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अमेरिका ने तेल बेचने की छूट दी तो ईरान ने ट्रंप को आईना दिखा दिया..

Hindi Post

एक्सपर्ट सशन कैंडेड डस्टिंग पाउडर हटा खुजली लगा कैंडिडेट अमेरिका ने ईरान से तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंध में 30 दिनों की छूट दी है। यह छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकर्स की खरीद के लिए है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा अभी तक ईरान का यह तेल चीन सस्ते दाम में इकट्ठा कर रहा था। लेकिन अब इस तेल को बाजार में लाकर अमेरिका लगभग 14 करोड़ बैरल तेल दुनिया को मुहैया कराएगा।

ईरान ने जो तेल संकट पैदा किया है वो इससे कम होगा। हम ईरान के ही तेल का इस्तेमाल उसके खिलाफ करेंगे ताकि ऑपरेशन एपिथरी के बीच दुनिया में तेल की कीमतों को कम किया जा सके। ऐसा स्कॉट बेसेंट ने कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मंजूरी सिर्फ उस तेल के लिए है जो पहले से जहाजों पर लदा हुआ है। नए सिरे से तेल की खरीद या प्रोडक्शन की परमिशन नहीं है।

इस तेल की बिक्री से ईरान को कोई मुनाफा भी नहीं होने देंगे क्योंकि अमेरिका ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाना जारी रखेगा और इंटरनेशनल बैंकिंग से उसे दूर रखेगा। ऐसा अमेरिका का कहना है। अमेरिका इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत $110 प्रति बैरल के पार चली गई है।

बीते दिनों तो यह कीमत $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। जबकि 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले यह कीमत $0 प्रति बैरल के करीब थी। अमेरिका का तर्क है कि वैसे भी यह तेल चोरी-छिपे चीन को बेचा जाता रहा है। तो क्यों ना इसे वियतनाम या थाईलैंड जैसे देश खरीद लें। इसलिए यह फैसला लिया गया है। ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने से तेल के सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल किया जा सकेगा।

ऐसा अमेरिका का मानना है। अमेरिका ने रूस के तेल पर भी सेंक्शन हटा दिया है। एक नया जनरल लाइसेंस जारी किया गया है जिसके तहत उन रूसी टैंकर्स को तेल बेचने की इजाजत दे दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। इससे पहले 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की छूट दी थी ताकि वह समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सके।

अब इस छूट को और बढ़ा दिया गया है। जाहिर है इससे भारत को भी फायदा होगा। एक समय भारत ईरान से तेल का सबसे बड़ा इंपोर्टर हुआ करता था। लेकिन प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने पहले प्रेसिडेंशियल टर्म में ईरान पर जो सेंशंस लगा रखे थे, उसके बाद भारत ने ईरान से तेल की खरीद पर रोक लगा दी थी। मई 2019 से भारत ने ईरान से कोई तेल नहीं खरीदा है। पिछले कई सालों से ईरान के कुल तेल एक्सपोर्ट का 90% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ एक देश को जाता रहा है

और वो है चाइना। तो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब अमेरिका लचीला रुख दिखाता है तो रिफाइनरीज़ जो हैं रिफाइनरी कंपनियां जोखिम कम मानकर खरीदारी शुरू कर देती हैं। थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिफाइनरीज ने अब तक लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है। इसमें कोई शक नहीं है कि प्रतिबंधों में ढील देने से रूस को दो तरफ़ा फायदा हो रहा है।

एक तो तेल बिक रहा है और दूसरा अमेरिकी छूट की वजह से अब उसे कोई खरीदार ढूंढना नहीं पड़ रहा है। आसानी हो रही है। इस पर ईरान का भी जवाब आया है। अमेरिका के इस फैसले पर ईरान का क्या कहना है वह भी जान लीजिए। ईरान के तेल मंत्रालय के स्पोक पर्सन ने सोशल मीडिया पर साफ किया है कि हमारे पास समुद्र में फंसा हुआ या बाहर भेजने के लिए कोई एक्स्ट्रा तेल है ही नहीं।

और उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का यह बयान सिर्फ बाजार को झूठी उम्मीद देने के लिए है। असल में इतना तेल है ही नहीं जितना अमेरिका बता रहा है। तो क्या इस छूट से जो अमेरिका ने ईरान को छूट दी है इससे क्या ईरान को कोई फायदा होगा? तो इस पर अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान के लिए इस कमाई को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। अमेरिकी वित्त मंत्री के मुताबिक अमेरिका ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम से दूर रखेगा।

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