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भारत में चलेंगे प्लास्टिक नोट? RBI का प्लान क्या?

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दरअसल आरबीआई अब प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी में है। आखिर प्लास्टिक के नोटों का क्या होगा? कैसे होगा और क्यों इसकी तैयारी की जा रही है कि मतलब कागज के नोट के बदले प्लास्टिक के नोट आएंगे। तो इन सारी बातों पर हम विशेष चर्चा करेंगे। विस्तार से चर्चा करेंगे और वो चर्चा करने के लिए हमारे साथ गेस्ट मौजूद हैं जो कि है अश्विनी राणा जी।

ये बैंकिंग का फाउंडर हैं वॉइस ऑफ बैंकिंग के। । तो सर ये जो आरबीआई तैयारी कर रही है प्लास्टिक के नोट लाने की तो इस पे आपका पहला कमेंट क्या है सर? नहीं नहीं बहुत अच्छा सोच है रिजर्व बैंक की।

पहले भी एक बार अटेम्प्ट हुआ था लेकिन वो अटेम्प्ट जो है 2012 के बाद उसको वास्तविकता में हम कन्वर्ट नहीं कर पाए। लेकिन आप आज मांग है समय की कि भाई जो पेपर करेंसी है उसकी एक तो कॉस्ट इतनी ज्यादा है उसकी प्रिंटिंग की हर साल अगर नोट जो छापते हैं तो 6000 से 7000 करोड़ का उस नोट को प्रिंट करने का खर्चा है फिर उसकी लाइफ नहीं है ।

मतलब वो पेपर का नोट है खराब हो जाता है फिर वो वापस जाता है उसकी जगह नए नोट छपते हैं और करेंसी की कई बार डिमांड बढ़ती है अब अगर देखे जाए तो छोटे नोट 10 के 20 के बहुत और लोग मांगते हैं लेकिन वो मार्केट में नहीं है। तो इस तरह से सरकार का कोशिश है कि भ ये आरबीआई की कि भ प्लास्टिक के नोट क्योंकि उसकी लाइफ भी ज्यादा है।

उसकी प्रिंटिंग कॉस्ट भी कम है और ड्यूरेबिलिटी भी है। तो उसको देखते हुए मुझे लगता है रिजर्व बैंक ने ये एक सोच जारी की है। जी सर दरअसल ये इंडिया पहला ऐसा नहीं है कंट्री जहां प्लास्टिक के नोटों की बात हो रही है। कम से कम 60 ऐसे देश हैं जहां ऑलरेडी प्लास्टिक की करेंसी चल रही है। जिसमें ऑस्ट्रेलिया है, कनाडा है, यूनाइटेड किंगडम है, सिंगापुर है, न्यूजीलैंड है और भी कई देश हैं जहां प्लास्टिक की करेंसी चल रही है।

तो सर आपको लगता है कि आरबीआई की जो प्लानिंग है, ये क्या मतलब केवल नोट के खर्च में जो नोट का जो छापने का खर्च है, उसको कम करना है या और भी कोई इसके पीछे की मंशा है? देखो बिल्कुल दोनों तरह की मंशा है। एक तो कॉस्ट को कम करना है, ड्यूरेबिलिटी बढ़ाना है और दूसरा जो पहले से एक चल रहा था कि भाई बड़े नोटों को अगर कम किया जाए या उनको मार्केट से हटाया जाए, सर्कुलेशन से हटाया जाए तो वो आज स्थिति नहीं है। लेकिन इस तरह के नोट को प्रिंट करके आप उसको मार्केट में लाकर और आहिस्ता-आहिस्ता पेपर करेंसी को जो है आप मार्केट से बाहर करेंगे तो वो चीज भी हो जाएगी क्योंकि वो बड़े जो नोट हैं वो बहुत बड़ी मात्रा में जो है वो अंडर ग्राउंड है। यानी वो उसका अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं है।

ना वो बैंक में है और ना ही उसका अर्थव्यवस्था में कोई उपयोग हो रहा है। तो, इस तरीक़े से अह एक तीर से दो निशाने जो है सरकार लगाना चाहती है। एक तीर से दो निशाने लगाना चाहती है। सर, आरबीआई का जो है, इससे पहले भी हमने शो किया था। हम आप ही के साथ हमने किया था और वह नोटों को लेकर था कि छोटे नोटों को बढ़ावा दे दिया जाए। और ऐसा अब आरबीआई कर भी रही है। इस रिपोर्ट में भी आज आरबीआई की जो रिपोर्ट आई है उसमें एक और खास बात कही गई है कि ₹500 के जो फेक नोट्स हैं मार्केट में बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं और आरबीआई ने इसे सावधान रहने के लिए कहा गया है और वहीं अब प्लास्टिक करेंसी की बात हो रही है। तो सर ये आप देखिए कि खर्चा कितना बैठता है। केवल एक बीज वर्ष की बात करें तो पिछले साल करीब-करीब 5100 समथिंग करोड़ खर्च हुआ था छापने में।

इस बार खर्च हुआ है 6000 समथिंग करोड़। तो इतनाइतना जो एक तो खर्चा हो रहा है एक तो उस खर्च में कमी आएगी और आपको क्या लगता है सर प्लास्टिक नोट के और क्या-क्या फायदे हो सकते हैं? देखिए प्लास्टिक नोट की जो प्रिंटिंग कॉस्ट है वो कम है। कम से कम 25 से 30% पेपर नोट से फिर फेक करेंसी जो है वो आपको नहीं मिलेगी। मतलब जानी लोटों को आप रोक सकते हैं और जो दूसरा है उसकी लाइफ ज्यादा है। यानी यह अगर हर साल जहां 6000 करोड़ का लगभग करता है नोट छापने का और वहां अगर पेपर करेंसी हर साल ऐसे ही छपती रहती है तो 5 साल में 300 करोड़ हो जाते हैं। लेकिन वो उसकी एक बार छपने से 4000 करोड़ में वही नोट जो है 5 से छ साल तक चल सकता है। तो एक दोनों तरह से उसका फायदा है।

जी सर अगर बात करें वर्ल्ड लेवल की तो ऑस्ट्रेलिया में सबसे पहली बार प्लास्टिक करेंसी आई थी और उसमें बताया जा रहा है कि वो दुनिया की सबसे मजबूत प्लास्टिक करेंसी है। मजबूत मेरा कहने का मतलब ये है कि मजबूत उसकी जो मतलब मजबूती है वो बहुत ही है और वो जल्दी कटता फटता नहीं है और उसकी लाइफ कम से कम 15 साल है। इसके बाद सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया में इस तरह के नोट्स आए। उसके बाद धीरे-धीरे वर्ल्ड में यूरोप के कई कंट्रीज में आए। 1998 में सबसे पहले प्लास्टिक नोट यूरोप ने पेश किया। इसके बाद धीरे-धीरे कनाडा में आया। 2011 में इसे कनाडा ने अपने सिस्टम में लागू किया। और अब बात करते हैं कि सर अमेरिकी जो डॉलर है पूरी तरह से उस वहां की जो नोट है वो पूरी तरह से प्लास्टिक की नहीं होती है। उसमें कुछ हिस्सा मिला होता है। तो सर अब बात कर रहे हैं मैं आता हूं वापस ऑस्ट्रेलिया के ऊपर कि ऑस्ट्रेलिया की करेंसी को सबसे मजबूत माना गया है। तो सर इसके पीछे आप क्या वजह मानते हैं?

देखिए ऑस्ट्रेलिया हालांकि हमारे कंट्री से बहुत छोटा है। वहां की करेंसी की सर्कुलेशन कम होगी। हमारा बहुत बड़ा देश है। नोटों की सर्कुलेशन बहुत ज्यादा है। लेकिन फिर भी सब तरह से वो उसका फायदे का सौदा है। ये आरबीआई के लिए भी लोगों के लिए कि वो जिस तरह से फटाफट खराब हो जाता है। ये खराब भी नहीं होगा और आपकी जेब में भी रहेगा तब भी दिक्कत नहीं है। पेपर करेंसी है वो अगर धुल गया या कुछ हो गया तो वह खराब हो जाता है। हम फिर बैंक भी देते हैं। बैंक आरबीआई भेजता है। तो एक लंबा प्रोसेस तो यह सब तरह से फायदे का सौदा और दूसरा जो करेंसी मार्केट में एक डंप पड़ी है उसको आहिस्ता-आहिस्ता सर्कुलेशन से बाहर करके प्लास्टिक को लाने में भी एक अच्छा जो है रोल प्ले करेगी कि वो पैसा जो पड़ा हुआ है कहीं जी वो अर्थव्यवस्था में सर्कुलेशन में काम आएगा। सर एक बात की जा रही है कि जैसे मानते हैं कागज के नोट जो भी हम आप हम और आप यूज़ करते हैं उसको गलने की सड़ने की फटने की संभावना होती है। फिर उसको बैंक में बदलने जाओ तो आपको तो परेशानी होती है। बैंक का भी खर्चा बढ़ता है।

बैंक उसको फिर से रिसफल करता है। फिर नोट छापता है। तो चलिए यहां तक तो ठीक है। तो प्लास्टिक करेंसी की भी तो कोई उम्र होगी ना। वो भी तो ऐसा तो नहीं है परमानेंट वो चलेगा। वो भी तो खराब होगा। तो सर दोनों में जरा अंतर बताइए कि जो अभी करेंसी चल रही है कागज की उसकी कितनी लाइफ होती है और प्लास्टिक करेंसी की कितनी लाइफ हो सकती है? देखिए अभी जो करेंसी है उसकी डिपेंड करता है कि किस हाथों में जाता है कितना सर्कुलेशन में जाता है कितना यूज़ होता है तो दो-ती साल में जो वो नोट है वो खराब हो जाता है लेकिन ये ये डिपेंड करेगा कि सरकार फाइनली जो नोट ला रही है वो पॉलीक्लनिक कौन सा जो प्लास्टिक है पॉलीमर प्लास्टिक है या उसके अंदर कुछ मिक्स कर रही है या उसके अंदर क्या एक्चुअली वो जो है उसका प्रोडक्ट किससे बनेगा लेकिन फिर फिर भी वो उसकी लाइफ 5 से 10 साल तक हो सकती है और वो कहीं पड़ा पड़ा सड़ता भी नहीं है। पेपर है कहीं डंप हो गया तो वो जो है बेकार हो जाता है। जी सर इससे सबसे बड़ी जो बात निकल के आ रही है सर कि नकली नोटों का जो गोरख धंधा है इस पे भी बहुत बड़ा एक हैंपर पड़ेगा।

बहुत बड़ी मार पड़ेगी। क्योंकि आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में खुद बताया है कि 500 के नकली नोट इतने ज्यादा मार्केट में घूम रहे हैं कि उनके लिए काउंटर फीट करना इसको मतलब दिक्कत हो रही है। तो प्लास्टिक नोट आने के बाद एक इस पे बड़ा प्रहार हो सकता है। इस पर आप क्या कहते हैं सर? नहीं बिल्कुल होगा। कारण क्या है कि हालांकि देखिए अभी जो आप 500 के नोट की बात कर रहे हैं कोई भी नोट है जो नकली नोट है वो पर्सन टू पर्सन अगर मूव कर रहा है तो आप उसको ज्यादा उसको नहीं देख सकते हैं कि वो नकली है या असली है वो बैंक में जाएगा तो वो पकड़ा जाएगा क्योंकि वहां पर जो मशीन है जिससे वो काउंट करते हैं उसके अंदर स्कैनर है तो वो नकली नोट की पहचान कर लेता है लेकिन इस तरह के नोट जो है सिर्फ मार्केट के अंदर सर्कुलेट किए जाते हैं तो उससे भी लोग बच जाएंगे कि उनके हाथ जो भी होगी और आज सबसे बड़ी बात है कि आज जो एटीएम है वह भी उस प्लास्टिक की करेंसी को डिस्पेंस करने के लिए तैयार है। यानी मतलब उसके अंदर टेक्नोलॉजी ऐसी है कि पहले वो नहीं हो सकता था लेकिन आज वो पॉसिबल है।

जी मेरा अगला सवाल इसी पे था सर क्योंकि दर्शक जरूर जानना चाहेंगे कि अभी हम एटीएम से जाके पैसे निकाल लेते हैं। अगर प्लास्टिक की करेंसी आ गई जैसे हमारा डेबिट कार्ड है, क्रेडिट कार्ड है। मतलब कुछ इस तरह का हुआ क्योंकि इंडिया में यह बिल्कुल नई बात है। आया नहीं है। हालांकि आरबीआई इसकी तैयारी बहुत दिनों से कर रही थी। अब आरबीआई ने मतलब अभी भी आरबीआई ने घोषणा नहीं की है। लेकिन यह कहा है कि हम तैयारी कर रहे हैं और हम विचार कर रहे हैं लाने की। तो सर एटीएम में जो नोट डलते हैं तो क्या इसके लिए प्लास्टिक का बॉक्स तैयार किया जाएगा? खांचा अलग तैयार किया जाएगा या कैसे होगा? नहीं वो क्या होता है? अलग-अलग जो कैसेट्स उसमें रहती हैं, वह उसमें कोई दिक्कत नहीं। क्योंकि आज जो लेटेस्ट एटीएम्स आ रहे हैं, वह उस तरीके से बनाए गए हैं और सोच के साथ बनाए गए हैं कि वह उसके साथ उसको जो है क्फ़िगर हो जाएगा और कोई उसके अंदर कोई बहुत बड़ी मुश्किल नहीं आएगी कि भाई जो कैसेट लगती हैं तीन या चार उसमें एक कैसेट प्लास्टिक के नोट की भी लगा सकते हैं। तो वो आहिस्ता-आहिस्ता उस उसके ऊपर भी काम हो जाएगा। वो कोई बहुत बड़ा इशू नहीं है। अह लेकिन जो योजना है जो प्लानिंग है वो निश्चित रूप से बनी है तो उसके पीछे कोई एक दिन की प्लानिंग नहीं होगी। काफी लंबे समय से रिजर्व बैंक सोच रहा होगा लेकिन उसको आज उसने बताया है तो वो इंप्लीमेंट भी जल्दी हो जाएगा।

ऐसा उम्मीद की जा सकती है। जी और सर एक आपको डाटा बताना चाहूंगा कि जो खराब नोटों की संख्या है हर साल इतने नोट खराब होते हैं उसको आरबीआई वापस लेता है बैंकों के माध्यम से। तो वित्त वर्ष 25 में करीब-करीब 23.8 अरब डॉलर के नोट चलन से बाहर किए खराब होने के कारण। कुछ गलगल गए, कुछ सड़ गए, कुछ फट गए। कुछ मतलब बाहर हो गए चलन से। तो इतनी बड़ी तादाद में नोट बाहर जाते हैं। फिर उसके बाद नए नोट छापे जाते हैं। तो इन सब झंझट से मुक्ति के लिए क्या ये आरबीआई फैसला ले रहा है? नहीं नहीं बिल्कुल ये मैं कह रहा हूं ये एक अच्छा है कारण क्या है कि भाई बार-बार और देखिए वो कोई उसकी भी एक कॉस्ट है नोट छपते हैं वो जाते हैं फिर पुराने नोट बैंक में आते हैं बैंक से रिजर्व बैंक में जाते हैं रिजर्व बैंक उसको जो है डिस्ट्रॉय करता है उसकी जगह नए टॉप छापता है तो वो बहुत बड़ा कॉस्ट है वो कॉस्ट नोट की प्रिंटिंग की कॉस्ट अलग है लेकिन उसको लाना और ले जाना दोबारा जो है मार्केट में भेजना बैंकों के पास वो भी एक बहुत बड़ी कॉस्ट है जी सर आपने बिल्कुल सही कहा। प्रिंटिंग कॉस्ट के अलावा एक कॉस्ट तो होती है।

वहीं सर प्लास्टिक के नोट पे एक सबसे बड़ा सवाल जो लोगों के मन में उठ रहा है कि जैसे मेरे मन में भी उठ रहा है। आम पब्लिक के भी उठ रहा है कि प्लास्टिक के नोट होंगे जैसे हमारे डेबिट कार्ड में एक चिप लगा होता है या फिर वो जो स्कैनर टाइप लगा होता है और क्रेडिट कार्ड में भी होता है। तो क्या कुछ उस तरह का होगा? तभी तो फिर ये ट्रांसपेरेंट हो सकेगा ना। नहीं तो फिर इसको कोई भी यूज़ कर सकता है। फिर तो नहीं नहीं नहीं वैसा चिप चिप वाली बात जब ₹2000 का नोट आया था तो मार्केट में बहुत हल्ला मचा था कि उसमें चिप लगी है और वो पता लग जाएगा कहां पड़ा है ऐसा ऐसा कुछ नहीं होने वाला। अभी इंटरनेशनल भी आपने जैसे कहा ऑस्ट्रेलिया अमेरिका बाकी जगह जो सब प्लास्टिक करेंसी है उसमें कहीं कोई चिप नहीं है और उसके अंदर सिक्योरिटी फीचर जो भी होंगे वो उसके अंदर इंटेक्ट होंगे। उसके अंदर डाले जाएंगे ताकि उसका नकली नोट भी कोई ना बना सके क्योंकि वह नकली कोड उसका बनाना कोई आसान नहीं होगा।

ऐसी उम्मीद की जा सकती है। जी सर अब बात करते हैं आपने बिल्कुल सही कहा। 2000 के नोट वाला वीडियो बहुत वायरल भी हुआ था क्योंकि लोगों को लगा भाई इसमें चिप लगा है कुछ भी हो सकता है। तो इसीलिए मैंने सोचा कि आपके आपके माध्यम से दर्शकों को क्लियर कर दिया जाए कि ऐसा कुछ भी नहीं है। अब सर एक बात आती है प्लास्टिक नोटों को लेकर कि इसमें जो सिक्योरिटी फीचर होंगे वो कैसे होंगे और यह कैसे काम करेगा। जैसे आपने बताया कि एटीएम में अलग से एचेट में डाले जाएंगे और दूसरे देशों की बात करें जहां ऑलरेडी ये करेंसी चल रही है तो वहां भी बिल्कुल सेम है। बस आपका कागज के बदले वो प्लास्टिक होगा ताकि वो खराब ना हो। तो क्या इंडिया में भी कुछ ऐसा ही हो सकता है? जी नहीं बिल्कुल ऐसा है कि देखिए इंडिया में भी जो नोट छपेगा वो जो ऑलरेडी बाहर के किसी कंट्रीज में छप रहा है उसमें से कौन सा बेस्ट है उसको आरबीआई उसको सेलेक्ट करके और उसको यहां पर इंट्रोड्यूस करेगी। तो सिक्योरिटी के हिसाब से वह देखिए वहां पर भी आप कहीं कोई खबर ऐसी सुनते नहीं होंगे कि भाई किसी कंट्री में जो है नकली नोट जो है छप गए प्लास्टिक के और ऐसे हो गया।

ये हमारे देश में ही संभव है कि भ इस तरह के नोट और हमारे देश में भी नहीं होता। वो एक्सटर्नल फर्सेस जो है वो छाप कर और यहां की अर्थव्यवस्था को खराब करने के लिए वो काम करती हैं। जी सर आरबीआई की रिपोर्ट में एक बात कही गई है कि पिछले कुछ वर्षों में जो नगदी की मांग लिक्विडिटी है वो काफी बढ़ी है। हालांकि डिजिटल पेमेंट सारा कुछ बढ़ा है लेकिन उसके बावजूद नकदी की मांग बढ़ी है और नगदी की संख्या काफी बढ़ी है। जिसके कारण आरबीआई प्लास्टिक नोट पर विचार कर रहा है। हालांकि ये केवल अभी विचार है। दर्शकों को बार-बार बता दे रहा हूं कि अभी आरबीआई ने कोई घोषणा नहीं की है। यह केवल विचार है एक और अभी आगे इस पर तैयारी की जा सकती है। तो सर यह बताइए कि यह जो न मतलब नोट होते हैं मांग बढ़ रही है तो इसको आप कैसे देखते हैं? क्योंकि मुझे लगता है टॉप सिटीज में तो डिजिटल पेमेंट है।

इसका मतलब तो ये निकल के आता है कि जो छोटे गांव हैं, दूरदराज इलाके हैं वहां अभी नकदी का काम तेजी से हो रहा है। देखिए बिल्कुल क्या है जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ती है तो उसके अंदर कैश की जो रिक्वायरमेंट है वो भी बढ़ती है। तो कैश की रिक्वायरमेंट आपने जो कहा कि सेमी अर्बन में या रूरल में वहां पर ज्यादा है। वहां अभी भी लोग जो है उसके ऊपर भरोसा करते हैं। अभी भी बहुत सारे लोग हैं जो बैंक में पैसा नहीं रखते वो घर में रखना चाहते हैं या बिजनेस भी करते हैं तो वो घर में उनको ये लगता है कि बैंक में रखा तो वो जो भी हमारा पैसा है सब वो सरकार की नजर में आ जाएगा और टैक्सेबल हो जाएगा या कहीं भी कुछ भी कह सकते हैं कुछ सुविधा के लिए भी करते हैं कि हां उनके आसपास कोई बैंक ना हो तो इस तरह से बहुत सारी चीजें हैं और आज एक आपके माध्यम से यह भी बता देता हूं कि बहुत सारी वीडियो भी सोशल मीडिया पर इस तरह की आ रही है कि भाई देश में आर्थिक संकट है। बैंक डूब जाएंगे। कैश निकाल के रख लो। उसका भी कुछ असर होता है। कुछ लोग कैश को अपना निकाल निकाल के अपने पास रखते हैं।

ऐसा कुछ नहीं है। कोई बैंक डूबने वाला नहीं है। अर्थव्यवस्था अच्छी है। और इस तरह के जो फेक मैसेज चलते हैं उसके अंदर ऊपर ना जाए। करेंसी जो है वो सुरक्षित है। बैंक भी सुरक्षित है। आपका पैसा आपका बैंक के अंदर जो भी है वो सब सुरक्षित है। जी आरबीआई ने साफ इस पर कहा भी हुआ है और उसकी लिमिट भी तय की हुई है कि इतना पैसा तक किसी भी बैंक में आपका पैसा है एक लिमिट है। उस लिमिट तक है तो आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। वो कभी नहीं डूबेगा। और आपने भी कहा और हम लोग भी दर्शक दर्शकों को अलग-अलग माध्यम से बार-बार बताते रहते हैं। सर अब बात करें जरा प्लास्टिक नोट की जैसे ऑस्ट्रेलिया में सबसे पहले ₹10 का मतलब वहां जो 10 मतलब इंडिया के हिसाब से मैं बोल रहा हूं। ₹10 की वैल्यू का प्लास्टिक नोट लाया गया। उसके बाद पहले उसका एक्सपेरिमेंट किया गया। वो धीरे-धीरे सक्सेसफुल हुआ। उसके बाद बड़े नोटों की संख्या हुई। तो आरबीआई की रिपोर्ट ही मैं पढ़ रहा था। उसमें जो सबसे खराब नोटों की संख्या बताई गई है और मतलब जिसको सबसे ज्यादा आरबीआई को वापस लेना पड़ा वो 500 और ₹100 के नोट थे क्योंकि चलन में भी सबसे ज्यादा यही नोट होते हैं। तो क्या आपको लगता है कि आरबीआई ऑस्ट्रेलिया या बाकी देशों की तरह छोटे-छोटे नोटों से स्टार्टिंग में एक्सपेरिमेंट करेगा फिर धीरे-धीरे जाएगा। नहीं एक्सपेरिमेंट मैंने बताया 2012 में ऑलरेडी ₹10 के नोट को छाप के वो कर चुका है। लेकिन उसको जो है प्रमोट नहीं किया गया। यानी उसको आगे बढ़ाया नहीं गया। उस समय की जो भी सरकार रही या रिजर्व बैंक रहा तो उसको आगे नहीं बढ़ाया गया। अब सरकार मैंने कहा कि एक तीर से दो निशानियां साधने की कोशिश में है कि 500 के नोटों को सर्कुलेशन से फिजिकल नोटों को कैसे बाहर किया जाए और उसकी जगह प्लास्टिक के नोटों को लाया जाए। तो ये होल्ला भी नहीं बचेगा और करेंसी भी चेंज हो जाएगी और जो डंप मनी है वो भी बाहर आ जाएगी। मतलब सर इसका सबसे बड़ा मुझे लगता है मकसद जो डंप पैसे हैं उसको बाहर निकालना है क्या? नहीं दोनों ही है पर्पस है भाई ऐसा है कि कॉस्ट को कम करना प्रिंटिंग कॉस्ट को उसके नोटों की जो लाइफ को बढ़ाना और जो डंप पैसा पड़ा है जो कहीं अर्थव्यवस्था में जिसका कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं है उसको भी सर्कुलेशन में लाना ये सारी एक चीज से जो है वो संभव हो सकेगी। जी सर कागज की नोटों की तुलना में प्लास्टिक का नोट जो है फायदे तो हमने बता दिए। कई सारे फायदे हैं। थोड़ा इसके नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं सर इस पे जरा गौर फरमाएंगे आप। नहीं नहीं नुकसान कुछ नहीं है। अब अब कई कोई कह सकता है कि पॉल्यूशन की बात है कि देखिए ये कोई पॉलिथीन बैग नहीं है कि भाई वो जो है पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा। नुकसान पहुंचाएगा।

अगर कोई नोट खराब भी हो जाता है किसी एक समय के बाद भी तो रिजर्व बैंक में जाकर उसकी रिसाइक्लिंग होकर वो सारी उसकी व्यवस्था होगी क्योंकि ये कहीं कोई भी नोट को फेंकने वाला नहीं है। पॉलिथीन खराब हो गई तो आप डस्टबिन में फेंक दोगे लेकिन नोट को फेंकने वाले नहीं है। इसलिए उसका पूरा रिसाइक्लिंग का और उसको चेंज होने का पूरा एक सिस्टम जो है वो रिजर्व बैंक उसको एक इंट्रोड्यूस करेगा। जी सर नोट चाहे प्लास्टिक का हो या चाहे कागज का हो कोई उसको फेंकता नहीं है। कोई भी नहीं फेंकेगा। उल्टा कहीं फेंका हुआ होता तो तुरंत उठा लेता है बिना पूछे। सर अब पर्यावरण पर बात आई तो आज एक मैं रिपोर्ट पढ़ रहा था। उसमें बताया गया कि कागज के नोट से उल्टा पर्यावरण को नुकसान है ना कि प्लास्टिक के नोट से क्योंकि कागज पेड़ से रबड़ रबड़ के पेड़ से और भी कई तरह के पेड़ को काटकर तब कागज बनाए जाते हैं। तो उससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि प्लास्टिक से नहीं हो रहा है। तो सर यह जो पर्यावरण वाला मुद्दा है इस पर थोड़ा सा आप कहेंगे क्या? नहीं नहीं वो देखिए वह तो है ही है पेपर जितना भी है वो पेड़ से ही बनता है तो उसके अंदर चाहे वह अच्छी क्वालिटी का है या कोई भी क्वालिटी का है या उसके अंदर कुछ और भी मिक्स होता है तो उससे यह बेटर है हर लिहाज से कि लाइफ ज्यादा है कॉस्ट कम है आपका जल्दी से खराब नहीं होगा और आपके पास पड़ा पड़ा भी वो चाहे कितने भी हाथों में चला जाए तो उसकी जो कड़क है वह कम नहीं होगी और आपको नहीं लगेगा कि यह फट फट गया है। फटेगा भी नहीं क्योंकि वो मटेरियल ऐसा होगा कि वो फटेगा नहीं। आज बहुत सारे लोग जो नोट पड़ जाते हैं रिजर्व बैंक में लेके जाते हैं और उसको चेंज करवाते हैं। जी सरकार का वैसे भी फोकस सर टेक्नोलॉजी पे है और डिजिटल एज में हम डिजिटल एरा में जी रहे हैं। आजकल सब कुछ डिजिटल हो चुका है। तो उम्मीद करता हूं कि प्लास्टिक के नोट का भी ऐसा ही कुछ होगा। सर बात करते हैं अमेरिका की जो अमेरिकी डॉलर है जिसको अभी भी सबसे पावरफुल माना जाता है उसमें ये बताया गया है कि वहां जो प्लास्टिक करेंसी है मतलब जो प्लास्टिक की खास करेंसी है उसमें पूरी तरह से वो प्लास्टिक नहीं है उसमें मिक्स अप है कुछ तो उसके लिए वैसा क्यों किया गया जो एक रिपोर्ट में पढ़ रहा था वो उसमें यह बताया गया ताकि इसमें ट्रांसपेरेंसी बनी रहे और पब्लिक को यूज़ में कन्वीनिएंट आए उसको परेशानी भी ना हो क्योंकि कई बार आप देखते होंगे वॉलेट में हम लोग चारप कार्ड रख लेते हैं तो वॉलेट काफी भारी हो जाता है तो हालांकि यह तो अभी सब प्रोसेस पायलट प्रोजेक्ट है।

अभी पता लगेगा आने के बाद। लेकिन आपको लगता नहीं है कि सरकार कुछ ऐसा ही कुछ करेगी? नहीं नहीं मैंने इसलिए कहा कि भ सरकार मुझे लगता है कि सरकार जो बेस्ट करेंसी किसी भी देश की है जो उसको यूज़ करने में आसानी है। उसको कैरी करने में आसानी है। उसको हां चलाते रहो ना। वो उसको जो है वो जो है इंट्रोड्यूस करेगी। जी। सर आपने देखा पूरी दुनिया का कैसे-कैसे चल रहा है। तो उम्मीद करता हूं इंडिया में भी आएगा तो अभी तो हालांकि कुछ कहा नहीं जा सकता है। कोई घोषणा भी नहीं हुई कुछ नहीं हुआ है। लेकिन सबसे बड़ी जो बात है इसमें ये शो करने का मकसद हमारा ये है हमारे शो का नाम ही काम की बात है और उसका मकसद ये है कि आपको काम की बात बताना। तो सर ये बहुत जरूरी काम की बात है। पब्लिक को खास करके पब्लिक मतलब खास करके जो टिएर टू रूरल सिटीज में है उनको समझाना काफी कठिन है क्योंकि उनके लिए प्लास्टिक मनी शायद समझना मुश्किल है। तो इसलिए मैंने सोचा कि एक्सपर्ट के एक्सपर्ट से बिठा के समझाया जाए। तो इसमें आप जरा एक एक कमेंट सर दीजिए कि पब्लिक ताकि पैनिकिक ना हो कि क्या होने वाला है। नहीं नहीं बिल्कुल मैं कह रहा हूं थोड़े समय के बाद अभी तक हम प्लास्टिक मनी को सिर्फ क्रेडिट कार्ड डेबिट कार्ड को ही प्लास्टिक मनी समझते थे। लेकिन हो सकता है कि थोड़े दिन में जब आप बैंक जाए और एटीएम में जाए तो आपको जो नोट निकले तो वह पेपर के ना होके प्लास्टिक के हो सकते हैं। आपको घबराना नहीं है। इसमें समय लगेगा लेकिन एक अच्छा प्रयास अच्छी सोच अच्छा डायरेक्शन जो है रिजर्व बैंक इस ओर करने जा रही है। जी सर एक लास्ट कमेंट आपसे पूछना चाहूंगा कि आरबीआई समय-समय पर कई पहल करती रहती है। ग्राहकों को जागरूक भी करती है और चूंकि आप भी बैंकिंग से काफी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। आपने भी अपने सोशल मीडिया के माध्यमों से आप पब्लिक को जागरूक करते रहते हैं और हमारा मकसद भी यही होता है कि पब्लिक को हर बात पूरी विस्तार से बताई जाए।

तो जैसे ही ये खबर आई कि अब प्लास्टिक का पैसा आ जाएगा तो भूचाल मसा मच गया पूरे मतलब मीडिया रिपोर्ट्स में कि क्या हो रहा है नहीं हो रहा है। कई बार तो मतलब सुबह-सुबह ये खबर आई थी। तो लोगों ने कहा कि नहीं अब पता नहीं क्या होगा। सारे नोट हमारे छीन जाएंगे। ये होगा वो होगा। तो हमने कहा कि चलो एक बार सो करके बताया जाए एक्सपर्ट बिठा के कि पैनिकिक करने की कोई जरूरत नहीं है। तो सर एक फाइनल वर्डिक फाइनल कमेंट आप अप ना दे दीजिए सर इस नहीं नहीं बिल्कुल ऐसा है कि कोई एकदम से कोई ये नहीं होगा कि पेपर करेंसी को खत्म कर दिया जाए स्क्रैप कर दिया जाए और प्लास्टिक ये जो भी चीज होगा वो वो स्टेप बाय स्टेप उसको साइमलटेनियसली उसको जो है शुरू किया जाएगा और आपके शो के माध्यम से एक और लोगों को जानकारी देना सकता हूं कि 2005 से पहले के नोट अगर किसी के पड़े हुए हैं और वो खराब है या कैसे भी हैं तो वो बैंक में जमा नहीं होते मतलब वो अभी ऐसे ऐसे चलते नहीं है तो वो पुराने जो नोट हैं वो लीगल टेंडर है लेकिन आप उसको रिजर्व बैंक में जाकर जो है चेंज करवा सकते हैं।

जी ये आपने बहुत अच्छी जानकारी दी सर बहुत सारे लोगों को नहीं पता होगा कि 2005 से पहले के जो नोट हैं वो लीगल टेंडर तो है लेकिन वो बाजार में आप इसको चला नहीं सकते।

आप को उसको आरबीआई में चेंज कराना ही होगा। मैं उम्मीद करता हूं कि इस पे हमें एक शो भी करना चाहिए और करूंगा ताकि बहुत सारे पब्लिक को जनता को पता नहीं होगा शायद। तो सर ये प्लास्टिक मनी को उम्मीद करते हैं कि अच्छा ही होगा और देखते हैं कि कब तक सरकार इसको आरबीआई रोल आउट करता है। हालांकि आरबीआई जो भी चीज करता है प्रोसेस करता है। जैसा कि आपने मुझे याद है लास्ट शो में बताया भी था कि जो पुराने नोटों को अगर बाहर भी करेगी फेज आउट भी करेगी तो स्टेप बाय स्टेप चलन मतलब प्रोसेस के साथ करेगी। ये नहीं कि अचानक से पैनिकिक मच जाए झटका मिल जाए। तो उम्मीद करते हैं प्लास्टिक मनी के साथ भी कुछ ऐसा ही होगा।

लेकिन जब भी आएगी सरकार ऐसे नहीं कि अचानक से ला देगी और क्रिएट कर देगी।

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