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ईरान ने फौजियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा? सच्चाई चौंकाएगी!, जानिए सच्चाई..

Hindi Post

सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में लोग अमेरिकी फौजी वर्दी पहने हुए नजर आते हैं और वह रोते विलखते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए कई यूज़र्स दावा कर रहे हैं कि यह मिडिल ईस्ट में चल रहे कथित ईरान और अमेरिका इजराइल के टकराव की असली मंजर बयां करता है। कुछ पोस्ट में तो यह तक कहा जा रहा है कि अमेरिकी सोल्जर्स ईरान के हमलों से खौफजदा होकर रो रहे हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं।

आइए जानते हैं कि क्या है इन दावों की हकीकत। नमस्कार, मैं हूं आदित्य। india.com में आपका स्वागत है। दरअसल फैक्ट चेकर्स की ओर से जब इस वायरल वीडियो की तहकीकात की गई तो असलियत कुछ और ही निकली। फैक्ट चेक करने वाले मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने जब इस वीडियो को ध्यान से देखा और जांच पड़ताल की तो पता चला कि यह वीडियो हकीकत नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किया गया है।

जिन लोगों ने इस वीडियो को शेयर किया उन्होंने बड़े जज्बाती और भड़काऊ कैप्शन लिखे। कहीं लिखा गया कि अमेरिकी दूतावासों में आग लगा दी गई है तो कहीं कहा गया कि सोल्जर्स मैदान छोड़कर भागने को मजबूर हैं। ईरान ने इन्हें दौड़ा दौड़ा कर पीटा है। इन भ्रामक दावों के साथ सोशल मीडिया पर कई और वीडियोस भी शेयर किए जा रहे हैं। एक यूजर ने पोस्ट किया है कि कोरोना में अपने पिता की अर्थी छोड़कर भागने वाले लोग इजराइल के लिए उछल रहे हैं

और अमेरिकी सोल्जर मैदान से [संगीत] भागने के लिए रो रहे हैं और मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी फोर्स वीडियो बनाकर डॉन्ड ट्रंप से कह रहे हैं कि यह बस बंद करना चाहिए हमें यहां से किसी भी तरह से निकालो| जांच में पाया गया कि ये वीडियोस भी फेक हैं और डीप फेक टूल्स का इस्तेमाल करके बनाए गए हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बिना किसी पुख्ता जांच या बिना किसी भरोसेमंद न्यूज़ सोर्स के इसे सर्कुलेट किया जा रहा है।

वीडियो को गौर से देखने पर भी कई गड़बड़ियां सामने आती है। सोल्जर के चेहरे के हाव-भाव कुछ अजीब और बनावटी लगते हैं जैसे कोई रोबोट एक्टिंग कर रहा हो। उनकी यूनिफार्म भी असली अमेरिकी फौजी की वर्दी से मैच नहीं करती। ना रंग वही है ना डिजाइन। यह सारी बातें साफ इशारा करती हैं कि वीडियो असली नहीं है। इसके अलावा अलग-अलग फैक्ट चेकिंग टूल्स और एआई डिटेक्शन एप्स की मदद से भी इस वीडियो की जांच की गई है।

जिसमें यह साबित हो गया है कि यह पूरी तरह से फर्जी कंटेंट है। तो साफ लफ्जों में कहें तो यह वायरल वीडियो महज एक झूठी कहानी है। जिसे लोगों को गुमराह करने के लिए बनाया गया है। ऐसे में जरूरी है कि हम किसी भी सनसनीखेज वीडियो या खबर पर यकीन करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें.

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