हिंदू तो मैं हूं इसमें नो डाउट क्योंकि मैं ऑलरेडी हिंदू हूं। बट अफवाहों को लेकर के तो मैंने ऐसा यहां पे कुछ भी नहीं देखा है। तो यहां पे सभी मतलब लैंग्वेज की भाषा यहां पे पढ़ाई जा रही है। उर्दू, हिंदी, इंग्लिश, मैथ, संस्कृत ऑल। ठीक है? और यहां पे अफवाहओं का तो मुझे ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। मैं देखती हूं बच्चे आते हैं नॉर्मली डेली पढ़ते हैं और पढ़ के अपने घर चले जाते हैं। फर्स्ट टाइम तो मुझे भी ऐसा लगा था कि मदरसा है कैसे जाएंगे। वहां पे ये सारी चीजें दिखाई जा रही है मीडिया में, YouTube पे एंड Google वगैरह जहां [संगीत] पे भी तो उस चीजों को देखते हुए तो मैं भी फर्स्ट टाइम डर रही थी। पर यहां आने के बाद मैंने ये ऑब्जर्व किया कि नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। यहां पे बच्चे सिर्फ पढ़ते हैं और पढ़ के चले जाते हैं और बच्चों का पढ़ने में जो इंटरेस्ट है वो भी मैंने देखा कि काफी रुचि है।
अगर कहीं पढ़ाई नहीं करवाई जाती, कट्टरता सिखाई जाती तो वहां बच्चे पढ़ते नहीं। उनका कोई इंटरेस्ट नहीं होता। मैं यहां पे फुल प्रोटेक्टेड मानती हूं अपने आपको क्योंकि मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगता कि मेरे अगेंस्ट कुछ भी वर्क्स यहां पे किया जा रहा है। बच्चे भी बहुत ही ज्यादा फमिलियर हैं और यहां के टीचर्स भी बहुत ज्यादा फमिलियर हैं और मेरी प्रॉब्लम्स को भी सॉल्व करते हैं।
ऐसा कुछ नहीं है कि अगर मुझे आने जाने में प्रॉब्लम होती है तो बच्चे मुझे घर जाकर के रास्ते में स्टार्टिंग में मुझे जैसे वो रास्ते का कोई ज्ञान नहीं था। तो उन्होंने बच्चों ने मुझे जाकर के वन टू मंथ तक मुझे वहां पे छोड़ा अपने साथ इतनी कड़ी धूप में मैंने यहां पे अक्टूबर में ज्वाइन किया था। अक्टूबर के मंथ में बच्चे मुझे जाकर के छोड़ते थे। अक्टूबर कौन से ईयर में? अक्टूबर 202 अच्छा या तो कभी हिचकिचाहट रहा परिवार समाज लोगों ने कहा कि कहां जा रही हो मदरसे में क्यों पढ़ाने जा रही हो? नहीं नहीं ऐसा किसी ने कुछ नहीं कहा। मेरी फैमिली से किसी ने कुछ नहीं कहा। मुझे पढ़ाना है। शिक्षा बच्चों को देनी है और मुझे लगा कि मेरी जरूरत ज्यादा यहां पे है तो मैं यहां पे आई हूं।
यहां पे बच्चों को पढ़ाना है। जैसे कि कुछ ये मतलब इस मतलब धर्म के लोग जो हैं अपने बच्चों को दूर भेजते नहीं है पढ़ने के लिए लड़कियों को मोस्टली। तो लड़कियों को पढ़ाने के लिए बेसिकली मैं यहां पे आई हूं। उनको मैं जो दे सकती हूं जो मेरे पास अपनी शिक्षा है मैं उनको प्रोवाइड करना चाहती हूं। और मैं चाहती हूं कि मेरी तरह यह भी एक टीचर बने और इसमें से बहुत से बच्चे टीचर, डॉक्टर, इंजीनियर ये। दोस्तों, आपने हिंदू खातून टीचर का पूरा इंटरव्यू देखा। इस वीडियो का मकसद किसी से बहस करना या किसी पर गलबा हासिल करना नहीं है।
बल्कि एक ऐसी खातून की गवाही आपके सामने पेश करना है, जिसने खुद कई साल एक मदरसे में तदरीसी खिदमत अंजाम दी, और वहां के माहौल को करीब से देखा। आज जब मदरसों के बारे में तरह-तरह की बातें फैलाई जाती हैं। ऐसे में जरूरी है हम उन लोगों की बातें भी सुने जो खुद इस माहौल का हिस्सा रहे हैं। दीन इस्लाम हमें इल्म, अद्ल, अखलाक और हुस्ने मामलात की तालीम देता है। यही वजह है कि मदरसे सिर्फ दीन की तालीम ही नहीं बल्कि अच्छे इंसान तैयार करने की भी कोशिश करते हैं।
बेशक हर शख्स का मुशाहदा और तजुर्बा अलग हो सकता है। लेकिन किसी भी मामले में फैसला करने से पहले हकीकत को जानना और दोनों जानिब की बात सुनना इंतहाई जरूरी है।