पुणे की एक ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिला कुछ टीचर्स और प्रोफेसर्स से जान पहचान और फिर उसी पहचान के दम पर देश की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा नीट यूजी 2026 का पेपर लीक कराने का आरोप। सीबीआई की जांच में जो कहानी निकल कर सामने आई है वो किसी थ्रिलर से कम नहीं लग रही।
तस्वीर में नजर आ रही इस महिला का नाम मनीषा वाघमारे। 46 साल की मनीषा पुणे में ब्यूटी पार्लर चलाती है। साइड बाय साइड वह स्टूडेंट्स को ट्यूशन टीचर दिलाने का काम भी करती थी। इसी दौरान उनकी जान पहचान कई टीचर्स, लेक्चरर्स और प्रोफेसर्स से होती है। का आरोप है कि मनीषा ने इन्हीं कॉन्ट्रैक्ट्स का इस्तेमाल करके जो भी उनके कांटेक्ट्स थे उनका इस्तेमाल करके नीट यूजी 2026 का पेपर लीक कराने का पूरा खेल रचा।
14 मई को ने मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। उनके साथ रिटायर्ड टीचर पीवी कुलकर्णी भी पकड़े गए। दोनों को कोर्ट ने 10 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। इसके बाद जांच एजेंसी ने 57 साल की बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को भी गिरफ्तार कर लिया है। के मुताबिक असली इनसाइड कनेक्शन मनीषा मंधारे हीथी। वो एनटीए की उस टीम में शामिल थी जो नीट यूजी 2026 के सवाल तैयार कर रही थी। उन्हें बॉटनी और ज़ूलॉजी के फाइनल पेपर तक की पहुंच मिली हुई थी।
आरोप है कि इसी पहुंच [संगीत] का इसी रीच का इस्तेमाल करके उन्होंने पैसों के बदले पेपर बाहर पहुंचाया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मनीषा वाघमारे को पता चल गया था कि मंधारे मनीषा मंधारे पेपर सेटिंग प्रोसेस का हिस्सा हैं।
बस यहीं से पूरा खेल शुरू हो गया। दोनों ने मिलकर पेपर बेचने की प्लानिंग की और बाद में रिटायर्ड टीचर कुलकर्णी को भी इसमें शामिल कर लिया। तीनों का काम भी बटा हुआ था। मनीषा वाघमारे ऐसे स्टूडेंट्स की तलाश करती थी जो मोटी रकम देकर पेपर खरीदने को तैयार हो उसमें सक्षम हो। हर स्टूडेंट से करीब 10 ₹1 लाख की डील तय हुई थी।
इसमें से करीब ढाई से ₹ लाख मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और रिटायर्ड टीचर कुलकर्णी आपस में बांटने वाले थे। सीबीआई के मुताबिक मनीषा वाघमारे ने चार से पांच स्टूडेंट्सका इंतजाम भी कर लिया था। फिर उसने अपने पुराने दोस्त धनंजय लोखंडे को इस पूरे प्लान की जानकारी दी। धनंजय ने आगे नासिक में एजुकेशन काउंसलिंग का काम कराने वाले शुभम खैरनार से संपर्क किया। यानी शुभम खैरनार काउंसलिंग का काम किया करता था।
शुभम को एग्जाम रद्द होने के कुछ ही घंटों के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया था। आरोप है कि लोखंडे ने वाघमारे से पेपर लेकर खैरनार को दिया। [संगीत] फिर खैरनार ने वही पीडीएफ फाइल्स गुरुग्राम के यश यादव और जयपुर के कुछ लोगों तक पहुंचाई। यश यादव को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक इस मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन सीबीआई का कहना है कि मामला इससे कहीं और भी बड़ा हो सकता [संगीत] है। एजेंसी को शक है कि एक संगठित पेपर लीक रैकेट है। ऑर्गेनाइज्ड पेपर लीक रैकेट जिसमें और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
इसलिए अब सिर्फ पेपर लीक ही नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की भी जांच हो रही है। इसके साथ ही सीबीआई यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर पेपर लीक हुआ कैसे? क्या किसी ने ओरिजिनल पेपर की फोटो कॉपी निकाली या फिर उसकी फोटो खींचकर बाहर भेजी गई? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि एनटीए के जिस कॉन्फिडेंशियल एरिया में पेपर तैयार होता है वहां सिक्योरिटी बेहद सख्त होती है। अंदर मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक [संगीत] गैजेट यहां तक कि ऐसा पेन भी नहीं ले जा सकते जिसमें कैमरा छिपा हो।
ऐसे में पेपर की फोटो लेना या कॉपी निकालना आसान नहीं माना जाता। यानी अगर पेपर सच में बाहर गया है तो सिर्फ बाहर के लोगों के दम पर यह मुमकिन नहीं लगता। जांच एजेंसी को शक है कि एनटीए के अंदर के कुछ लोग भी इसमें मददगार हो सकते हैं। क्योंकि पेपर सेटिंग के वक्त एक्सपर्ट, प्रोफेसर और लेक्चरर सवाल तैयार करते हैं। जबकि एनटीए अधिकारियों की जिम्मेदारी उन पर नजर रखने की होती है। मॉनिटरिंग करने आए हो। वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि जिन आरोपियों को अब तक पकड़ा गया है उनमें से ज्यादातर ने अपने फोन से चैट और फोटो गैलरी डिलीट कर दी थी। कई लैपटॉप से भी फाइल्स गायब मिली हैं। खासतौर पर मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे के फोन से काफी डाटा डिलीट पाया गया है। अब सीबीआई डिजिटल एविडेंस जुटाने में लगी है। फोन, लैपटॉप और ऑनलाइन चैट्स को रिकवर करने की कोशिश हो रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि इससे पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकती है और यह पता चल सकेगा कि पेपर आखिर कितने लोगों तक पहुंचा था।
फिलहाल इस केस ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल वही है कि अगर इतनी सख्त सुरक्षा के बावजूद पेपर बाहर आ गया तो अंदर से मदद की किसने? इस खबर में इतना ही।
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