Cli

चाड: पानी को लेकर दो पक्षों में झड़प, 42 लोगों की मौत

Uncategorized

दक्षिण अफ़्रीका देश के पूर्वी चाड में पानी के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ एक विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। एक कुएं के पानी के इस्तेमाल को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि इसमें कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना सूडान सीमा के पास वादी फ़िरा प्रांत के इगोते गांव की है। इलाके के अधिकारी (पूर्व प्रधानमंत्री) लिमाने महामत ने बताया है कि घायलों को इलाज के लिए प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। इस घटना कि जानकारी बीती रात यानी 17 अप्रैल 2026 की रात की है और स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद के बाद जवाबी हमलों का सिलसिला आसपास के बड़े इलाके तक फैल गया था जिससे हालात बिगड़ने लगे। स्थिति को संभालने के लिए सेना को बीच में उतरना पड़ा। सेना के हस्तक्षेप के बाद हिंसा पर काबू पाया गया और फिलहाल हालात शांत बताए जा रहे हैं।चाड में जमीन, पानी और दूसरे जरूरी संसाधनों को लेकर इस तरह के सामुदायिक टकराव अक्सर सामने आते रहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हालात इसलिए और मुश्किल हुए हैं क्योंकि देश पहले से संसाधनों की कमी से जूझ रहा है और ऊपर से बड़ी संख्या में शरणार्थियों के आने से दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

फिलहाल हालत क़ाबू में है और कार्रवाई शुरू है चाड में हुई हिंसक झड़प के बाद सरकार ने हालात पर काबू पाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। उप-प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने सूडान सीमा से लगे वादी फिरा प्रांत के इगोटे गांव का दौरा किया और बताया कि इस घटना में 42 लोगों की मौत हुई है जबकि 10 लोग घायल हैं जिन्हें इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा है कि यह हिंसा बदले की कार्रवाई के रूप में बड़े इलाके तक फैल गई थी जिसके बाद सेना को दखल देना पड़ा।

सेना की तेज कार्रवाई से हालात संभाले गए और अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। सरकार ने गांव में बातचीत के जरिए तनाव कम करने की पहल शुरू करने के साथ-साथ इस मामले में कानूनी जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने का ऐलान किया है। चाड में पानी, जमीन और दूसरे संसाधनों को लेकर समुदायों के बीच टकराव पहले भी होते रहे हैं और पिछले साल भी किसानों और चरवाहों के बीच ऐसी ही हिंसा में 42 लोगों की जान गई थी। अब सरकार का कहना है कि सीमा से लगे इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।

शरणार्थियों से बढ़ा दबावसूडान में जारी संघर्ष का असर पड़ोसी देश चाड पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में सूडानी शरणार्थी पिछले कई महीनों से चाड के पूर्वी इलाकों में शरण लिए हुए हैं जिससे वहां पानी, जमीन और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है क्योंकि सूडान के लड़ाकों के कई बार सीमा पार करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी वजह से फरवरी में चाड सरकार ने सावधानी के तौर पर सूडान से लगने वाली अपनी सीमा अगली सूचना तक बंद कर दी थी ताकि संघर्ष का असर उसके इलाकों तक न पहुंचे। पानी की ऐसी लड़ाई: 42 मौत, सेना उतारनी पड़ गई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *