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2 साल तक कैद, पिटबुल से निगरानी, अब मुजफ्फर नगर केस मे योगी भेजेंगे य!म के पास

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कोई पैसा नहीं है। कोई चीज़ नहीं मिलती। यह जो इससे कूड़े का इस्तेमाल करते थे मारने का। 24 घंटे में एक बार चौकर की रोटी, चार रोटी और नमक और सूखी मिर्च। कोई बात नहीं। मोबाइल, आधार, सारा खुल। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के दौर में कोई इंसान किसी को 2 साल तक बंधक बनाकर रख सकता है?

वह भी ऐसी यातनाएं देकर जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। जी हां, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक ऐसी ही सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां एक दोना फैक्ट्री में 12 मजदूरों को नरक जैसी जिंदगी जीने पर मजबूर किया जा रहा था। लेकिन जब पुलिस की छापेमारी हुई तो जो सच सामने आया उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

मुक्त हुए मजदूरों के आंसू और उनके शब्द थे कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने हमें नई जिंदगी दी है। तो चलिए क्या है उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बधुआ मजदूरी के एक सनसनीखेज मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब उन मजदूरों की दर्द भरी दास्ता सामने आ रही है। जिन्हें करीब 2 साल तक कथित तौर पर बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दी गई। तीतावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक दोना फैक्ट्री पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 मजदूरों को मुक्त कराया था।

अब इन मजदूरों के चेहरे पर आजादी की मुस्कान है और उनके शब्द है। क्या हुआ आपके साथ? हमारे साथ बोल के हमको पैसे का लालच देके हमको बुला लाया गया अंबाला से। बोलो हम ₹12,000 महीना देंगे। तीन टाइम चाय तीन टाइम खाना ना यहां चाय मिलता था ना खाना मिलता चौकर की रोटी मिलती 24 घंटा बाद वो भी नमक रोटी मिलता था अच्छा

पैसा नहीं है कोई चीज नहीं मिलती परिवार से कभी कोई बात नहीं कोई बात नहीं मोबाइल आधार सारा कुछ ले लिया सब चीज ले ले थे सब ले ले किस तरह से आपको पीटते थे कैसे टॉर्चर करते हैं बेल्ट से मार काम नहीं करेंगे तो मारेगा से मार के हां परिवार से इस बीच बात नहीं हुई। बात मेरे भाई से किए हुए हैं। अब बात हुई है। हां बात हुई पुलिस ले गए आपको। वहां एक तो लड़का उधर से भगाया गया था। मेन मालिक था वो मेहमानी गया था कहीं पे रिशेदारी में तो उसका बाप आया था वो गेट खोला था।

तो उसी के झांसे में वो लड़का को भगाया गया। वह लड़का भाग करके उसको लपटाया भी तो लोग निकल पाया नहीं। वो आ के थाना रुका। वो बेचारा ने हमको छुड़वाया पुलिस को बहुत प्रशासन को एक कुत्ता भी वहां पर रखा एक नहीं दो है जी दो कुत्ते हैं एक गेट के बाहर रहता है गेट के अंदर मंगलवार को एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से भाग निकलने में सफल हुआ उसने पुलिस को अंदर चल रहे बदुआ मजदूरी के खेल की जानकारी दी सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और श्रम विभाग की टीम ने फैक्ट्री पर छापा मार दिया छापेमारी के दौरान 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया जिन्हें बिहार राजस्थान उत्तराखंड हरियाणा और नेपाल समेत विभिन्न स्थानों से नौकरी और अच्छी कमाई का झांसा देकर यहां लाया गया था। सर 24 घंटे काम करवाते हैं।

जब तक लाइट रहेगी लाइट गई बस उतने में कट्टे पैक करो, धोना पैक करो फिर लाइट आ जाती है। सो पाते नहीं थे। अब काम करेंगे बंदे को नींद आएगी। नींद आएगी तो बेल्ट बजाएंगे। तमंचा दिखाएंगे। जो हाथ में आ गया वो मार देते थे। आदमी प्रताड़ित हो जाए। सर ये पहुंचे थे बाहर जाते घूमने। वहीं से बंदे को कहते हम काम करोगे हम कैसे करेंगे काम। तो 8 घंटे ड्यूटी बताया दोनो पत्ते की फैक्ट्री बताया पूरा खाना पीना बढ़िया मिलेगा कपड़े लत्ते मिलेंगे नहाना धोना आराम से व रहना ₹1000 सूखे मिलेंगे इसी जंगल में आ गए सर और यहां आकर सीधे लॉकअप में बंद कर दिया अच्छा फिर क्या कुछ हुआ आपके साथ में यहां पे फिर यहां के काम करो 24 घंटे और भी अगर आग लगी तो मार पड़ती है सारे बंदों मार पड़ती है खाने में क्या देते थे 13 लोग खाने में 24 घंटे में एक बार चौकर की रोटी चार रोटी और नमक और सूखी मिर्च कितने लोग थे और पुलिस ने कितने बरामद किए और कहां है सर बंदे हम 13 थे। 13 बंदे सब लोग साथ में हैं।

हमारा सिर सिर गंजा करके फिर बेल्ट बजाते हैं सिर में। जैसे सिर फट जाता है। फट जाता है। फिर उनको बोरी बंद करके टांग देते हैं। फिर रात में हम लोग जैसे सो गए। फिर लाइट बंद कर दी। उसके बाद बोरी बंद किया उठा के ले गए। फेंकाते सर बहुत अच्छा लग रहा है। छूट गए हम। अपने घर पहुंच जाएंगे बच्चों के पास। उत्तर प्रदेश पुलिस का। बहुत-बहुत धन्यवाद मुजफ्फरनगर पुलिस का जो हमें मुक्त कराया। मुक्त कराए गए मजदूरों ने जो कहानी सुनाई उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। मजदूरों के मुताबिक उन्हें लगातार मारपीट और प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। खाने के नाम पर सूखी रोटियां दी जाती थी। जबकि उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड तक छीन लिए गए थे। इतना ही नहीं फैक्ट्री में दो पेटबुल कुत्ते भी रखे गए थे ताकि कोई मजदूर भागने की हिम्मत ना कर सके। बुधवार को भावुक कर देने वाला दृश्य उस समय देखने को मिला जब मुक्त कराए गए मजदूरों के परिजन उनसे मिलने मुजफ्फरनगर पहुंचे। कई महीनों और कुछ मामलों में वर्षों बाद अपने परिजनों को सामने देखकर मजदूरों की आंखें नम हो गई। परिजनों ने भी पुलिस और प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि अगर समय रहते कारवाई नहीं होती तो शायद उनके अपनों का पता भी नहीं चलता। पुलिस ने इस मामले में शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जबकि फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान की तलाश में दो विशेष टीमों का गठन किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित की गई है जो पूरे प्रकरण की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सामने आए बंधवा मजदूरों के मामले को बेहद चौंकाने वाला बताते हुए कहा है कि यह सामान्य अपराध की घटना नहीं बल्कि यह खस्ता हाल और धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है। राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्ट्स पर कहा कि मजदूरों से बिना मजदूरी दिए काम कराया गया। उन्हें कुत्तों से कटवाया गया। भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए और मवेशियों का चारा खिलाया गया। उन्होंने इसे इंसानी गरिमा पर सीधा हमला बताया और कहा कि पीड़ितों का न्याय के साथ पुनर्वास कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पुलिस ने चार मजदूरों के बयान न्यायालय में दर्ज करा दिए हैं। जबकि अन्य के बयान भी कराए गए हैं। सभी मजदूरों का चिकित्सय परीक्षण कराया गया है और उनकी काउंसलिंग भी चल रही है।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मजदूरों ने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 में उनके एक साथ टोपी उर्फ़ अर्जुन को निर्मम हत्या कर शव को बोरे में भरकर फेंक दिया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने हत्या का एक अलग मुकदमा भी दर्ज कर लिया और मामले की जांच तेजी से कर दी गई। इससे टॉर्चर करते थे ये सब। ये इससे कूड़े का इस्तेमाल करते थे इसे मारने का। ये सब चीजें। एसएसपी मुजफ्फरनगर ने बताया कि आरोपी मजदूरों को रेलवे स्टेशन व अन्य जगहों से 10,000 से ₹12,000 की कमाई का लालच देकर और फिर उन्हें बंधक बना लेते थे और करते थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों ने कुछ लोगों को प्रताड़ित भी किया था जिसके चलते तीन लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें से एक मृतक का पता लग गया कि वह व्यक्ति कौन था जिसकी से हो गई है। इन मौतों के चलते मामले में धाराएं बढ़ा दी गई हैं।

एसएसपी ने बताया कि अभी दो और लोगों की तलाश की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि जिन मजदूरों की मौत हो जाती थी उनके शव को कैसे छिपे थे। छुड़ाए गए लोगों में बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान राज्यों के निवासी हैं तथा एक नेपाल का भी व्यक्ति है चोकर की सूखी रोटी खिलाते हैं। जो 12 लोग मुक्त कराए गए हैं उनके शरीर पर गंभीर चोट के निशान है तथा उनको मुक्त कराया गया तो उनसे पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि इस तरह से उनको डेढ़ से दो साल से वहां पर बंधक बनाया गया था। 10 से 12,000 या कभी 8,000 का लालच दे के यह लोग नौकरी के नाम पर रेलवे स्टेशन, बस अड्डे तथा विभिन्न स्थानों से इनको ले जाते थे तथा वहां पर बंधक बना लेते थे।

इनसे फिर जबरदस्ती काम कराते थे। एक टाइम रोटी देते थे। वह भी सूखी रोटी देते थे जो कि चोकर की रोटी होती। पिटबुल डॉग रखते हैं ताकि इनको प्रताड़ित कर सके। साथ ही लोहे के कुछ इंस्ट्रूमेंट रखते हैं जिन्हें गर्म करके मजदूरों को प्रताड़ित करते थे। साथ ही साथ जो फैन बेल्ट होता है उसे कोड़े के रूप में इस्तेमाल करते थे। मजदूरों के शरीर पर कई निशान हैं। काफी गंभीर चोट हैं। कई के रिब्स टूटे हुए हैं। जब इन मुक्त हुए मजदूरों के परिजन मुजफ्फरनगर पहुंचे तो वहां हर किसी की आंखें नम थी। महीनों और सालों बाद अपने अपनों को जिंदा देखकर लोग पुलिस का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे थे। पुलिस ने इस मामले में शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को जेल भेज दिया है।

मुख्य आरोपी अंकित बालियान की तलाश में दो विशेष टीमें लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक एसआईटी का गठन किया गया है जो वैज्ञानिक तरीके से इस पूरे रैकेट की जांच कर रही है। सभी 12 मजदूरों का मेडिकल टेस्ट और काउंसलिंग कराया जा रहा है।

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