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संजय खान के साथ सेट पर ऐसा क्या हुआ जो जिंदगी और मौत के बीच झूलने लगे?

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हिंदी सिनेमा के 60 का दौर था एक बेमिसाल अभिनेता का उदय हो रहा था नाम था संजय खान अपने जमाने के सुपरस्टार कहे जान वाले फिरोज खान के छोटे भाई पहले ही फिल्म ने संजय खान को स्टार बना दिया था रोज लाइन लगाएं बड़े-बड़े डायरेक्टर और प्रोड्यूसर्स इनके सामने खड़े रहते अपनी फिल्मों में इन्हें साइन करने के लिए यह वह अभिनेता थे जो सुधार के बड़े-बड़े सितारों के बीच भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे थे मगर दोस्तों क्या आपको पता है की यह अपने करियर के जब उसे मुकाम पर पहुंचने वाले थे जहां से हर कोई इनके पीछे खड़ा नजर आता तो एक भयानक हाथ से ने इनका पूरा करियर तबाह कर डाला आई हम आपको इनके फिल्मों में आने से लेकर इनके शाह अब्बास खान से संजय खान बने और फिर करियर तबाह होने की पुरी कहानी सुनते हैं यह कहानी आपको चौंकाने वाली है दोस्तों कभी आपने सुना है की कभी किसी एक्टर को कोई फिल्म कर में धक्का लगाने के आवाज में मिली हो अगर नहीं सुना तो आई हम बताते हैं संजय खान को अपनी पहले फिल्म ऐसे ही मिली थी तीन जनवरी 1940 को शाहबाद यानी की संजय बेंगलुरु में पैदा हुए थे इनके पिता शादी काली और मां बीबी फातिमा बेंगलुरु के इज्जतदार लोगों में आते थे वैसे तो संजय खान पांच भाइयों में थे लेकिन मशहूर केवल तीन हुए क्योंकि यह तीनों बॉलीवुड में ए गए फिरोज खान संजय खान और अकबर खान बाकी दो भाई बिजनेस करने लगे संजय के परवरिश बेंगलुरु से ही हुई उन्होंने सेंट जर्मन स्कूल से पढ़ाई की और बाद में मुंबई चले आए संजय की उम्र करीब 20 22 वर्ष रही होगी मुंबई में जहां संजय रहा करते थे वहीं उनके पड़ोस में एक मशहूर डायरेक्टर हुआ करते थे जिनका नाम था सत्यम बस वही सत्यम बस जिन्होंने जागृति चलती का नाम गाड़ी और मासूम जैसी बेमिसाल

फिल्म में बनाई थी एक बार की बात है जब सत्य की एक पुरानी कर स्टार्ट नहीं हो रही थी ऐसे में पड़ोसी संजय के घर पहुंचे और उन्हें बुलाया सत्यम बस बोले की कर स्टार्ट नहीं हो रही है थोड़ा धक्का मार दो चल पड़ेगी संजय ने धक्का मारा और कर स्टार्ट हो गई अब तो यह रोजगार सिलसिला बन गया जब भी कर स्टार्ट ना होती तो सत्येन संजय के घर पहुंचने और संजय धक्का मार कर कर को स्टार्ट करते थे एक सुबह संजय के घर की बेल बाजी जब संजय ने दरवाजा खोल तो सामने खड़े थे संजय ने हंसते हुए कहा की चलो दादा ए रहा हूं धक्का करने सत्येंद्र हंसते हुए बोले की आज मैं थका मरवाने नहीं आया तुम्हें फिल्म में लेने आया हूं संजय कुछ समझ पाते इससे पहले ही सत्यम बोले की तेजश्री प्रोडक्शन वाले ताराचंद्र बजात्या का एक बहुत ही बढ़िया ऑफर आया है मैं तुम्हें इस फिल्म में हीरो लेना चाहता हूं संजय बोले की क्या मैं आपको हीरो जैसा लगता हूं इस पर सत्यम बोले की तुम बॉलीवुड में बड़ा स्टार बनोगे बस एक कमी है बॉलीवुड में तुम्हारा यह नाम शाह अब्बास नहीं चलेगा इसको बदलकर मैं तुम्हारा नाम संजय खान रखना हूं बस इस दिन से शाह अब्बास संजय खान बन गए संजय खान सचिन बस के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू ही करने वाले थे की इसी बीच चेतन आनंद ने उन्हें अपनी फिल्म में साइन कर लिया वह 1962 भारत चीन युद्ध पर एक फिल्म बना रहे थे इस फिल्म में संजय को एक छोटा सा रोल दिया गया इत्तेफाक की बात है की दोनों ही फिल्में 1964 में रिलीज हुई लेकिन हकीकत फिल्म पहले ए गई इसी वजह से यह फिल्म संजय खान की पहले फिल्म बन गई मगर कुछ ही महीनो बाद सचिन बस की फरमाई जिसका नाम था दोस्ती इस फिल्म में अंधे लंगड़े बने सुधीर कुमार और सुशील कुमार के साथ साथ एक अमीर खानदान के युवक बने संजय खान ने भी अपनी अदाकारी से सबका दिल जीत लिया रफी की आवाज में फिल्म के कर गानों ने धूम मचा दी जान वालों जरा मड के देखो इधर मेरी दोस्ती मेरा प्यार चाहूंगा मैं तुझे शाम सवेरे और रही मानव दुख की चिंता क्यों सताती है नए कलाकारों द्वारा बनी सिर्फ फिल्म ने सिनेमाघर में राज कपूर और राजेंद्र कुमार की फिल्म संगम तक को कड़ी टक्कर दे दी थी दोस्ती फिल्म के बाद संजय खान अचानक

बॉलीवुड में उभर गए वो अपने भाई फिरोज खान के घर रोज रात शराब पीने जय करते थे वहां संजय खान की सफलता से उत्साहित भाई फिरोज खान उनसे रोज पूछा करते की आज कितनी फिल्में साइन की संजय कभी पांच बोलते तो कभी छे आलम ये था की एक महीने के अंदर ही करीब 100 फिल्में साइन कर चुके थे संजय इसके बाद संजय खान की कई हिट फिल्में आई जैसे 1966 में आई फिल्म 10 लाख 1979 में एक फूल दो माली इंतकाल और शर्ट 1971 में मेला और उपासना 1973 में और 1976 में नागिन मेला उपासना और नागिन फिल्मों में वो भाई फिरोज खान के साथ खूब पसंद भी किया गए इसी बीच उन्होंने अचानक खुद फिल्म बनाने का फैसला भी कर लिया संजय ने तीन फिल्में बनाई 1977 में चांदी सोना 1980 में अब्दुल्ला जिसमें वो अपने फेवरेट हीरो राज कपूर के साथ नजर आए वहीं 1986 में कल धंधा गोरे लोग इन तीनों ही फिल्मों में अब्दुल्ला और कल धंधा गोरे लोग फिल्मों ने खूब कमाई भी की संजय खान का करियर एक्टर और डायरेक्टर बनकर काफी अच्छा चल रहा था मगर उनके जीवन का जब सबसे ऊंचा मुकाम आने वाला था तभी इस बदकिस्मत अभिनेता के जीवन में एक दर्दनाक हादसा हो गया जिसने उनका पूरा करियर बर्बाद कर दिया इस हादसे के बड़े में जन से पहले उसे कलंक के बड़े में जान लीजिए जो उनके चरित्र पर लगा था जब वह 19 साल के थे तभी उनका दिल एक खूबसूरत मॉडल और एक्ट्रेस जरीन पर ए गया था जरीन को आपने देवानंद की 1963 में आई फिल्म तेरे घर के सामने में जरूर देखा होगा वो इस फिल्म में देवानंद की सेक्रेटरी जेनी बनी थी कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली थी दोनों के कर बच्चे हुए फरहा सुजैन खान जायद खान और साइमन मगर दोस्तों संजय खान

ने अपनी पत्नी को उसे वक्त धोखा दिया था जब वह गर्भवती थी यह बात अब्दुल्ला फिल्म की शूटिंग के दौरान की है जब जीनत अमन और संजय खान का अफेयर हो गया था एक समय तो ऐसा आया जब जरीन संजय खान को छोड़कर जान वाली थी लेकिन फिर जीनत अमन और संजय खान की लड़ाई हो गई संजय खान ने तो जीनत अमन की सबके सामने टी तक कर दी थी इसके बाद दोनों का ब्रेकअप हुआ और बड़ी मुश्किल से संजय खान और जरीन की शादी बच्ची थी आई अब उसे दर्दनाक हादसे के बड़े में बताते हैं जिसने संजय खान का करियर बर्बाद कर डाला 1988 के आसपास की बात है वह मुंबई से दिल्ली जा रहे थे उसे जमाने के शांताक्रूज एयरपोर्ट पर पहुंचे फ्लाइट में थोड़ा टाइम था तो वहीं एक बुक स्टोर पर पहुंच गए वहां उनकी नजर एक किताब पर पड़ी लेखक का नाम लिखा था भगवान किडवानी यह किताब एक मुस्लिम शासन टीपू सुल्तान पर लिखी गई थी किताब का नाम था दी शॉट ऑफ टीपू सुल्तान दिलचस्प बड़ी तो किताब खरीद ली प्लेन में बैठे बैठे जब पुरी किताब पड़ी तो किताब के मुरीद हो गए और फैसला किया की इस पर फिल्म बनाएंगे वापस मुंबई पहुंचने पर जब लेखक का पता करवाया तो पता चला की वो दिल्ली में रहते हैं संजय दोबारा दिल्ली पहुंचे उनको

₹10000 देकर कॉन्ट्रैक्ट बनवाकर राइट्स अपने नाम करवा लिए मगर इस किताब के पुरी कहानी को एक फिल्म में समेटना थोड़ा मुश्किल था इसलिए फिल्म बनाने की बजे सीरियल बनाने का फैसला कर लिया टीपू सुल्तान की शूटिंग शुरू हो गई कुछ ही दिन हुए थे की अचानक एक खौफनाक हादसा हो गया 8 फरवरी 199 का दिन था मैसूर के प्रीवियस स्टूडियो में शूटिंग चल रही थी रात के करीब 8:00 बजे थे कुछ शॉट होने के बाद लाइटिंग कम चल रहा था संजय अपने राइटर के साथ बैठकर बातचीत कर रहे थे अचानक लोगों के चखने चिल्लाने की आवाज सुने देने लगी उन्होंने जब कमरे से बाहर झांक कर देखा तो चारों तरफ आज ही आज नजर आई लोग जल रहे थे सीख रहे थे संजय खान के होश उड़ गए भयानक आज ने उन्हें भी घर लिया उन्होंने जान बचाने के लिए भागने की कोशिश की लेकिन गेट जाम हो चुका था वह एक छोटे से दरवाजे से निकालने की कोशिश कर रहे थे की अचानक ऊपर से एक पेंट का डब्बा उनके सर पर गिर गया और वह गिर पड़े आज में जल रहे संजय को किसी तरह लोगों ने बाहर तो निकाला लेकिन तब तक वह 65 फ़ीसदी जल चुके थे पूरा जिस कल पद चुका था हाथ पर चेहरा सब कुछ जल चुका था उनकी तस्वीर ऐसी है जिनको दिखाए भी नहीं जा

सकता जब राजीव गांधी को खबर हुई तो उन्होंने एम्स के डॉक्टर को भेजो एम्स के डॉक्टर ने कहा की इनके बचाने की उम्मीद अब सिर्फ 10% है 5 मीना तक वह भारत के अस्पताल में तड़पते रहे और इसके बाद कई मीना तक वो अमेरिका के अस्पताल में पड़े रहे 13 महीने और 73 सर्जरी के बाद उनकी जान तो बैक गई लेकिन जल शरीर अभिनेता बने के काबिल नहीं रहा डॉक्टर की चेतावनी के बावजूद बड़ी मुश्किल से और भारी मेकअप के साथ टीपू सुल्तान को पूरा किया 1990 में यह टीवी सीरियल टीवी पर प्रसारित हुआ और ऐसा छाया की संजय खान टीवी के सुपरस्टार बन गए [संगीत] हालांकि डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के रूप में उन्होंने खूब नाम और पैसा कमाया लेकिन अगर यह खौफनाक हादसा ना हुआ होता तो वह टीवी की दुनिया के बेताज बादशाह बन जाते दोस्तों आपको संजय खान कैसे लगता थे उनकी कोई फिल्म या कोई कदर आपको पसंद आया हो तो हमें कमेंट्स में जरूर बताइएगा साथ ही साथ अगर आप हमारे चैनल भारती मंथन पर नए हैं तो इसे सब्सक्राइब कर लीजिए और बेल आईकॉन ढाबा दीजिएगा ताकि ऐसी ही अनसुनी कहानी हम आपके लिए हमेशा लेट रहे

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