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56 विमानों की डील से बदला खेल ! PM Modi के विज़न ने रचा रक्षा इतिहास !

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56 विमानों की इस ₹21,935 करोड़ की डील में से 16 विमान स्पेन से उड़कर सीधे भारत आएंगे। जबकि बाकी के 40 एयरक्राफ्ट वो पूरे के पूरे भारत में फ्रॉम स्क्रैच मतलब बिल्कुल शुरुआत से बन रहे हैं। टाटा एडवांस सिस्टम और एयरबस का यह गठजोड़ भारत के डिफेंस [संगीत] मैन्युफैक्चरिंग का नया ब्लूप्रिंट है। यह सिर्फ पार्ट्स को जोड़ना नहीं यानी कि असेंबलिंग तक सीमित नहीं है। यह भारत को अपने पैरों पर खड़े होने की जमीन देता है। एक समय था जब भारत की पहचान दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस इंपोर्टर्स आयासकों में होती रही है। इस निर्भरता के कारण हमारे सामने रणनीतिक और सुरक्षा दोनों तरह की चुनौतियां भी है। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। इसके लिए नीतियों के स्तर पर बड़े रिफॉर्म किए गए। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज रक्षा क्षेत्र में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट की नई संभावनाएं बनी है।

एक मिलिट्री एयरक्राफ्ट को बनाने में हजारों बारीक पुर्जे लगते हैं। और आपको जानकर गर्व होगा कि देश भर के एमएसएमईस यानी हमारे छोटे और मध्यम उद्योग इस एयरक्राफ्ट के लिए सर्टिफाइड पार्ट्स की सप्लाई कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब है वडोदरा से जो विमान उड़ान भर रहा है उसमें देश के कोने-कोने का पसीना और भारत का दिमाग होता है। और इसका सबसे [संगीत] बड़ा ग्लोबल इंपैक्ट यह होने वाला है कि जब हम अपने देश में मिलिट्री एिएशन का इतना बड़ा हब बना लेते हैं तो हम सिर्फ अपनी जरूरत पूरी नहीं करते। हम दुनिया के सामने [संगीत] एक मजबूत विकल्प बनकर भी उभरते हैं। C295 एयरक्राफ्ट की कुछ ऐसी ही बेजोड़ और घातक खासियत है जो इसे भारतीय वायु सेना का सबसे ट्रस्टेबल वर्क होस बनाती है। इसके साथ ही यह विमान अलग-अलग मिशनंस के हिसाब से भी ढाला जा सकता है। इस विमान में एक डिजिटल कॉकपिट मौजूद है। इसमें टॉप डेक एयनिक सिस्टम लगा है। जिसमें कॉकपेट के अंदर बड़ी डिजिटल स्क्रीन होती है। यह पायलट को रात के अंधेरे में या भयंकर तूफान में भी रास्ता ढूंढने टैक्टिकल नेविगेशन में मदद करता है। C295 विमानों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का बनाया गया स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट लगाया गया। अगर दुश्मन इस पर मिसाइल [संगीत] दागता है तो यह मिसाइल खुद ब खुद ऑन इट्स ओन उस मिसाइल को डिटेक्ट करके उसे हवा में ही डिफ्लेक्ट कर सकता है। बात इंजन की करें तो इसमें दो शक्तिशाली प्रैक्ट एंड विटनी PW127G टर्बो प्रॉप इंजन लगे हैं जो इस विमान को 480 किमी/ घंटे की स्पीड से उड़ने [संगीत] में मदद करते हैं।

इतना ही नहीं एक बार ईंधन भरने पर करीब 5000 कि.मी. तक का सफर यह विमान तय कर सकता है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे भारत का एक चक्कर यह कवर कर सकता है। 2014 तक देश का कुल डिफेंस प्रोडक्शन 400 करोड़ के आसपास था। आज यह बढ़कर लगभग ₹180 हजार करोड़ तक पहुंच गया है। और साथियों एक तरफ देश में रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ा है। दूसरी तरफ हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट अभूतपूर्वक गति से बढ़ रहा है। 2014 तक भारत करीब 700 करोड़ रुपए के रक्षा उत्पादों का निर्यात करता था। 700 करोड़ आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 4000 करोड़ पहुंच रहा है। भारत में बने रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। साथियों आत्मनिर्भरता की यात्रा में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। एक तरफ शत्रु के गढ़ में क्विक डिप्लॉयमेंट तो अपने एक और घातक हथियार से भारत अब दुश्मन पर नजदीक से निगाह रख सकता है। डीआरडीओ 25 जून को स्वदेशी एयरबर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल नेत्र को फाइनल ऑपरेशन क्लीयरेंस देगा। एम्रेर विमान पर बना यह सिस्टम आसमान में दुश्मन की मिसाइलों और विमान पर नजर रखकर भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ा देगा। डीआरडीओ के बनाए गए इस नेत्र सिस्टम को आसान भाषा में आसमान में उड़ता हुआ आधुनिक रडार और कमांड सेंटर कहा जा सकता है। यह अत्याधुनिक सर्विलांस सेंसर ब्राजीलियाई एम्रेयर विमान पर फिट किए गए और इस सिस्टम का मेन काम भारतीय हवाई क्षेत्र में एंटर करने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन, मिसाइलों और यहां तक कि समुद्री सतह पर मंडराने वाले खतरों की बहुत पहले टोह लेना और अर्ली वार्निंग जारी करना। नेत्र दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल और रडार एमिशन को पकड़ने में माहिर है।

जिससे युद्ध के समय दुश्मन [संगीत] की स्थिति को सटीकता से प्रसीशन के साथ ट्रैक किया जा सकता है। यह भारतीय लड़ाकू विमानों को हवा में ही निर्देश देने और नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस को संभालने में फोर्स मल्टीप्लायर के तौर पर काम करता है। डीआरडीओ ने वायुसेना के लिए तीन एम्ब्रेयर विमान प्लेटफार्म पर स्वदेशी मिशन एयनिक्स एंड सर्विलांस सिस्टम को सफलतापूक इंटीग्रेट किया है। जिसे अब फाइनल ऑपरेशन क्लीयरेंस दिया जा रहा है। एंड दिस प्रूव्स दैट दिस इंडीजीनस सिस्टम हैज़ मेट ऑल ऑफ द आईएएफ स्ट्रिंजेंट ऑपरेशनल रिक्वायरमेंट्स। वो भी 100%। भारत को दुनिया का भविष्य कहा जा रहा है और यह सब संभव हुआ प्रधानमंत्री मोदी की विजनरी सोच [संगीत] के चलते जिसकी वजह से भारत ने साल 2014 के बाद से खुद में वो बदलाव किए जिससे उसे इंपोर्टर से एक्सपोर्टर बनने में मदद मिली। उसे कंज्यूमर से सप्लायर बनाया गया। आज ग्लोबल साउथ के देश चाहे वो अफ्रीका हो, साउथ ईस्ट एशिया एक ऐसे भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर की तरफ देख रहे हैं जो उन्हें बिना किसी राजनीतिक शर्त के मॉडर्न टेक्नोलॉजी दे सके और ग्लोबल साउथ के लिए भारत ही वो विकल्प है जिस पर सभी देश आंख बंद करके भरोसा करते हैं। यही बदलता हुआ भारत [संगीत] है और यह वह भारत है जो अब दुश्मन की रणनीति को सिर्फ समझता नहीं है बल्कि अपनी इस नई उड़ान से दुश्मन के होश भी उड़ा देता है और इसी का नतीजा है कि भारत लगातार डिफेंस एक्सपोर्ट और प्रोडक्शन के मामले में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहा है। कुछ नए डाटा हाल ही में सामने आए हैं।

फाइनेंसियल ईयर 2025-26 में देश का सालाना डिफेंस प्रोडक्शन [संगीत] अब तक के सबसे ऊंचे स्तर यानी 1.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। करंट फाइनेंसियल ईयर का यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष यानी 202425 के 1.54 लाख करोड़ के मुकाबले 15.6% की शानदार बढ़त को दिखाता है। अगर कुछ साल पहले की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में यह प्रोडक्शन 84,643 करोड़ था और इसके मुकाबले इस बार डिफेंस प्रोडक्शन में 110% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इतना ही नहीं फाइनेंसियल ईयर 2013 से 14 में देश का स्वदेशी रक्षा उत्पादन महज 43,746 करोड़ था। जो कि अब लगभग चार गुना बढ़ चुका है। आज मेक इन इंडिया के जरिए देश इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां, जेनेरिक दवाएं, रिन्यूएबल एनर्जी, क्रूड स्टील, लो कार्बन, मटेरियल, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, बायोटेक उत्पाद का निर्माण कर रहा है। और अब एिएशन और डिफेंस के फील्ड में भी भारत क्रांति ला रहा है। इतना तय है कि जब भारत में बना हुआ विमान देश की सुरक्षा में आसमान में उड़ता हुआ दिखाई देगा तो हर कोई यही कहेगा यही है असली भारत असली इंडिया जो जमीन से लेकर आसमान तक अपनी छाप छोड़ रहा है जो दुनिया को यह बता रहा है दैट नाउ इट्स टाइम फॉर इंडिया और यही है भारत की ऊंची छलांग डिफेंस सेक्टर में भारत की सक्सेस स्टोरी और आज की हमारी इंडिया स्टोरी।

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