हरीश राणा की यह हालत किसने की? छत से किसने दिया था धक्का? पिता का बड़ा दावा। यूनिवर्सिटी में उस रात क्या हुआ था? जब पिता को कॉल आई। सीबीआई ऑफिसर ने कही थी बड़ी बात। पांच लोगों को जीवनदान देकर जा रहे हरीश। मां-बाप ने भावुक वक्त में भी किया रुला देने वाला फैसला। एक तरफ है हरीश के भावुक पिता जो अपने बेटे की इस हालत के लिए मारपीट करने वालों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
तो दूसरी तरफ है एम्स की वह तस्वीरें जहां हरीश राणा को अंतिम विदाई दी जा रही है। हरीश के पिता का एक पुराना इंटरव्यू जो इन्होंने आज तक को दिया था इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें वह कहते हैं 20 अगस्त 2013 को जब यह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। रात करीब 7:21 पर शाम में हमें फोन आया। बताया गया कि ऋषु यानी हरीश राणा छत से गिर गया।
मैंने पूछा आप कौन हो? तो बोला मैं उसका दोस्त बोल रहा हूं। फिर मैं पत्नी के साथ रात लगभग 2 से 2:30 बजे चंडीगढ़ पहुंचा। वहां डॉक्टर राकेश जी से मिला तो उन्होंने सीधा पूछा इसने छलांग क्यों लगाई? मैं मौन हो गया। कुछ समझ नहीं आ रहा था। लेकिन यह कहानी का पहला पार्ट था। डॉक्टर को भी शायद यह बात समझ नहीं आई थी कि हरीश खुद छत से नहीं कूदा बल्कि उसे छत से गिराया गया था।
रात में हुए पांच सिटी स्कैन और मेडिकल जांच रिपोर्ट ने इस ओर इशारा करना शुरू कर दिया था। हरीश के पिता आगे बताते हैं उसके शरीर पर उंगलियों के निशान थे। चोट देखकर लग रहा था जैसे किसी ने बैट से मारा हो। वहां एक पुलिस वाले ने किसी कागजात पर हमसे साइन करवाए। एक सीबीआई के ऑफिसर जो हमें जानने वाले थे उन्होंने भी कहा यह साजिश हो सकती है। पर पुलिस ने फाइल बंद कर दी।
तो सवाल उठ रहा है कि आखिर हरीश के साथ ऐसा किया किसने? जो लड़का बॉडी बिल्डिंग का शौक रखता था। क्या उसे साजिश छत पर ले जाया गया? उसके साथ मारपीट हुई और फिर उसे इस तरीके से नीचे फेंका गया कि वह दोबारा कभी ना उठ पाए। अगर इस दावे में दम है तो फिर इसकी सीबीआई जांच क्यों नहीं हुई? चार सवालों का जवाब अब भी अधूरा। सवाल नंबर एक, क्या इस केस में कोई बड़ा व्यक्ति शामिल है जिसके रसूख से जांच अधूरी रह गई?
सवाल नंबर दो, पीजी में रहने वाले लोगों और यूनिवर्सिटी से पूछताछ के बाद पता चला रिपोर्ट कहां है? सवाल नंबर तीन, क्या हरीश राणा की फाइल फिर खुलेगी? क्या यह पता चल पाएगा मारपीट किसने की? सवाल नंबर चार, चंडीगढ़ प्रशासन ने फोन कर जानकारी क्यों नहीं दी? हरीश के दोस्त ने क्यों कॉल की? अगले कुछ हफ्तों में हरीश इस दुनिया में नहीं होंगे पर उनकी यादें आज भी परिवार के पास रहेंगी।
हरीश के पिता कहते हैं, आधी रात को हमें कॉल आई थी, लेकिन बाद में कॉल आनी बंद हो गई। हरीश के पिता रोते-रोते अब बेटे की अंतिम सांस का इंतजार कर रहे हैं। मां की तबीयत भी पूरी तरह ठीक नहीं है। इस मुश्किल परिस्थिति में परिवार ने एक बड़ा हिम्मत भरा फैसला लिया है। उन्होंने हरीश के अंगदान करने की बात कही है। डॉक्टर्स कहते हैं हरीश का लीवर, किडनी, लंग्स [संगीत] और आंखों का कॉर्निया चार लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं।
इसके अलावा अगर उनके दिल की कंडीशन सही है तो वह भी एक जीवन बचा सकता है। यानी हरीश जाते-जाते भी पांच लोगों की जिंदगियां बचा रहे हैं। भले ही उनकी जिंदगी यह मेडिकल साइंस नहीं बचा पाया लेकिन परिवार ने कोशिशें नहीं छोड़ी। ₹40 महीना कमाने वाले हरीश के पिता तो अस्पताल के महंगे खर्चों के बाद भी घर पर 28,000 महीने की सैलरी पर एक नर्स को रखते हैं ताकि वह बेटे की देखरेख कर सके।
फिजियोथेरेपी के लिए अलग से फिजियोथरेपिस्ट घर पर ही बुलाते हैं। इन सब का खर्च और परिवार का समर्पण देखें तो यही लगता है कि परिवार ने बेटे को बचाने की हर कोशिश की। बिना किसी से लड़ाई लड़े जिसने उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की लेकिन आखिर में सब्र जवाब दे गया क्योंकि खाली हाथ इस देश में इलाज भी नहीं मिलता।