IPL 2026 से सबसे पहले नॉकआउट होने वाली जो टीम थी, वह थी लखनऊ सुपर जंट्स। यानी वह पहले ही तय हो गया था कि लखनऊ की टीम आगे नहीं बढ़ सकती यानी प्लेऑ्स में क्वालीफाई नहीं कर सकती। ऐसे में उनके पास मौका था बेंच स्ट्रेंथ को ट्राई करने का। साथ ही मौका था उन प्लेयर्स को मौका देने का जिन्हें पूरे सीजन उन्होंने बैठा करके रखा है। यानी वो सिर्फ बेंच गर्म कर रहे थे। इसमें एक नाम था अर्जुन तेंदुलकर का भी। अर्जुन तेंदुलकर लगातार आपको प्रैक्टिस में तो दिखे। वो यॉर्कर्स डालते दिखे। वह हर जगह दिखते थे। लेकिन जब बात आई वो कैप देने की, वह डेब्यू कराने की, तो वह काम इस सीजन लखनऊ सुपर जंट्स ने सबसे अंतिम मुकाबले में किया और हम ऐसा कह सकते हैं कि अर्जुन के साथ यह गलत हुआ है। गलत हुआ है। मुझे तो लगता है कि अ लखनऊ का जो टीम मैनेजमेंट है वो मेरे हिसाब से तो उनको मतलब अगर ये कॉल ली है कि आखिरी मैच में खिला लेते हैं तो उनको तब भी नहीं खिलाना चाहिए क्योंकि फिर आपको आप यही कर रहे हो ना कि एट द एंड कि हां ठीक है अब लिया है 30 लाख खर्च किए हैं
आप सचिन तेंदुलकर के बेटे हैं तो एक मैच खेल लीजिए आप खेल के जाइए तो वो बड़ा वो कहते हैं ना कि एक यंग प्लेयर के ऊपर एक उसके मेंटल लेवल पे मेंटल स्ट्रेंथ पे एक डेंट देता है मेरे हिसाब से तो वो है। तो उसके बाद आपने बोला गलत हुआ है। आप ऐसे देखिए गलत वाली बात कि आखिरी ओवर में बैटिंग कर रहे थे। अब्दुल समद सामने थे। पहली तीन बॉल पहली वाइड डाली अदीप ने उसके बाद तीन बॉलों में उन्होंने सिंगल डिनाई किया है अर्जुन तेंदुलकर को। मतलब माना कि मैंने वो बंदा आपसे अच्छी बैटिंग नहीं कर पाता है। लेकिन वो मतलब इतनी खराब बैटिंग भी नहीं करते कि आपको सिंगल लेके नहीं दे पाएंगे। मुझे ऐसा लगता है पांच गेंद में पांच रन उन्होंने बनाए हैं। लेकिन वो तीन गेंद में जो उन्होंने सिंगल डिनाई किया है वो फिर से मैं बात कर रहा हूं कि एक यंग प्लेयर जो आपकी टीम से पहला मैच खेल रहा है और आपकी टीम बाहर हो चुकी है। ये भी नहीं है कि अ आप किसी पोजीशन के लड़ रहे हो या उन तीन दिनों में कुछ हो जाएगा वो मान लीजिए। सबसे बड़ी बात कि डीवाई पाटिल टूर्नामेंट अगर आप देखेंगे वहां पे उन्होंने तेज तर्रार हाफ सेंचुरी बनाई है। वही मैं कह रहा हूं। तो वो ऐसा नहीं है कि एकदम ही वो बोलते हैं ना कि बेकार बैटर हैं। बैटिंग कर नहीं पाते। बल्ले बॉल नहीं आती। वो उनके साथ नहीं है। थोड़ी बहुत बैटिंग कर लेते हैं। तो अगर अब्दुल समद शायद उनको सिंगल लेके दे देते तो यू नेवर नो कि वो एक आध गेंदों में बाउंड्री मार देते। बाद में समद ने ठीक है रन बना दिए
14 बने उनके बल्ले से। लेकिन वो पहली तीन गेंदों में आपको देखना होगा कि डॉट गया है और बाद में मैच के बाद ऋषभ पंत ने भी कहा कि कुछ 10-15 रन कम रह गए थे। तो हो सकता है कि वो तीन गेंद में कुछ रन बन जाते। आपको क्या पता? लेकिन अब ठीक है। वो भी छोड़िए। लेकिन मैं ये कह रहा हूं कि एक यंग प्लेयर जो डेब्यू कर रहा है आपकी टीम के लिए और अभी आखिरी मैच में कुछ नहीं बचा है आपके पास खोने के लिए। वहां आपने उसको एक ऐसा सोचने का मौका दे दिया है कि वो अब जीवन भर सोचेगा कि यार इन्होंने मेरे को स्ट्राइक नहीं दी और क्यों नहीं दी और बाद में जब जा रहे थे अर्जुन तेंदुलकर बैटिंग के बाद तो आप उनके रिएक्शन से भी देख सकते हैं। खैर उसके बाद मैं बॉलिंग पे आता हूं। आप अ फिर देखिए कि बॉलिंग माना कि अर्जुन के पास स्पीड नहीं है। वो शॉर्ट बॉल कराने को जाते हैं तो वहां चौके खाते हैं जैसा कि उनके सेकंड ओ थर्ड ओवर में हुआ। अ दूसरे ओवर में 15 रन खाए। तीसरे में 12 रन खाए। लेकिन दूसरे ओवर में उन्होंने इंपॉर्टेंट विकेट लेके दिया था प्रभु सिमरन सिंह का। वो बॉल आप देखिए मतलब बहुत बढ़िया यॉर्कर थी। सर यह हमने कई बार देखा है जब भी वह डोमेस्टिक या डीवाई पाटिल का हमने नाम लिया जहां खेलते हैं या प्रैक्टिस में भी इस बार वो अच्छी यॉर्कर डालते हैं और उसी में उनको विकेट मिला बहुत अच्छी बॉल थी प्रभु सिमरन सिंह सेट बैटर थे उनको बोल्ड करना और वो भी यॉर्कर लेंथ बॉल पे अपने हां हां वही यॉर्कर लेंथ करा के एलबीडब्ल्यू आउट करना वो अपने आप में बहुत बड़ी चीज है प्रोफेसर रन सिंह इसप अच्छी बैटिंग कर रहे हैं ठीक है तो पहले ओवर में चार दिए आखिरी ओवर में फिर से वापसी करी पांच रन दिए खाली तो चार ओवर ओवर में 35 36 रन दे रहा है कोई बॉलर आई मीन वो आप वो भी कंपेयर कर लीजिए कि उसी मैच में एक इंडिया खेलने वाला बॉलर रजदीप सिंह तीन ओवर में 52 रन देता है तो उनके अंदर कॉन्फिडेंस है तो मुझे ऐसा लगता है कि आपने अगर उनको पहले ट्राई किया होता क्योंकि आप पहले ही बाहर हो चुके थे। आपको बेंच स्ट्रेंथ जैसा आपने बोला कि वो ट्राई करनी चाहिए थी।
अगर अर्जुन को आप वहां खिलाते तो वो बंदा कुछ सीखता ही हो सकता है अगले सीजन आपके थोड़ा बहुत और काम आ सकता था। लेकिन अब आप अगले सीजन से पहले सोचोगे क्या किया जाए इस प्लेयर का रखा जाए निकाला जाए एक वो भी आपके मन में डाउट रहेगा उसके मन में भी डाउट रहेगा तो प्रॉब्लमेटिक वो सारी चीजें हैं और मुझे लगता है कि पहले खिला सकते थे आप एटलीस्ट वो कुछ सीखते हैं जैसे मैं बोल रहा हूं ना कि स्पीड नहीं है तो वो बाउंस बाउंसर ट्राई करते हैं मतलब बाउंसर मारना भी अपने आप में बड़ी बात है लेकिन वो क्योंकि स्पीड नहीं है तो बल्लेबाज रीड कर लेते हैं तो वो सीखेंगे अगर आप उनको लगातार खिलाओगे तो वो और लर्न ही करेंगे और उनके आर्सनल में और स्किल्स आएंगी लेकिन आपने वैसा किया नहीं और आखिरी मैच में खिला के आप मतलब मेरी समझ से तो परे इसलिए मैं कह रहा हूं कि शायद खिलाना ही नहीं चाहिए था और मुझे लगता है कि जो मूव भी किया था अर्जुन तेंदुलकर ने मूव लिया था कि चलो ठीक है मुंबई इंडियंस जबकि अपना घर भी है एक तरीके से मुंबई में वो रह सकते हैं आराम से जाकर के वहां क्रिकेट खेल रहे थे और ऐसा नहीं था कि उनको मौका नहीं मिल रहा था एक दो तीन मैचज़ उनको वहां पे भी मिल जाते थे लेकिन जब वो मूव कर रहे थे लखनऊ की तरफ तो कहीं ना कहीं उनके मन में यह बात ज़रूर थी कि मैं अह वहां मुझे शायद ज़्यादा मौका मिलेगा जो मुझे मुझे मुंबई में नहीं मिल रहा था क्योंकि मुंबई में ऑलरेडी कैंप में इतने सारे बॉलर्स, इतने सारे बैटर्स और निश्चित तौर पे समझ आ रहा था कि हां वहां पे मौका मिलना मुश्किल है।
लेकिन जब लखनऊ में आने के बावजूद अब सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला है। ऐसे में क्या अर्जुन तेंदुलकर के लिए ये सोचना गलत नहीं होगा कि मतलब अब ये फ्रेंचाइज़ मेरे लिए सही नहीं है क्योंकि पूरे सीजन ये टीम नीचे लगी हुई थी पॉइंट्स टेबल पे। इसके बावजूद उसने मुझे मौका दिया तो अंतिम मैच में दिया और उसमें भी उस तरीके से नहीं मौका मिला जिस तरह से मुझे चाहिए था। हां बिल्कुल मतलब मैं कह रहा हूं ना कि एज अ प्लेयर अर्जुन अ के साथ आज जो जो चीजें हुई हैं वो यंग प्लेयर के तौर पर काफी कुछ सोच सकते हैं। अह जैसा वो सिंगल डिनाई वाला पूरा आखिरी ओवर में जो हुआ उसके बाद बॉलिंग जब कराई तो अगर वो लगातार दो-तीन मैच खेले होते या मतलब मौके मिल रहे होते तो वो सीखते ही तो अब इस क्योंकि आप आपके लिए सीजन खत्म हो चुका है। तो अब वो भी सोचेंगे कि अगले सीजन क्या खेलना चाहिए मुझे कि नहीं। टीम मैनेजमेंट भी सोचेगा कि रखें या ना रखें किसी और को ले तो बहुत सारे समीकरण बनते हैं। बहुत सारी चीजें होंगी। तो अगले आईपीएल से ही पहले पता लगेगा सीन ये है। बाकी मतलब अर्जुन के लिए वो एलएसजी ने जो किया वो ठीक नहीं है।
बाकी तो ठीक है जैसा चल रहा है। और ये ट्रेड करके आए थे और उस समय एक बात आर अश्विन ने कही थी कि लखनऊ में उनका यूज़ तभी किया जाएगा जब पूरी टीम में से आधे से ज्यादा बॉलर्स इंजर्ड हो जाएंगे। और क्योंकि इंजरी ज्यादा प्रोन रहती है लखनऊ की टीम और हमें पता है चाहे वो मोहसीन हो चाहे मयंक हो सब इंजरी प्रोन रहते हैं और वो लंबे समय तक इंजरी से जूझते रहे हैं। तो ऐसे में उनको मौका मिल सकता है और आप देखिए तो बिल्कुल उनकी बात लगभग-लगभग सच ही हुई है कि अंतिम मैच में बस एक कोरम पूरा करने के लिए उन्हें मौका दिया गया है। अब ये मौका उनके लिए कितना कारगर साबित हुआ नहीं हुआ वह तो
अब आगे ही पता चलेगा। लेकिन एक चीज़ यहां से जो तय है कि उनके साथ जो जस्टिस होना चाहिए था वो नहीं हुआ क्योंकि वो जो मूव करके आए थे अपना घर छोड़ कर के आए थे लखनऊ की तरफ वो सोच यही थी कि कहीं ना कहीं मुझे ज्यादा मौका मिलेगा जैसा उन्होंने डोमेस्टिक में भी किया है कि गोवा चले गए हैं मुंबई से क्योंकि वहां कंपटीशन ज्यादा है और निश्चित तौर पर ऐसा नहीं है कि अर्जुन बहुत एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी बॉलर हैं। ऐसा नहीं है। लेकिन हां मौके मिल सकते थे क्योंकि बीच में कई सारे ऐसे बॉलर्स ट्राई किए गए जैसे आकाश थे। बाकी सारे बॉलर्स भी ट्राई किए गए जहां पर इन्हें भी मौका मिल सकता था। लेकिन लखनऊ की टीम ने वह नहीं चुना। अब बाकी अर्जुन को लेकर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में लिख करके जरूर बताइएगा। इस वीडियो में इतना ही मेरा साथ दिया प्रशांत ने। मैं सुकांत देखते रहिए टॉप स्पोर्ट्स। धन्यवाद। [संगीत]