बिल्कुल जीरो पर खड़ी है। किसी नॉर्मल पायलट ने यहां टेक ऑफ रोक दी होती, रनवे छोड़ दी होती, मेंटेनेंस बुलाया होता। लेकिन कैप्टन अहमद एदेम ने एक ऐसा डिसीजन लिया जो अगले कुछ मिनट में इन 189 लोगों की तकदीर हमेशा के लिए बदल देने वाला था। उन्होंने टेक ऑफ कंटिन्यू रखने का फैसला किया और वो बोइंग 757 रात की ठंडी डोमिनिकन हवा में हवाओं में उठ गया। तो सवाल यह है क्या यह प्लेन फ्रैंकफर्ट पहुंचा? क्या यह 189 लोग अपने घर अपने परिवारों के पास लौट पाए या इस रात का अंत कुछ और ही लिखा था।

और सबसे बड़ा सवाल अगर कैप्टन के एयर स्पीड इंडिकेटर ने काम करना बंद किया तो ऐसा क्यों हुआ? कोई मैकेनिकल फौल्ट, कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट? नहीं। जवाब इतना अजीब है, इतना अनएक्सेक्टेड है कि आज भी जब कोई एिएशन एक्सपर्ट इस क्रैश का जिक्र करता है तो सुनने वाले का मुंह खुला का खुला रह जाता है। एक छोटा सा जीव, एक कीड़ा उसने इस पूरी कहानी की नींव रख दी थी। चलिए शुरू से एक-एक डिटेल के साथ इस पूरी कहानी को समझते हैं।

तारीख थी 6 फरवरी 1996। जगह थी डोमेनिकन रिपब्लिक। कैरेबियन का एक छोटा खूबसूरत मुल्क जो अपने टूरिस्ट बीचेस और रिसोर्ट्स के लिए दुनिया भर में जाना जाता था। शहर था पुअरतोपलाता। समुंदर के किनारे बसा हजारों जर्मन और यूरोपियन टूरिस्ट्स का फेवरेट डेस्टिनेशन। पुअर्थतोपलाता का ग्रेगोरियो लुपेरोन इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक छोटा एयरपोर्ट था। एक ही रनवे लेकिन इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए इक्विप्ड। समुंदर से इतना करीब कि रनवे के किनारे से नीले पानी की झलक साफ दिखाई देती थी।

इस रात इस एयरपोर्ट पर फ्लाइट नंबर एलw की तैयारी हो रही थी। जिसे लोग बिरगेन एयर फ्लाइट 301 के नाम से जानते थे। रूट था पुअर्थतो प्लाटा से फ्रैंकफर्ट जर्मनी। बीच में दो स्टॉप्स के साथ। पहला कनाडा के गैंडर में और दूसरा जर्मनी के बर्लिन में। एक बहुत लंबा रात भर का सफर डोमेनिकन रिपब्लिक से सीधा यूरोप तक। बिरगिन एयर एक टर्किश चार्टर एयरलाइन थी। इस्तांबुल में बेस्ड 1988 में शुरू हुई। कोई शेड्यूल्ड एयरलाइन नहीं। टूर ऑपरेटर्स इन्हें बुक करते थे खुसूसी फ्लाइट्स के लिए। बिरगनेर का खास रिश्ता था जर्मन के टूरिस्ट ऑपरेटर्स से। डोमेनिकन रिपब्लिक में जर्मन टूरिस्ट्स की भारी तादाद थी और उन्हें लाने ले जाने का काम बिरगनेर जैसी एयरलाइंस किया करती थी। लेकिन यहां एक ट्विस्ट था। बिरगनेयर डोमेनिकन रिपब्लिक में डायरेक्टली ऑपरेट नहीं कर सकती थी अपने टर्किश लाइसेंस के साथ। तो उन्होंने एक लोकल शेल कंपनी बनाई आलस नेसनालिस के नाम से मतलब नेशनल विंग्स। कागजों में यह एक डोमेनिकन एयरलाइन थी।

असल में यह बिरगेनयर ही थी। एक नई शर्ट पहने। बाद में जब जर्मन जर्नलिस्ट्स ने इस कंपनी का हेड क्वार्टर ढूंढने की कोशिश की तो पता चला एक सीधी सी पुरानी बिल्डिंग जिसके अंदर एक आदमी बैठा था जो अपना बिजनेस कार्ड भी नहीं दे सकता था। अब बात करते हैं उस एयरक्राफ्ट की जो इस रात पोर्थो पप्लाटा की रनवे पर खड़ी थी। बोइंग 757 225 रजिस्ट्रेशन टीसी जिन ट्विन इंजन नैरो बॉडी जेट अपने जमाने का एक बहुत ही कैपेबल एयरक्राफ्ट बोइंग 757 अपनी एफिशिएंसी रेंज और पावरफुल इंजंस की वजह से इंटरनेशनलली बहुत पॉपुलर था। यह खास एयरक्राफ्ट बिल्ड हुआ था फरवरी 1984 में। पहले ईस्टर्न एयरलाइंस के लिए फ्लाई करता था। फिर कनाडा की नेशन एयर के पास गया और जुलाई 1993 में बिरगेन एयर ने इसे लीज़ पर लिया। इंज थे दो Rolls Ryce RB 211 टर्बो फैन पावरफुल रिलायबल प्रूवन। इस एयरक्राफ्ट की एक बहुत जरूरी बात जो इस पूरी कहानी की नीव है। यह बोइंग 757 रजिस्ट्रेशन टीसी जेन जनवरी 12, 1996 को पुअर्थतो प्लाटा एयरपोर्ट पर लैंड हुआ था और उस दिन के बाद से यह वहां खड़ा था। उड़ा नहीं था।

बस खड़ा था रनवे के किनारे। डोमेनिकन रिपब्लिक की गर्मी में खुले आसमान के नीचे पिछले 25 दिन से। लेकिन उस एयरक्राफ्ट के कुछ बहुत ही खास हिस्सों में कुछ हो रहा था। जिसके बारे में पायलट्स को, मेंटेनेंस क्रू को किसी को भी कोई अंदाजा नहीं था। पहले पायलट्स की बात करते हैं। कैप्टन थे अहमद एरदेम, उम्र 60 साल, टर्किश नेशनल बिरगनेर के सबसे सीनियर पायलट्स में से एक। 24,750 फ्लाइट आवर्स का तजुर्बा। अगर रोज 8 घंटे फ्लाई करें तो इसका मतलब है लगभग 8. साल सिर्फ हवा में बिताना। बोइंग 757 पर 10,875 आवर्स। लेकिन एक जरूरी बात उनकी पिछली सिमुलेटर ट्रेनिंग थी मार्च 12, 1995 को क्रैश से ऑलमोस्ट 1 साल पहले इमरजेंसी प्रोसीजर्स रिफ्रेश किए हुए काफी वक्त हो गया था। उनके साथ कॉकपिट में थे फर्स्ट ऑफिसर आईकुट गर्गिन 35 साल कुल 3500 फ्लाइट आवर्स। लेकिन सिर्फ 71 घंटे बोइंग 757 पर। कैप्टन और को पायलट के बीच यह बड़ा एक्सपीरियंस गैप और अथॉरिटी गैप बाद में एक जरूरी रोल निभाने वाला था।

तीसरे कॉकपिट मेंबर थे रिलीफ पायलट मोहलिस एरेनोसोगू 51 साल 15000 टोटल आवर्स 121 आवर्स ऑन 757 लॉन्ग हॉल फ्लाइट्स में कैप्टन या फर्स्ट ऑफिसर को रेस्ट देने के लिए। बाकी क्रू में छह फ्लाइट अटेंडेंट्स और चार मेंटेनेंस इंजीनियर्स, कुल 13 क्रू मेंबर्स। अब बात करते हैं पैसेंजर्स की। 176 लोग, 167 जर्मन टूरिस्ट्स जो डोमेनिकन रिपब्लिक के रिसोर्ट्स में छुट्टियां बिता के घर लौट रहे थे। ज्यादातर ओगर टूर्स के पैकेज हॉलिडे के थ्रू। नौ पोलिश पैसेंजर्स।

इनमें से दो पोलैंड की पार्लियामेंट के इलेक्टेड मेंबर्स थे। जिबनीव गॉडजिला चेक और मारिक वल्लगुस। कोई हनीमून से लौट रहा था। कोई पहली बार डोमेनिकन रिपब्लिक घूमने आया था। कोई ऑफिस की थकान के बाद कुछ दिन आराम करके वापस जा रहा था। सबके अपने सपने और अब अपने घर की तरफ। उन्हें नहीं पता था कि आज रात उनका घर उनसे बहुत दूर था। उस शाम डिपार्चर से कुछ घंटे पहले एक प्रॉब्लम आई। जो बोइंग 767 पहले इस फ्लाइट को ऑपरेट करने वाला था। वो मैकेनिकल फौल्ट की वजह से ग्राउंड हो गया। बिरगिनेर ने कहा पुअर्थतो प्लाटा में एक 757 खड़ा है .

25 दिन से उड़ा नहीं है लेकिन उसे प्रिपेयर किया जा सकता है। क्रू भी बदलनी पड़ी। कैप्टन एरदेम गर्गिन और एवरेनो सोगलू रात के 2:15 पर एयरपोर्ट पर पहुंचे। एक फ्लाइट अटेंडेंट और लेट आई। 1 घंटे की और डिले। लास्ट मिनट एयरक्राफ्ट चेंज, नया क्रू, 25 दिन से खड़ा एयरक्राफ्ट और इन सबके बीच प्री फ्लाइट चेकक्स होने लगे। प्री फ्लाइट वॉक अराउंड में पायलट्स खुद एयरक्राफ्ट के बाहर घूमते हैं। टायर्स, कंट्रोल सरफेसेस, इंजंस, लाइट्स, और जरूरी पीटॉट ट्यूब्स। पीटोट ट्यूब का नाम शायद आपने पहले नहीं सुना हो तो एक सेकंड रुक के समझते हैं क्योंकि यही इस कहानी का दिल है। पीटॉट ट्यूब एक छोटा सा सिलड्रिकल मेटल ट्यूब होता है पेंसिल के साइज का, जो एयरक्राफ्ट के नोज के पास लगा होता है। इसका काम एक ही है। हवा की स्पीड मेजर करना।

जब एयरक्राफ्ट आगे बढ़ता है, हवा इस ट्यूब में धकेलती है और इस प्रेशर को रीड करके कॉकपिट का एयर स्पीड इंडिकेटर बताता है कि प्लेन कितनी स्पीड से भाग रहा है रनवे पर। स्पीड का पता चले बिना पायलट अंधा है। बोइंग 757 में तीन पिट और ट्यूब्स लगते हैं। कैप्टन के लिए फर्स्ट ऑफिसर के लिए और एक स्टैंड बाय ताकि अगर एक फेल हो बाकी काम करते रहे। जब एयरक्राफ्ट लंबे समय के लिए ग्राउंड पर खड़ा रहता है। इन पिटो ट्यूब्स में इंसेक्ट्स या डस्ट घुस सकती है। इसीलिए स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है पिटो ट्यूब्स पर स्पेशल कवर्स लगाओ। टीसी जैन 25 दिन से डोमेनिकन रिपब्लिक की गर्मी में खड़ा था। इन्वेस्टिगेटर्स बाद में कंफर्म करते हैं कि क्रैश से कम से कम दो दिन पहले कवर्स नहीं थे। इंजन टेस्ट के लिए उतारे गए और वापस नहीं लगाए गए। और डोमेनिकन रिपब्लिक में एक खास चीज थी। मड डॉबर ओस्प सेलफ्रॉन कैमेंटेरियम एक काला पीला छोटा सा वॉस्प जिसे लोकल डोमेनिकन पायलट्स भी जानते थे और जिससे डरते थे। यह वॉस्प सिलड्रिकल होल्स में मड से घोंसला बनाता है। एक-एक खवारा केयरफुली पैक करते हुए। एक पिटो ट्यूब पतला सिलड्रिकल अंदर से डार्क इसे परफेक्ट घर लगता था। दो दिन डोमेनिकन गर्मी, एक खुला ट्यूब। क्या हुआ उस ट्यूब के अंदर?

100% सर्टेनिटी के साथ कभी कंफर्म नहीं हो सकता क्योंकि पिटो ट्यूब्स क्रैश में ओशन की गहराई में चली गई और कभी रिकवर नहीं हुई। उस रात प्री फ्लाइट में क्रू को कुछ अनयुअल नहीं दिखा। एयरक्राफ्ट ठीक लग रहा था। फ्यूल लोड पहले लेग गैंडर तक के हिसाब से लोडेड सिस्टम्स चेक नॉर्मल इंजन स्टार्ट नॉर्मल। रात के 1:15 बजे पैसेंजर्स ने बोर्डिंग शुरू की। जर्मन टूरिस्ट डोमेनिकन रिपब्लिक की यादों के साथ हंसते हुए अपने घर की राह पर। रात के 11:30 बजे एयरक्राफ्ट पुशबैक हुआ। ईटीसी ने क्लीयरेंस दी रनवे 08 पर लाइन अप करो सीधा समंदर की तरफ। रात के 11:42 बजे फ्लाइट 301 ने रनवे 08 पर लाइनअप ली।

बाहर थोड़े बादल दूर समंदर पर तूफान लेकिन रनवे का मौसम ठीक था। कैप्टन अर्दम ने थ्रस्ट लेवर्स आगे की। फुल टेक ऑफ पावर। गर्गिन ने कॉल दिया पावर सेट। एयरक्राफ्ट ने स्पीड पकड़ी। Rolls रॉयस इंजंस का पावरफुल रो रनवे पर तेजी से आगे और तब 80 नॉट्स पर गर्गिन ने स्टैंडर्ड कॉल की 80 नॉट्स। कैप्टन अर्दम ने अपनी एयर स्पीड इंडिकेटर देखी। वो नीडल हिली नहीं थी। जीरो पर थी। कोई रीडिंग नहीं। अर्दम ने इमीडिएटली कहा, माय एयर स्पीड इंडिकेटर नॉट वर्किंग। और यहीं इस एक सेकंड में इस पूरी ट्रेजडी की नीव थी। एक बाय द बुक पायलट यहां क्या करता? टेक ऑफ अबॉट करता, ब्रेक्स लगाता, मेंटेनेंस को बुलाता। लेकिन कैप्टन अर्धम ने एक डिफरेंट फैसला किया। फर्स्ट ऑफिसर गर्गिन की एयर स्पीड इंडिकेटर सही काम कर रही थी। अर्धम ने गर्गिन से कहा, यू टेल मी तुम अपनी रीडिंग से मुझे स्पीड बताते रहो और टेक ऑफ कंटिन्यू किया। बोइंग 757 ने पोएटो प्लाटा की रनवे छोड़ी। रात की डोमेनिकन हवा में उठ गया।

कैबिन में पैसेंजर्स ने वह फमिलियर जर्क फील किया जब प्लेन जमीन से उठा। कुछ ने खिड़कियों से बाहर देखा। एयरपोर्ट की लाइट्स नीचे होती जा रही थी। कंप्लीटली रूटीन। एयरक्राफ्ट क्लाइंब करने लगा। 500 फीट, 1000 फीट, 1500 फीट। और तब कॉकपिट में एक अजीब चीज हुई। कैप्टन अर्दम की एयर स्पीड इंडिकेटर जो टेक ऑफ रोल में जीरो थी, अचानक जिंदा हो गई। नीडल हिलाई, रीडिंग आने लगी। अर्दम ने कहा, इट बिगेन टू ऑपरेट। राहत मिली होगी। लेकिन असलियत में जो हो रहा था, वह बहुत ही डेंजरस था। वो पिटो ट्यूब मड डॉबर वॉस्ट के नेस्ट से ब्लॉक था। हवा की एक्चुअल स्पीड मेजर नहीं कर सकता था। लेकिन जब एयरक्राफ्ट क्लाइम करता है, एटमॉस्फियर की प्रेशर चेंज होती है और एक ब्लॉक्ड पिटो ट्यूब एक अजीब बिहेवियर करता है। वो चेंज होती एयर प्रेशर को स्पीड की तरह रीड करने लगता है।

मतलब जैसे एटीट्यूड बढ़ती है, कैप्टन का गेज बोलता है स्पीड बढ़ रही है। जबकि असल में सिर्फ एटीट्यूड बढ़ रही है। वो एयर स्पीड इंडिकेटर एलटीमीटर की तरह काम कर रहा था लेकिन स्पीड दिखा रहा था। एक बहुत कन्विंसिंग झूठ। 3500 फीट पर फ्लाइट के सिर्फ 1 मिनट 30 सेकंड बाद कैप्टन अर्दनम ने ऑटो पायलट इंगेज किया। यहां एक जरूरी बात बोइंग 757 का ऑटो पायलट डिफॉल्ट सेटिंग में कैप्टन की इंस्ट्रूमेंट से रीडिंग लेता है। मतलब वो ब्लॉक्ड झूठ बोलने वाली इंडिकेटर अब पूरे एयरक्राफ्ट को कंट्रोल कर रही थी। 4700 फीट पर ऑटो पायलट ने कैप्टन की इंडिकेटर देखी 350 नॉट्स। असलियत में एयरक्राफ्ट की स्पीड थी सिर्फ 220 नट्स। ऑटो पायलट सोचा बहुत फास्ट स्लो डाउन करो। और उसने नोज ऊपर उठाया। इंजंस की पावर कम की। एयरक्राफ्ट का नोज ऊपर गया। एक्चुअल स्पीड और कम होने लगी। लेकिन कैप्टन की इंडिकेटर बोल रही थी स्पीड बढ़ रही है। 6668 फीट पर कैप्टन की इंडिकेटर बोल रही थी 352 नॉट्स।

एयरक्राफ्ट एक एबनॉर्मली हाई नोज अप एटीट्यूड में था और तब ओवर स्पीड वार्निंग बजा। आप बहुत फास्ट जा रहे हैं। अर्दम ने कहा दिस इज नॉटेंट और अलार्म बंद कर दिया। लेकिन साथ ही फर्स्ट ऑफिसर गर्गिन की इंडिकेटर जो सही काम कर रही थी बोल रही थी स्पीड 200 नॉट्स है और घट रही है। गर्गिन ने बोला कैप्टन माय एयर स्पीड इज डिक्रीजिंग। एक कॉकपिट में दो बिल्कुल अलग रीडिंग्स। एक बोल रहा था बहुत फास्ट। दूसरा बोल रहा था बहुत स्लो। दोनों पायलट्स ने सोचा दोनों इंस्ट्रूमेंट्स ही गलत है। क्या करें? यह वो लम्हा था जहां अनरिलायबल एयर स्पीड प्रोसीजर फॉलो करना था। ऑटो पायलट डिस्कनेक्ट करो। इंज फुल पावर एयरक्राफ्ट स्टेबलाइज करो।

लेकिन वो प्रोसीजर बर्जन एयर के ऑफिशियल चेक लिस्ट में उस वक्त था ही नहीं और कंफ्यूजिंग वार्निंग्स और भी आए। रडर रेशियो, मैक एयर स्पीड कॉशन, बीप, अलर्ट, लाइट, एक के बाद एक। कैबिन में पैसेंजर्स को कुछ पता नहीं था। उन्हें लगा होगा शायद टर्बुलेंस है। कोई अनाउंसमेंट नहीं आई थी। और तब एक और अलार्म और यह वाला बिल्कुल अलग था। स्टिक शेकर बोइंग 757 में एक सिस्टम होता है जो पायलट के योक को लिटरली हिला देता है। वाइब्रेट करता है जब एयरक्राफ्ट स्टॉल के करीब होता है। स्टॉल मतलब एयरक्राफ्ट इतना स्लो हो जाता है कि विंग्स पर से लिफ्ट खत्म हो जाती है और एयरक्राफ्ट कंट्रोल से बाहर हो जाता है। स्टिक शेकर चालू हुआ। गर्गिन ने कैप्टन को सजेस्ट किया नोज नीचे करो। इंज पुश करो। रिलीफ पायलट एवरेनेस सोगलू ने भी यही कहा। लेकिन कैप्टन अर्दम उस वक्त एक अलग रियलिटी में थे। उनका इंस्ट्रूमेंट बोल रहा था 352 नॉट्स। ओवर स्पीड अलार्म बजा था। तुम बहुत फास्ट हो और इस कॉन्टेक्स्ट में स्टिक शेकर उन्हें समझ ही नहीं आया। उन्होंने थ्रोटल्स बैक की। इंजंस की पावर और कम की। एयरक्राफ्ट जो ऑलरेडी स्टॉल के करीब था उसकी स्पीड और कम हो गई। अर्दम की आवाज सीवीआर पर रिकॉर्ड हुई। टर्किश में नेओलियो व्हाट द हेल इज गोइंग ऑन। गर्गिन ने कहा, डोंट पुल बैक। प्लीज डोंट पुल बैक।

गर्गिन के पास भी कंट्रोल था। 757 में दोनों सीट्स पर एक्टिव कंट्रोल्स होते हैं। अगर चाहता तो अपनी साइड से डायरेक्टली नोज नीचे कर सकता था। लेकिन कैप्टन की अथॉरिटी के सामने उसने अपने हाथ रोक लिए। ऑटो पायलट फाइनली डिस्कनेक्ट हुआ। लेकिन तब तक बहुत लेट हो चुका था। एयरक्राफ्ट स्टॉल हो गया। नोज एक झटके से नीचे गई। एयरक्राफ्ट रोल करने लगा। लेफ्ट विंग नीचे। नोज सीधा डाउन। कैबिन में आसमान और समुंदर एक दूसरे की जगह बदलते हुए जो लाइट्स ऊपर थी वो नीचे होने लगी। तेज झटका, चीखें, सामान गिरने लगा। ग्रेविटी का पता नहीं चल रहा था। सीवीआर पर जो लास्ट वर्ड्स थे टर्किश में वो एक पायलट की चीख थी जो समझ गया था कि क्या हो रहा है लेकिन अब कुछ भी नहीं कर सकता था।

रात के 11:47 पर सिर्फ 5 मिनट के बाद टेक ऑफ के बोइंग 757 टीसीजीईएन पुअर तो प्लाटा से लगभग 14 नॉटिकल माइल्स दूर अटलांटिक ओशन में सीधा नोजडाउन एटीट्यूड में पानी से टकराया। इंपैक्ट इतनी तेज थी कि एयरक्राफ्ट प्रैक्टिकली इंस्टेंटली टूट गया। पानी में भारी धड़कने की आवाज और फिर खामोशी। 189 लोग कैप्टन से लेकर पैसेंजर्स तक सबका सफर वहां खत्म हुआ। रेस्क्यू ऑपरेशंस उस रात ही शुरू हो गए। डोमेनिकन रिपब्लिक कोस्ट गार्ड नियर बाय वेसल्स बाद में यूएस और इंटरनेशनल टीम्स। लेकिन यह सर्च एंड रेस्क्यू नहीं था। कोई जिंदा नहीं था। यह एक रिकवरी ऑपरेशन था। समुंदर की सरफेस पर रेकेज के टुकड़े, सीट्स, लगेज, फ्यूजलाच के हिस्से, फ्रैंकफर्ट में फैमिलीज रात भर फोन पर थी। फ्लाइट कब पहुंचेगी और जवाब आया जो कभी नहीं सुनना चाहते थे

। ब्लैक बॉक्सेस का तो अलग ही ड्रामा था। सीवीआर और एफडीआर अटलांटिक ओशन की 7200 फीट गहरी तह में थे। इतनी गहराई पर कोई इंसान नहीं जा सकता। यूएस नेवी ने एक स्पेशल रिमोटली ऑपरेटेड एंड सीयूआरवी केबल अंडर वाटर रिकवरी व्हीकल। 22 दिन की मेहनत के बाद 28 फरवरी 1996 को सीयूआरवी ने ओशन फ्लोर पर दोनों ढूंढे और सरफेस पर ले आए। दोनों वर्किंग कंडीशन में थे।

डाटा इंटैक्ट था और जब इन्वेस्टिगेटर्स ने यह डाटा निकाला इस एक्सीडेंट की पूरी कहानी सामने आई। हर सेकंड डॉक्यूमेंटेड कैप्टन की कंफ्यूज्ड वॉइस फर्स्ट ऑफिसर की वार्निंग, स्टिक शेकर और वो आखिरी चीख। डोमिनिकन रिपब्लिक की एिएशन इन्वेस्टिगेशन अथॉरिटी खुता इन्वेस्टिगादोरा द एक्सडियंतेस आइरेयास ने लीड किया। उनके साथ यूएस एनटीएसबी बोइंग रोल्स रyस जर्मन फेडरल ब्यूरो क्योंकि विक्टिम्स जर्मन थे। एयरलाइन टर्किश थी। मल्टीपल कंट्रीज इनवॉल्व थे। एफडीआर से कंफर्म हुआ कि कैप्टन की एयर स्पीड इंडिकेटर ने टेक ऑफ ने कुछ भी मेजर नहीं किया। क्लाइम में फॉल्स रीडिंग्स देने लगी। जैसे एटीट्यूड बढ़ी गेज ने स्पीड दिखानी शुरू की। 350, 352 वो नंबर्स एक्चुअल स्पीड नहीं थी।

ब्लॉक्ड ट्यूब की वजह से एक अजीब फिनोमिनन था। सीवीआर से पता चला कि कैप्टन ने ओवर स्पीड अलार्म बंद किया। दिस इज नॉटेंट जबकि वो सबसे इंपॉर्टेंट था। पता चला कि फर्स्ट ऑफिसर और रिलीफ पायलट ने सजेशंस दिए लेकिन इतने हल्के, इतने पोलाइटली कि कैप्टन ने उन्हें सीरियसली नहीं लिया। पिटोट ट्यूब्स वो कभी रिकवर नहीं हुई। ओशन की गहराई में खो गई। तो टेक्निकली 100% सर्टेनिटी के साथ कंफर्म नहीं हो सकता कि एग्जजेक्टली क्या ब्लॉक था। लेकिन इन्वेस्टिगेटर्स ने क्लूस जोड़े। आइस नहीं। डोमिनिकन रिपब्लिक में फरवरी में टेंपरेचर काफी वार्म था। पिटोट ट्यूब कवर मेंटेनेंस क्रू ने कहा कवर्स नहीं थे और मड डॉबर वॉस्प डोमेनिकन रिपब्लिक में कॉमन लोकल पायलट से भी जाना जाता था। इन्वेस्टिगेटर्स ने कंक्लूड किया कि यही सबसे लाइकली कल्पेट था।

फाइनल रिपोर्ट में प्राइमरी कॉजेस लिस्टेड हुए। पहला कैप्टन ने 80 न्स पर ही एयर स्पीड इंडिकेटर फेल देखकर टेक ऑफ अबॉर्ड करना चाहिए था। यह सबसे बड़ी गलती थी। दूसरा एयर में एयर स्पीड एनॉमली पर अनरिलायबल एयर स्पीड प्रोसीजर फॉलो नहीं किया क्योंकि वो प्रोसीजर बर्गिन एयर के चेक लिस्ट में था ही नहीं। तीसरा स्टिक शेकर की वार्निंग को इग्नोर किया जो स्टॉल का सीधा सिग्नल था। चौथा क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट फेलियर। जूनियर पायलट्स ने कैप्टन को फोर्सफुली चैलेंज नहीं किया। फर्स्ट ऑफिसर डायरेक्टली इंटरवीन कर सकता था लेकिन कैप्टन की अथॉरिटी के सामने नहीं किया। पांचवा मेंटेनेंस कैप पिटोट ट्यूब कवर्स का ना लगना एक सिस्टमैटिक फेलियर था। क्रैश के बाद बर्गनयर की रेपुटेशन कंप्लीटली टूट गई। प्लेेंस ग्राउंड हो गए। पैसेंजर्स ने बुकिंग बंद कर दी और अक्टूबर 1996 में सिर्फ 8 महीने बाद bgin ने बैंकरप्सी डिक्लेअ कर दी। लेकिन एिएशन के लिए जरूरी चेंजेस आए।

एफए ने डायरेक्टिव जारी किया कि अब पायलट ट्रेनिंग में स्पेसिफिकली ब्लॉक्ड पिटॉट ट्यूब सिनेरियो शामिल होगा। फ्लाइट 301 के बाद यह ट्रेनिंग मैंडेटरी हो गई। बोइंग को कहा गया कि 757 में नया वार्निंग ऐड करो कि तुम्हारे इंस्ट्रूमेंट्स डिसए्री कर रहे हैं और पायलट्स को एबिलिटी दो कि ऑटो पायलट कौन से पिटोट ट्यूब से रीडिंग ले। क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट ट्रेनिंग दुनिया भर में स्ट्रेंथन हुई। जूनियर पायलट्स क्लियरली और फोर्सफुली इंटरवीन करें अगर कैप्टन गलती कर रहा हो। सीन्योरिटी बाद में पहले एयरक्राफ्ट बचाओ और दुनिया भर में पिटोट ट्यूब कवर्स मैंडेटरी हो गए। कोई ए्बिग्विटी नहीं। 2016 में बीएएई सिस्टम्स ने लेजर बेस्ड एयर स्पीड सेंसर डेवलप किया जिसमें वॉस्प या आइस की ब्लॉकेज का डर ही नहीं। सीधा फ्लाइट 301 जैसी ट्रेजडीज से इंस्पायर होकर। 6 फरवरी 1996 यह वो रात थी.

जब डोमेनिकन रिपब्लिक के पुअर तोपलाता एयरपोर्ट से 189 लोग एक रूटीन चार्टर फ्लाइट पर सवार हुए। जर्मन टूरिस्ट्स जो घर लौट रहे थे पोलिश पार्लियामेंटेरियंस टर्किश क्रू सबके अपने सपने अपने इंतजार एक छोटे से ट्यूब में शायद सिर्फ कुछ ग्राम मड एक छोटे से वॉस्प की मेहनत का नतीजा वो पूरी रात बदल गई और एक एक्सपीरियंस्ड कैप्टन 24750 आवर्स का तजुर्बा लिए हुए एक डिसीजन लिया जिसे रोकना पॉसिबल था और जो उस रात अटलांटिक के अंधेरे पानी में 189 के साथ डूब गया। यह थी बर्गन एयर फ्लाइट 301 की कहानी। एक ऐसे छोटे से जीव की वजह से जो एक ट्यूब में मड लेकर घुस गया। एक पूरी दुनिया बदल गई और 189 लोग जो उस रात घर लौटना चाहते थे वो हमेशा के लिए अटलांटिक के पानी का हिस्सा बन गए। अगर आपको लगता है कि आज आपने कुछ ऐसा जाना जो आपने पहले नहीं सुना था तो इकबाल प्रोडक्शन को अभी सब्सक्राइब करो। बेल आइकॉन जरूर दबाओ क्योंकि हम लाते हैं ऐसे टॉपिक्स जो पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी में कोई नहीं कवर करता। रियल स्टोरीज, डीप रिसर्च और वो सच्चाइयां जो टेक्स्ट बुक्स में नहीं मिलती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *