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एलियन को बुलाने के लिए NASA ने भारतीय सिंगर का गाना क्यों भेजा?

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[संगीत] अगर हम आपसे कहें कि हमारी पृथ्वी से लगभग 24 अरब किलोमीटर दूर इतना दूर किस सौरमंडल से भी बाहर इतना बाहर कि जहां सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुंच सकती। लेकिन अंतरिक्ष के इस गहरे और अंधेरे हिस्से में हिंदुस्तान की एक गायिका की आवाज किसी एलियन का इंतजार कर रही है। तो क्या आप हमारी बात पर यकीन कर पाएंगे? शायद नहीं। लेकिन यह 100 फीसदी सच है। सच यह है कि हिंदुस्तान की प्रसिद्ध गायिका केसर बाई केरकर के एक गीत जात कहां हो अकेली गोरी को ग्रामोफोन में रिकॉर्ड कर अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में भटकने के लिए छोड़ दिया गया है।

इस मकसद के साथ कि यह ग्रामोफोन किसी एलियन के हाथ लग जाए और एलियन केसरबाई की दिलकश आवाज के जरिए पृथ्वी पर बसी मानव सभ्यता के बारे में जानकारी पा सकेंगे। यह बात विचित्र लेकिन सत्य है। आइए जानते हैं इस पूरी कहानी के बारे में। साल 1977 में अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने दो अंतरिक्ष यानों को अंतरिक्ष मिशन के लिए रवाना किया। नाम था वजर वन और वजर टू। मकसद था हमारे सौरमंडल के बड़े-बड़े ग्रह जैसे बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेप्च्यून वगैरह के बारे में ज्यादा से ज्यादा गहरी जानकारी इकट्ठा करना। लेकिन इसके साथ ही वैज्ञानिकों के दिमाग में एक अकल्पनीय विचार कौंधा।

उन्होंने सोचा कि अनंत काल तक अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में भटकते हुए यह यान खुदा ना खास्ता अगर किसी एलियन के हाथ लग जाए तो क्या होगा? तो क्यों ना लगे हाथ एलियन के लिए इसमें पृथ्वी वासियों की तरफ से कोई संदेश भी छोड़ दिया जाए। संदेश यह कि हम कौन हैं? हम कहां रहते हैं? वगैरह-वगैरह। लेकिन अहम सवाल यह था कि एलियन को भेजने के लिए यह जानकारी आखिर किस तकनीक के जरिए रिकॉर्ड की जाए? क्योंकि यह साल था 1977। उस समय तक सीडी या पेनड्राइव जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी। हां, ग्रामोफोन रिकॉर्ड का आविष्कार हो चुका था। इसलिए नासा के वैज्ञानिकों ने ग्रामोफोन रिकॉर्ड की तर्ज पर तांबे की एक गोल्ड डिस्क बनाई। उसके ऊपर सोने की परत चढ़ाई गई और ध्वनि तरंगों के माध्यम से उसमें धरती के बारे में ढेर सारी जानकारी और बहुत सारी तस्वीरों को सेव कर दिया गया। इसके लिए तस्वीरों को एक खास तकनीक से डिजिटल सिग्नल में बदला गया।

फिर उस सिग्नल को एनालॉग फॉर्म में कन्वर्ट करके रिकॉर्ड पर उसी तरह डाला गया जैसे वेव फॉर्मेट यानी कि साउंड की लहरें डाली जाती हैं। इस डिस्क का नाम गोल्डन रिकॉर्ड रखा गया। लेकिन इसके बाद एक और काल्पनिक सवाल पैदा हुआ। सवाल यह कि अगर यह डिस्क एलियन के हाथ लग भी जाती है तो वो इसे डिकोड कैसे करेंगे। इसका समाधान निकालते हुए नासा ने डिस्क के कवर पर एक डायग्राम के जरिए यह भी बताया कि इसे ऑपरेट कैसे करना है। इस सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया ताकि बिना किसी खास टेक्नोलॉजी के भी किसी दूसरी सभ्यता के प्राणी सिर्फ लॉजिक और साइंस के आधार पर इसे समझ सकें। अब आप जरा अंदाजा लगाइए कि एलियंस के लिए जो गोल्डन रिकॉर्ड तैयार किया गया उसमें क्या-क्या होगा।

चलिए हम आपको बताते हैं। इस गोल्डन रिकॉर्ड में इंसानों के खाने-पीने, खेलने, कूदने की फोटो के साथ-साथ ताजमहल की तस्वीर रखी गई है। जानवर, व्हील, मछली, पक्षी के साथ ही बारिश और हवा की आवाज डाली गई है। 55 भाषाओं में हाय, हेलो और नमस्ते, सलाम बोला गया है। और सबसे खास बात यह कि उस डिस्क में दुनिया भर के चुनिंदा संगीत भरे गए हैं। लेकिन अब जो बात हम आपको बताने जा रहे हैं, उसको सुनकर आप गर्व से फूले नहीं समाएंगे। दरअसल इस डिस्क के लिए दुनिया भर से जो संगीत चुना गया उसमें भारत की प्रसिद्ध गायिका केसरबाई केरकर का गाया हुआ एक गीत जात कहां हो अकेली गोरी को भी शामिल किया गया। जात कहां हो अकेली गोरी गाने में एक मां अपनी बेटी से पूछ रही है कि कहां जा रही हो अकेली? बता दें कि केसरबाई केरकर का जन्म गोवा के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके बारे में प्रसिद्ध है कि वह स्टेज पर माइक का इस्तेमाल किए बगैर ही गाती थी। लेकिन गायिका इतनी जबरदस्त थी कि रविंद्रनाथ टैगोर ने उन्हें सुश्री की उपाधि से नवाजा था। इन्हीं केसर भाई केरकर का गाया हुआ राग भैरवी अब ब्रह्मांड में तैर रहा है।

रही बात वजर यान की तो जुलाई 2025 में वजर वन धरती से करीब 24 अरब कि.मी. और वजर टू धरती से तकरीबन 20 अरब कि.मी. से ज्यादा की दूरी पर निकल चुके हैं। यह दूरी इतनी है कि वहां तक सूरज की रोशनी भी पहुंचते-पहुंचते थक जाएगी। यह दोनों यान अब सौरमंडल और सूरज के प्रभाव से बाहर निकल चुके हैं। लेकिन 1 कि.मी./ घंटे की रफ्तार से अंतरिक्ष की यात्रा कर रहे हैं। पिछले 47 साल से लगातार डाटा इकट्ठा कर नासा को भेज रहे हैं। हालांकि नासा के मुताबिक 2030 तक इनकी बैटरी खत्म हो जाएगी। फिर उनसे संपर्क भी टूट जाएगा और यह डाटा भेजना भी बंद कर देंगे। लेकिन इसके बाद भी वह करोड़ों सालों तक बिना दिशा निर्देश के अंतरिक्ष में भटकते रहेंगे और इन्हीं यानों में रखा गया है गोल्डन रिकॉर्ड भी। करोड़ों साल तक ब्रह्मांड में तैरता रहेगा। साथ ही ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों में तैरता रहेगा जात कहां हो अकेली गोरी गाने वाली केसर बाई केरकर की आवाज। किसी एलियन से मुलाकात के इंतजार में। जाते-जाते यह भी बता दें कि वजर और गोल्डन रिकॉर्ड मानव द्वारा निर्मित और मानव सभ्यता के इतिहास की एक ऐसी चीज है जो पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर पहुंच चुकी है। अगर आपको यह किस्सा अच्छा लगा हो तो वीडियो को लाइक करें और शेयर करिए और कल्पना करके बताइए कि अगर कभी एलियन के हाथों में गोल्डन रिकॉर्ड लग गया तो उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी। [संगीत]

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