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सरकार को RBI देगा 2.86 लाख करोड़, कहां से आया इतना पैसा

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क्या आपने कभी सोचा है कि अगर भारत सरकार को अचानक 2.86 लाख करोड़ मिल जाए तो क्या होगा? सड़कें बनेंगी, रेलवे का विस्तार होगा, राजकोशीय घाटा कम होगा और सरकार को अतिरिक्त टैक्स लगाने की जरूरत भी कम पड़ सकती है। लेकिन इस बार यह पैसा किसी टैक्स से नहीं आया है। ना किसी विदेशी कर्ज से आया है। यह पैसा आया है देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान भारतीय रिजर्व बैंक यानी कि आरबीआई से। नमस्कार, मैं हूं रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया न्यूज़।

[संगीत] आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025 2026 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.86 लाख करोड़ का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा अधिशेष हस्तनांतरण है। दिलचस्प बात यह है कि यह रकम पाकिस्तान को [संगीत] आईएमएफ से मिले कर्ज से भी ज्यादा बताई जा रही है। तो सवाल भी उठता है कि आखिर आरबीआई के पास इतना पैसा आया कहां से? सबसे पहले समझते हैं कि आरबीआई कमाता कैसे है। आरबीआई कोई साधारण बैंक नहीं है। यह देश का केंद्रीय बैंक है जो विदेशी मुद्रा भंडार, सरकारी बॉन्ड और विभिन्न निवेशों का प्रबंधन करता है। आरबीआई की कमाई का सबसे बड़ा सोर्स है विदेशी मुद्रा भंडार।

भारत के पास 700 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार है जो दुनिया के सबसे बड़े रिजर्व में शामिल है। आरबीआई इस धन को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड, यूरोपीय सिक्योरिटीज और अन्य सुरक्षित निवेशों में लगाता है और उस पर ब्याज कमाता है। दूसरा बड़ा सोर्स है सरकारी प्रतिभूतियां यानी कि गवर्नमेंट बॉन्ड। आरबीआई के पास बड़ी मात्रा में सरकारी सिक्योरिटीज होती हैं जिन [संगीत] पर उसे नियमित ब्याज मिलता रहता है। तीसरा सोर्स है विदेशी मुद्रा कारोबार से होने वाला लाभ। जब डॉलर, यूरो या फिर अन्य विदेशी मुद्राओं की कीमत में बदलाव होता है तो आरबीआई को कई बार बड़ा मुनाफा होता है।

पिछले वर्ष विदेशी मुद्रा भंडार में हुए उतार-चढ़ाव ने आरबीआई की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। [संगीत] यही वजह है कि आरबीआई की कुल आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर किया जा सका। अब सवाल यह है कि यह जनता के टैक्स का पैसा है। जवाब है बिल्कुल नहीं। यह पूरी तरह से आरबीआई की अपनी कमाई है। यह पैसा आयकर, जीएसटी या अन्य किसी टैक्स से नहीं आया हुआ है। आरबीआई ने अपने निवेश और वित्तीय प्रबंधन से जो अधिशेष कमाया उसी का हिस्सा सरकार को दिया जा रहा है।

इस डिविडेंड का सबसे बड़ा फायदा सरकार को राजकोशीय घाटा कम करने में मिलेगा। सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए घाटे को नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा है। आरबीआई से मिली अतिरिक्त रकम उस लक्ष्य को हासिल करने में बहुत बड़ी मदद कर सकती है। इसके अलावा सरकार के गैर कर राजस्व में भी बड़ा इजाफा होगा। इससे बुनियादी ढांचा, रेलवे सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ने की संभावना बनेगी। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इतनी बड़ी रकम मिलने के बावजूद सरकार को खर्च और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना [संगीत] होगा।

फिलहाल इतना तय है कि आरबीआई का यह रिकॉर्ड डिविडेंड भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। यह ना सिर्फ आरबीआई की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत का आर्थिक ढांचा वैश्विक अनिश्चितताओं [संगीत] के बीच भी मजबूती से खड़ा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस ऐतिहासिक रकम का इस्तेमाल किस तरह करती है और इसका आम लोगों की जिंदगी पर कितना असर पड़ता है। इस खबर में इतना ही। अपडेट्स के लिए देखते रह वन इंडिया हिंदी। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत]

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