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स्टॉकब्रोकर में से 2 बार देश के CM कैसे बने थे विजय रुपाणी?

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कल अहमदाबाद प्लेन हादसे को एक साल पूरा हो जाएगा, उस भयानक हादसे में 260 लोगो ने अपनी जान गवाई। उन लागो में रुपाणी जी भी शामिल है। कल उनकी पहली पुण्यतिथि है ऐसे में बात करते है उनकी जिंदगी के सफर के बारे में।

विजय रूपाणी को ऐसे समय में मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए कहा गया जब गुजरात में काफी उथल-पुथल चल रही थी.नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद साल 2014 में आनंदीबेन पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री बनी थीं. लेकिन अगस्त 2016 में उनके इस्तीफा देने के बाद राज्य की सत्ता विजय रूपाणी के हाथों में आ गई.

साल 2015 में स्थानीय निकाय चुनावों में सफलता के बाद कांग्रेस ने पाटीदार आंदोलन के लिए स्पष्ट समर्थन के माहौल में दिसंबर साल 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी.रूपाणी को राज्य सरकार का नेतृत्व ऐसे समय सौंपा गया था जब विधानसभा चुनाव में डेढ़ साल से भी कम समय बचा था और पाटीदार आंदोलन के धीमा पड़ने का कोई संकेत नहीं दिख रहा था.बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने कहा, “गुजरात और राष्ट्रीय स्तर के बीजेपी नेताओं के कहने के बावजूद आनंदीबेन पटेल किसी भी हालत में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं थीं. अंत में बात यहां तक ​​पहुंच गई कि आनंदीबेन से कहा गया कि या तो साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की गारंटी दें या फिर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें.”

पाटीदार आंदोलन के साये में हुए विधानसभा चुनाव को बीजेपी ने विजय रूपाणी के नेतृत्व में लड़ा था और मोदी समेत कई नेताओं ने जोरदार प्रचार किया था.उस वक्त विधानसभा में नेता विपक्ष रहे परेश धनानी ने साल 2017 में कहा था कि कांग्रेस के लिए गुजरात में सत्ता में आने का यह सबसे अच्छा मौका था और अगर कांग्रेस इसे चूक गई तो कोई नहीं कह सकता कि ऐसा मौका फिर कब आएगा.साल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्व में बीजेपी गुजरात में सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही. लेकिन बीजेपी 182 में से 99 सीटें ही जीत सकी.

उनके सीएम बनने के बारे में बात की जाए तो

मुख्यमंत्री के तौर विजय रूपाणी के कार्यकाल में कई विवाद हुए और आरोप भी लगाए गए.

फरवरी 2022 में तत्कालीन विपक्ष के नेता सुखराम राठवा और कांग्रेस के दो और विधायक शैलेश परमार और सी.जे.चावड़ा ने गांधीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाए, “राजकोट की सीमा के पास सहारा इंडिया की 111 एकड़ ज़मीन का सरकार ने ज़ोन बदलकर उसे हाउसिंग ज़ोन से औद्योगिक ज़ोन में कर दिया और उसमें 500 करोड़ का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था.’

उनका कहना था कि जब इस ज़ोन में बदलाव हुआ तब शहरी विकास मंत्रालय का ज़िम्मा विजय रूपाणी के पास था.

इन आरोपों को नकारते हुए रूपाणी ने गांधीनगर की एक कोर्ट में राठवा, उनके ऑफिस के क्लर्क, परमार और चावड़ा पर मानहानि का फौजदारी केस किया था. उसके बाद चावड़ा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.

आख़िर में राठवा, चावड़ा और परमार ने बिना शर्त के माफी मांगी थी और रूपाणी ने अक्तूबर 2024 में ये केस वापिस ले लिया था.साल 2022 में दिए एक इंटरव्यू में रूपाणी ने कहा कि 10 सितंबर की रात को बीजेपी के एक राष्ट्रीय नेता ने उनसे कहा कि उन्हें इस्तीफा देना होगा और पार्टी के आदेश का सम्मान करते हुए उन्होंने अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया.इस्तीफा देने के एक सप्ताह बाद राजकोट के प्रमुख स्वामी सभागार में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रूपाणी ने कहा, “मैं सीएम नहीं था, तब भी सीएम था, सीएम था तब भी सीएम था और आज भी सीएम हूं. सीएम का मतलब है, आम आदमी, आपके बीच का कार्यकर्ता और उस कार्यकर्ता या पार्टी को जो करना है, वो करना ही है.

अगर राजनीति में शुरुआत की बात करें तो

विजय रूपाणी का जन्म साल1956 में म्यांमार की राजधानी रंगून (अब यंगून) में हुआ था.

उनके पिता रसिकलाल रूपाणी वहां अनाज व्यापारी थे.

विजयभाई सात भाइयों में सबसे छोटे थे. विजयभाई के जन्म के कुछ महीने बाद म्यांमार में अस्थिरता के कारण रूपाणी परिवार राजकोट चला गया और रसिकलाल ने बॉल-बेयरिंग का बिजनेस शुरू किया.

विजय रूपाणी साल 1973 में एबीवीपी में शामिल हुए और साल 1996 में राजकोट के मेयर चुने गए. साल 2006 में वे राज्यसभा के सदस्य चुने गए. इसके बाद उन्हें गुजरात बीजेपी का महासचिव नियुक्त किया गया.

साल 2012 में उन्हें गुजरात नगर निगम वित्त बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. साल 2014 में जूनागढ़ नगर निगम चुनाव के प्रभारी नियुक्त होने के बाद उन्होंने बीजेपी को उस चुनाव में जीत दिलाई.

उस समय जूनागढ़ नगर निगम गुजरात का एकमात्र नगर निगम था जहां बीजेपी सत्ता में नहीं थी.

उसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में विजय रूपाणी ने सौराष्ट्र-कच्छ की सभी आठों लोकसभा सीटों पर बीजेपी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपना राजनीतिक कद बढ़ाया.

साल 2014 में राजकोट पश्चिम से विधायक वजुभाई वाला को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर उन्होंने सीट से इस्तीफा दे दिया था.उसके बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने विजय रूपाणी को टिकट दिया और उनकी जीत के बाद आनंदीबेन पटेल सरकार में रूपाणी को जल आपूर्ति मंत्री बनाया गया. उसके बाद वे कुछ ही समय में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बन गए।

रुपाणी का विक्तिग्गत जीवन कभी रसप्रद रहा।

रूपाणी एक स्टॉकब्रोकर थे और उन्होंने सौराष्ट्र-कच्छ स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया.

उनकी पत्नी अंजलि रूपाणी भी बीजेपी महिला मोर्चा की नेता हैं. उनके बेटे ऋषभ और बेटी राधिका विदेश में बस गए हैं.

अपने दूसरे बेटे पूजित की असामयिक मृत्यु के बाद उन्होंने उनकी स्मृति में पूजित रूपाणी मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना की और इसके माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का काम किया.

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