अब एक ऐसे कथित घोटाले की फाइल खोलेंगे जिसने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और एक बैंक से लेकर शेयर बाजार तक में हड़कंप मचादिया है। खलबली इसलिए मची है क्योंकि पैसा डूबने की फिक्र सबको सताने लगी है।
आपका निवेश भी फंसाहो। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि जो कंपनी घोटाले में घिरी हुई है उसमें LIC का भी पैसा फंसा हुआ है और इसे अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है यानी महा घोटाला क्योंकि इसमें इतनी बड़ी रकम शामिल है जितना कई देशों का सालाना बजट भी नहीं होता15 लाख करोड़ इतनी भारी भर भरकम रकम कि आप गिन नहीं पाएंगे।
15 के साथ इतने जीरो लगाने पड़ेंगे कि गिनतेगिनते थक जाएंगे। लेकिन एक कंपनी 15 लाख करोड़ के घोटाले में गिर गई है। इतना बड़ा घोटाला जिसे कंपनी इतिहास का मदर ऑफ ऑल घोटाला कह सकते हैं जो देश के रक्षा बजट का लगभग दो गुना ज्यादा बड़ा है जो भारत के बजट का लगभग 30% है जो पाकिस्तान के बजट का लगभग ढाई गुना ज्यादा बड़ा है।
जिसे 1992 में हुए हर्षद मेहता घोटाले से 375 गुना बड़ा घोटाला माना जा रहा है। जिसने देश के सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC को हिला दिया। जिसने केरा बैंक को झटका दे दिया। इस घोटाले के सूत्रधार बताई जा रही उस कंपनी का नाम है राजेश एक्सपोर्ट्स जिसके प्रमोटर हैं राजेश मेहता जो देश की बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक है।
राजेश एक्सपर्ट्स ग्लोबल गोल्ड इंडस्ट्री में बड़ी पहचान रखती है लेकिन गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों में घिर गई है और यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद सेबी ने किया है जो शेयर बाजार और निवेश से जुड़े कामकाज की निगरानी करती है। सेबी ने जो ढूंढा है
15 लाख करोड़ से ऊपर का फाइनेंशियल मिस रिपोर्टिंग हुई है राजेश एक्सपर्ट्स की बुक्स में। अब ये एक प्रारंभिक घोषणा है। ये फाइंडिंग अभी फाइनल नहीं है। इसका फाइनल चर्चा होना है। बट इससे हमें पता क्या चलता है? इसमें हमें यह पता चलता है कि जो राजेश एक्सपर्ट्स है उसने अपना कंसोलिडेटेड जो स्टेटमेंट बताया उसमें बोला कि 15 लाख 60 15.66 लाख करोड़ की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू है। और इसमें से जब सेबी ने इसमें देख की तो उनको पता चला कि उनकी जो पूरी रेवेन्यू वो आ रही है।
उनके एक स्विट्जरलैंड की छोटी सी सब्सिडरी कंपनी से। उस कंपनी से 3000 करोड़ की रेवेन्यू आ रही है। पर 15 लाख करोड़ और 3000 करोड़ में बहुत फर्क है। 90% से ज्यादा। यह फर्क अब कहां से बन रहा है? यह सेबी का सवाल है। सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में इल्जाम लगाया है कि राजेश एक्सपर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपनी विदेशी कंपनियों के जरिए करीब 15.15 लाख करोड़ की फर्जी या बढ़ा चढ़ाकर कमाई दिखाई है। जो कि असल में थी ही नहीं। आरोप है कि कंपनी ने अपनी कुल कमाई का लगभग 97% से लेकर 99% हिस्सा बढ़ाचढ़ा कर दिखाया।
सेबी ने इस गड़बड़ी को इतिहास की सबसे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में से एक बताया है। [संगीत] सेबी ने फिलहाल राजेश मेहता पर कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग करने [संगीत] से पूरी तरह रोक लगा दी है। इस चक्कर में देश की सबसे बड़ी सरकारी इंश्योरेंस कंपनी LIC भी बुरी तरह फंस चुकी है। वो इसलिए क्योंकि LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8% की बड़ी हिस्सेदारी है। जैसे ही सेबी [संगीत] का यह आदेश आया, LIC के शेयरों में भी 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। अब एक 2024 में शेयरहोल्डर कंप्लेंट के बेसिस पे सेबी ने ये इन्वेस्टिगेशन चालू किया। अब इसमें सेबी ने बहुत सारे कागजात, फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, सेल्स, क्लाइंट्स इन लोगों के नाम, सेल्स किसको हो रही है? क्लाइंट्स कौन है? वेंडर कौन है? सबके नाम मांगे। पर सेबी का यह कहना है कि यह कोई इंफॉर्मेशन हमें मिला नहीं और जितना इंफॉर्मेशन हमें मिला है उससे हमें यह पता चलता है कि 15 लाख से ऊपर तक का जो अमाउंट है वो इनफ्लेटेड है वो बढ़ा चढ़ा के बताया गया है।
अब इसमें ये भी पता चलता है कि जो इंफॉर्मेशन कंपनी ने दी है कि एक क्लाइंट जैसे है एफ्लुएंस करके। अब एफ्लुएंस के बारे में कंपनी ने ये बोला था सेबी को कि 11,000 करोड़ की बिजनेस है। जब एफ्लुएंस सी बात करी सेबी ने तो उनको यह पता चला कि यह तो क्लाइंट ही नहीं है उनकी। [संगीत] लेकिन यह सब कुछ हुआ कैसे? जरा इसे समझते हैं। इसके लिए आपको राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस मॉडल समझना होगा। यह कंपनी कच्चा सोना [संगीत] खरीदती है। उसे शुद्ध सोने में रिफाइन करती है। गहने बनाती है और फिर उन्हें बाजार में बेच देती है। लेकिन इस कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साल 2015 में तब आया जब राजेश एक्सपर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी वेलकम का अधिग्रह [संगीत] कर लिया। वेलकैमबी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग फैसिलिटीज में से एक माना जाता है। और इस डील के बाद राजेश मेहता का नाम ग्लोबल मार्केट में चमक गया।
यहां तक कि LIC [संगीत] ने भी इस कंपनी में भारी भरकम पैसा लगा दिया और उसकी हिस्सेदारी 10% से ज्यादा हो गई। इससे राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर बाजार में भी शादी हो गई और उसके शेयर के दाम बढ़ने लगे। बैंक ने भी राजेश एक्सपोर्ट्स [संगीत] को बड़ा लोन दे दिया। लेकिन सेबी की जांच बताती है कि कंपनी ने जो कमाई बताई वो कमाई दरअसल हुई ही नहीं। सेबी के मुताबिक राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2021 के लिए 2.58 लाख करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दिखाया। इस राजस्व का 99% से ज्यादा हिस्सा अपनी विदेशी कंपनियों से जुड़ा बताया।
लेकिन ऑडिट में करीब [संगीत] 586 करोड़ का ही राजस्व दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2022 के दौरान कंपनी ने एक मुंबई की ब्रोकरेज फर्म के साथ करीब ₹4625 करोड़ की बिक्री और ₹4627 करोड़ की खरीदी। सेबी का [संगीत] आरोप है कि यह बड़े लेनदेन कंपनी की कमाई का अहम हिस्सा थे। लेकिन कंपनी ने इनके बारे में अपने बोर्ड को नहीं बताया। सेबी की जांच में इसी तरह की कुछ और गड़बड़ियों की ओर इशारा किया गया है। अब यह समझिए कि यह मामला सेबी तक पहुंचा कैसे? दरअसल मार्च 2023 में एक शेरधारक ने सेबी को शिकायत भेजकर संभावित वित्तीय गड़बड़ी का इल्जाम लगाया।
इस शिकायत के बाद सेबी ने शुरुआती जांच की और अब जाकर सेबी ने उस पर अपना अंतरिम [संगीत] आदेश पारित किया है। सेबी के आरोपों ने राजेश एक्सपर्ट्स का साम्राज्य हिला दिया। शेयर बाजार में खलबरी मच गई। रेवेन्यू में इस भारी गड़बड़ी के आरोपों से राजेश [संगीत] एक्सपोर्ट्स के शेयर गिर गए। इस कंपनी को 500 करोड़ से ज्यादा का कर्ज देने वाला बैंक अब लोन वसूली की प्लानिंग कर रहा है।
लेकिन सबसे ज्यादा चिंता LIC को हो रही है। क्योंकि LIC सरकारी बीमा कंपनी है। उस पर आम लोगों का भरोसा है। वहां आम लोगों का पैसा लगा है। हालांकि NDTV इंडिया के सहयोगी [संगीत] चैनल NDTV प्रॉफिट से एक बातचीत में राजेश मेहता ने इस बात से इंकार किया है कि उनकी कंपनी ने कोई गड़बड़ी की है। इन्वेस्टिगेशन हैज़ गोइंग फॉर सच अ लॉन्ग टाइम। हैज़ बीन गोइंग ऑन फॉर सच अ लॉन्ग टाइम। एंड दिस इज़ एन इंटेरिम ऑर्डर वेयर दे हैव एक्सप्रेस्ड डाउट एंड दे हैव सेड इट अपीयर्स। इट द वर्ड इज़ अपीयरर्स।
इट इज़ नथिंग इज़ अपीयर इट. 5 लाख करोड़ रेवेन्यू। [गला साफ़ करने की आवाज़] व्हिच हैज़ कम इन फोर ई इन फोर इयर्स। इज़ परफेक्टली करेक्ट। इट इज़ नॉट अ प्रोसेसिंग यूनिट। इट इज़ ए रिफाइनिंग एंड सेलिंग यूनिट। इट सप्लाई गोल्ड बुलियन अक्रॉस द वर्ल्ड। सो देयर इज़ अ सेल व्हिच इज़ हैपनिंग। द 3000 करोड़ नंबर व्हिच हैज़ कम अप इज़ दी बेसिक वैल्यू एडिशन व्हिच हैज़ बीन अचीव्ड बिटवीन द परचेस एंड द सेल। अगर जांच में सेबी के लगाए आरोप सही साबित होते हैं तो फिर यह एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड तो होगा ही।
साथ ही देश की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही पर भीगंभीर सवाल खड़े होंगे।