समंदर के बीच अचानक गूंजी गोलियों की आवाज ने एक बार फिर दुनिया की नजरें होब स्ट्रेट पर टिका दी हैं। भारत के लिए जरूरी तेल और गैस लेकर आ रहे जहाजों पर हुई फायरिंग ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। यह घटना सिर्फ एक हमले तक सीमित नहीं रही बल्कि इसके बाद जो हुआ उसने साफ कर दिया कि तनाव कितना गहरा है और हालात कितनी तेजी से बदल सकते हैं।
शनिवार दोपहर का समय था जब होरमुज स्टेट से गुजर रहे भारतीय जहाजों को अचानक ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड यानी आईआरजीसी ने रोक लिया। जानकारी के मुताबिक कुल 14 जहाज भारत की ओर बढ़ रहे थे लेकिन उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसी दौरान फायरिंग की घटना सामने आई जिसने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया। एक जहाज को गोली भी लगी जिसमें नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन बाकी जहाजों ने खतरे को देखते हुए अपनी दिशा बदल ली।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि 13 जहाज फारस की खाड़ी में अलग-अलग स्थानों पर लौट गए। हालांकि एक जहाज किसी तरह स्ट्रेट पार करने में सफल रहा लेकिन बाकी के लिए रास्ता बंद हो गया। यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में तनाव बढ़ा हो। लेकिन भारतीय जहाजों को निशाना बनाया जाना चिंता की बड़ी वजह बन गया है। इस घटना के तुरंत बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात ईरान के राजदूत को तलब किया और इस पूरे मामले पर अपना विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ कहा कि पहले भी ईरान भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देता रहा है।
आवाजाही बहाल की जानी चाहिए। यह कदम इस बात का संकेत था कि भारत इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। दूसरी ओर ईरान ने होम मिनिजिस्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया था। उसका आरोप था कि अमेरिका सीजफायर समझौते का पालन नहीं कर रहा है। इसी वजह से उसने यह सख्त कदम उठाया है। लेकिन हालात तेजी से बदले और 24 घंटे के भीतर ही ईरान ने अपने फैसले पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया। इससे यह संकेत मिला कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और हालात की गंभीरता को देखते हुए वह पीछे हटने पर मजबूर हो गया है।
पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं जिन्होंने इस पूरे संकट को और जटिल बना दिया है। खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत की कोशिश हो रही है और सोमवार को पाकिस्तान में दोनों देशों की टीमें मिल सकती हैं। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि होनी अभी बाकी है। लेकिन यह संकेत जरूर है कि तनाव कम करने की कोशिशें जारी है। उधर अमेरिका ने भी अपनी तरफ से बड़ा कदम उठाते हुए अपने इमरजेंसी ऑयल स्टोरेज से करीब 2.6 करोड़ बैरल तेल निकालकर बाजार में उपलब्ध कराया है। इसका मकसद साफ है कि अगर सप्लाई पर असर पड़ा तो बाजार को संभाला जा सकेगा। वहीं अमेरिका की ओर से भी यह कहा गया है कि जब तक पूरी तरह समझौता नहीं हो जाता तब तक उसकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि होमज स्ट्रेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन है। यहां होने वाली हर हलचल का असर दुनिया भर पर पड़ता है। खासकर भारत जैसे देशों पर जो तेल के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हालात जल्द सामान्य होंगे या तनाव आगे और बढ़ेगा। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि ईरान के फैसले और उसके बाद की गतिविधियों ने संकेत दे दिया है कि वह स्थिति को ज्यादा बिगड़ने नहीं देना चाहते। लेकिन जब तक पूरी तरह समाधान नहीं निकल जाता तब तक यह इलाका दुनिया के लिए चिंता का केंद्र बना रहेगा। इस वीडियो में बस इतना ही। मेरा नाम वैभव है। आप देखते रहिए वन इंडिया। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत] डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।