अमेरिका के कैलिफोर्निया में बसा एक भारतीय बिजनेसमैन। दोस्ती के नाम पर शहर के बड़े बिजनेसमैन को पार्टी देता है। पार्टी में बुलाता है। फिर इसे ही आधार बनाकर राइवल बिजनेसमैन को करता है।
फर्जी डॉक्यूमेंट्स के सहारे बैंक को भी चुना लगाने लगता है। वह भी कोई छोटी-मोटी रकम नहीं बल्कि करीब 100 मिलियन यानी लगभग ₹957 करोड़। इस भारतीय मूल के अमेरिकी बिजनेसमैन का नाम है महेंद्र मक्खीजानी। मक्कीजानी की उम्र 44 साल है।
वो कैलिफोर्निया के पौश इलाके में रहता है और अपने कारनामों को अंजाम देता है। मक्कीजानी के मामले में सेक्स है, और पैसों का फ्रॉड है। मामला खुला 10 जून की सुबह। जब कैलिफोर्निया के करोरा डेलमार इलाके में मक्कीजानी के आलीशान बंगले पर सूरज की पहली किरण पड़ी।
मक्कीजानी की सुबह हर रोज की तरह नहीं थी। बस बदला यह कि उस दिन सुबह-सुबह उसके दरवाजे पर हाथों में बंदूक लिए फेडरल एजेंट्स दस्तक दे चुके थे। क्या है पूरा मामला? महेंद्र मक्खीजानी पर क्या आरोप लगे हैं? उसने इस पूरे मामले को अंजाम कैसे दिया? इन सारे सवालों के जवाब देंगे।
महेंद्र मक्खीजानी की कहानी पर। 44 साल के महेंद्र मक्खीजानी भारतीय मूल के फाइनेंसर हैं। भारत के नागरिक हैं लेकिन अमेरिका में ग्रीन कार्ड पर रह रहे हैं। उनकी पहचान एक लॉफुल परमानेंट रेजिडेंट की तरह है। माने वो अमेरिका में रह सकते हैं, काम कर सकते हैं। बस ऑफिशियल नागरिकता नहीं है।
मक्कीजानी कैलिफोर्निया के सबसे महंगे इलाकों में से एक कोरोना डेलमार में रहते हैं। यह इलाका न्यूपोर्ट बीच का एक हिस्सा है। मक्खीजानी का वहां सिर्फ एक घर नहीं बल्कि दो अगल-बगल वाले आलीशान महल जैसे बंगले हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मक्खी जानी ने एक बंगला सिर्फ अपने ससुराल वालों के लिए रखा हुआ है।
सिर्फ घर ही आलीशान नहीं है। मक्खी जानी जिंदगी भी आलीशान जीते हैं। राजा महाराजा की तरह प्राइवेट जेट से सफर करते हैं। महंगी कारों का भी जत्थ था जिसमें Bentle Ports और Mercedes, Gwagen जैसी गाड़ियां शामिल थी। उनके कपड़े हमेशा डिज़र होते थे। बाहर से देखने पर वह एक बेहद सफल और अमीर बिजनेसमैन लगते थे।
लेकिन इस चमक-धमक के पीछे की असल सच्चाई अब सामने आई है। महेंद्र मक्खीजानी कटर ग्रुप बीएलएलसी नाम की कंपनी चलाते थे। इस कंपनी का ऑफिस न्यू पोर्ट बीच में ही था। मक्खीजानी की कंपनी और एक बड़े बैंक वेस्टर्न अलायंस बैंक के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था। इस बैंक को बैंक हैशटग वन भी कहा जा रहा है। इस डील के तहत बैंक ने कैंटर ग्रुप को करीब 100 मिलियन एडवांस दिए थे। इस पैसे का इस्तेमाल मक्खीजानी को रियलस्टेट के लिए लोन देने या खरीदने में करना था।
नियम यह था कि जो भी लोन मक्खीजानी की कंपनी देगी उसके बदले में वो प्रॉपर्टी के कागज बैंक के पास गिरवी रखेगी। बैंक ने एक और बहुत सख्त शर्त रखी थी। कहा था मक्कीजानी की कंपनी सिर्फ वही लोन बैंक को गिरवी रख सकती है जिसमें उसकी फर्स्ट लियन पोजीशन हो। यहीं पर जान लीजिए फर्स्ट लियन होता क्या है? आसान भाषा में समझें तो फर्स्ट लियन का मतलब है अगर कर्ज लेने वाला पैसा नहीं चुकाता है तो बैंक को उस प्रॉपर्टी पर कब्जा करने का सबसे पहला हक होगा। यानी अगर फर्स्ट लियन रूल नहीं अप्लाई होता तो बैंक के पास वसूली कर पाने का हक कम होता। अब बैंक को भरोसा दिलाने के लिए मकीजानी को टाइटल इंश्योरेंस पॉलिसी जमा करनी पड़ती थी।
यह पॉलिसी सबूत होती है कि उस प्रॉपर्टी पर सबसे पहला हक मकीजानी की कंपनी का ही है। बैंक इसी भरोसे पर पैसे देता रहा। उसे लगा कि उसके 100 मिलियन डॉलर पूरी तरह से सुरक्षित हैं। आरोप है कि मक्कीजानी ने सितंबर 2024 से लेकर अप्रैल 2025 के बीच बैंक के साथ फर्जीवाड़ा किया। मक्कीजानी पर ऐसी प्रॉपर्टी को बैंक के पास गिरवी रखने का आरोप है जिस पर पहले से ही दूसरे लेनदारों का हक है। बैंक को शक ना हो इसके लिए मक्कीजानी ने इंश्योरेंस के कागजों में छेड़छाड़ की।
उन्होंने AOब सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके टाइटल पॉलिसी के डॉक्यूमेंट्स को ही बदल डाला। कागजों पर तो दिख रहा था कि मक्कीजानी पहले नंबर पर हैं लेकिन हकीकत में वो पीछे थे। पकड़े जाने के डर से मक्कीजानी ने एक और चालाकी की। डिजिटल फाइलों में एक मेटा होता है जो बताता है कि फाइल कब और किसने एडिट की। मक्कीजानी खुद या अपने किसी कर्मचारी से यह मेटाडेटा हटवा देते थे।
वो पहले एडिटेड कागज का प्रिंट निकालते थे और फिर उसे दोबारा स्कैन करते थे ताकि किसी को डिजिटल बदलाव का पता ना चल सके। जब भी बैंक कोई सवाल पूछता मक्कीज जानी खुद कॉन्फ्रेंस कॉल पर आकर झूठ बोल देते थे। दिसंबर 2024 में तो उन्होंने बैंक को झूठी जानकारियों वाली एक पूरी स्प्रेडशीट ही थमा दी थी। बैंक उनकी बातों पर यकीन करता रहा और मक्कीजानी का महल खड़ा होता रहा। महेंद्र मक्कीजानी के मामले में कोर्ट में जमा डॉक्यूमेंट्स और गवाही।
इस कहानी को और आगे ले जाती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कोर्ट के डॉक्यूमेंट्स के हवाले से लिखा गया है कि मक्कीजानी प्राइवेट पार्टियां आयोजित करते थे। इन पार्टियों में जमकर और को बुलाया जाता था। हैरानी की बात यह है कि इन पार्टियों में बैंक के कर्मचारी भी शामिल होते थे। आरोप है कि मक्खी जानी इन पार्टियों का रिकॉर्ड और फुटेज भी जमा कर रहा था।
इसका इस्तेमाल बैंक के अधिकारियों को ब्लैकमेल करने के लिए हो रहा था। अगर बैंक का कोई कर्मचारी सवाल उठाता तो मक्खी जानी के पास उसे चुप कराने के लिए हथियार तैयार रहता था। यह उनका अपने स्टाफ और बिजनेस पार्टनर्स पर कंट्रोल रखने का एक तरीका था। आरोप है कि मक्खी जानी अपने कर्मचारियों को सरेआम जान से मारने की देते थे। वो अक्सर कहते थे कि अगर किसी ने बात नहीं मानी तो वह उसे मार डालेंगे। उसके परिवार को सड़क पर ले आएंगे और उनके बच्चों को वेलफेयर पर जीने को मजबूर कर देंगे।
उनके नेटवर्क में लोग भी शामिल थे। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी कैलिफोर्निया के महंगे इलाकों में मक्कीजानी ने अपने के जरिए होटलों और एक रेस्टोरेंट पर जबरन कब्जा करने की कोशिश भी की थी। उनके खिलाफ कई घटनाओं के आरोप भी हैं। मक्कीजानी का एक विवाद लघुना बीच के बिजनेसमैन मोहम्मद हुनारकर के साथ भी चल रहा था।
यह विवाद दर्जनों प्रॉपर्टीज को लेकर था। मक्खीजानी ने होनारकर के साथ कई एग्रीमेंट तोड़े और उनके साथ धोखाधड़ी की। इसी 2026 के ही मई महीने में एक ऑर्बिट्रेटर ने मक्खीजानी को ही इस मामले में दोषी पाया और हुनारकर को करीब 1.34 बिलियन करीब ₹1,891 करोड़ का हरजाना देने का आदेश दिया।
न्यूयॉर्क पोस्ट ने हुनारकर का बयान छापा है जिसमें वह कहते हैं मक्कीज जानी मुझे अक्सर डराते थे। इज्जत मिट्टी में मिला देने की धमकी देते थे। मेरे बच्चों और पोतीपोतियों को सड़क पर ले आने की धमकी देते थे। साल 2023 में होटल लघुना के मैनेजमेंट को लेकर मक्कीजानी के गार्ड्स और होटल के स्टाफ के बीच हिंसक झड़प हुई थी। जिसके बाद होटल को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।
महेंद्र मक्कीजानी अक्सर कहता था कि अगर कभी पुलिस उनके करीब पहुंची तो वह भारत भाग जाएंगी। लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसियां चुप नहीं बैठी। आईआरएस l इन्वेस्टिगेशन, , और अन्य कई एजेंसियां मिलकर इस मामले की जांच कर रही थी। आईआरएस के एजेंट्स ने मकीजानी के पैसे के लेनदेन का पीछा किया।
उन्होंने पाया कि मक्कीजानी ने पैसे को छुपाने के लिए कई लेयर्ड ट्रांसफर और छिपे हुए अकाउंट्स का इस्तेमाल किया था। अगस्त 2025 में विक्टिम बैंक ने लॉस एंजेलिस सुपीरियर कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया। जिसके लंबे वक्त बाद 10 जून 2026 को फेडरल एजेंट्स ने उनके घर पर छापा मारा।
मकीजानी को उनके महलनुमा घर से बाहर निकाला गया। अब उन पर बैंक फ्रॉड के गंभीर आरोप लगे हैं। अगर वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 30 साल की जेल हो सकती है।
हालांकि एजेंसीज के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब उन 100 मिलियन डॉलर्स की रिकवरी करना है। क्योंकि अभी तक पता नहीं चला है कि यह सारा पैसा है कहां? मक्कीजानी की गिरफ्तारी के बाद अब उनके पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।