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LPG नही अब इस से बनेगी आपकी रसोई, सरकार ने किया बड़ा एलान, होश उड जाएंगे।

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आने वाले वक्त में आपके घर की रसोई में गैस सिलेंडर की जगह एक नया ईंधन नजर आ सकता है। जिस एथेनॉल का इस्तेमाल अभी आपकी कार और बाइक के पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जा रहा है।

वही एथेनॉल अब खाना पकाने के काम में भी इस्तेमाल हो सकता है। यानी आने वाले दिनों में चूल्हा जलाने के लिए एलपीजी सिलेंडर के साथ-साथ एथेनॉलभी एक ऑप्शन बन सकता है। नमस्कार, मैं खुशी चौधरी और आप देख रहे हैं एबीपी लाइव। सरकार अब एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिसका मकसद खाना पकाने के लिए साफ और सस्ते ईंधन को बढ़ावा देना है। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो देश में एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम हो सकती है और लोगों को खाना बनाने के लिए एक नया ऑप्शन मिल सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक नई अल्टरनेटिव क्लीन कुकिंग पॉलिसी यानी वैकल्पिक स्वच्छ खाना पकाने की नीति तैयार कर रहा है। इस नीति के तहत सरकार एलपीजी के साथ-साथ एथेनॉल को भी घरेलू कुकिंग फ्यूल के तौर पर बढ़ावा देने की तैयारीकर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की योजना है कि आने वाले वक्त में एथेनॉल को सिर्फ गाड़ियों तक सीमित ना रखा जाए बल्कि इसे घरों की रसोई तक भी पहुंचाया जाए। हालांकि मंत्रालय की ओर से अभी तक इस योजना को लेकर कोई आधिकारिकघोषणा नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह नीति सितंबर तक तैयार हो सकती है।

अब सवाल है कि आखिर एथेनॉल से खाना बनेगा कैसे और क्या यह गैस सिलेंडर का ऑप्शन बन [संगीत] सकता है? दरअसल एथेनॉल एक ऐसा फ्यूल है जिसे गन्ने, मक्का और दूसरी फसलों से तैयार किया जाता है। इसे ज्यादा साफ ईंधन माना जाता है क्योंकि इसके इस्तेमाल से पोलशन कम होता है और इसीलिए सरकार पिछले कुछ सालों से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को बढ़ावा दे रही है। अब इसी दिशा में अगला कदम एथेनॉल से खाना पकाने की तरफ बढ़ाया जा रहा है। देश में एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव की टेस्टिंग भी चल रही है।

इन स्टोव एथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और इससे खाना पकाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि अगर एथेनॉल जैसे ग्रीन फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ता है तो इससे कई फायदे हो सकते हैं। पहला फायदा यह होगा कि एलपीजी की मांग कम हो सकती है। दूसरा फायदा यह होगा कि देश को ऊर्जा के लिए दूसरे ऑप्शनमिलेंगे और तीसरा फायदा पर्यावरण को होगा क्योंकि एथेनॉल को साफ ईंधन माना जाता है। इंटरनेशनल इंस्टट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट यानी आईआईएसडी के एक रिपोर्ट में भी कहा गया कि अगर भारत में एलपीजी की जगह बायोगैस और दूसरे ग्रीन फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाया जाए तो साल 2050तक देश करीब ₹ लाख करोड़ से ज्यादा की बचत कर सकता है।

हालांकि एथेनॉल को रसोई तक पहुंचाना इतना भी आसान नहीं होगा।इसके लिए सरकार को कई चीजों पर काम करना होगा।

जैसे एथेनॉल की सप्लाई चेन तैयार [संगीत] करना, इसे लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाना और इसकी कीमत को आम लोगों के लिए किफायती रखना। इसी को देखते हुए सरकार एथेनॉल कुकिंग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी कैपिटल सपोर्ट और दूसरी आर्थिक मदद देने पर भी विचार कर रही है।

इसके अलावा एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों और इंडस्ट्रीज से भी बातचीत [संगीत] चल रही है ताकि इसकी सप्लाई और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

भारत में एथेनॉल की उपलब्धता भी लगातार बढ़ रही है। कुछ और रिपोर्ट के मुताबिक देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता अब20 अरब लीटर प्रति साल से ज्यादा हो चुकी है। आने वाले वक्त में इसमें करीब 4 अरब लीटर की और बढ़ोतरी होने की उम्मीदहै। अभी देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए करीब 11 अरब लीटर एथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके अलावा शराब, दवा और केमिकल इंडस्ट्री में भी लगभग 3 से 3.5 अरब लीटर एथेनॉल की खपत होती है। इन सभी इस्तेमाल के बाद भी देश में करीब 7 अरब लीटर एथेनॉल बच जाता है। [संगीत] ये एक्स्ट्रा एथेनॉल अब खाना पकाने जैसे नए इस्तेमाल के लिए उपयोग किया जा सकता है। हालांकि आम लोगों के मन में कई सवाल भी हैं। क्या एथेनॉल से खाना बनाना सुरक्षित होगा? क्या इसकी कीमत एलपीजी से कम होगी? क्या गांव और छोटे शहरों तक इसकी पहुंच हो पाएगी?

इन सभी सवालों के जवाब सरकार की आने वालीनीति और उसके लागू होने के बाद ही क्लियर होंगे। लेकिन इतना बिल्कुल तय है कि भारतअब धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधन से हटकर साफ और नए विकल्पों की तरफ बढ़ रहा है। जिसएथेनॉल ने पेट्रोल में अपनी जगह बना ली है। हो सकता है आने वाले वक्त में वही आपकी रसोई में भी नजर आए। यानी फ्यूचर में घर का चूल्हा सिर्फ गैस से [संगीत] नहीं बल्कि ग्रीन एनर्जी से भी जल सकता है।

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