जंतरमंतर पर जो कॉकरोच जनता पार्टी और तमाम कॉलेजेस के स्टूडेंट्स धरना प्रदर्शन के लिए पहुंचे संसद तक मार्च करना था क्योंकि पार्लियामेंट का सेशन शुरू हुआ था तब शायद बहुत सारे लोगों को उम्मीद नहीं थी कि इतनी भीड़ जमा होगी लेकिन जिस तादाद में वहां स्टूडेंट्स पहुंचे और साथ में वह लोग जो शिक्षा नीति में बदलाव चाहते हैं या फिर और भी बहुत सारी समस्याएं उसने बहुत सारे लोगों को चौंका दिया था और फिर यह पूरा धरना प्रदर्शन हुआ। अब सोशल मीडिया पर बहुत सारे वीडियो की बाढ़ है। कई तस्वीरों को देखकर लगता है कि मतलब क्या है ये?
जिस तरह से निहत्ते बच्चों पर, छात्रों पर पुलिस ने लाठियां चलाई। L से लथपथ वह तस्वीरें, लड़कियां जिन्हें मारा गया, गया। मैं इस बहुत कुछ तो नहीं कहूंगा लेकिन यह जरूर कहूंगा कि हम उस देश में रहते हैं जिस देश में धरना, प्रदर्शन, आंदोलन, आमरण, अनशन, भूख, हड़ताल ये किसी और से नहीं मिली हमें विरासत में। यह हमें गांधी जी ने दिया था।
और वह गांधी जी थे जिन्होंने यही सब कर बिना किसी हिंसा के वायलेंस के हमारे देश को आजादी दिलाई और अंग्रेजों को जाना पड़ा। वही बार-बार हर दौर में अलग-अलग लोग करते आए हैं। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हैं।
हम लोगों ने जो अपने दौर में देखा एक अन्ना हजारे मूवमेंट रामलीला मैदान पर लगातार इतने दिनों तक या फिर सोनम वोंटक लद्दाख में जिस तरीके से वो आमरण अनशन पर बैठे फिर यहां अभी 20 दिन तक तो मेरा अपना मानना है और मैं क्योंकि इस जंतरमंतर को बरसों से कवर करता आया हूं ना जाने कितनी रैलियां कितने धरना प्रदर्शन मैंने कवर किया वहां जाकर और पहले के मैं मैंने देखा कि वाटर कैनन या फिर लाठी चार्ज यह सारी चीजें होती थी।
लेकिन इसे बेहतर तरीके से हैंडल किया जा सकता था। जो भी धरना प्रदर्शन या आंदोलन करते हैं वो क्या करते हैं? जब संसद से का सत्र होता है तो संसद भवन तक मार्च करते हैं और उसके बाद उन्हें भी पता है कि पार्लियामेंट के अंदर तो आपको जाने दिया नहीं जा सकता।
तो वहीं पर बैठकर नारे लगाकर लोग लौट आते। लेकिन दिल्ली पुलिस ने अगर इसकी बेहतर तरीके से प्लानिंग की होती, तैयारी की होती तो शायद 100 से ज्यादा बच्चे जो घायल है ऐसा नहीं होता। और भीड़ में जिस तरीके से पुलिस ने लाठियां चलाई है मैंने खुद इस तरीके से पहले कभी नहीं देखा।
तो आंदोलन और धरना प्रदर्शन को कुचलने के लिए अगर बल का प्रयोग करते हैं इस तरीके से उसको कहीं से भी सही नहीं ठहरा जा सकता। हालांकि एक दूसरा पहलू यह है कि ऐसे आंदोलन में बहुत सारे ऐसे लोग भी घुस जाते हैं जो जानबूझकर इसको गड़बड़ करना या बदनाम करने की भी कोशिश करते हैं और कोई भी आंदोलन उठा लीजिए। इसमें होता है ऐसा।
लेकिन कल के इस पूरे आंदोलन को बेहतर तरीके से दिल्ली पुलिस शायद हैंडल नहीं कर पाई और पता नहीं क्यों उन्हें किसने छूट दे रखी थी कि बस जाओ और लाठियां बरसाओ डंडे बरसाओ। खैर उसके बाद आज जब नेता इसमें उतर आए हैं।
पॉलिटिक्स शुरू हो गई है अब पीएम हाउस के बाहर धरना प्रदर्शन हुए। प्रॉब्लम यही है कि फिर असली मुद्दा भटक जाता है। मुद्दा नीट के पेपर का मुद्दा हमारे एजुकेशनल पॉलिसी का पॉलिसी जो एजुकेशन की है उसकी शिक्षा नीति की और बहुत सारी चीजें फिर लास्ट में सब राजनीति इसमें घुस जाती है और सब कुछ बेकार हो जाता है। पर मैं चाहता हूं ऐसा हो ना और जो देश के लाखों स्टूडेंट्स हैं उनका जो भविष्य है वह हमेशा बेहतर हो। कम से कम इतना तो होना चाहिए कि वो इत्मीनान से और बिना किसी खौफ के इम्तिहान दे सके ये सोच कर कि दोबारा नहीं देना पड़ेगा।
पेपर लीक नहीं होगा और पता नहीं ऐसा होगा कि नहीं होगा। खैर आते हैं आज की कहानी के ऊपर। एक ट्रिपल हो यानी कि एक ही घर में तीन-तीन कत्ल और पुलिस उस कत्ल की जांच करे और उस कत्ल के सिलसिले में दो उसकी नजरों में आए और फिर अचानक एक तीसरा कातिल लेकिन तीसरा कातिल इंसान नहीं है। वो एक मशीन है, एक टेक्नोलॉजी है।
अब उस पर मुकदमा कैसे चलेगा? इंसान का तो समझ में आता है लेकिन आप टेक्नोलॉजी को एक को एक्यूज या सह आरोपी ट्रिपल केस में कैसे बनाएंगे? बेंगलुरु से यह अजीब सी कहानी सामने आई और यह कहानी रिश्तों के की भी है। दो लोग तीन की प्लानिंग करते हैं और इनमें एक लड़की है और जिन्हें तीन जो तीन लोग हैं जिनका कत्ल करना है वो कोई और नहीं।
उस लड़की के अपनी मां है, अपना पिता है और अपनी छोटी बहन है। इन तीनों को उसे मारना है। और मारना किसके साथ मिलकर है? अपने लिविंग पार्टनर के साथ मिलकर।
छ महीने से तीनों प्लानिंग करते हैं कि तो करना है। लेकिन कैसे करना है? कोई तरीका बताएं। और फिर वही हर , हर गुनहगार की तरह वही गलती कि फुल प्रूफ एक ऐसा करना है जिसमें पुलिस पकड़ ना पाए। अब इसके लिए यह प्लानिंग छ महीने तक करते रहते हैं। इन छ महीनों में प्लानिंग करतेकरते दोनों क्योंकि पढ़े लिखे और टेक्नो सेवी थे।
टेक्नोलॉजी जानते थे बल्कि आईटी सेक्टर में काम करते थे। तो उन्होंने कहा क्यों ना चलो एआई की मदद लेते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। तो एआई को इस कत्ल में शामिल करते हैं। अब एआई क्यों? उन्हें लगा कि किसी इंसान को हम राज बनाएंगे तो वो कल को राज खोल सकता है, राजफश कर सकता है। लेकिन टेक्नोलॉजी बोलती नहीं है। तो इसलिए टेक्नोलॉजी को अपना हमराज बनाओ, अपना दोस्त बनाओ। अब ये दोनों सीधे अपना हमराज किसी और को नहीं एआई को बनाते हैं। यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। वही एआई जिसकी बातें पूरी दुनिया में हो रही हैं। अब दोनों एआई को अपना हमराज बनाकर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सवाल पूछते हैं। पहला सवाल कि हमें ट्रिपल करना है तीन कत्ल करने हैं।
वो करने का तरीका बताओ जिससे हम पकड़े ना जाए। दूसरा सवाल है ऐसा कौन सा केमिकल है जो कत्ल करने के बाद खून के धब्बे को मिटा दे।
के बाद अगर बॉडी यानी को पैक करना है, उसकी पैकिंग करनी है तो वह कैसे करें? अगर करते वक्त कोई अचानक उन पर वापस हमला कर दे तो उससे कैसे निपटे? कत्ल करने के बाद और की पैकिंग के बाद उसे घर से बाहर कैसे ले जाए? अगर कहीं उसको ठिकाने लगाना है। इसके अलावा क्या क्लाउड किचन के लिए बनाई गई जो भट्टी होती है लोहे की उसमें कत्ल के बाद लाश को अगर डाल दें तो के सारे सबूत जलकर मतलब मिट जाएंगे। कोई भी चीज बचेगी नहीं सबूत के तौर पर। तो ये सवाल दो लोग एआई से पूछ रहे हैं कि ट्रिपल कैसे होगा?
के धब्बे कौन से केमिकल से मिटेंगे? कत्ल करने के बाद की पैकिंग कैसे होगी? घर से बाहर लाश को कैसे ले जाएंगे? अगर कत्ल के वक्त कोई हमला करे तो उससे कैसे निपटेंगे? और क्लाउड किचन के जरिए जो भट्टी है उसमें क्या को हम जलाकर जला सकते हैंये सारी चीजें और एआई टूल सब सवालों के जवाब दे रहा है।
वो तो भाई हुक्म का गुलाम है। आप पूछिए वो दे देता है। यह सारी प्लानिंग हो गई और उसके बाद अब वो दिन आता है जब उन्हें तीन करने हैं एक साथ। अब कैसे होता है क्या होता है? यहां से शुरू होती है पूरी कहानी। 22 जून पिछले महीने की बात है। सीसीटीवी कैमरे की दो तस्वीरें आपको दिखा रहा हूं। वक्त हुआ है घड़ी में रात के 9:02। एक घर है। उसका गेट खुलता है और एक लड़का और एक लड़की उस गेट से बाहर आते हैं।
यह पहली तस्वीर है। एक दूसरी तस्वीर है। दूसरे कैमरे से वही लड़का और लड़की लड़का आगे आगे लड़के पीछे पीछे जा रहे हैं। इन दोनों को देखकर कोई अंदाजा लगा सकता है कि ये दोनों बस कुछ देर पहले ही एक साथ तीन मर्डर कर चुके हैं। इनकी चाल से, इनके चलने के अंदाज से कोई पकड़ ही नहीं पाएगा। और यह जस्ट कुछ देर पहले जब यह कैद हुए हैं इस कैमरे में तीन कत्ले कर चुके थे। अब आते हैं एक दूसरे घर की तस्वीर पर। यह बेंगलुरु में ही एक साईं ग्रीन होम है। साईं ग्रीन होम अपार्टमेंट। और इसी अपार्टमेंट में एक फ्लैट है..
जिसका नंबर है जी03। इस फ्लैट में दो लोग रहा करते थे। एक श्वेता और एक कैनथ। श्वेता 24 साल की कैनथ 25 साल का दोनों लिविन में इस घर में रहते थे। श्वेता और कैनथित की ही कहानी है ये और इनके तीसरे दोस्त एआई की। कुछ वक्त पहले श्वेता के पेरेंट्स और कैनथ के पेरेंट्स दोनों बहुत ही अच्छे पोस्ट पर काम करते हैं। श्वेता के पेरेंट्स एक आईटी कंपनी में है।
वो भी आपके मल्टीीनेशनल जो कंपनी होती है उसमें अच्छे पोस्ट पर है। कैनथ के फादर जो है वो एक एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी में जॉब करते हैं। तो दोनों पढ़े लिखे खुद श्वेता ने अच्छी पढ़ाई की और वह भी एक आईटी कंपनी में जॉब कर रही थी। केनित भी एक आईटी कंपनी में जॉब कर चुका था।
फिर दोनों मिलते हैं। दोनों में प्यार होता है। दोनों एक साथ लिव इन में रहने लगते हैं अपना-अपना घर छोड़कर। इस दौरान में यह होता है कि कैनथित की नौकरी चली जाती है और अब श्वेता उसका खर्चा उठा रही है। श्वेता अपनी मां से कुछ पैसे मांगती है। मां उसे ₹ लाख देती है। वह कहती है मैं बाद में लौटा दूंगी। लेकिन बाद में खुद श्वेता की भी नौकरी चली जाती है। अब वह भी बेरोजगार, लिविंग पार्टनर भी बेरोजगार। खर्चा कैसे चले? उधर अब श्वेता को यह था कि जो तय मियाद थी पैसे लौटाने की वो आ गई करीब। उसे डर लगा कि मां पैसे मांगेगी 50 लाख वो क्या करेगी?
कहां से जवाब देगी? तब अचानक उसे एक दिन ख्याल आया कि अगर मैं अपने मां-बाप और बहन तीनों को मार दे तो ना ₹ लाख देने पड़ेंगे और उल्टे ये होगा कि जो भी प्रॉपर्टी है, घर है, बैंक में पैसे हैं वो सारे उसके हो जाएंगे। उसने अपने पार्टनर कैन से बात की। दो बेरोजगार इससे अच्छा आईडिया उन्हें कुछ लगा ही नहीं। दोनों ने कहा, ठीक है। अब ये बात है दिसंबर जनवरी की। लास्ट ईयर दिसंबर और इस साल जनवरी की। जब पहली बार इनके दिमाग में यह आईडिया आया। अब इन्होंने प्लानिंग शुरू की। अब प्लानिंग यह कि कत्ल करें और पकड़े ना जाए। तो फिर उसी प्लानिंग में एआई इनका साथी बना। एआई के साथ इन्होंने सारे सवाल पूछ लिए। हर सवाल को उन्होंने कई बार उसके जवाब टटोरे, खंगाले। और इसी दौरान में कहने यह भी चाहता था कि वो एक क्लाउड किचन तैयार करें।
क्लाउड किचन मतलब आजकल एक बिजनेस है कि आप सिर्फ खाना बनाएं और ऑनलाइन डिलीवर हो जाए लोग आए या ले जाए वहां पे मतलब बैठकर आपको खिलाने की कोई सुविधा नहीं होगी बस तो वो एक क्लाउड किचन बना रहा था और उसने इसी एआई से पूछपूछ कर एक लोहे की भट्टी भी बना ली खुद से ही सारी तैयारी हो गई सारे एआई ने जवाब दे दिए अब दोनों ने तय किया कि कत्ल किस दिन करना है। तारीख चुनी गई 22 जून।
22 जून को श्वेता अपनी मां को फोन करती है और धोखे से बुलाती है घर कि मम्मा आपके कुछ पैसे जो थे वो वापस लौटाने हैं। मां उसके घर आती है। 22 जून की दोपहर अकेली। जैसे ही घर में दाखिल होती है मां और केरत आमने-सामने। इस दौरान श्वेता अचानक आती है और चाकू से अपनी मां पर हमला करती है। एक दो नहीं 26 वार करती है अपने मां के जिस्म पर। अब मां लगभग मुर्दा पड़ी है फर्श पर। थोड़ी देर के बाद इसी तरह वो अपने पिता को बुलाती है। पिता आते हैं। दोनों मिलकर पिता को भी उसी तरीके से चाकू से मारते हैं। फिर छोटी बहन भी आई। ठीक। उसे भी चाकू से मारा। अब श्वेता और केने को लगा कि तीनों मर चुके हैं। अब तीनों का अगला टास्क यह था कि वह श्वेता अपनी मां के घर जाए और वहां जो भी कैश है, पैसे हैं, जो जेवर है वो सब वहां से ले ले। इसके बाद तीनों लाश घर में छोड़कर वो मां आपके घर पहुंचती है। वहां से वो सारे जो भी कैशवश थे वो सब उठाती है। वापस आती है। दोनों मोटरसाइकिल पर बैठते हैं। और एक तस्वीर भी है। उसमें एक बैग भी है। उसके बाद उसी मोटरसाइकिल पर दोनों बेंगलुरु के आउटस्करट यानी बाहरी इलाके में चक्कर काट रहे हैं। कुछ देर के बाद दोनों अलग-अलग बस पकड़ते हैं और वहां से पुुडुचेरी चले जाते हैं।
इधर उनके पीछे में यह है अब घर की कहानी कि जिन तीनों को मुर्दा समझकर वो निकल गए थे उनमें से एक श्वेता के जो पिता थे सोमा सुंदर उनकी सांसे अब भी चल रही थी। वो किसी तरह कमरे में घिसटते हुए दरवाजे से बाहर आते हैं। कुछ पड़ोसियों की नजर पड़ती है। पड़ोसी देखकर घबरा जाते हैं। कोई पुलिस को फोन कर देता है। पुलिस फौरन मौके पर पहुंचती है। जब पुलिस पहुंचती है और देखती है घायल लहूलुहान इतने सारे चाकू के वार जिस्म पर पुलिस उठाकर हॉस्पिटल ले जा रही होती है। सांसे चल रही थी और तब सोमा सुंदर पुलिस को उसी वक्त कहते हैं कि अंदर मेरी बीवी और एक छोटी बेटी भी है। उसे भी चाकू से मारा गया। और वो यह भी कहते हैं कि हम तीनों को मेरी बेटी, बड़ी बेटी, श्वेता और उसके दोस्त केनत ने मारा है। पुलिस फौरन अब अंदर जाती है। अंदर दो लाशें पड़ी हुई थी पुलिस लेकर। तीनों को अस्पताल जाती है। मां और छोटी बहन को डॉक्टर डेड डिक्लेअ कर देते हैं।
शोभामा सुंदर का कुछ घंटे इलाज चलता है। लेकिन फिर उनकी भी मौत हो जाती है। और इस तरह तीन कत्ल हो चुका। लेकिन मरने से पहले श्वेता के पिता बयान दे चुके थे पुलिस को। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालती है। सारी चीजें देखती है तो उसमें ये दोनों घर के बाहर निकलते हुए दिखाई देते हैं। फिर यह भी पता था कि श्वेता की मां का कहां पता कहां है। पुलिस की टीम वहां जाती है। वहां के भी सीसीटीवी कैमरे में दोनों कैद नजर आते हैं। अब यह क्लियर था क्योंकि मरने वाला बयान दे चुका था। अब पुलिस श्वेता और कैन को ढूंढती है। बेंगलुरु में चारों तरफ ढूंढ रहे हैं लेकिन कहीं कुछ मिला नहीं। इसी दौरान पुलिस को यह पता चलता है कि 15 दिन पहले दोनों पुुडुचेरी गए थे। अब पुुडुचेरीकि तमिलनाडु में पड़ता है तो कर्नाटक पुलिस ने वहां की पुलिस से कांटेक्ट किया और इसके बाद एक टीम भी भेजी।
अब पुुडुचेरी में जब पुलिस की टीम पहुंची तो वहां तलाश शुरू हुई। आखिरकार श्वेता पुलिस के हाथ लग गई। पुलिस ने उसे पकड़ लिया लेकिन केनेत हाथ नहीं लगा था। पुलिस श्वेता को पकड़ कर बेंगलुरु ले आई। केनित की तलाश जारी थी। फिर एक रोज केनित भी एक बार में पुलिस के हाथ लग गया। उसे भी बेंगलुरु लाया गया। अब दोनों से पूछताछ शुरू हुई। जब पूछताछ शुरू हुई तो श्वेता ने चौंकाने वाले बयान दिए। उसने कहा कि ये तीन कत्ल मैंने किए। अपने हाथों से मारा। अपनी मां को, अपने बाप को और अपनी बहन को। केनित ने किसी को नहीं मारा। उसने सिर्फ कत्ल करने में मेरी मदद की। असल कातिल मैं हूं। पुलिस ने पूछा तुमने ऐसा क्यों किया? उसने कहा बचपन से मेरी मां मेरी जिंदगी पर एक तरह से पूरी तरह से कंट्रोल रखती थी। उसने कभी मुझे कोई आजादी नहीं दी। आजादी के साथ मैं कहां जाना चाहती हूं, क्या खाना चाहती हूं, क्या पहनना है। हर चीज पर बंदिश, हर चीज पर रोक दी। और इसकी वजह से मेरा करियर भी नहीं बन पाया।
तो मुझे लगता है मेरी मां ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। इसलिए मुझे मेरी मां से सख्त नफरत थी। और तब मैंने तय किया कि मैं अपनी मां को मार डालूंगी। फिर पूछा गया बाप और बहन का क्या कसूर? उसने कहा बस मुझे फिर पूरे घर से ही नफरत हो गई थी। लेकिन उसने सब कुछ अपने ऊपर रखा। उसने कहा कि कत्ल मैंने अपने हाथों से किया। मां, बाप और छोटी बहन इन तीनों के जब जिस्म पर चाकू के घाव को गिना गया तो वह 50 से ज्यादा था। मतलब खुद पुलिस हैरान थी कि एक बेटी अपनी बेटी इतनी नफरत अपनी मां से अपने बाप से और अपनी बहन से। मतलब प्रोफेशनल किलर भी इस तरीके से वार नहीं करता जितना इन दोनों ने किया। हालांकि पुलिस का कहना है कि इन्होंने एआई से सारी जानकारी तो ली बॉडी डिस्ट्रॉय करने की और शायद इनका इरादा यह भी था कि क्लाउड किचन के जरिए जो भट्टी बनाई थी खुद कैनत ने उसमें ही इन तीनों की लाश को जलाकर सबूत मिटा दिया जाए या मौका मिले तो घर से बाहर ले जाए। लेकिन ऐन वक्त में इन्होंने अपना प्लान बदल दिया। जब तीन कत्ल हो गए तो तीनों डर गए कि अगर हम यह सब कुछ करेंगे तो पड़ोसियों को पता चल जाएगा या पुलिस आ जाएगी तो फिर सारा भेद खुल जाएगा।
इसीलिए इन्होंने तीनों को बिना ठिकाने लगाए घर में ही छोड़कर वहां से निकले और फिर अपनी मां के घर गई और वहां से पैसे और जेवर उठाए और ये लोग पुडीचेरी तीन कत्ल करने के बाद घूमने के लिए चले गए। अब इसके बाद इनके बयान के बाद जब पुलिस ने इनके लैपटॉप और मोबाइल को खंगाला तो फिर पता चला कि पिछले काफी वक्त से ये दोनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के जरिए ट्रिपल के तरीके को ठिकाने लगाने के तरीके के धब्बों को साफ करने के लिए कौन से केमिकल का इस्तेमाल होगा वो बॉडी पैक करने के तरीके घर से बाहर बॉडी निकालने के तरीके और क्लाउड किचन इनकी भट्टी में को कैसे जलाई जाए उसके तरीके ढूंढ रहे थे।
तो सर्च इंजन से जब यह सारे एआई से पूछे गए सवाल जवाब के साथ पुलिस के सामने आए तब पुलिस को लगा ये क्या है? बेंगलुरु पुलिस ने फिर यह सोचा कि कत्ल तो दो लोगों ने मिलकर किया लेकिन शायद इस कत्ल में इनकी मदद एआई टू ने की है। हालांकि वो एक टेक्नोलॉजी है। लेकिन बहुत पहले भी आपको कहानी सुनाई थी कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसको भी दोषी माना गया और बकायदा अदालत में उसको लेकर मुकदमा चला। मतलब जिसने टेक्नोलॉजी बनाई.
उस कंपनी के खिलाफ तो बेंगलुरु पुलिस को लगा कि क्या केनत और श्वेता के साथ-साथ एआई टूल्स को भी कोक्यूज्ड यानी सह आरोपी बनाया जाए इस तेरे l या ट्रिपल मंडल के लिए अब मामला अजीब था और इससे पहले ऐसा हुआ नहीं तो फिलहाल बेंगलुरु पुलिस ने उस कंपनी को कुछ सवाल भेजकर जवाब मांगे हैं, जानकारी मांगी है और उस जानकारी के बाद अब आगे जो भी फैसला होगा वो बेंगलुरु पुलिस करेगी।
लेकिन पुलिस हिरासत में इन दोनों से पूछताछ के बाद फिलहाल श्वेता और कैनथ दोनों जुडिशियल कस्टडी में जेल भेज दिए गए और इस वक्त वो जेल में है और बेंगलुरु पुलिस सारी कड़ियों को सारे सबूतों को जोड़कर यह कोशिश कर रही है कि इन दोनों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए और इसमें एआई का आखिर वो किस तरीके से उसको लेंगे